Winter Special: पत्नी का पेट पति की आफत बन जाएं तो क्या करें?

एक पत्रिका में एक समस्या छपी थी, ‘‘मेरी शादी को 3 साल हो गए हैं. मेरे मोटे पेट के कारण मेरे पति मेरी तरफ देखते भी नहीं. कृपया बताएं कि मैं क्या करूं, जो पति मेरे पेट को भूल कर मेरे करीब आ जाएं और मैं फिर से वैवाहिक सुख का आनंद ले पाऊं?’’

इसी तरह एक और समस्या थी. एक लड़की की 1 महीने बाद शादी होने वाली थी और वह अपना वजन घटाना चाहती थी. शादी के दिन वह अपने मोटापे को ले कर हंसी का पात्र नहीं बनना चाहती थी. इस के लिए उस ने टीवी में कैलोग्स स्लिम फैट का ऐड देख कर उसे नाश्ते में लेना शुरू कर दिया, जिस से वह बीमार पड़ गई. तब डाक्टर ने दुलहन बनने जा रही उस मुहतरमा को सही सलाह दी.

क्या आप भी दुलहन बनने जा रहीं और छरहरा बनना चाहती हैं? क्या यह सिर्फ विवाह तक के लिए करना चाह रही हैं? विवाह के बाद का क्या? उस के बाद जब भी आप खुद को आईने में देखेंगी तो आप को अपने थुलथुल बदन पर क्या शर्म महसूस नहीं होगी?

ऐसी कई लड़कियां होंगी, जो लड़का देखने आने तक से शादी तक स्लिम होना चाहती हैं. शादी के 1-2 साल बाद या कहें मां बन जाने के बाद इन सारे फौर्मूलों को बायबाय कह देती हैं.

  1. आफतें कैसीकैसी

रील लाइफ: शरत कटारिया द्वारा निर्देशित फिल्म ‘दम लगा कर हईशा’ में फिल्म की बेमेल जोड़ी की चर्चा है. ऐक्टर आयुष्मान खुराना उर्फ प्रेम निखट्टू की बीवी विशाल शरीर वाली इंटैलीजैंट दिखाई गई है. पति 10वीं फेल है पर पत्नी के मोटापे को ले कर बेहद शर्मिंदा रहता है. उसे फिक्र रहती है कि उस के दोस्त व बाकी लोग उस की मोटी बीवी के बारे में पता नहीं क्या सोचते होंगे. खैर, फिल्म के बीच में विवाद होने के बाद हैप्पी ऐंडिंग हो जाती है.

रीयल लाइफ: रोहन एक मल्टीनैशनल कंपनी में कार्यरत था. आए दिन कंपनी की गैटटूगैदर पार्टियां होती रहती थीं. ऐसे में जब रोहन औफिस की गैटटूगैदर में अपनी पत्नी मालिनी को ले जाता तो सामने व पीठ पीछे उस पर लोग मंदमंद मुसकराते. कारण था, बीवी का प्रैगनैंसी के बाद मोटा हो जाना. ‘जिस की बीवी मोटी उस का भी बड़ा नाम है.’ रोहन को इस तरह के न जाने कितने जुमले सुनने को मिलते. रोहन को पहले इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था, पर बाद में उसे भी मालिनी के साथ पार्टी में जाने पर शर्मिंदगी महसूस होने लगी. फिर उस ने अकेले पार्टियों में जाने का फैसला लिया.

सैक्स और वजन: मोटे पेट वाली महिलाएं और पुरुष दोनों ही घर से बाहर भी और भीतर भी शर्मिंदगी का कारण बनते हैं. एक अध्ययन से पता चला है कि बाहर निकले पेट का संकोच सिर्फ बैडरूम में ही नहीं, बल्कि बाहर भी रहता है. प्यार की बात पर शरीर का जो पहला हिस्सा झिझक व अनफिट दिखता है, वह है बड़ा पेट. यह बड़ा पेट आप के प्यार के पलों का मजा कम कर देता है. ऐसे में आप जल्दी थक जाते हैं या आप की सांसें फूलने लगती हैं, प्यार करने की इच्छा नहीं होती और बाहर मन डोलने लगता है. इतना ही नहीं साथी को खुश न कर पाना तनाव को भी जन्म देता है.

मनचाही ड्रैस न दे पाना: शादी के बाद या फिर बच्चा हो जाने के बाद यह तो नहीं कि रोमांस खत्म हो जाए पर अगर बीवी मोटी हो तो पति की कई इच्छाएं मर जाती हैं जैसे अगर वह आप को कोई मनचाही ड्रैस देना भी चाहे तो या तो आप का साइज नहीं मिलेगा या फिर आप पर वह फबेगी नहीं. इस चक्कर में पति चाह कर भी पत्नी को अपनी मनचाही ड्रैस का सरप्राइज नहीं दे पाता.

कौंप्लैक्स का भाव: अगर आप की फिगर 36-24-36 से डबल हो जाए तो आप उम्र से भी बड़ी दिखने लगेंगी. ऐसे में आप के पति की उम्र भले ही आप से ज्यादा हो पर वह जवां दिखेगा. तब आप को कौंप्लैक्स फील होगा कि आप अपनी उम्र से बड़ी दिख रही हैं. इसलिए वेट लौस कर बन जाएं स्लिम ऐंड ट्रिम, पति की तरह एकदम फिट. ऐसा नहीं है कि औरत को मोटा होना अच्छा लगता है पर शादी हो जाने के बाद वह मान लेती है कि मोटी हो भी जाए तो क्या पति का प्यार कम थोड़े होगा. यह सोच गलत है.

2. लाइफस्टाइल है पेट पर भारी

यूनानी चिकित्सक हिप्पोक्रैट्स के अनुसार, सारी बीमारियां पेट से ही शुरू होती हैं. 2 दशक पहले हुए शोध के अनुसार पूरी तरह से फिट व हैल्दी रहने के लिए आंतों का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है. हमारे लाइफस्टाइल की वजह से हमारी आंतें प्रभावित होती हैं, क्योंकि हम हाई कैलोरी फूड और जंक फूड का सेवन बहुत ज्यादा करने लगे हैं. ऐसे में आंतों को स्वस्थ बनाए रखना बहुत आवश्यक है. मोटापा, लिवर में फैट जमना, सूजन होना, इरिटेबल बौवेल सिंड्रोम, अल्सर जैसी बीमारियां लाइफस्टाइल से जुड़ी होती हैं.

3. क्यों बढ़ता है मोटापा

नोवा स्पैश्यलिटी हौस्पिटल बैंगलुरु की डाइट ऐंड न्यूट्रीशियन कंसलटैंट डा. शीला कृष्णनन स्वामी ने बताया कि तनाव के कारण हमारी बौडी में एड्रीनेलिन और कार्टिसोल हारमोंस का स्तर बढ़ जाता है. इस से शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और पाचनतंत्र बिगड़ जाता है. प्रैगनैंसी के दौरान, हारमोंस असंतुलन आदि के कारण भी डिप्रैशन, नींद न आना या गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन और मेनोपौज के कारण महिलाओं में हारमोंस के स्तर में तेजी से बदलाव आता है, जिस कारण पेट के आसपास चरबी बढ़ जाती है. इस के अलावा आजकल महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं, स्टेराइड हारमोन, डायबिटीज, अवसाद और ब्लडप्रैशर को कंट्रोल करने वाली दवाओं के कारण भी वजन बढ़ जाता है. नींद की कमी भी मोटापे का कारण हो सकती है. आजकल गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल, शारीरिक सक्रियता में कमी, लिफ्ट का इस्तेमाल, बाहर खेलने के बजाय लैपटौप या टीवी से चिपके रहने से भी मोटापे का शिकार हो सकते हैं. आनुवंशिकता भी मोटापे की एक बड़ी वजह है.

4. मोटापे से होने वाली बीमारियां

यूनिवर्सिटी औफ मौंट्रियल के शोधकर्ताओं के अनुसार मोटे लोगों को वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों का ज्यादा खतरा रहता है, क्योंकि ऐसे लोगों को सांस लेने के लिए ज्यादा हवा की जरूरत होती है. जिन लोगों का बीएमआई यानी बौडी मास इंडैक्स 18.5 से 25 तक हो उन्हें रोजाना 16.4 क्यूबिक मीटर हवा की जरूरत पड़ती है जबकि 35 से 40 बीएमआई वालों को 24.6 क्यूबिक मीटर हवा की. ऐसे में ज्यादा बीएमआई वालों को वायु प्रदूषण का ज्यादा प्रभाव पड़ता है. यह अध्ययन 2000 लोगों पर किया गया था. इस के अलावा मोटापे से शरीर पर वसा की ज्यादा परतें जम जाती हैं. आज दुनिया की 20 फीसदी आबादी मोटापे से ग्रस्त है. मोटापे से होने वाली बीमारियों में डायबिटीज, जोड़ों में दर्द, बांझपन, हार्ट फेल्योर, अस्थमा, कोलैस्ट्रौल, ज्यादा पसीना आना, हाइपरटैंशन आदि का खतरा बढ़ जाता है. खानपान की गलत आदतें या फिर लाइफस्टाइल में आए बदलाव और शारीरिक सक्रियता में कमी के चलते भी यह परेशानी हो रही है.

5. मोटापे के फायदे

  • हम कुछ मोटापे के फायदे बता रहे हैं. लेकिन हम यहां बिलकुल भी फबतियां नहीं कस रहे हैं: 
  • पति हमेशा पत्नी के बौडीगार्ड का काम करता है पर आप की मोटी बीवी तो खुद आप की बौडीगार्ड होगी.
  • मोटी बीवी कपड़ों को ले कर न ज्यादा वक्त लगाती है और न सिलैक्टिव होती है. ऐसे में न आप का टाइम ज्यादा वेस्ट होगा न डिजाइनर कपड़ों को ले कर आप को ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे.
  • अगर पति खाने का शौकीन है तो मोटी बीवी उसे ज्याद टोकेगी नहीं, बल्कि उलटा फौरन साथ देने लगेगी.
  • पत्नी मोटी हो तो उसे जल्दी सीट मिल जाती है पर स्लिम पत्नी के लिए उस के पति को ही किसी से सीट मांगनी होगी.
  • कुछ लोगों को मोटी या कहें हृष्टपुष्ट बदन वाली लड़की ही पसंद होती है.
  • छरहरी बदन वाली पत्नी जहां ज्यादातर अपनी काया की देखरेख में लगी रहेगी वहीं मोटी बीवी पति का पूरापूरा ध्यान रखेगी.

6. कैसे घटाएं वजन

  • भूखे रह कर नहीं खा कर घटाएं वजन.
  • भोजन में फाइबर की मात्रा ज्यादा लें.
  • रोजाना व्यायाम करें.
  • स्टार्च का सेवन कम कर दें. हो सके तो इस का इस्तेमाल ही न करें.
  • ग्रीन टी का सेवन करें. चाय और कौफी बंद कर दें.
  • खाली पेट कतई न रहें. बीचबीच में यानी 3 घंटे के अंतराल पर कुछ पौष्टिक खा लें. ओट्स, बाजरा, गेहूं आदि का सेवन ज्यादा करें.
  • हरी सब्जियां ज्यादा से ज्यादा खाएं जैसे पालक, मेथी, सरसों आदि.

7. सर्जरी

पुष्पांजलि क्रासले हौस्पिटल दिल्ली, के सर्जन डा. दीपक कुमार के अनुसार बेहद मोटे यानी जिन्हें अपना वजन कम से कम 35 से 40 किलोग्राम तक घटाना है तो वे बैरिएट्रिक सर्जरी करा सकते हैं. लेकिन जिन्हें मधुमेह या फिर ब्लडप्रैशर हो उन्हें 32.5 या उस से ज्यादा बीएमआई होने पर सर्जरी की सलाह दी जाती है. अगर कोई बीमारी नहीं है तो 37.5 या उस से ऊपर के बीएमआई वालों की सर्जरी की जा सकती है. बैरिएट्रिक सर्जरी के 2 प्रकार हैं- पहली गैस्टिक स्लीव, इस में पेट के साइज को स्टैप्पल कर के कम दिखाया जाता है. इस सर्जरी से 80 फीसदी मोटापा कम कर दिया जाता है. इस सर्जरी के कराने के बाद पेट भराभरा सा लगेगा. यह परमानैंट सर्जरी है. दूसरा प्रकार है गैस्टिक बाईपास. इस में पेट के छोटेछोटे पाउच बना कर उन्हें सीधे इंटेस्टाइन से जोड़ा जाता है. यह सर्जरी कराने पर कम खाने से पेट भर जाता है. पेट का इस में कोई पार्ट रिमूव नहीं होता. चाहें तो बाद में पाउच की हटवा भी सकते हैं. एक अच्छी बात यह भी है कि इस सर्जरी को कराने के बाद मधुमेह के रोगियों को मधुमेह से छुटकारा पाने के चांसेज बढ़ जाते हैं.

बच्चों को बिगाड़ते हैं बड़े

मेरी सहेली कंचन के घर में अकसर पंचायत होती है जिस में उस के घर का छोटे से बड़ा हर सदस्य भाग लेता है. मुद्दा चाहे पड़ोसी का हो या किसी रिश्तेदार का, किसी परिचित के बेटे के किसी लड़की के साथ भाग जाने का हो या घर की आर्थिक स्थिति का.

विनोद ने औफिस से आ कर जैसे ही अपने घर की घंटी बजाई, पास में खेल रहा पड़ोसी मिश्राजी का 8 वर्षीय सोनू आ कर बोला, ‘‘अंकल, आप आंटी के साथ झगड़ा क्यों करते हो? आप को पता है, बेचारी आंटी ने आज सुबह से खाना भी नहीं खाया है.’’ इतने छोटे बच्चे के मुंह से यह सब सुन कर विनोद सन्न रह गया. आज सुबह पत्नी रीना से हुए उस के झगड़े के बारे में सोनू को कैसे पता? वह समझ गया कि पत्नी रीना ने झगड़े की बात पड़ोसिन अनुभा को बताई होगी जिसे सुन कर उन का बेटा सोनू उन से प्रश्न कर रहा था.

‘‘पता है, रैना आंटी की यह तीसरी शादी है और सामने वाली स्नेहा दी का किसी से अफेयर चल रहा है. वे रोज उस से मिलने भी जाती हैं,’’ 10 वर्षीय मनु अपनी पड़ोस की आंटी को दूसरे पड़ोसी के घर के बारे में यह सब बड़ी सहजता से बता रही थी. ‘‘मेरी दादी ने मेरी मम्मी को कल बहुत डांटा, बाद में मम्मी नाराज हो कर फोन पर मौसी से कह रही थीं कि बुढि़या पता नहीं कब तक मेरी छाती पर मूंग दलेगी,’’ 9 वर्षीय मोनू अपने दोस्त से कह रहा था. 

उपरोक्त उदाहरण यों तो बहुत सामान्य से लगते हैं परंतु इन सभी में एक बात समान है कि सभी में बातचीत करते समय बच्चों की उपस्थिति को नजरअंदाज किया गया. वास्तव में बच्चे बहुत भोले होते हैं. वे घर में जो भी सुनते हैं उसे उसी रूप में ग्रहण कर के अपनी धारणा बना लेते हैं और अवसर आने पर दूसरों के सामने प्रस्तुत कर देते हैं. इसलिए मातापिता बच्चों से सदैव उन के मानसिक स्तर की ही बातचीत करें और उन्हें ईर्ष्या, द्वेष, आलोचना या दूसरों की टोह ?लेने जैसी भावनाओं से दूर रखें क्योंकि उन की यह उम्र खेलनेकूदने और पढ़ाई करने की होती है, न कि इस प्रकार की व्यर्थ की दुनियादारी की बातों में पड़ने की.

बचपन में बच्चों को जब इस प्रकार की बातों में भाग लेने और अपना मत व्यक्त करने की आदत पड़ जाती है तो यह आदत उन के चरित्र का एक निगेटिव पौइंट बन जाती है. इसलिए ध्यान रखें. दरअसल, मातापिता, अभिभावक व घरपरिवार के बड़ेबूढ़े बच्चों को बेहतरीन इंसान बनाना चाहते हैं लेकिन उन में से कुछ की गलतियों के चलते उन के बच्चे बिगड़ जाते हैं. वे समझदारी से बच्चों को प्यार व उन की देखभाल करें तो वे बिगड़ नहीं सकते. इस प्रकार, बच्चों को बिगड़ने, न बिगड़ने का सारा दारोमदार बड़ों पर ही निर्भर है.

चांद के पार – भाग 1 : जया के जीवन में अकेलापन ही क्योंं बना रहा

काले सघन बरसते बादलों के बीच मचलती हुई दामिनी के साथ शिव ने जया की कलाई को क्या थामा कि बेटेबहू के साथ अमेरिका में रह रही जया के भीतर मानो सालों सूखे पर सावन की बूंदें बरस उठीं. शिव के अपनेपन से उस की आंखें ऐसे छलकीं कि कठिनाइयों व दुखों से भरे उस के पहले के सारे बरस बह गए.

जया को सियाटल आए 2 हफ्ते हो गए थे. जब तक जेटलैग था, दिनभर सोती रहती थी. जब तक वह सो कर उठती, बहू, बेटा, पोतापोती सभी आ तो जाते पर रात के 8 बजते ही वे अपने कमरों में चले जाते. वे भी क्या करें, औफिस और स्कूल जाने के लिए उन्हें सुबह उठना भी तो पड़ता था.

जब से जेटलैग जाता रहा, उन सबों के जाते ही उतने बड़े घर में वह अकेली रह जाती. अकेलेपन से ही तो उबरने के लिए 26 घंटे की लंबी यात्रा कर वह अपने देश से इतनी दूर आई थी. अकेलापन तो बना ही रहा. बस, उस में सन्नाटा आ कर जुड़ गया जिसे उन का एकाकी मन  झेल नहीं पा रहा था. सूई भी गिरे तो उस की आवाज की अनुगूंज उतने वृहत घर में फैल जाती थी.

कितना यांत्रिक जीवन है यहां के लोगों का कि आसपास में ही संवादहीनता बिखरी रहती है. नापतोल कर सभी बोलते हैं. उस के शैया त्यागने के पहले ही बिना किसी शोर के चारों जन अपनेअपने गंतव्य की ओर निकल जाते हैं. जाने के पहले बहू अणिमा उस की सारी आवश्यकताओं की पूर्ति कर जाती थी. अपनी दिनचर्या के बाद पूरे घर में घूम कर सामान को वह इधरउधर ठीक करती. फिर घर के सदस्यों की असुविधा का खयाल कर यथावत रख देती. हफ्तेभर की बारिश के बाद बादलों से आंखमिचौली करता हुआ उसे आज सूरज बहुत ही प्यारा लग रहा था.

अपने देश की चहलपहल को याद कर उस का मन आज कुछ ज्यादा ही उदास था. इसलिए अणिमा के मना करने के बावजूद वह लेक समामिस की ओर निकल गई. ऊंचीनीची पहाड़ी से थक कर कभी वह किसी चट्टान पर बैठ कर अपनी चढ़तीउतरती सांसों पर काबू पाती तो कभी आतीजाती गाडि़यों को निहारते हुए आगे बढ़ जाती. कहीं गर्व से सिर उठाए ऊंचेऊंचे पेड़ों की असीम सुंदरता उसे मुग्ध कर देती. सड़क के इस पार से उस पार छलांग लगाते हिरणों का  झुंड देख कर डर जाती.

झुरमुटों से निकल कर फुदकते हुए खरगोश को देख कर वह किसी बच्ची की तरह खुश हो रही थी.  झील के किनारे कतारों में बने घरों की सुंदरता को अपलक निहारते हुए वह अपनी धुन में आगे बढ़ती जा रही थी. उसे इस का आभास तक नहीं हुआ कि कब आसमान में बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ बारिश होने लगी थी. अचानक इस आई मुसीबत से निबटने के लिए वह एक पेड़ के नीचे खड़ी हो गई.

अपना देश रहता तो भाग कर किसी घर के अहाते में खड़ी हो जाती. पर इस देश में यह बहुत बड़ा जुर्म है. आएदिन लालपीलीनीली बत्तियों वाली कौप की गाडि़यां शोर मचाती गुजरती थीं. पर आज इस मुसीबत की घड़ी में उन का भी कोई पता नहीं है.‘‘अरे आप तो पूरी तरह से भीग गई हैं,’’ अचानक उस के ऊपर छतरी तानते हुए किसी ने कहा तो जया चौंक कर मुड़ गई. सामने 60-65 वर्ष के व्यक्ति को देख कर वह संकुचित हो उठी.

‘‘मैं, शिव, पटना, बिहार से हूं. शायद आप भी भारत से ही हैं. आइए न, सामने ही मेरी बेटी का घर है. बारिश रुकने तक वहीं रुकिए.’’मंत्रमुग्ध सी हुई जया शिव के साथ चल पड़ी. पलभर को उसे ऐसा लगा कि इस व्यक्ति से उस की पहचान बहुत पुरानी हो. बड़े सम्मान व दुलार के साथ शिव ने उसे बैठाया. जया को टौवेल थमाते हुए वे तेजी से अंदर गए और

2 कप कौफी बना कर ले आए.‘‘अभी घर में बेटी नहीं है, वरना उस से पकौड़े तलवा कर आप को खिलाता. पकौड़े तो मैं भी बहुत करारे बना सकता हूं. साथ छोड़ने से पहले मेरी पत्नी पद्मा ने मु झे बहुत काबिल कुक बना दिया था,’’ कहते हुए शिव की पलकों पर स्मृतियों के बादल तैर गए.

शिव अपने बारे में कहते गए और मौन बैठी जया आभासी आकर्षण में बंधी उन के दुखसुख को आत्मसात करती रही. अचानक शिव का धाराप्रवाह वार्त्तालाप पर विराम लग गया. हंसते हुए वे बोले, ‘‘आप को तो कुछ बताने का अवसर ही नहीं दिया मैं ने, अपने ही विगत को उतारता रहा. क्या करूं, बेटी की जिद से आ गया. आराम तो यहां बहुत है पर किस से बात करूं.

यहां तो किसी को फुरसत ही नहीं है जो पलभर के लिए भी पास बैठ जाए. पटना में बातचीत करने के लिए जब कोई नहीं मिलता है तो नौकर के परिवार से ही इस क्षुधा को शांत कर लेता हूं. जातेजाते पद्मा ने उन सबों को कह दिया था कि बाबूजी को भले ही नमकरोटी दे देना खाने के लिए, लेकिन बातचीत हमेशा करते रहना. बालकनी में उन का किचन बनवा कर फ्लैट का एक रूम रामू को दे दिया था जिस में वह अपनी पत्नी और

2 बच्चों के साथ रहता है.’’शिव कुछ आगे कहते कि जया ने रोक लगाते हुए कहा, ‘‘मेरी सम झ से बारिश रुक गई है और मु झे चलना चाहिए.’’‘‘क्यों नहीं, चलिए मैं आप को छोड़ आता हूं. इसी बहाने आप का घर भी देख लूंगा. जब भी अकेलापन महसूस करूंगा, आप को परेशान करने चला आऊंगा,’’ कहते हुए शिव साथ हो लिए तो जया उन्हें मना न कर सकी. रास्तेभर शिव अपनी रामकहानी कहते रहे और जया मूक श्रोता बनी सुनती रही.

शिव पटना के बिजली विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर हैं. पिछले साल ही कैंसर से इन की पत्नी की मृत्यु हुई है. बातोंबातों में ही जया कब अपने घर पहुंच गई, उसे पता ही न लगा. यह बात और थी कि ऊंचेनीचे कटाव पर जब भी वह लड़खड़ाती, शिव उस की बांहों को थाम लेते. एक दशक बाद किसी पुरुष और स्पर्श उस के तनमन को भले ही कंपित कर के रख देता रहा पर अपनेपन के खूबसूरत सुखद एहसास को उन में भरता भी रहा.

औपचारिकता निभाते हुए जया ने शिव को अंदर आ कर एक कप चाय पी कर जाने को कहा तो प्रत्युत्तर में उन्होंने अपनी बच्चों सी मुसकान से उसे मोहते हुए कहा, ‘‘नहीं जयाजी. अब आप को और बोर नहीं करूंगा. किसी और दिन आ कर चाय के साथ पकौड़े भी खाऊंगा.’’ यह कहते हुए शिव जाने के लिए मुड़ गए. जब तक वे दिखते रहे, सम्मोहित हुई जया उसी दिशा में ताकती रही.

 

Year Ender 2022: भारती-हर्ष से लेकर देबिना-गुरमीत तक इस साल पेरेंट बने ये टीवी कपल

साल 2022 सबके लिए खास हो ये ज़रुरी नही है लेकिन ऐसे कई सितारे है जिनके लिए ये साल बेहद ही शानदान रहा है पहले वो सितारे जिन्होंने इस साल शादी रचाई, दूसरे वो सितारे जो शादी कर माता-पिता बने है जी हां, ऐसे कई सितारे है जिन्हे इस साल मां-बाप बनने का सुख मिला है तो आइए जानते है ऐसे  कौन से स्टार्स है जो मम्मी -पापा बने है.

  1. गुरमीत चौधरी और एक्ट्रेस देबिना बनर्जी

टीवी स्टार गुरमीत चौधरी और एक्ट्रेस देबिना बनर्जी अप्रैल के घर अप्रैल के महीने में एक नन्ही परी आई थी. इसके बाद नवंबर में देबिना ने अपनी दूसरी बेटी को जन्म दिया.

 

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2.भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया 

टीवी एक्ट्रेस भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया भी इसी साल माता-पिता बने हैं. भारती ने अप्रैल के महीने में एक बेटे को जन्म दिया था.

 

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3.अपूर्व अग्निहोत्रीऔर शिल्पा सकलानी

अपूर्व अग्निहोत्रीऔर शिल्पा सकलानी के घर किलकारियां गूंजी हैं. बता दे, कि शादी के 18 साल बाद दोनों एक बेटी के माता-पिता बने हैं. यह खबर सुनते ही फैंस में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है. इससे पहले गुरमीत चौधरी देबिना बनर्जी माता-पिता बने थे. आज हम आपको बॉलीवुड लाइफ की इस रिपोर्ट में टीवी के उन सितारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें इस साल माता-पिता बनने की खुशी मिली.

 

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4.धीरज धूपर और विन्नी अरोड़ा

धीरज धूपर और विन्नी अरोड़ा ने इसी साल अपने फैंस को गुड न्यूज दिया था. दोनों अगस्त के महीने में माता-पिता बने थे. विन्नी अरोड़ा ने एक बेटे जन्म दिया है.

 

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5.पूजा बनर्जी और संदीप सेजवाल

टीवी एक्ट्रेस पूजा बनर्जी और संदीप सेजवाल भी इसी साल एक बेटी के माता-पिता बने हैं. पूजा अक्सर अपनी बेटी की तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं.

 

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6. निकितेन धीर और कृतिका सेंगर

स्टार एक्टर निकितन धीर और कृतिका सेंगर के घर इसी साल के घर किलकारियां गूंजी हैं. दोनों एक बेटी के माता पिता बन गए हैं.

 

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39 की उम्र में मां बनेंगी बिग बॉस विनर गौहर खान, ऐसा किया अनाउंसमेंट

कई बॉलीवुड सितारे इस साल शादी करते नज़र आएं तो, कई पैरेंट्स बनते दिखे , जिसकी फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है ऐसे में भला एक और एक्ट्रेस जो जल्द ही मां बनने की खुशखबरी सबको दे रही है. जी हां 39 साल की उम्र में ये एक्ट्रेस मां बनने जा रही है जिसकी जानकारी खुद उन्होंने इस्टाग्राम पर शेयर कर एक वीडियो से दी है.

आपको बता दें, कि ये एक्ट्रेस कोई और नहीं बल्कि गौहर खान है जो बिग बॉस 13 की विजेता कंटेस्टेंट रह चुकी है और अब गौहर व जैद दरबार जल्द ही सबको खुशखबरी देंगे. बता दें कि गौहर खान और जैद दरबार ने साल 2020 में शादी की थी. अब करीब 2 साल बाद गौहर और जैद के घर में किलकारी गूंजने वाली है. जी हां गौहर खान ने अपने सोशल मीडिया के जरिए ये जानकारी अपने फैंस को दी है. दरअसल, गौहर खान ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें एक्ट्रेस ने अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में बताया है. एक्ट्रेस ने लिखा, ‘बिस्मिल्लाह हीर रहमान नीर रहीम आपके प्यार और आर्शीवाद की जरूरत है. शादी से लेकर इस खूबसूरत सफर का अहसास के सफर तक.

 

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गौहर खान का ये वीडियो काफी मजेदार है और खूब वायरल हो रहा है. इस क्लिप में दोनों कार्टून के फॉर्म में नजर आ रहे हैं. क्लिप में गौहर अपने पति जैद दरबार के साथ बाइक पर दिखाई दे रही हैं.इसके बाद वीडियो में लिखा आता है जब जी की मुलाकात जेड हुई तो हम एक से दो हुए और अब जल्द तीन होने वाले हैं. बता दें कि गौहर खान के इस वीडियो पर उनके फैंस समेत कई सितारे जमकर प्यार बरसा रहे हैं.साथ ही लोग इस क्लिप पर लगातार कमेंट करते हुए गौहर खान को जैद को शुभकामनाएं दे रहे हैं.

गौहर खान की लव स्टोरी

 

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बता दें कि गौहर खान और जैद दरबार की लव स्टोरी काफी दिलचस्प है. ये दोनों पहली बार एक स्टोर में मिल थे। इसके बाद जैद ने गौहर को सोशल मीडिया पर मैसेज किया था। इसके बाद दोनों की दोस्ती हो गई. धीरे-धीरे ये दोस्ती प्यार में बदल गई है.

मोहित रैना ने तलाक पर तोड़ी चुप्पी, 8 महीने पहले हुई थी शादी

देवों के देव महादेव फेम मोहित रैना बीते कई दिनों से लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. दरअसल, कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि मोहित की शादीशुदा जिंदगी ठीक नहीं चल रही है. हालांकि अब एक्टर ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है. हाल ही में एक मीडिया हाउस से बातचीत में मोहित ने ये साफ कर दिया कि तलाक की खबर में कितनी सच्चाई है.

 

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मीडिया रिपोर्ट ने अनुसार एकटर ने कहा, “यह निराधार है.  मैं वास्तव में नहीं जानता कि यह कहां से शुरू हुआ. इसे सबसे पहले एक न्यूज वेबसाइट ने चलाया था, लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है. जहां तक मेरी और अदिति की बात है, हम खुशी-खुशी शादीशुदा जीवन बिता रहे हैं.मैं इस बारे में और बात करना चाहता हूं, लेकिन अभी हम हिमाचल प्रदेश में अपनी शादी की पहली सालगिरह मना रहे हैं.

 

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आपको बता दें कि मोहित और उनकी पत्नी अदिति एक दूसरे को सोशल मीडिया पर फॉलो नहीं करते हैं, जिसकी वजह से इन अफवाह को और अधिक हवा मिल गई. कि उनके बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है लेकिन जब अभिनेता से एक दूसरे को फॉलो न करने पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि वह (अदिति) इंडस्ट्री से नहीं हैं और उन्हें इस तरह का अटेंशन पसंद नहीं है.

चौथापन: मुन्ना के साथ क्या हुआ

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Wedding Special: वेडिंग सीजन में ट्राय करें ये ट्रेंडी मांग टीके

वेडिंग सीजन शुरू हो गया है, जिसके लिए आपने शौपिंग की शुरुआत भी कर दी होगी. पर वेडिंग सीजन में ड्रेस के साथ-साथ ज्वैलरी का ख्याल रखना जरूरी होता है, जिनमें मांग टीका आजकल लेडीज के बीच काफी पौपुलर हो रहा है. आज हम आपको कुछ ट्रेंडी मांग टीके के डिजाइन के बारे में बताएंगे, जिसे आप चाहें तो अपनी या दूसरों की शादी में ट्राय कर सकते हैं. ये मांग टीके के डिजाइन आपके लुक को एलीगेंट और ब्यूटीफुल दिखाने में मदद करेगा.

1. कुंदन का ये मांग टीका है परफेक्ट

अगर आप वेडिंग के लिए मांग टीके के डिजाइन चुनना चाहती हैं तो ये डिजाइन आपकी वेडिंग के लिए परफेक्ट है. कुंदन की ज्वैलरी के साथ माथे को कवर करने वाला ये मांग टीका आपके लुक के लिए परफेक्ट औप्शन है. साथ ही गोल्डन होने के साथ ये आपकी लहंगे के लिए बेस्ट रहेगा.

 

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2. चेन वाला ये मांग टीका करें ट्राय

आजकल मांग टीके के लिए चेन वाले पैटर्न ज्यादा पौपुलर है. अगर आप भी अपने लुक को एलीगेंट के साथ-साथ ट्रैंडी दिखाना चाहते हैं तो मांग टीका का ये चेन वाला पैटर्न आपके लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा.

 

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3. खुले बालों के लिए परफेक्ट है ये मांग टीका पैटर्न

अगर आप पार्टी में अपने बाल खुला रखने का सोच रही हैं और उसके लिए मांग टीके का डिजाइन ढूंढ रही हैं तो ये मांग टीके का डिजाइन आपके लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा.

4. पासा पैटर्न है मांग टीके लिए परफेक्ट औप्शन

पासा पैटर्न आजकल खासा पौपुलर है. अगर आप भी पार्टी या वेडिंग में सबसे अलग दिखना चाहती हैं तो मांग टीके का ये पासा पैटर्न आपके लिए परफेक्ट रहेगा. ये आपके लुक को सबसे अलग दिखाने में मदद करेगा.

5. फ्लावर मांग टीका करें ट्राय

आजकल ट्रेंडी स्टाइल की बात की जाए तो फ्लावर ज्वैलरी बहुत पौपुलर है. अगर आप भी फ्लावर पैटर्न का मांग टीका ट्राय करना चाहती हैं तो ये लुक आपके लिए परफेक्ट रहेगा.

6. राजस्थानी मांग टीका करें ट्राय

राजस्थानी पैटर्न वाले मांग टीके फिल्मों में इस्तेमाल होने के बाद काफी पौपुलर हो गए हैं अगर आप भी कुछ नए बौलीवुड के ट्रैंडी मांग टीके ट्राय करना चाहते हैं तो ये राजस्थानी पैटर्न वाले मांग टीके आपके लिए परफेक्ट है.

प्यार में क्यों डूबती हैं किशोरियां

किशोरावस्था में विपरीत लिंग से प्यार होने के कारणों में सब से महत्त्वपूर्ण है इस उम्र में हारमोंस का विकास होना. इस बारे में मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि सात तालों में बंद करने के बाद भी इस वर्ग की किशोरियों को किसी के प्यार में पड़ने से नहीं रोका जा सकता. उन के अनुसार, ‘‘इस उम्र में किशोरकिशोरियों का शारीरिक विकास होता है और ऐसे हारमोंस की वृद्धि होती है जिन से मस्तिष्क प्रभावित होता है. इस के अलावा इसी बीच जननांगों का भी विकास होता है.’’

इन्हीं परिवर्तनों के कारण किशोरकिशोरियों में अपने जननांगों के प्रति उत्सुकता जागती है और किशोरियां कल्पनालोक में खोई इस परिवर्तन से आत्ममुग्ध होती रहती हैं. वे अपना अक्स किसी दूसरे में भी देखना चाहती हैं. उन की अपनी प्रशंसा उन्हें सतरंगी ख्वाब दिखाने लगती है. उम्र का यही पड़ाव उन में विपरीत सैक्स के प्रति आकर्षण पैदा करता है.

किशोरकिशोरियां इन शारीरिक परिवर्तनों से परस्पर आकर्षित होते हैं. यही झुकाव उन्हें प्यार की मंजिल दिखा देता है. वे दोनों अपना अधिकतर समय छिपछिप कर बातें करने व एकदूसरे की जिज्ञासाएं शांत करने में बिताते हैं. उन का यह सामीप्य उन में एक सुखद अनुभूति पैदा कर देता है, जिस से वे उन्मुक्त हो कर प्यार के बंधन में बंध जाते हैं.

आखिर कुछ किशोरकिशोरियां ही इस मार्ग को क्यों अपनाते हैं? समाजशास्त्रियों का मानना है कि बच्चे के सामाजीकरण में सामाजिक, पारिवारिक संस्थाओं का महत्त्वपूर्ण स्थान है. मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है, ‘‘इस उम्र में किशोरियों की स्थिति गरम लोहे के समान होती है और जब उन का माहौल उन पर चोट करता है तो वह उसी रंग में रंग जाती हैं.’’

  1. पारिवारिक वातावरण का प्रभाव

किशोरियों को घरेलू तनाव, हर वक्त की नोकझोंक से उत्पन्न तनाव प्रभावित करता है, इस से जूझते बच्चे प्यार का सहारा खोजते हैं. ऐसे में दूसरे के प्रति आकर्षित होना सहज है. एक किशोरी ने बताया कि वह कैसे कच्ची उम्र में ही प्यार करने लगी थी. उस की सौतेली मां का व्यवहार अच्छा न था. उस के दिन भर काम करने पर भी उसे प्यार के दो मीठे बोल सुनने को नहीं मिलते थे. इसी दौरान एक लड़का उसे विशेष रुचि से निहारता था, कई बार स्कूल जाते समय उस की प्रशंसा करता था, जबकि वह अपने घर के कड़वाहट भरे जीवन से उकता रही थी. इस लड़के से उसे असीम प्यार व सहानुभूति मिली तो वह भी उस से प्यार करने लगी.

2. स्कूल के माहौल का प्रभाव

स्कूल का माहौल भी काफी हद तक प्रभावित करता है. स्कूल में कुछ किशोरियां अपने प्यार के किस्से को बढ़ाचढ़ा कर सुनाती रहती हैं. सहेलियों की संगत उन्हें अपने रंग में रंग लेती है. ऐसे में छात्राओं में प्यार की प्रतिस्पर्धा होती भी देखी गई है. ऐसी परिस्थितियों में मांबाप की लापरवाही आग में घी का काम करती है. इस उम्र में किशोरियों को प्यार, सहानुभूति व उचित शिक्षा की जरूरत होती है. कभीकभी स्कूल जैसी पवित्र संस्था से जुड़े कुछ लोग इन किशोरियों के साथ गलत सलूक करते हैं. चूंकि बच्चे भयग्रस्त होते हैं अत: कुछ कह नहीं पाते. ऐसी परिस्थितियों पर निगाह रखना या जानकारी रखना मांबाप का कर्तव्य है. कच्ची उम्र में भय और भावना दोनों ही खतरनाक होते हैं.

3. मीडिया का प्रभाव

मीडिया भी किशोरियों को इस राह पर पहुंचाने के लिए काफी हद तक उत्तरदायी है. आज हमारे सशक्त मीडिया दूरदर्शन पर शिक्षा की अपेक्षा मनोरंजन पर अधिक बल दिया जा रहा है, जिस में उत्तेजक दृश्यों की भरमार रहती है. उत्तेजक दृश्यों से उत्पन्न वासना किशोरियों को गुमराह करती है.

4. अश्लील साहित्य का प्रभाव

साहित्य समाज का प्रतिबिंब होता है लेकिन आज हमारा साहित्य किशोरों की उत्तेजना भड़काने वाला अधिक होता जा रहा है. उस में अश्लील लेखन व चिंत्राकन की भरमार रहती है. रहीसही कसर अब इंटरनैट व मोबाइल ने पूरी कर दी है. इस स्थिति से निबटने के लिए किशोरियों को उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता है. इस मार्गदर्शन में मां का उत्तरदायित्व सब से अधिक होता है.

5. बचाव के उपाय

पेरैंट्स को चाहिए कि बेटी के साथ मित्रता का भाव रखें. उस की समस्याओं को जान कर उन का निवारण करें. किशोर बेटी के प्रति लापरवाही न बरतें. समयसमय पर मां उस से यह जानकारी लेती रहें कि उसे कोई गुमराह तो नहीं कर रहा तथा उस की कोई समस्या या जिज्ञासा तो नहीं है.

घर की समस्याओं से भी किशोरियों को दूर न रखें, क्योंकि इस से वे अछूती रहती हैं तो उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का ज्ञान नहीं हो पाता है. उसे बच्ची कहने मात्र से आप का दायित्व खत्म नहीं होता बल्कि उस पर दायित्व डाल देना ज्यादा बेहतर है. छोटे भाईबहनों को पढ़ाना, उन्हें स्कूल के लिए तैयार करना या घर के कामों में मां का हाथ बंटाना आदि ऐसे ही दायित्व हैं.

किशोरावस्था में किशोरियों को नितांत अकेला न छोडे़ं, क्योंकि एकांत कुछ न कुछ सोचने पर मजबूर करता है. जहां तक हो सके उन्हें व्यस्त रखें. व्यस्त रखने का मतलब उन से भारी काम लेना नहीं अपितु कुछ रुचिकर काम उन से लिया जा सकता है. खाली समय में व्यावसायिक शिक्षा भी दी जा सकती है. नाचगाने, पिकनिक, पर्वतारोहण, कंप्यूटर आदि का ज्ञान किशोरकिशोरियों की महत्त्वपूर्ण सामाजिक क्रियाएं हैं.

अगर किसी किशोरी को किसी किशोर से प्यार हो जाता है तो उसे प्यार से समझाएं कि यह वक्त पढ़नेलिखने का है, प्रेम करने का नहीं. उन्हें मारेंपीटें नहीं और न ही जरूरत से ज्यादा पाबंदियां लगाएं. उन का ध्यान किसी क्रिएटिव काम को करने में लगाएं.

Winter Special: सुपरफूड में छिपा है सेहत का राज

स्वास्थ्य का मसला हो या खानेपीने की चीजों की चर्चा, आजकल सुपरफूड शब्द काफी सुनने को मिलता है. आखिर यह सुपरफूड क्या है? क्या यह कोई ऐसा फूड है, जो सभी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उसी तरह हल कर देता है, जैसे किसी फिल्म में सुपरमैन तमाम समस्याओं को हल करता है?

दरअसल, सुपरफूड कोई वैज्ञानिक शब्द नहीं है, लेकिन जैसेजैसे सामान्य भोज्यपदार्थों के विशिष्ट गुण पता लगने लगे हैं, वैसेवैसे कुछ विशेषज्ञ उन्हें सुपर की श्रेणी में रखने लगे हैं. इन पदार्थों को सुपरफूड इसलिए कहा जाने लगा है, क्योंकि जरूरी पोषक तत्त्वों के अलावा उन में ऐंटीऔक्सीडैंट होते हैं, जो हमें जवां बनाए रखते हैं और कैंसर जैसे गंभीर रोगों से बचाते हैं. उन में हैल्दी फैट होते हैं ताकि हृदयरोग से बचाव हो सके. उन में फाइबर होते हैं ताकि डायबिटीज और पेट की गड़बड़ी परेशान न करे. उन में फाइटोकैमिकल्स होते हैं, जो हमें रोग नहीं लगने देते.

यहां प्रस्तुत हैं, कुछ प्रमुख सुपरफूड और उन की विशेषताएं. ये सुपरफूड की ज्यादातर सूचियों में शामिल हैं और हमारे देश में आसानी से उपलब्ध भी हैं.

  1. ब्राउन राइस

ये सफेद चावल का अनरिफाइंड रूप होते हैं. इन में प्रोटीन, थिएमाइन, कैल्सियम, मैग्नीशियम, सेलेनियम, पोटैशियम और फाइबर पाए जाते हैं. डायबिटीज का खतरा कम करने के लिए ब्राउन राइस बढि़या हैं. इन में ग्लाइसेमिक रेट बहुत कम होता है और ये ब्लडशुगर को नियंत्रण में रखते हैं. इन में मौजूद सेलेनियम कैंसर, हाई कोलैस्ट्रौल दिल और हड्डियों की दिक्कत कम करता है. फाइबर से भरपूर ये चावल देर तक हमारा पेट भरा रखते हैं, जिस से ये वजन घटाने में भी सहायक हैं. आंतों के कैंसर का खतरा कम करते हैं, पथरी में भी फायदेमंद हैं. विशेषज्ञ इन्हें बेर और अन्य फलों के साथ खाने की सलाह देते हैं ताकि इन के ऐंटीऔक्सीडैंट गुणों का शरीर को पूरा फायदा मिल सके.

2. मसूर, मूंग और अन्य दालें

दालों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, फाइबर, फौस्फोरस और अनेक मिनरल्स पाए जाते हैं. अरहर की दाल में विटामिन ए और बी होते हैं और यह खून, कफ और पित्त की गड़बडि़यों को ठीक करती है. उरद की दाल कब्ज दूर करती है और शक्ति भी देती है. इसे पीस कर फोड़ाफुंसी में भी लगाया जाता है. मूंग की दाल में फाइबर होते हैं. यह आसानी से पचती है, इसलिए मरीजों के लिए फायदेमंद होती है. इस का हलवा काफी शक्ति देता है. यह आंखों के लिए भी बढि़या है. राजमा प्रोटीन का भंडार है. इस में आयरन और विटामिन बी-9 विशेष रूप से पाया जाता है. मसूर की दाल रक्त को समृद्ध करती है. यह पेट के लिए भी बहुत सही रहती है. चना हमें कब्ज, डायबिटीज, पीलिया और खून की कमी से नजात दिलाने में सहायक है. चने का आटा बालों और त्वचा के लिए भी लाभकारी है.

3. अलसी का बीज और तेल

यह ओमेगा-3 फैट्स, डाइटरी फाइबर, पोटैशियम और अनेक पोषक तत्त्वों का घर है. ओमेगा-3 फैट्स चूंकि हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं के जरूरी तत्त्व होते हैं, इसलिए अलसी का बीज और तेल एक तरह से हमें संपूर्ण स्वास्थ्य देने का काम करता है. पाचनतंत्र को अच्छा करने के साथसाथ यह हाई ब्लडप्रैशर और हाई कोलैस्ट्रौल को भी कम करता है. यह हार्ट अटैक, डायबिटीज और कैंसर का खतरा कम करता है. बालों, त्वचा के दोस्त और आंखों में सूखेपन की समस्या को दूर करता है. यह मेनोपौज में भी राहत पहुंचाता है. शरीर में वसा को जलाता है.

4. ग्रीन टी

ग्रीन टी कैंसर और त्वचा कैंसर से लड़ने में सक्षम माना जाता है. इस में मौजूद ऐंटीऔक्सीडैंट विटामिन सी और विटामिन ई से भी बहुत ज्यादा बेहतर पाए गए हैं. यह हृदय की कोशिकाओंकी रक्षा करती है और कोलैस्ट्रौल को कम करती है. इस का पौलीफिनोल नाम का ऐंटीऔक्सीडैंट बढ़ती उम्र पर लगाम लगाता है. वजन घटाने और मैटाबोलिक दर को बढ़ाने में सहायक है. पाया गया है कि ग्रीन टी एक दिन में शरीर की 70 कैलोरी कम कर देती है. यह हड्डियों को मजबूत करती है और आर्थ्राइटिस का खतरा कम करती है. ब्लडशुगर के स्तर को बढ़ने से रोक कर यह डायबिटीज में भी बहुत फायदा करती है. यह लिवर से भी नुकसानदायक तत्त्वों को बाहर करती है. वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह एचआईवी के वायरस को शरीर में फैलने से रोकती है. ग्रीन टी से भीगी रुई को कान में डालने से कान का इन्फैक्शन भी दूर होता है. यह दांतों में मौजूद बैक्टीरिया को भी मारती है यानी 1 कप चाय में गुण ही गुण.

5. ओट्स

ओट्स में मुख्य रूप से जौ, अन्य अनाज और उन के दलिया आते हैं. ओट्स प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, मैगनीज और विटामिन बी से भरपूर होते हैं. ये हड्डियों का विकास करते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. ये बहुत जल्दी हमारा पेट भर देते हैं और इन्हें खा कर काफी देर तक भूख नहीं लगती. ओट्स में सब से ज्यादा घुलनशील फाइबर होते हैं, जिस से ये बुरे कोलैस्ट्रौल को कम करते हैं. इन्हीं फाइबरों की वजह से ओट्स डायबिटीज में भी बहुत राहत देते हैं और पाचनतंत्र को दुरुस्त रखते हैं. ये त्वचा के बहुत अच्छे दोस्त हैं. विभिन्न फेसपैक में इन का इस्तेमाल होता है. ओट्स में मौजूद लिगनेन नामक तत्त्व कैंसर और हृदयरोग का खतरा कम करता है.

6. गेहूं का अंकुर (व्हीट जर्म)

इसे पोषक तत्त्वों का गोदाम भी कहा जाता है. इस में वसा नाममात्र की होती है और कोलैस्ट्रौल होता ही नहीं. कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फौलिक ऐसिड, फाइबर, विटामिन और मिनरल की भरमार होती है. यह फौलिक ऐसिड का सर्वश्रेष्ठ भंडार माना जाता है इसलिए गर्भधारण कर रही महिलाओं के लिए बहुत ही लाभकारी है. फौलिक ऐसिड दिल की बीमारी, हड्डी टूटने जैसी दिक्कतों का खतरा भी टालने का काम करता है. यह दिमाग को भी दुरुस्त रखता है. इस में एक विशेष किस्म का ऐंटीऔक्सीडैंट एरगोथियोनिआइन होता है, जो पकाने पर भी नष्ट नहीं होता. यह शरीर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है.

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