गहराइयां : विवान को शैली की कौनसी बात चुभ गई? -भाग 1

विवान की बांहों से छूट कर शैली अभी किचन में घुसी ही थी कि हमेशा की तरह फिर से आ कर विवान ने उसे पीछे से पकड़ गालों को चूम लिया. शैली ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की, तो विवान ने उसे और जोर से बांहों में भर लिया. शैली चिढ़ कर बोली, ‘‘छोड़ो न विवान, वैसे भी आज उठने में काफी देर हो गई है. क्या आज औफिस नहीं जाना है?’’

‘‘जाना तो है… रहने दो मैं दोपहर में आ जाऊंगा खाना खाने और इसी बहाने…’’ बात अधूरी छोड़ विवान ने एक और किस शैली के गाल पर जड़ दिया.

किसी तरह अपने को छुड़ाते हुए शैली यह कह कर सब्जी काटने लगी कि कोई जरूरत नहीं है घर आने की… मैं अभी नाश्ता और खाना बना देती हूं.

‘‘तो फिर लाओ मैं सब्जी काट देता हूं, तब तक तुम चाय बनाओ,’’ कह कर विवान ने उस के हाथ से चाकू ले लिया. विवान शैली को दुनिया की हर खुशी देना चाहता था पर वह थी कि बातबात पर उसे झिड़कती रहती थी. हर बात में उस की बुराई निकालना जैसे उस की आदत सी बन गई थी. सोचती कि सब के पतियों जैसा उस का पति क्यों नहीं है? क्यों हमेशा रोमांटिक बना फिरता है. अरे, जिंदगी क्या सिर्फ प्यार से चलती है? और भी तो कई जिम्मेदारियां होती हैं घरगृहस्थी की, पर सावन के अंधे को यह कौन समझाए?

गुस्से से हांफती और जबान से जहर उगलती शैली ने विवान के हाथ से चाकू छीन लिया और फिर सारा गुस्सा सब्जी पर उतारने लगी. उस का मन तो किया कि सब्जी उठा कर कूड़े के डब्बे में फेंक दे और कहे कि कोई जरूरत नहीं है बारबार घर आ कर उसे परेशान करने की. उस का तो मन करता कि कैसे जल्दी विवान औफिस जाए और उस की जान छूटे.

विवान को औफिस भेजने के बाद घर के बाकी काम निबटा कर अभी शैली बैठी ही थी कि फोन बज उठा. विवान का फोन था और यह सिलसिला भी सालों से चल रहा था. मतलब औफिस पहुंचते ही सब से पहले वह शैली को फोन लगा कर जब तक उस से बातें न कर लेता उसे चैन नहीं पड़ता था. इस बात पर भी शैली को काफी चिढ़ होती थी. कभीकभी तो मन करता कि फोन को बंद कर के रख दे, पर यह सोच कर वह ऐसा नहीं करती कि पिछली बार की तरह फिर वह भागतादौड़ता घर पहुंच जाएगा और फिर वेवजह उस का महल्ले में तमाशा बन जाएगा.

एक बार ऐसा ही हुआ था. किसी कारणवश गलती से शैली का फोन बंद हो गया था और उसे इस बात का पता नहीं चला. लेकिन विवान के कई बार फोन लगाने पर भी जब उस का फोन बंद ही आता रहा तो उसे लगा कि शैली को कुछ हो गया है. दौड़ताहांफता वह घर पहुंच गया और जोरजोर से दरवाजा पीटने लगा. आवाज सुन कर आसपड़ोस के लोग इकट्ठा हो गए और क्या हो गया… क्या हो गया… कहने लगे.

बाहर लोगों का शोर सुन जब शैली की आंख खुली और उस ने दरवाजा खोला तो विवान उसे पकड़ कर कहने लगा, ‘‘शैली तुम ठीक तो हो… वो तुम्हारा फोन नहीं लग रहा था इसलिए मैं घबरा गया,’’ कह कर वह सब के सामने ही शैली को चूमने लगा.

देखा तो सच में फोन बंद था. उस वक्त शैली शर्मिंदा हो गई कि उस के कारण… परफिर यह सोच कर मन ही मन फूली नहीं समा रही थी कि उस का पति उसे कितना प्यार करता है…

मगर अब विवान का उसे हर पल निहारते रहना, जब मन आए उसे अपनी गोद में उठा कर चूमने लगना, उस की हर छोटी से छोटी चीज का खयाल रखना, कभी अपने से दूर न होने देना, अब उसे गले का फंदा सा लगने लगा था. प्यार वह भी करती थी पर एक हद में. उस का सोचना था कि पतिपत्नी हैं तो क्या हुआ… आखिर उन्हें भी तो अपने जीवन में थोड़ी स्पेस चाहिए, जो उसे मिल नहीं रही थी. मगर उस की सोच से अनजान विवान बस हर पल उस के ही खयालों में खोया रहता था.

शैली की दोनों भाभियां उस का मजाक उड़ातीं कि उस का पति तो उस के बिना एक पल भी नहीं रह पाता. एक बच्चे की तरह उस के पीछेपीछे घूमता रहता है. उन की कही बातें शैली को अंदर तक भेद जातीं. उसे लगता उस की भाभियां उस पर तंज कस रही हैं. मगर उसे यह नहीं पता था कि वे उस से जलती हैं.

विवान को कोई लड़की पसंद न आने की वजह से उस के मातापिता काफी परेशान रहने लगे थे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर विवान को कैसी लड़की चाहिए?

आखिर एक रोज उसे अपनी पसंद की लड़की मिल ही गई. दरअसल, विवान अपने एक खास दोस्त की शादी में गया था. वहीं उस ने शैली

को देखा तो देखता ही रह गया. उस की खूबसूरती पर वह ऐसे मर मिटा जैसे चांद को देख कर चकोर. कब आंखों के रास्ते शैली उस के मन में समा गई उसे पता ही नहीं चला. उस से अपनी शादी के बारे में सोच कर ही उस का मन मयूर नाच उठा.

जब उस के मातापिता को यह बात मालूम पड़ी तो उन्होंने जरा भी देर न कर अपने बेटे की शादी शैली के साथ तय कर दी. एकदूसरे की बांहों में शादी का 1 साल कैसे पंख लगा कर उड़ गया उन्हें पता ही नहीं चला.

लोग कहते हैं कि जैसेजैसे शादी पुरानी होती जाती है, पतिपत्नी के प्यार में भी गिरावट आने लगती है. मतलब पहले जैसा प्यार नहीं रह जाता. मगर विवान और शैली की शादी जैसेजैसे पुरानी होती जा रही थी उन का प्यार और भी गहराता जा रहा था. मगर पहले जिस विवान का प्यार शैली को हरी दूब का कोमल स्पर्श सा प्रतीत होता था अब वही प्यार उसे कांटों की चुभन सी लगने लगा था. विवान का दीवानापन अब उसे पागलपन सा लगने लगा था. उसे लगता या तो कुछकुछ दिनों के अंतराल पर विवान औफिस के काम से कहीं बाहर चला जाया करे या फिर उसे अकेले मायके जाने दिया करे ताकि वह खुल कर अपने मनमुताबिक जी सके.

आखिर कुछ दिनों के लिए उसे विवान से अलग रहने का मौका मिल ही गया. ऐसे जाना कोई जरूरी नहीं था, पर वह जाएगी ही, ऐसा उस ने अपने मन में तय कर लिया.

‘‘शादी में? पर जानू,’’ विवान अपनी पत्नी को प्यार से कभीकभी जानू भी बुलाता था, ‘‘वो तो तुम्हारे दूर के रिश्तेदार हैं न और फिर तुम ने ही तो कहा था कि तुम्हारा जाना कोई जरूरी नहीं है?’’

हांहां कहा था मैं ने, पर है तो वह मेरी बहन ही न… सोचो तो जरा कि अगर मैं नहीं जाऊंगी तो चाचाजी को कितना बुरा लगेगा, क्योंकि कितनी बार फोन कर के वे मुझे आने के लिए बोल चुके हैं… प्लीज विवान, जाने दो

न. वैसे भी यह मेरे परिवार की अंतिम शादी है और फिर मैं वादा करती हूं कि शादी खत्म होते ही आ आऊंगी.’’

अब शैली कुछ बोले और उस का विवान उसे मना कर दे, यह हो ही नहीं सकता था.

अत: बोला, ‘‘ठीक है तो फिर मैं कल ही छुट्टी की अर्जी…’’

शैली अचकचा कर बोली, ‘‘अर्जी… पर क्यों? मेरा मतलब है तुम्हें वैसे भी छुट्टी की समस्या है और कहा न मैं ने मैं जल्दी आ जाऊंगी.’’

न चाहते हुए भी विवान ने शैली को जाने की अनुमति दे तो दी, पर सोचने लगा अब उस के इतने दिन शैली के बिना कैसे बीतेंगे?

जाते वक्त बाय कहते हुए शैली ने ऐसा दुखी सा मुंह बनाया जैसे उसे भी विवान से अलग होने का दुख हो रहा है पर जैसे ही ट्रेन सरकी वह खुशी से झूम उठी.

शैली के अकेले मायके पहुंचने पर नातेरिश्तेदार सब ने पूछा कि विवान क्यों नहीं आया? तो वह कहने लगी कि विवान को छुट्टी नहीं मिल पाई, इसलिए उसे अकेले ही आना पड़ा.

वैसे शैली की भाभियां सब समझ रही थीं. चुटकी लेते हुए कहने लगीं, ‘‘ऐसे कैसे दामादजी ने आप को अकेले छोड़ दिया ननद रानी, क्योंकि वे तो आप के बिना…’’ बात अधूरी छोड़ कर दोनों ठहाका लगा कर हंस पड़ीं.

5 तरीकों से जानें आई कांटेक्ट फ्लर्टिंग के पीछे का छिपा विज्ञान

फ्लर्टिंग बड़ी दिलचस्प चीज है. खासकर जब आप आंखों-आंखों में फ्लर्ट करने की कोशिश करें. अब जरा सोचिए कि क्या कभी आपने अपने प्यार को या कहें अपने क्रश को दूर से घूरा है? क्या आपने कभी दूर से ही उसके साथ आंखों से संपर्क साधने की कोशिश की है? क्या कभी अपने प्यार को तब तक देखा है जब तक उसके चेहरे पर मुस्कुराहट न आए जाए या फिर वह शर्माने न लगे? क्या ये सारी बातें आपके मन में रोमांच नहीं पैदा करती हैं?

बहरहाल आप ऐसे अकेले व्यक्ति नहीं हैं जो आंखों-आंखों में फ्लर्ट करते हुए संकोच महसूस करते हैं. आपकी तरह तमाम ऐसे लोग हैं जो अपने क्रश को एकटक निहार नहीं पाते. असल में दूसरों की आंखों में घूरना जबरदस्त भाव है. यह न सिर्फ सकरात्मक प्रभाव छोड़ता है वरन यह आपको नकारात्मकता की ओर भी ले जा सकता है. अब कविता की बात सुनें. कविता कहती है कि मैं पिछले दिनों पार्टी में गयी थी जहां एक लड़का मुझे एकटक घूर रहा था. मैंने पार्टी के मेजमान से उसकी शिकायत की जिसके बाद उस लड़के को पार्टी से निकाल बाहर कर दिया गया.

आंखों-आंखों में देखकर फ्लर्ट करना दिलचस्प तो है साथ ही अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रभावशाली भी है. हैरानी की बात यह भी है कि यदि आप आंखों-आंखों में फ्लर्ट नहीं करेंगे तो आपके रिश्ते को पिक अप मिलने में मुश्किलें भी आ सकती हैं. बहरहाल इस लेख में आंखों-आंखों में फ्लर्ट के पीछे छिपे विज्ञान पर चर्चा करेंगे.

  1. दूसरों को खुश करना

आप चाहें फ्लर्ट करें या न करें यदि आप अपने क्रश को मुस्कान देते हुए एकटक निहारते हैं तो उस  पर सकरात्मक असर पड़ता है. असल में यह उसे खुश करने का एक तरीका भी है. इससे वह आपके बारे में अच्छा सोचने के लिए बाध्य होती है. यही नहीं वह आपके पास आ भी सकती है या फिर उम्मीद करती है कि आप उसके पास जाएं.

2. दूसरों को पढ़ने की कोशिश

आंखों-आंखों में संपर्क कर फ्लर्टिंग करने से दोनों एक दूसरे को जानने की कोशिश भी करते हैं. यही नहीं एक दूसरे के प्रति आलोचनात्मक रुख भी इख्तियार करते हैं. दरअसल आंखों-आंखों में संपर्क करना कोई सहज क्रिया नहीं है. मन में चोर हो तो भी आंखों में आंखें डालकर संपर्क नहीं किया जा सकता है. अतः यह पुरुष और महिला दोनों को एक दूसरे के लिए प्रति न्यायपरख बनाता है और एक दूसरे को जानने में मदद भी करता है.

3. विश्वसनीय बनाता है

क्या आप जानते हैं कि जिसे आप प्यार करते हैं या जिस पर आपका क्रश है, यदि आप उसे एकटक निहारते हैं तो यह आप दोनों का विश्वास भी बढ़ाता है. दरअसल %

जम्मू की सरगम कौशल बनीं मिसेज वर्ल्ड 2022, 21 साल बाद भारत ने जीता खिताब

सरगम कौशल मिसेज वर्ल्ड 2022 की विनर बन गई हैं. मिसेज वर्ल्ड का ताज जीतकर उन्होंने 21 साल का इंतजार खत्म कर दिया है. सरगम कौशल की जीत पर सेलेब्स और फैंस बेहद खुश दिखाई दे रहे हैं. इससे पहले उन्होंने मिसेज इंडिया 2022 का खिताब अपने नाम किया था.

 

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मिसेज वर्ल्ड 2022 इवेंट का आयोजन अमेरिका में किया गया था. ब्यूटी कॉम्पटिशन में बॉलीवुड के बड़े स्टार्स ने शिरकत की. 21 साल बाद जब मिसेज वर्ल्ड का खिताब भारत के नाम हुआ तो, सरगम कौशल स्टेज पर इमोशनल होती हुई दिखीं. सोशल मीडिया पर सरगम का एक वीडियो शेयर किया जा रहा है. वीडियो में सरमग ताज पहनते हुए रोती हुई दिखाई दे रही हैं. हालांकि, ये उनके खुशी के आंसू थे.

मिसेज वर्ल्ड 2022 का ताज जीतने के बाद सरगम कौशल को सेलेब्स से बधाईयां मिलनी शुरू हो गई हैं. अदिति गोवित्रीकर, सोहा अली खान, विवेक ओबेरॉय, और मोहम्मद अजहरुद्दीन ने सरगम को जीत की बधाई दी है. अदिति गोवित्रीकर ने सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, इस जर्नी का हिस्सा बन कर खुश हूं. 21 साल बाद ताज  वापस आया है. आपको दिल से बधाई. 2001 में अदिति गोवित्रीकर ने ये ताज अपने नाम करके देश का मान बढ़ा दिया था.

 

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आपको बता दें, कि मिसेज वर्ल्ड का खिताब जीतकर देशवासियों का नाम रोशन करने वाली सरगम कौशल जम्मू कश्मीर की निवासी हैं. वो एक शिक्षक और मॉडल हैं. सरगम की शादी 2018 में हुई थी. शादी के बाद से ही उनके दिल में ब्यूटी पेजेंट जीतने का जुनून सवार था. इसके बाद उन्होंने मिसेज वर्ल्ड प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. कॉन्फिडेंस और सुंदरता साथ लेकर अमेरिका के लास वेगास पहुंची सरगम कौशल जीत कर ही भारत वापस लौटीं. सरगम कौशल मिसेज इंडिया 2022 में भी हिस्सा ले चुकी हैं.

शादी के बाद पहले सरगम ने मिसेज इंडिया का ताज जीता है. वहीं अब उन्होंने मिसेज वर्ल्ड बन कर साबित किया कि अगर सपनों की उड़ान ऊंची हो, तो फर्क नहीं पड़ता कि आप शादीशुदा हैं या नहीं.

Anupmaa: अधिक के सामने गिड़गिड़ाई पाखी, क्या दोनों के बीच होगा तलाक?

स्टार प्लस शो अनुपमा (anupama) मे आने वाले मोड शो को औऱ बेहतर बना रहे है शो टीआरपी की रेस में चल रहा है शो में होने वाले टर्नस शो को और ज्यादा एंटरटेनिंग बना रहे है, अबतक शो में कहानी गुड़ो के ईदगिर्द घूमती नज़र आई है. वही अनुपमा ने गुंडो से कैसे जीत हासिल की वो दिखाया गया था, लेकिन अब शो में नया मोड ले लिया है.

आपको बता दें, कि इन दिनों इस शो की कहानी पाखी और अधिक के रिश्ते के आसपास घूम रही है. दोनों की शादी को हुए अभी महज 3 से 4 हफ्ते हुए हैं लेकिन दोनों के बीच भयंकर तरीके से लड़ाई हो रही है. बीते एपिसोड में दिखाया गया है कि पाखी की वजह से शाह हाउस में पुलिस पहुंच जाती है और यह ड्रामा आने वाले एपिसोड में भी देखने को मिलेगा.

 

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शो में आगे दिखाया गया है कि बरखा, पाखी-वनराज के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवा देती है, जिसके बाद शाह हाउस में पुलिस पहुंच जाती है. घर में पुलिस देखकर जहां सभी घबरा जाते हैं तो वहीं वनराज भी अधिक के खिलाफ पुलिस कंप्लेंट करने की बात करते हैं, जिसके बाद पुलिस के सामने बाबू जी जाते हैं और वह अपने बेटे और पोती की गलती बताते हैं. शाह हाउस का यह पूरा तमाशा बाहर मौजूद मोहल्ले वाले भी देख रहे होते हैं। वहीं, बाबू जी की बात सुनकर घरवालों के होश उड़ जाते हैं.

क्या पुलिस के सामने गलती कबूल करेंगी पाखी?

इस पूरे तमाशे के बाद अनुपमा भी अपनी बेटी को आगे आने की बात कहती है, ताकि वह अपनी गलती कबूल करके अपना रिश्ता बचा सके, जिसके बाद ही पाखी आगे आकर पुलिस को सारी बात बताती है. पाखी और शाह हाउस का यह पूरा तमाशा जानने के बाद पुलिस ऑफिसर का गुस्सा भी फूट पड़ता है और फिर वह घरेलू हिंसा और इसे रोकने के लिए बने कानून की अहमियत बताती है. इतना ही नहीं, पुलिस ऑफिसर पाखी और वनराज शाह से एक डॉक्यूटमेंट पर भी साइन करवाती है, ताकि वह आगे से कभी ऐसा करने की हिम्मत ना कर सके.

 

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महुए की खुशबू

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देश तो आज़ाद हो गया, अब महिलाओं की बारी है

गुजरात में बाबरा पुलिस ने पति की मृत्यु के बाद दोबारा शादी करने की इच्छा रखने वाली महिला पर हमला करने और उसका सिर मुंडवाने के आरोप में मंगलवार को दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया. पुलिस के एक बयान के अनुसार, महिला आरोपी 35 वर्षीय पुधाबेन और 25 वर्षीय सोनालबेन पीड़िता की रिश्तेदार थीं. इनमें से एक पीड़िता की भाभी थी.

पीड़िता का पति नहीं रहा और अपनी इच्छा अनुसार उसने कोर्ट में दूसरी शादी कर ली. यह विकास उसकी पूर्व भाभी को अच्छा नहीं लगा और भाभी ने पीड़िता से उसकी दूसरी शादी को लेकर सवाल किया तो बात तेजी से आगे बढ़ गई. जल्द ही, ननद ने अपने पति और एक अन्य महिला के साथ मिलकर पीड़िता को बेरहमी से डंडों से पीटा और उसका सिर भी मुंडवा दिया.

सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने पीड़िता को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है. मारपीट में शामिल तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर मामला दर्ज कर लिया है.

भारत में विधवाओं को हमेशा अस्वीकृति और उत्पीड़न के अधीन किया गया है. सती प्रथा शायद सबसे पुराना और सबसे स्पष्ट उदाहरण है. सती एक अप्रचलित भारतीय अंतिम संस्कार प्रथा है जहां एक विधवा से अपेक्षा की जाती थी कि वह अपने पति की चिता पर आत्मदाह कर लेगी.

इसलिए, ईश्वर चंद्र विद्यासागर (एक समाज सुधारक), ने विधवा पुनर्विवाह की वकालत की और प्रस्तावित किया- विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856. गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग ने विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया, जो सामाजिक रूप से उपेक्षित महिलाओं के जीवन में एक प्रकाशस्तंभ था. अधिनियम का उद्देश्य विधवा पुनर्विवाह को न्यायोचित ठहराना और हिंदू समाज में व्याप्त अंधविश्वास और असमानता को खत्म करना था. लेकिन अधिनियम के लागू होने के सालों बाद लोगों की सोच में आज भी महिलाओं को लेकर कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है.

आज़ादी से पहले और आज़ादी के बाद महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही. उन्हें कभी भी पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त नहीं हुए. इसके अतिरिक्त भारतीय संस्कृति में बाल विवाह और जौहर जैसी अन्य सामाजिक कुरीतियाँ भी प्रचलित थीं.

अपने पूरे जीवन में महिलाएं पुरुषों के नियंत्रण में ही रही हैं. बचपन पर पिता का साया रहा और शादी के बाद पति ने जिम्मेदारी संभाली. पति की मृत्यु के बाद भी वह उसके प्रभुत्व से मुक्त नहीं हुई. पुनर्विवाह करना और एक नया जीवन शुरू करना तो सवाल से बाहर है.

दुःख की बात तो यह है कि आखिर मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग में तेज़ी से तरक्की करने वाले इस देश में महिलाओं को आज भी इतना निम्न समझा जाता है. अधिकार होने के बावजूद भी उनको ये सब सहना पड़ता है. आखिर वह समय कब आएगा जब औरतों के साथ अत्याचार बंद होंगे? क्योंकि तभी हमारा देश पूर्ण रूप से विकसित कहलाएगा. आज भी अपने समुदायों द्वारा अस्वीकृत और अपने प्रियजनों द्वारा परित्यक्त, हजारों हिंदू महिलाएं वृंदावन के लिए अपना रास्ता बनाती हैं, एक तीर्थ शहर जो बीस हज़ार से अधिक विधवाओं का अब घर है. क्या उन्हें पुनर्विवाह करने का हक समाज ने अभी तक नहीं दिया है?

Winter Special: फैमिली डाक्टर का साथ यानी बेहतर इलाज

आज की व्यस्त जिंदगी में हर व्यक्ति चाहता है कि वह और उस का परिवार हमेशा सुखी और स्वस्थ रहे. लेकिन आजकल गलत खानपान व अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों में बहुत सी बीमारियां जन्म ले रही हैं और ये बीमारियां कभी भी किसी को भी हो सकती हैं. फैमिली डाक्टर क्यों जरूरी: इंडिया हैबिटैट सैंटर के कंसल्टैंट फिजिशियन डाक्टर अशोक रामपाल का कहना है कि कोई भी बीमारी दरवाजा खटखटा कर नहीं आती. इसलिए खुद को और अपने परिवार को बीमारियों से दूर रखने व स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक फैमिली डाक्टर का होना बहुत जरूरी होता है, जो समय पर सही इलाज कर सके या अच्छे डाक्टर के पास आप को रैफर कर सके. आप का फैमिली डाक्टर आप की और आप की फैमिली के लोगों की उम्र, समस्याएं वगैरह धीरेधीरे जान जाता है, इसलिए वह सभी का सही इलाज तो करता ही है, कोई गंभीर समस्या जैसे हार्ट की, लंग्स की या हड्डी की होने पर वह हार्ट सर्जन, कार्डियोलौजिस्ट या और्थोपैडिक सर्जन के पास रैफर कर देता है.

1.एक फिटनैस फ्रैंड: फैमिली डाक्टर को अगर फिटनैस फ्रैंड का नाम दें तो गलत नहीं होगा क्योंकि उसे आप के स्वास्थ्य के और बीमारी के बारे में पूरी जानकारी होती है. उस आप की पर्सनल हिस्ट्री पता होती है, इसलिए कौन सी दवा आप को सूट करेगी और किस से आप को साइडइफैक्ट होगा उसे शुरू से पता होता है. आप की समस्या के अनुसार ही वह आप का और आप के पूरे परिवार का इलाज करता है. इलाज बिना समय गंवाए: आप अपने फैमिली डाक्टर से कभी भी किसी समय अपना इलाज करा सकते हैं और बिना समय गंवाए आप नी पेन से ले कर हार्ट सर्जरी तक इलाज करवा कर स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं. किसी गंभीर बीमारी के होने पर यह डाक्टर तुरंत प्राथमिक उपचार कर आप को दूसरे डाक्टर के पास रैफर कर सकता है. इस से आप का इलाज समय रहते हो जाता है.

2.स्वास्थ्य भी और सलाह भी: एक फैमिली डाक्टर ही आप को सही सलाह दे सकता है कि किस तरह से इलाज कराएं क्योंकि कभीकभी एक छोटी सी बीमारी भी आप के अनदेखा करने पर बड़ी बीमारी बन जाती है इसलिए अपने फैमिली डाक्टर से बिना कुछ छिपाए उन्हें सही जानकारी दे कर खुद को स्वस्थ रखें. संपर्क कभी भी कहीं भी मुमकिन: आप अपने फैमिली डाक्टर से इतने फ्रैंडली होते हैं कि आप बिना झिझक उन से किसी भी समय फोन कर के या मिल कर अपनी समस्या बता सकते हैं. अगर आप कहीं बाहर हैं तो फोन द्वारा भी वे आप की बीमारी का इलाज बेहतर तरीके से कर सकते हैं. न पैसे की बरबादी न सेहत का नुकसान: फैमिली डाक्टर को आप के स्वास्थ्य के अलावा आप की फैमिली की आर्थिक स्थिति के बारे में भी पूरी जानकारी होती है, इसलिए वह इलाज उसी के अनुसार करता है. अगर किसी बड़ी बीमारी के लिए उसे कहीं रैफर भी करना पड़े, तो वह आप की आर्थिक स्थिति को देख कर ही यह करता है. इस से आप के पैसे की बरबादी नहीं होती और इलाज भी बेहतर हो जाता है.

3.फैमिली डाक्टर एक काउंसलर भी: आप का फैमिली डाक्टर एक काउंसलर के रूप में भी कार्य करता है, क्योंकि उसे आप की हिस्ट्री के बारे में पूरी जानकारी होती है. इसीलिए वह आप को कौन सी बीमारी है और उस की सही पहचान व सही इलाज के लिए जिस विशेषज्ञ की आप को जरूरत है, उसी के पास रैफर करता है. अगर आप को इस की जानकारी न हो तो आप को विशेषज्ञ मिलना मुश्किल हो सकता है. एक फैमिली डाक्टर आप को उचित सलाह दे कर आप को तनावमुक्त भी रखता है.

Winter Special: स्वाद लाजवाब, कौर्न व दाल के डंपलिंग

वेज डंपलिंग तो आपने बहुत खाया होगा. अब एक बार कौर्न व दाल के डंपलिंग जरूर ट्राई करें. ये है बनाने का तरीका.

सामग्री भरावन की

1/4 कप धुली मूंग 2 घंटे पानी में भिगोई

2 बड़े चम्मच कौर्न उबले

1 छोटा चम्मच अदरक व हरीमिर्च बारीक कटी

1 छोटा चम्मच राई

चुटकी भर हींग

10-12 करीपत्ते

2 बड़े चम्मच ताजा नारियल कद्दूकस किया

1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती बारीक कटी

1/2 छोटा चम्मच चाटमसाला

1 बड़ा चम्मच रिफाइंड औयल

नमक स्वादानुसार

सामग्री कवरिंग के लिए

1/2 कप ताजा पिसे चावलों का आटा

3/4 कप पानी

2 छोटे चम्मच औयल

नमक स्वादानुसार

विधि

-मूंग की दाल को पानी से निथार कर कौर्न के साथ हैंडब्लैंडर के चौपर में 1 मिनट चलाएं. ताकि दाल व कौर्न थोड़ा सा क्रश हो जाएं.

-एक नौनस्टिक कड़ाही में तेल गरम कर के राई, करीपत्ते व हींग का तड़का लगा कर दाल व कौर्न वाला मिश्रण डालें. इस में अदरक, हरीमिर्च और नमक डाल कर धीमी आंच पर 5 मिनट पकाएं. अब नारियल, चाटमसाला और धनियापत्ती डालें. फिर 1 मिनट भूनें. मिश्रण को ठंडा कर लें.

-चावलों के आटे में पानी और नमक मिलाएं. नौनस्टिक कड़ाही में धीमी आंच पर मिश्रण तब तक पकाएं जब तक आटे की लोई सी न बने.

-इस में तेल डाल कर हाथ से चिकना करें. लगभग 7 लोइयां तोड़ें. हाथ से फैलाएं. बीच में मिश्रण भर कर बंद करें. जब सब डंपलिंग तैयार हो जाएं तो उन्हें भाप में लगभग 5 मिनट पकाएं. चटनी के साथ टिफिन में पैक करें.

सिंगल मदर: क्या वाकई आसान हुई राह

जब मां की बात चलती है तो फिल्म ‘दीवार’ का डायलौग ‘मेरे पास मां है…’ कानों में गूंजने लगता है. मगर यह मात्र डायलौग ही है. असल जिंदगी में इस की कोई अहमियत नहीं, क्योकि हमारे देश में ज्यादातर पितृसत्ता वाले समाज का ही बोलबाला है. आज भले ही हमारा समाज कितनी तरक्की क्यों न कर गया हो, सिंगल पेरैंट होना आसान नहीं है. यों तो भारत में ज्यादातर जगहों पर पितृसत्ता ही वजूद में है, पर उत्तरपूर्व, हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों और केरल में मातृसत्ता प्रभुत्व में रही है. अब सुप्रीम कोर्ट ने सिंगल मदर्स के हक में एक अहम फैसला दिया है.

1.कोर्ट का फैसला कितना सही

जुलाई, 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में बिन ब्याही मां के अपने बच्चे के स्वाभाविक अभिभावक होने पर मुहर लगाई. कोर्ट ने कहा कि कोई भी सिंगल पेरैंट या अनब्याही मां बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करे तो उसे वह जारी किया जाए. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन अविवाहित मांओं के लिए एक बेहतर फैसला साबित हुआ है, जो विवाह से पहले गर्भवती हो गई थीं, क्योंकि ऐसी युवतियों को अपनी संतान के पिता का नाम बताना अब जरूरी नहीं होगा. फैसले में कोई भी महिला बिना शादी के भी अपने बच्चे का पालन कर कानूनन अभिभावक बन सकती है, जिस के लिए उसे पुरुष के नाम व साथ की जरूरत नहीं होगी. अब किसी भी महिला को अपने बच्चे या समाज को उस के पिता के नाम को बताना जरूरी नहीं होगा. कोर्ट ने कहा है कि यदि महिला अपनी कोख से पैदा हुए बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र के लिए अर्जी देती है तो संबंधित अधिकारी हलफनामा ले कर प्रमाणपत्र जारी कर दें.

कोर्ट का यह फैसला भले ही अनब्याही मांओं के लिए खुशियां ले कर आया हो पर क्या समाज उसे नाजायज कहना बंद कर देगा? क्या अविवाहित मां होने पर उसे समाज के तानों से मुक्ति मिल जाएगी? क्या इस फैसले से उस के अंदर आत्मविश्वास की भावना जाग्रत होगी? अगर यह सब मुमकिन होगा, तो कोर्ट का फैसला सचमुच कुंआरी मांओं के हित में है.

2जानता है मेरा बाप कौन है…

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को भले ही महिलाओं के हक में देखा जा रहा हो, पर समाज की तसवीर इस से अलग है. समाज में पिता का क्या स्थान है, यह बचपन से ही देखने को मिल जाता है. बच्चों को पहचानने के लिए लोग उन के पिता का ही नाम पूछते हैं, बेटे तुम्हारे पापा का क्या नाम है, वे क्या करते हैं आदि. इस में मां का जिक्र नहीं के बराबर ही होता है. बच्चे भी एकदूसरे पर रोब झाड़ने के लिए अकसर कहते सुने जा सकते हैं कि जानता है, मेरा बाप कौन है? भले ही उस की मां भी कामकाजी महिला हो, लेकिन वह अपनी पहचान अपने पिता से ही बताना चाहता है. ऐसे में साफ है कि हमारे समाज को अभी मां को उस की सही जगह देने की जरूरत है. सिर्फ नियमकानून से सिंगल मदर को उस का हक नहीं दिलाया जा सकता है.

स्टार प्लस पर प्राइम टाइम में ‘दीया और बाती हम’ धारावाहिक में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला. इस में सूरज और संध्या का बेटा अपने दोस्तों में रोब झाड़ता है. जब उस के दोस्त उस से पूछते हैं कि तुम्हारे पिता क्या काम करते हैं, तो वह बताता है कि उस के पिता का होटल है, जबकि असल में उस के पिता यानी सूरज हलवाई हैं. संध्या भले ही आईपीएस औफिसर हो पर उस के बेटे को पिता का नाम ही आगे करना था और सवाल भी आखिर यही था कि तुम्हारे पिता क्या करते हैं? यह मात्र एक धारावाहिक में ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी पिता का नाम ही पहले लिया जाता है.

3.दामादजी आए हैं

परिवार में ‘हैड औफ द फैमिली’ हमेशा पिता ही होता है. पिता की पसंदनापसंद का खयाल हर जगह सब से पहले रखा जाता है. लड़की के घर में भी शादी के बाद उस की पूछ कम हो जाती है. उस के परिवार वालों को भी बस दामादजी की पसंद की ही चिंता रहती है. खाने, फिल्म देखने, घूमने जाना आदि सब दामाद की पसंद से ही तय होता है. महिलाओं की जगह जब परिवार में ही कमतर होती जाएगी तो समाज और कानून में भी उन्हें उसी हिसाब से जगह मिलेगी. इसलिए इन चीजों में बदलाव की जरूरत घर के अंदर से होनी चाहिए.

4.इनसान हो या जानवर मां ही अहम

इनसानों और जानवरों के बीच सामाजिक परिवेश का फर्क होता है. इनसान जहां अपनी आने वाली पीढ़ी को परिवार और समाज में रहने के लिए तैयार करता है, वहीं जानवर उसे खुद के पैरों पर खड़ा होना सिखा कर उसे उस के हाल पर छोड़ देता है. कई बार जानवरों की तरह इनसानों में भी उदाहरण देखने को मिलते हैं, जब समाज में कोई पुरुष अपने बच्चे को अपना नाम या पहचान देने को तैयार नहीं होता है. ऐसे में अगर उस की मां उसे अपनाने की स्थिति में न हो तो वह असमय मौत का शिकार बनता है या अनाथालयों में पलता है. हालांकि ऐसे मामलों में जानवरों और इनसानों में यह समानता देखने को मिलती है कि दोनों जगहों पर मां ही अपने बच्चे को उस की आगे की जिंदगी के लिए तैयार करती है. जानवरों में भी खाने का जिम्मा मादा को ही उठाना पड़ता है. शिकार करना या अपना खाना ढूंढ़ना भी मां ही बच्चे को सिखाती है.

5.शादी के बिना मां बाप रे बाप

भारत की सामाजिक स्थिति ऐसी है कि यहां किसी लड़की का बिना शादी के मां बनना अपराध माना जाता है जबकि विदेशों में ऐसे कई मामले देखने को मिलते हैं. हमारे समाज में शादी में परिवार की मरजी सब से अहम होती है, इसलिए कई मामलों में प्रेमियों के बच्चे हो जाने पर भी वे शादी की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं. ऐसे में शादी से पहले मां बन कर रहना बड़ी चुनौती है. इसीलिए आए दिन भ्रूण के कूड़े के ढेर में पाए जाने के मामले सामने आते रहते हैं. समाज की सोच बदलने पर ही सिंगल मदर का कौन्सैप्ट सही मानों में कारगर होगा.

6.बच्चा तो अपना ही अच्छा

भारत में परित्यक्त, बेसहारा और अनाथ बच्चों की बड़ी संख्या होने के बावजूद उन्हें गोद लेने के लिए काफी कम संख्या में लोग आगे आते हैं. भारत में रजवाड़ों को खत्म हुए भले ही कई दशक बीत गए हों, पर आज भी वंश चलाने के नाम पर अपने ही खून को प्राथमिकता दी जाती है. कई परिवारों में बच्चे न होने के बावजूद अनाथ बच्चों को गोद नहीं लिया जाता. परिवार के बुजुर्गों को बेटेबहुओं से जल्दी औलाद पैदा करने की अपेक्षा रहती है. कई परिवारों में बेटे की चाहत में कई बेटियां पैदा हो जाती हैं, पर कोई लड़का गोद नहीं लिया जाता है. इस के अलावा संस्थाएं भी किसी कुंआरे लड़के या लड़की को बच्चा गोद देने में हिचकिचाती हैं.

7.तलाक के बाद की राह मुश्किल

दुनिया भर के मुकाबले हमारे देश में आज भी तलाक लेने का चलन काफी कम है. इस की वजह समाज में तलाकशुदा महिलाओं की स्थिति है. उन्हें आज भी हेय दृष्टि से देखा जाता है और विधवा पुनर्विवाह का चलन तो अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है. दूल्हा विधुर हो तो उसे एक बार नई दुलहन मिल जाएगी, पर विधवाओं की शादी का चलन अब भी देखने को नहीं मिलता है. विदेशों के मुकाबले तलाक की दर कम होने और पति के घर सिर्फ अर्थी ही निकलने की परंपरा के चलते हमारे देश में सिंगल मदर की मजबूत बनाने की योजनाएं भी धरी की धरी रह जाती हैं. इसी वजह से भारतीय महिलाएं ससुराल में उत्पीडन के बावजूद अपने बच्चे को अकेले पालने की हिम्मत नहीं दिखा पाती हैं.

8.लोगों के पास हैं चुभते सवाल

भारत में सिंगल मदर होना इतना आसान नहीं है. पूरी हिम्मत दिखा कर सिंगल मदर बनने पर भी महिलाओं को अकसर चुभते सवालों का सामना करना पड़ता है. मसलन, बच्चे के पापा अब कहां हैं, आप लोग साथ क्यों नहीं हैं? या फिर हतोत्साहित करने वाली प्रतिक्रियाएं जैसे अकेले बच्चा पालना बहुत मुश्किल है, सिर पर बाप का साया होना जरूरी है आदि. इस के अलावा स्कूल में बच्चे के दाखिले के समय या कोई सरकारीगैरसरकारी फौर्म भरते समय भी अभिभावक के बजाय पिता का नाम पूछा जाता है.

9.कुछ फैक्ट्स ऐंड फिगर्स

जनवरी से मार्च, 2015 के बीच भारत में गोद लिए जाने वाले बच्चों की संख्या में पिछले 3 सालों में पहली बार बढ़ोतरी दर्ज की गई. 2006 के आंकड़ों के अनुसार 82 फीसदी से ज्यादा भारतीय बच्चे अपने मातापिता के साथ रहते हैं. जो किसी एक पेरैंट के साथ रहते हैं, उन का आंकड़ा 8.5 फीसदी है. यहां एक पेरैंट का मतलब सिंगल मदर है.सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का महिला अधिकार समर्थकों ने स्वागत किया. वकील करुणा नंदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘संरक्षता कानूनों में समानता लाए जाने की शुरुआत करने की जरूरत थी.’’

दिल्ली सरकार के महिला और बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2007 से 2011 तक में लड़कों के मुकाबले लड़कियों को ज्यादा गोद लिया गया. 2011 में सरकार द्वारा पंजीकृत गैरसरकारी संस्थाओं से जहां 98 लड़के गोद लिए गए वहीं लड़कियों की संख्या 150 थी. द्य अब तक ‘द गार्जियन ऐंड वर्ड्स ऐक्ट’ और ‘हिंदू माइनौरिटी ऐंड गार्जियनशिप ऐक्ट’ के तहत बच्चे के लीगल गार्जियन का फैसला उस के पिता की सहमति के बगैर नहीं हो पाता था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि इस के लिए पिता की इजाजत की कोई जरूरत नहीं है.

Bigg Boss 16: में घर से बाहर होंगे अब्दु रोजिक, फैंस का फूटा गुस्सा

बिग बॉस 16 अपने टास्क और घर में होने वाली लड़ाईयों को लेकर काफी चर्चा में रहा है, हर दिन शो में होने वाले टास्क शो को बेहतर बना रहे है जिस कारण शो मीडिया की लाइमलाइट में बना हुआ है और टीआरपी की रेस में चल रहा है. ऐसे में शो में नया मोड़ आय़ा है जो कि फैंस बेहद ही नराज कर रहा है.

जी हां, इस वीकेंड के वार में अब्दु रोजिक घर से बाहर होने वाले है जो कि फैंस को बिलकुल पंसद नही आ रहा है बता दें,कि एक प्रोमो वीडियो जारी हुआ जिसमें फैंस जमकर कमेंट और ट्विट करते दिख रहे है और अब्दु को घर में वापिस लाने की मांग कर रहे है.

आपको बता दे, कि कई फैंस ऐसे हैं जो अब्दु रोजिक के घर से निकलने पर खफा हैं और इसके लिए साजिद खान पर निशाना साध रहे हैं. एक इंटरनेट यूजर ने कमेंट कर लिखा है, ‘जिस तरह से बीते कुछ हफ्तों से अब्दु रौजिक को बुली किया जा रहा था वो टूट चुका था. अब कम से कम कुछ दिन वो आराम की सांस ले सकेगा और दोबारा घर में दमदार वापसी करेगा।’ जबकि एक इंटरनेट यूजर ने कमेंट कर लिखा कि अब्दु रोजिक के जाने के बाद अब वो इस गेम शो को नहीं देखेंगे.वो चाहते हैं कि अब्दु रोजिक घर में दोबारा वापस आए.

घर से अब्दु रोजिक की विदाई फैंस का दिल तोड़ गई है. कई लोग परेशान हैं कि आखिर अब्दु रोजिक को घर से बाहर क्यों निकाला गया है.सामने आई एक जानकारी के मुताबिक दरअसल, अब्दु रोजिक को मेडिकल वजहों से घर से बाहर किया गया है. जल्दी ही अब्दु रोजिक फिर से बिग बॉस के घर में एंट्री करने वाले हैं. बीते दिनों साजिद खान ने अब्दु रोजिक के साथ एक भद्दा मजाक किया था.जिसके बाद से ही अब्दु रोजिक के फैंस बिग बॉस के मेकर्स से नाराज चल रहे थे. साथ ही अब्दु रोजिक की एजेंसी ने भी बिग बॉस के मेकर्स पर साजिद खान की ओर से किए गए भद्दे मजाक पर गुस्सा निकाला था.

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