टीवी का पॉपुलर शो “गुम है किसी के प्यार में” मे इन दिनों हिट चल रहा है शो की पॉपुलरेटी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है, शो में आने वाले नए मोड़ को और बेहतर बना रहे है. नील भट्ट (Neil bhatt) और आयशा सिंह (Ayesha Singh) स्टारर ‘गुम है किसी प्यार में’ (Gum Hai Kisi Ke Pyar Mein) में की कहानी अब नया मोड ल चुकी है.
आपको बता दें, कि इन दिनों कहानी विराट, पाखी और सई की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूम रही है . बीते दिन भी ‘गुम है किसी के प्यार में’ में दिखाया गया कि विराट गेम जीतने के बाद पाखी को मनाने की कोशिश करता है और उसे भरोसा दिलाता है कि उसकी जिंदगी में पत्रलेखा का काफी महत्व है. लेकिन इसी बीच टायर फट जाता है और बस खाई के किनारे अटक जाती है. विराट एक-एक कर सबको निकाल लेता है, लेकिन पत्रलेखा बस में बेहोश हो जाती है, जिससे विराट उसे भूल जता है. लेकिन ‘गुम है किसी के प्यार में’ में आने वाले मोड़ यहीं खत्म नहीं होते.
कहानी में दिखाया जाएगा कि पत्रलेखा को होश आता है और उसे पता चलता है कि वह बस में फंसी गई है. वह विराट को बुलाती है, लेकिन देखती है कि विराट सई को बचाने में लगा होता है. वह सई को सीपीआर भी देता है और उसके होश में आने के बाद उसे गले भी लगा लेता है. इतना कुछ देखने के बाद पत्रलेखा का दिल टूट जाता है.
कहानी में आगे दिखाया जाता है कि थोड़ी देर बाद विराट और सई पत्रलेखा को आसपास देखते है लेकिन उन्हे पत्रलेखा कहीं भी नजर नहीं आती. तभी सबको एहसास होता है कि पत्रलेखा बस में फंसी हुई है.लेकिन इसी बीच बस से बंधी रस्सी टूटने लगती है. विराट अपनी बीवी को बचाने की कोशिश भी करता है, लेकिन बस खाई में गिर जाती है और पत्रलेखा भी बस के साथ चली जाती है. दूसरी तरफ विराट हादसे के लिए खुद को दोषी मानता है और खुद भी उसे खाई में ढूंढने चला जाता है.
कहानी में आगे दिखाया जाएगा कि बस हादसे की खबर सुनते ही पूरा परिवार हादसे के जगह पर पहुंच जाता है.सई विनायक और सवि को संभालने की कोशिश करती है. लेकिन बाद में वह खुद पत्रलेखा को बचाने के लिए जंगलों में जाती है. उसे तालाब के किनारे पत्रलेखा मिल भी जाती है.लेकिन, तभी उसकी नजर तालाब में मौजूद मगरमच्छ पर पड़ती है, जो धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ता हैआगे ये दिखाया जायेगा कि सई उसका ऑपरेशन करेगी और उसकी जान बचाएगी.
सर्दियों का मौसम अचारों का मौसम होता है इस समय बाजार में भांति भांति की अनेकों सब्जियां भी खूब मिलतीं हैं. इनका अचार डालकर काफी लंबे समय तक सब्जियों का स्वाद बड़ी आसानी से लिया जा सकता है. अचार डालने के लिए बार बार मसाला डालने से अच्छा है कि एक बार अचार का प्रीमिक्स बना लिया जाए और फिर इसे आवश्यकता नुसार उपयोग कर लिया जाए इससे समय की बचत तो होती ही है साथ ही आपका जब मन चाहे आप चुटकियों में अचार बना सकतीं हैं तो आइए देखते हैं कि इस प्रीमिक्स को कैसे बनाया जाता है-
विधि
-सभी खड़े मसालों को बिना तेल के कड़ाही में धीमी आंच पर 5 मिनट तक रोस्ट कर लें. जब ठंडा हो जाये तो मिक्सी में दरदरा पीस लें. अब इसमें सभी पिसे मसाले अच्छी तरह मिलाएं और तैयार प्रीमिक्स को एक एयरटाइट जार में भरकर रख लें.
-जब भी आपको अचार बनाना हो तो सरसों के तेल को अच्छी तरह गर्म करें और गैस बंद कर दें. जब तेल गुनगुना सा हो तो मसाला मिलाएं और फिर जिसका आपको अचार बनाना उसे डालकर चलाएं और एक जार में अचार को भरकर 2-4 दिन धूप में रखकर प्रयोग करें.
रखें इन बातों का ध्यान
-लहसुन, गोभी, शलगम, मूली और गाजर जैसी बिना खटास वाली सब्जियों का अचार बनाते समय अचार की मात्रा के अनुसार 1-2 टीस्पून अमचूर पाउडर अवश्य डालें.
-आंवला और नींबू जैसे खट्टे स्वाद वाली सब्जियों के अचार में अमचूर पाउडर की आवश्यकता नहीं होती.
-मिर्च का अचार बना रहीं हैं तो या तो आप अलग से बिना लाल मिर्च का मसाला बनाएं अथवा मिर्च के
अचार का मसाला निकालकर प्रीमिक्स में अचार का मसाला मिलाएं.
-1किलो आंवले के अचार में 4 टेबलस्पून या 1 कप अचार का प्रीमिक्स मिलाएं.
-1 किलो अचार में ठंडा हो जाने पर 1 टेबलस्पून सफेद सिरका या वेनेगर मिलाएं इससे अचार लंबे समय तक खराब नहीं होता, आप चाहें तो गन्ने के सिरके का भी प्रयोग कर सकतीं हैं.
-इंस्टेंट अचार बनाने के लिए सभी सब्जियों को अच्छी तरह धो पोंछकर मनचाहे आकार में काटें फिर इन्हें हल्का सा नरम होने तक स्टीम कर लें गरम तेल में डालकर तेज आंच पर भूनें ताकि इनकी नमी समाप्त हो जाये फिर गर्म में ही अचार का मसाला मिलाएं और तुरंत ही प्रयोग करें.
-अचार बनाने के लिए ताजी और अच्छी तरह साफ की गई सब्जियों का ही प्रयोग करें और अच्छी तरह सूखे जार में ही भरें.
मेरी उम्र 26 साल है. मेरी रंगत सांवली है. मेरे चेहरे पर पिंपल्स के ब्लैक मार्क्स हैं. कृपया ठीक करने के लिए घरेलू उपाय बताएं?
जवाब
अगर दाग गंभीर, पुराने और गहरे हैं, तो उन्हें हटाने के लिए आप को किसी विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत होगी. चेहरे के दागधब्बों को हटाने के लिए 1 बड़ा चम्मच सेब का सिरका, 2 छोटे चम्मच शहद, आवश्यकतानुसार पानी को मिला कर पेस्ट तैयार कर लें और इस का प्रयोग करें. सेब के सिरके में ऐंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं. इस मिश्रण को रुई की मदद से अपने चेहरे और मुंहासे के दाग पर लगा कर 15 मिनट बाद चेहरा धो लें. आप इसे हर रोज या हर दूसरे दिन लगा सकती हैं.
आज की भागदौड़ भरी और व्यस्त जीवनशैली का विपरीत असर चेहरे की स्किन पर पड़ता है, जिससे स्किन संबंधी समस्याएं होने लगती हैं. इन समस्याओं में पिंपल्स का होना सबसे आम है और इससे निपटने के लिए हम कई उपाय भी करते हैं.
अक्सर हम इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि किस तरह हमारा फेशियल क्लेन्जर पिंपल्स से छुटकारा दिलाने के बजाय और भी नुक्सान पहुंचा रहा है. साधारण टॉयलेट सोप पिंपल्स के लिए नुक्सानदायक होने के साथ-साथ उन्हें बढ़ा भी सकता है.
सोप पिंपल्स से निपटने के लिए सही उपाय क्यों नहीं हैं?
यदि चेहरे पर पिंपल्स हैं, तो ऐसे में साबुन का इस्तेमाल करना पिंपल्स के लिए हानिकारक साबित हो सकता है. चेहरे की स्किन शरीर की बाकी स्किन की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होती है. साबुन चेहरे के पीएच स्तर को प्रभावित करता है, जिससे स्किन रूखी नजर आने लगती है. चेहरा जब ज्यादा ड्राई हो जाता है, तब यह तेल ग्रंथियों को सक्रिय कर देता है. ऐसे में पिंपल्स पैदा करने वाले बैक्टीरिया स्किन पर पनपने लगते हैं और पिंपल्स की समस्या भी बढ़ने लगती है.
विंटर सीजन में जहां खाने पीने, घूमनेफिरने व मस्ती करने का अपना ही मजा होता है. क्योंकि ठंडीठंडी हवाएं तन व मन को तरोताजा करने का काम जो करती है. लेकिन ये मौसम स्किन के लिहाज से थोड़ा चैलेंज भरा भी होता है. ऐसे में जरूरी है इस मौसम को एंजोय करने के साथसाथ अपनी स्किन के साथसाथ अपने पैरों का भी खास ध्यान रखने की. जिसे हम अकसर ये सोचकर इग्नोर कर देते हैं कि इन्हें देखने वाला कौन है, लेकिन जब परेशानी बढ़ती है , तब हम इसके सोलूशन के लिए महंगे ट्रीटमेंट्स लेने में भी पीछे नहीं रहते हैं . ऐसे में हम आपको बताते हैंग्रीनलीफ फुट केयर क्रीम के बारे में, जो आपको फटी एड़ियों से राहत पहुंचाने के साथसाथ खूबसूरत स्किन देने का काम करती है. तो आइए जानते हैं कैसे-
क्योंहोतीहैयेसमस्या
सर्दियों में तापमान में गिरावट का सीधा असर हमारी स्किन पर पड़ता है, अगर ये कहें कि सबसे ज्यादा असर एड़ियों पर पड़ता है, तो गलत नहीं होगा. क्योंकि एक तो कम तापमान और दूसरा ठंड बढ़ने की वजह से हम ज्यादा गर्म पानी से नहाते हैं , जो एड़ियों को रुखा बनाने के साथसाथ उसमें दरारें पैदा करने का भी काम करता है. ऐसे में गुनगुने पानी से नहाने के साथसाथ एड़ियों पर नेचुरल इंग्रीडिएंट्स से भरपूर क्रीम लगाने की भी जरूरत होती है, ताकि नेचुरल तरीके से स्किन प्रोब्लम को ठीक किया जा सके.
येक्रीमखासक्यों
– हैएलोवेराकीखूबियां
एलोवेरा एक बहुत ही अच्छा मॉइस्चराइजर होता है. जो स्किन के कोलेजन को बूस्ट करने के साथसाथ उसे मॉइस्चराइज करने का काम करता है. इससे फटी एड़ियों को भी हील करने में मदद मिलती है. ये स्किन के अंदर तक जाकर उसे हाइड्रेट रखता है, जिससे चाहे सर्दी हो या गर्मी आपके पैर हमेशा सोफ्ट , स्मूद व खूबसूरत बने रहते हैं. और आप भी तो यही चाहती हैं न.
– कोकुमबटरमेंरीजनरेटप्रोपर्टीज
कोकुम बटर में स्किन को रीजनरेट करने वाली प्रोपर्टीज होती हैं. ये एड़ियों में पड़ने वाली दरारों को हील करने के साथ आपके पैरों से आने वाली दुर्गंध को दूर करने का करता है. ये आपके पैरों को मॉइस्चराइज करके उन्हें पैंपर करने का काम करता है. इसमें रफ स्किन को रिमूव करके स्किन को सुपर स्मूद बनाने की क्षमता होती है. और बता दें कि ग्रीनलीफ फुट केयर क्रीम इस इंग्रीडिएंट की खूबी से भरपूर है. इसलिए अगर आप पैरों को स्मूद रखना चाहते हैं तो इस क्रीम का इस्तेमाल जरूर करें.
– टीट्रीमेंहै
एंटीमाइक्रोबियलप्रोपर्टीज
टी ट्री आयल न सिर्फ चेहरे के लिए फायदेमंद होता है, बल्कि इसमें है एंटीमाइक्रोबियल प्रोपर्टीज , जो हील्स को क्लीन करने के साथसाथ फटी एड़ियों के कारण उसमें रेडनेस, जलन व सूजन को भी कम करने का काम करता है. ये ड्राई स्किन को हाइड्रेट करके आपकी हील्स को तुरंत रिलैक्स करने का काम करता है. तभी तो इसे ड्राई व क्रैक हील्स के लिए किसी मैजिक से कम नहीं माना जाता.
कैसेअप्लाईकरें–
इसे अप्लाई करना बेहद आसान है. बस अपने पैरों को हलके गुनगुने पानी से धोकर उसे टॉवल की मदद से सुखा लें. फिर दिन में दो बार, यानि एक बार नहाने के बाद और फिर रात को सोते समय इसे पैरों में लगा लें. फिर हलके हाथों से मसाज कर लें. यकीन मानिए कुछ ही दिनों में आपको अपनी फटी एड़ियों में सुधार नजर आने लगेगा. ग्रीनलीफ फुट केयर क्रीम की खास बात ये है कि ये नेचुरल इंग्रीडिएंट्स से बनी होने के कारण पूरी तरह से सेफ है. तो फिर देर किस बात की , इसे अप्लाई करके अपने पैरों को बनाए सोफ्ट व खूबसूरत.
टीवी सीरियल ‘कौन बनेगा करोड़पति’ सीजन 5 के अंतिम खिलाड़ी के रूप में पुष्पा उदेनिया खेलने के लिए आई थीं. पुष्पा उदेनिया मध्य प्रदेश के दमोह जिले की रहने वाली हैं. उन के पिता चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं. वे बड़ी मुश्किल से पुष्पा की शादी कमलेश उदेनिया से करा पाए. कमलेश की भी कोई नौकरी नहीं थी. पुष्पा एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं. उन को शादी के 2 साल बाद बेटा हो गया. अब परेशानी यह थी कि बेटे की देखभाल कौन करे? पुष्पा और उन के पति की हालत ऐसी नहीं थी कि वे बेटे की देखभाल के लिए किसी नातेरिश्तेदार को बुला सकें या बेटे को क्रैच में रख सकें. ऐसे में पतिपत्नी ने मिल कर फैसला किया कि जिस का वेतन कम है, वह घर पर रह कर बेटे की देखभाल करेगा. कमलेश का वेतन कम था, इसलिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और घर पर रह कर बच्चे की देखभाल करने लगे. पुष्पा ज्यादा वेतन पाती थीं, इसलिए वे अपनी स्कूल टीचर की नौकरी करती रहीं. लेकिन पुष्पा को वेतन के रूप में सिर्फ क्व 3,000 ही मिलते थे अत: घर का खर्च चलाने के लिए वे अपने घर पर ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगीं.
पुष्पा ने बताया, ‘‘घर पर काम करने को ले कर शुरूशुरू में मेरे पति की बहुत आलोचना होती थी, लेकिन धीरेधीरे लोगों का विरोध कम हो गया.’’ पुष्पा के पति कमलेश का मानना है कि 2 साल की बात और है. जब बच्चा बड़ा हो जाएगा, वह स्कूल जाने लगेगा तब वे भी नौकरी करने लगेंगे. वे अपनी पत्नी को प्रोफैसर बनाने का सपना देख रहे हैं.
डे बोर्डिंग स्कूल बन रहे सहारा
यह बात केवल पुष्पा की ही नहीं है. समाज में पुष्पा जैसी बहुत सी महिलाएं हैं. सीमा और राकेश की कहानी भी ऐसी ही है. सीमा और राकेश दोनों ही नौकरीपेशा हैं. जब उन का पहला बच्चा हुआ तब उन के सामने भी परेशानी आई. राकेश ऐसी नौकरी करते थे, जिस में शिफ्टवार ड्यूटी थी. उस वक्त राकेश की ड्यूटी दिन की थी. ऐसे में परेशानी यह आने लगी कि बच्चे की देखभाल कौन करे? कुछ दिन बच्चा क्रैच में रखा गया, इस में भी परेशानी आ रही थी. तब राकेश और सीमा ने तय किया कि उन में से ही कोई एक अपने बच्चे की देखभाल करेगा. राकेश ने अपनी ड्यूटी बदलवा ली. 4 बजे के बाद सीमा जब बच्चे की देखभाल करने के लिए आ जाती, तब राकेश नौकरी करने जाते. इस बीच सीमा को दूसरा बच्चा भी हो गया. तब बड़े बच्चे को डे बोर्डिंग स्कूल में दाखिला दिला कर राकेश ने छोटे बेटे की देखभाल करनी शुरू कर दी. वे कहते हैं, ‘‘कुछ दिनों की बात है. इस के बाद छोटा बेटा भी डे बोर्डिंग स्कूल में जाने लगेगा, तब सब ठीक हो जाएगा.’’
क्रैच को छोड़ डे बोर्डिंग स्कूल में बच्चे का दाखिला दिलाने के सवाल पर राकेश ने बताया, ‘‘कै्रच में बच्चे की केवल देखभाल हो पाती है. वहां रहने वाली आया बच्चे को पढ़नालिखना या दूसरी चीजें नहीं सिखा पाती. डे बोर्डिंग स्कूल में 2 साल की उम्र के बाद दाखिला मिल जाता है. यहां पर बच्चे कई तरह के रचनात्मक कामों और खेल से तो जुड़ते ही हैं, उन की पढ़ाई की शुरुआत भी हो जाती है, जिस से किसी अच्छे स्कूल में बच्चे को दाखिल कराने में काफी मदद मिल जाती है. डे बोर्डिंग स्कूल में बच्चा दिन भर स्कूल में रहता है. वहां खाने और खेलने की सुविधाएं देने के साथ ही बच्चे को मैनर्स सिखाए जाते हैं. क्रैच के मुकाबले यह थोड़ा महंगा जरूर होता है पर बच्चा यहां ठीक से रहता है.’’
क्रैच का नहीं जवाब
निशा सरकारी नौकरी में हैं. उन के पति बाहर नौकरी करते हैं. उन्हें जब बच्चा हुआ तो पहले 3 माह की छुट्टी औफिस से मिल गई. इस के बाद उन्हें औफिस जाना था. निशा ने अपनी परेशानी औफिस में अपने सहयोगियों को बताई. उन से निशा को पता चला कि उन के औफिस में ही एक क्रैच खुला है, जिस में महिला कर्मचारी अपने बच्चों को रखती हैं. वे जब घर जाती हैं तो अपनेअपने बच्चे को साथ वापस ले जाती हैं. ऐसे में बच्चा उन से दूर भी नहीं रहता और उन्हें औफिस के काम में कोई परेशानी भी नहीं रहती. बच्चे की देखभाल के एवज में निशा को केवल क्व 3 सौ प्रतिमाह देने होते थे. आमतौर पर बड़े सरकारी औफिसों के अंदर ही क्रैच खुले होते हैं. सरकारी औफिसों में खुले क्रैच में बाहरी लोग भी अपने बच्चे को रख सकते हैं. इस के लिए बस उन को फीस कुछ ज्यादा देनी पड़ती है. प्राइवेट नौकरी करने वाली रजनी कहती हैं कि क्रैच और डे बोर्डिंग स्कूल में अंतर होता है. क्रैच में आप छोटे से छोटे बच्चे को भी रख सकती हैं जबकि डे बोर्डिंग स्कूल में 2 साल से ज्यादा उम्र के बच्चे ही रखे जा सकते हैं. रजनी को अपने औफिस से केवल 2 माह की छुट्टी मिली थी, उन को 2 माह की उम्र में ही बच्चे को क्रैच में भेजना शुरू करना पड़ा. समाज में वर्किंग मदर की बढ़ती संख्या को देखते हुए क्रैच खोलना अब एक कैरियर भी बन गया है. लगभग हर बड़े शहर की बड़ी कालोनी या रिहायशी इमारतों के आसपास क्रैच खुल रहे हैं.
अपने हों साथ तो क्या बात
रीना एनजीओ सैक्टर में काम करती हैं. वे कहती हैं, ‘‘हमें कभीकभी काम के सिलसिले में घर पहुंचतेपहुंचते काफी रात हो जाती थी. ऐसे में हमारे सामने कई मुश्किलें थीं. इन मुश्किलों से बचने के लिए हम ने अपनी मां को अपने पास बुला लिया. वे आ कर बच्चे की देखभाल करने लगीं. मैं कभीकभी रात में घर नहीं भी आती थी तो भी वे बच्चे की देखभाल कर लेती थीं. मुझे लगता है कि अगर संभव हो तो हम कोई ऐसी व्यवस्था कर दें जिस से घर का कोई बड़ाबुजुर्ग बच्चे की देखभाल करने को तैयार हो जाए. इस से बच्चे की तनिक भी चिंता नहीं रहती. रात में भी यह नहीं सोचना होता कि अब बच्चे को कहां रखें? ‘‘हम कितना भी महंगा क्रैच क्यों न खोज लें, उस में वह बात नहीं होती जो घर के बड़ेबुजुर्ग में होती है. आज की पीढ़ी अपने घर के बड़ेबुजुर्गों की देखभाल से बचने के लिए उन्हें अपने साथ नहीं रखती. अगर बच्चा घर के लोगों के साथ रहेगा, तो वह ज्यादा सुरक्षित रहेगा, उसे अच्छे संस्कार भी मिलेंगे.’’ मजदूर तबके की और स्वतंत्र रूप से काम करने वाली कुछ महिलाएं काम के दौरान भी बच्चे को साथ रखने का काम करती हैं. लेकिन जो नौकरी करती हैं उन के लिए बच्चे को साथ रखना मुनासिब नहीं होता. उन की कार्यक्षमता और तरक्की पर भी असर पड़ता है. ऐसे में क्रैच, घर के लोग और डे बोर्डिंग स्कूल उन का सहारा बन सकते हैं. पर इन जगहों पर बच्चे को रखने के लिए पहले मानसिक रूप से खुद को तैयार कर लें. बच्चे को भी पूरा सहारा दें ताकि उसे इस बात का एहसास न हो सके कि वह बिना मांबाप के अकेला रहता है. कई बार ऐसे हालात बच्चे के लिए नुकसानदायक साबित होती है.
लेखक: जेम्स कैमरून , रिक जफा , अमांडा सिल्वर , जोश फ्रीडमैन और और शेन सलेरनो
निर्देशकः जेम्स कैमरून
कलाकारः सैम वर्थिंगटन , जो सल्डाना , सिगरनी वीवर , स्टीफन लैंग और केट विंसलेट व अन्य
अवधिः तीन घंटे 15 मिनट
2009 में हौलीवुड के मशहूर निर्देषक जेम्स कैमरुन की फिल्म ‘‘अवतार’’ के साथ भारतीय दर्शकों ने भी एक नाता जोड़ लिया था,क्योंकि इस फिल्म में पारिवारिक मूल्यों के मानवीय भावनाओं और अद्भुत स्पेशल इफेक्टस था.इसी वजह से जब भारतीय दर्शकों को पता चला कि जेम्स कैमरून तेरह वर्ष बाद अपनी फिल्म ‘अवतार’ का सिक्वअल ‘‘अवतार द वे आफ वाटर’’ लेकर आ रहे हैं,तो भारतीय दर्शक इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार करने लगे थे.इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वीकेंड की एडवांस बुकिंग में तकरीबन चार लाख से भी ज्यादा के टिकट बिक चुके हैं.अब यह फिल्म सोलह दिसंबर को भारतीय सिनेमाघरों में अंग्रेजी के साथ ही हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम व कन्नड़ भाषा में पहंुच रही है.अफसोस जिन्हे 2009 की ‘‘अवतार’’ याद है,उन्हें ‘‘अवतार द वे आफ वाटर’’ देखकर थोड़ी निराशा होगी.फिर भी कुछ कमियों के बावजूद लगभग 3500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस फिल्म को थ्री डी में देखने पर रोमांचक अनुभव होते हैं.
कहानीः
‘अवतार‘ के दूसरे भाग यानी कि ‘अवतार द वे आफ वाटर’ की कहानी दस साल आगे बढ़ चुकी है. ‘अवतार’ में पेंडोरा पर इंसानों को मूल्यवान खनिज की खोज थी.इस फिल्म में नीली चमड़ी, सुनहरी आंखें, बंदरों की तरह पूंछ और लंबी चैड़ी कद काठी वाले नावी समुदाय के लोग शांति से अपने पेंडोरा ग्रह पर रह रहे हैं.लेकिन इस बार पेंडोरा पर पृथ्वी वासियों,जिन्हें पेंडोरा के लोग आकाशीय प्राणी कहते हैं,का आतंक बढ़ गया है.परिणामतः पेंडोरा के इंसानों को लग रहा है कि इस धरती पर रहना मुश्किल है और वह अपने दुश्मन का मुकाबला करने की बजाय परिवार को सुरक्षित रखने के लिए एक नए गृह की तलाश में हैं पेंडोरा पर नावी समुदाय के जैक सुली (सैम वर्थिंगटन) एक परिवारिक इंसान की तरह अपनी प्यारी पत्नी नेतिरी (जो सलदाना) और चार बच्चों के साथ खुशहाल जीवन बिता रहा है.उनके चार बच्चों में दो बेटे नेतेयम (जैमी फ्लैटर्स), लोक (ब्रिटेन डाल्टन) और एक बेटी टुक (ट्रिनिटी जो ली ब्लिस) है.उन्होंने एक बेटी कीरी (सिगर्नी वीवर) को गोद भी लिया है.वह हंसी खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं.साथ ही इंसानी बच्चा स्पाइडर (जैक चैंपियन) है. दिन प्रति दिन अपने बच्चों को बढ़ते देखना माता-पिता के रूप में सली और नेतिरी के लिए सुखद अहसास है.मगर उनकी हंसती-खेलती जिंदगी पर उस वक्त नजर लग जाती है,जब धरती के लोग मृत कर्नल माइल्स की समृतियों और डीएनए से बनाए गए कर्नल क्वारीच के अवतार को सुली से प्रतिशोध लेने के मिशन पर लगा देते हैं.कर्नल क्वारीच के साथ
आधुनिक हथियारों से लैस टुकड़ी का एकमात्र मकसद है सुली से बदला लेना है.वह सुली के बच्चों पर हमला करके स्पाइडर को बंधक बना अपने साथ ले जाता है.इससे सुली का परिवार और नावी समुदाय खुद को खतरे पाता है.पिछली फिल्म की तरह इस बार सुली युद्ध को न चुनकर अपने परिवार की रक्षा के लिए अपनी सरदारी छोड़ देता है. और सुरक्षित जगह की तलाश अपने समुदाय के साथ निकल पड़ता है. फिर ख्ुाद को जल जीव मानने वाले मेटकायनासमुदाय के टोनोवारी (क्लिफ करटिस) की शरण में पहुॅच जाता है.वहां के निवासी जलक्रीडा में माहिर हैं.यानी समुद्र के अंदर वह उतनी ही सहजता से रहते हैं, जितनी सहजता से सुली का परिवार घने जंगल में रहता था.अब नावी समुदाय के लोग वहां के रहने के तौर तरीके सीखते हैं. यॅूं तो शुरुआत में सुली और टोनावरी के बच्चों के बीच तीखी झड़प होती हैं, मगर टोनावरी की बेटी हमेशा ही सली के बच्चों के प्रति सहयोगी रवैया अपना कर उन्हें नए माहौल में ढलने में मदद करती है.अभी सुली और उसका परिवार सागर के साथ रहने के तौर-तरीके सीख ही रहा था कि कर्नल क्वारीच, स्पाइडर और हथियारांे से सुसज्जित अपनी टुकड़ी के साथ आ धमकता है.इतना ही नही क्वारीच के साथ पृथ्वी का वैज्ञानिक भी है, जो पायकन नामक विशालकाय व्हेल मछली के मस्तिष्क से ऐसा द्रव्य निकालने के मिशन पर है, जो इंसानों को अमरत्व दे सकता है.इस
बीच सुली के बेटे लोक की दोस्ती पायकन से हो जाती है.कुल मिलाकर सुली के कारण टोनोवरी समुदाय पर भी खतरा मंडराने लगता है.तो अब सुली या टोनोवरी समुदाय क्या करेगा?
लेखन व निर्देशनः
मैं कनाडियन फिल्म निर्देशक जेम्स कैमरून का प्रशंसक हॅूं.मुझे उनकी कई फिल्में काफी पसंद हैं.जिनमें ‘टर्मिनेटर 2’,‘टू लाइज’,‘टाइटानिक’ व ‘अवतार’ का समावेष है.उनकी इन फिल्मों में भगोड़ों की कहानी नही रही.पहली बार उन्होने ‘अवतार द वे आफ वाटर’ में सुली को अपने समुदाय को पैंडोरा रहकर पृथ्वी वासियो से लड़ने की बजाय परिवार की सुरक्षा के नाम पर पैंडोरा यानी कि जंगल छोड़कर सागर के किनारे बसे जल जीवियों की शरण में पहुंचकर भटक जाते हैं.और उनका सारा ध्यान शत्रु की गतिविधियों पर नजर की बजाय सागर अर्थात जल जीवी बनने की तरफ हो जाता है.तीन घंटे 15 मिनट की फिल्म में से एक घ्ंटे से अधिक फिल्म में नावी समुदाय के बच्चों जल में तैरना सीखते रहते हैं.लेखक व निर्देशक की यह सबसे बड़ी चूक है.पानी के भीतर के दृश्यों में काफी दोहराव है.इसे एडीटिंग टेबल पर कसे जाने की जरुरत थी.अब जबकि दो घ्ंाटे की अवधि वाली फिल्मों का दौर चल रहा है,उस दौर में
सवा तीन घंटे लंबी फिल्म दर्शकों के सब्र का इम्तहान लेने वाला ही है.सुली व नावी समुदाय के लोग जानते है कि स्पाइडर,जो कि उनके हर राज से वाकिफ होने के साथ ही नावी समुदाय की भाषा में बातें भी करता है,कर्नल क्वारीच का बेटा है.ऐसे में सुली व नावी समुदाय का सतर्क न रहना भी लेखक व निर्देशक की कहानी के स्तर पर कमजोर कड़ी है.‘अवतार’ की तरह ‘अवतार द वे आफ वाटर’ में पारिवारिक रिश्तों को ठीक से बुना नहीं गया है.लेकिन फिल्मकार ने नेतिरी के शोक और पायकन की कहानी से करुणा को उकेरा है.विभत्स और भयानक रस को लाने के लिए जेम्स कैमरून इंसानी फितरत का सबसे घृणित रूप भी सामने लाते हैं. निर्देशक जेम्स कैमरून ,मेटकायना कबीले पर रहने के लिए वहां के लोगों की स्वीकृति हासिल करने की दिक्कतों को बहुत अच्छी तरह से चित्रण करने में सफल रहे हैं.इस फिल्म का सशक्त पक्ष इसका वीएफएक्स है.यह फिल्म मूल फिल्म ‘अवतार’ की यादों को भी ताजा करती है. हवा में पक्षीराज के साथ कलाबाजियां जहां मूल फिल्म का आकर्षण थीं वहीं पानी के तलहटी में प्राकृतिक सुंदरता, कबीलेवासियों की कलाबाजियां, पानी के बीच उनकी अठखेलियां, दुश्मन
के साथ लड़ाई इस बार का विशेष आकर्षण हैं. फिल्म में जल की अहमियत पर रोषनी डालने वाले संवादो में से एक संवाद -‘‘हमारे जन्म से पहले और हमारे मरने के बाद समुद्र हमारा घर है.’ कई बार दोहराया गया है.मगर पृथ्वी पर जल की निरंतर हो रही कमी पर यह फिल्म खामोश रहती है. फिल्म के क्लायमेक्स के फिल्मांकन में भी निर्देशक मार खा गए हैं.क्लायमेक्स में जब कर्नल क्वारीच व उसकी
टुकड़ी आती है,तब सुली व नेतिरी के साथ मेटकायना समुदाय के राजा, रानी और उनके समुदाय के लोग भी आते हैं,पर कुछ देर बाद वह कहीं भी नजर नहीं आते? वजह पता नही चलती.
अभिनयः
सैम वर्थिंगटन और जोई सलदाना ने मूल फिल्म की तरह यहां पर भी अपने पुराने चरित्र की लय को बरकरार रखा है.इस बार का खास आकर्षण जेक का बेटा लोक (ब्रिटेन डेल्घ्टन) है.किरी का पात्र काफी रहस्यमय है.केट विंसलेंट और क्लिफ करटिस अपनी भूमिका में जंचते हैं.
स्टार प्लस सीरियल अनुपमा मीडिया की सुर्खियो मे बना हुआ है शो इन दिनो हिट चल रहा है सीरियल में आने वाले मोड़ फैंस को काफी एंटरटेन कर रहे है, शो के मेकर्स शो को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है. शो के टिवस्ट और टर्नस शो को टीआरपी के रेस में रख रहे है.
बीते दिन रुपाली गांगुली स्टारर अनुपमा में दिखाया गाया कि विज्येंद्र मेहता अनुपमा और डिंपल को किडनैप करने की कोशिश करते है लेकिन वो खुद के बनाएं जाल में फंस जाते है आइए आगे बताते है कि क्या हुआ? शो में दिखाया जाएगा कि अनुपमा आरोपियों को पुलिस के हवाले कर देती है. इस बात के लिए वहां मौजूद एक बच्ची न केवल अनुपमा की तारीफ करती है, बल्कि उसके जैसा बनने की भी बात कहती है. इस काम के लिए अनुपमा के साथ-साथ काव्या और किंजल की भी खूब वाहवाही होती है.
आपको बता दे,कि हाल ही शो का प्रोमो वीडियो वायरल हुआ है, जिसमे दिखाया गया है कि पाखी अधिक से फोन पर कहती है कि अगर तुम्हे मेरे साथ नहीं रहना चाहते हो मत रहो, मेरा जीने से अच्छा की मै मर जाऊं. ओर खुद को कमरे में बंद कर लेती है, ऐसे में सब पाखी को गेट खोलने के लिए कहते है पर पाखी नहीं खोलती है. दूसरी तरफ प्रोमो में दिखाया गया है कि अनुपमा एक मेले में जोकर बनती है. साथ ही चंदा चंमके चम-चम के गाने पर नाचती है. अब देखना ये होगा की पाखी आगे क्या करती है.
टीवी जगत की ऐसी कई हसीनाएं जिन्होंने शादी कर सबको हैरान क दिया है. ऐसे में कई सिलेब्स है जिन्होंने शादी कर अपनी फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर सबको शादी की जानकारी दी है. लेकिन ऐसे में इन हसीनाओं की शादी की फोटो ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई . जिसके बाद ट्रोलर्स ने शादी की फोटो पर जमकर मजाक बनाया और अजीबो-गरीब कमेंट्स भी किए तो आइए जानते है किन हस्तियों की शादी ट्रोलर्स के निशाना पर आई है.
देवोलीना भट्टाचार्जी (Devoleena Bhattacharjee)
देवोलीना भट्टाचार्जी ने हाल ही मे शादी की है ये शादी उन्होंने ट्रेन शाहनवाज शेख से की है. लोगों ने एक्ट्रेस के पति को न केवल उनके लुक्स के लिए ट्रोल किया, बल्कि इंटर रिलीजन मैरिज के लिए भी एक्ट्रेस को खूब निशाना बनाया.
टीवी जगत है पॉपुलर एक्ट्रेस सना खान की शादी की तस्वीरें ट्रोलर्स के निशाने पर आई है, जी हां, टोलर्स ने सना खान की शादी की फोटो पर जमकर कमेंट्स किए और कहा कि एक्ट्रेस ने शादी पैसों की खातिर की है. साथ ही यूजर्स ने यह तक कह दिया था, “क्या देखकर शादी की.
नेहा पेंडसे ने बिजनेसमैन शार्दुल ब्यास से शादी रचाई थी. एक्ट्रेस के पति को उनके तलाकशुदा होने और वजन के कारण खूब ट्रोल किया गया था. साथ ही नेहा पेंडसे पर पैसे की खातिर शादी करने का आरोप लगा था.
अदिति गुप्ता ने साल 2018 में कबीर चोपड़ा संग शादी रचाई थी। एक्ट्रेस ने खुद बताया था कि कई बार सोशल मीडिया यूजर ने पति के लुक्स को लेकर उनका मजाक बनाया था.
दीपिका कक्कड़ ने एक्टर शोएब इब्राहिम संग 2018 में शादी रचाई थी. इस बात के लिए एक्ट्रेस आज तक ट्रोल होती हैं. इतना ही नहीं, लोग दीपिका कक्कड़ को हाउस वाइफ बनकर रहने के लिए भी ताना मारते हैं.
चारू असोपा और राजीव सेन के रिश्ते में शादी के बाद से ही उथल-पुथल मची हुई है.कभी दोनों साथ रहते हैं तो कभी अलग होने की बातें करते हैं. इन दिनों भी चारू असोपा और राजीव सेन में झगड़ा चल रहा है, जिसे लेकर एक्ट्रेस खूब ट्रोल होती हैं.
अंकिता लोखंडे ने बीते दिन दिसंबर में विक्की जैन से शादी की थी. लोगों ने उस दौरान सुशांत सिंह राजपूत को याद कर अंकिता को ताना मारा था, साथ ही विक्की जैन को भी खूब ट्रोल किया था.
ऐश्वर्या शर्मा ने ‘गुम है किसी के प्यार में’ के को-स्टार नील भट्ट को अपना पति बनाया। दोनों को सीरियल के कारण खूब ट्रोल किया जाता है. ऐश्वर्या शर्मा ने बताया था कि ट्रोल्स ने उन्हें मरने तक के लिए कह दिया था.
अंकिता भार्गव ने करण पटेल संग शादी रचाई थी और उनकी एक बेटी भी है. अंकिता भार्गव को करण पटेल और काम्या पंजाबी का रिश्ता तोड़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है.
पनीर काठी रोल बच्चों और बड़ो दोनों को पसंद आने वाली स्वादिष्ट व्यंजन है. इसे बनाना भी बहुत आसान है. जानें इसे बनाने की विधि.
सामग्री भरावन के लिए
-1 कप प्याज बारीक कटा हुआ
-1 कप बींस बारीक कटी हुई
-1 कप गाजर बारीक कटी हुई
-1 कप बंदगोभी बारीक कटी हुई
-1 छोटा चम्मच अदरक कसा हुआ
-1 छोटा चम्मच लहसुन कसा हुआ
-250 ग्राम पनीर के टुकड़े
-1 कप टोमैटो कैचप
-नमक
-काली मिर्च स्वादानुसार
सामग्री रोटी के लिए
-500 ग्राम मैदा
-1/2 छोटा चम्मच नमक
-1/2 छोटा चम्मच अजवाइन
-1/2 कप पिघला मक्खन
-पानी मैदा गूंधने के लिए
विधि
-रोटी की सामग्री गूंध कर लोइयां बना लें और बड़े आकार की चपातियां बना कर एक तरफ रख लें. अब कड़ाही में तेल गरम कर, अदरक, लहसुन, वैजिटेबल्स, नमक व कालीमिर्च मिला कर 5-7 मिनट पकाएं. इस के बाद पनीर व टोमैटो कैचप मिला कर भरावन के लिए सामग्री तैयार कर लें.
-रोल बनाने के लिए हरेक चपाती के बीच में भरावन रखें. फिर उन के ऊपर पुदीना चटनी और प्याज के टुकड़े रख कर रोल बना लें.
-परोसने से पहले, रोल्स को ओवन में गरम कर लें और गरम गरम प्याज और पुदीना चटनी के साथ परोसें.