खुश रहेंगी, तभी दूसरों को खुश रख पाएंगी

गृहिणी हूं और एक लेखिका भी. मैं सुबह 5.30 बजे उठती हूं. पति के लिए चाय बनाती हूं, और फिर हर सुबह एक भाग का काम मैं ब्रेकफास्ट से पहले कर लेती हूँ. 10.30 बजे नाश्ता करने के बाद फिर से काम पर लग जाती हूं.  आप सोच रही होंगी मैं आपको अपनी डेली रूटीन किसलिये बता रही हूं? क्योंकि मैंने दोस्तों को कहते सुना है, कि वे काम और घर में बराबर ध्यान नहीं दे पा रहीं हैं और शायद ये आपकी भी समस्या हो सकती है, इसलिए निराश ना हों.

1. खुद को दोषी मानना बंद करें

अगर काम और घर के बीच सामंजस्य सम्भव नहीं है, तो खुद को अपराधी मानने की जरूरत नहीं. आप काम कर रहे हैं यह कोई गलत बात नहीं है, इसके लिए सबसे पहले आप घर में हो रही समस्याओं के लिए खुद को दोषी मानना बंद करें.

2. बनाएं टाइमटेबल

खुद के लिए एक टाइम टेबल बनाएं. दिन में 24 घंटे होते हैं, और अगर आप सही तरीके से टाइम-टेबल के हिसाब से चलेंगे, तो सारे काम आराम से हो जाएंगे. पर एक समय सीमा के हिसाब से चलना जरूरी है, अगर किसी एक काम पर आप जरुरत से ज्यादा वक्त जाया करेंगे, या सुस्ती दिखाएंगे, तो संतुलंत कभी नहीं बना पाएंगे.

3. आपसी समझ है जरूरी

जो काम ज्यादा जरूरी हैं, उसे पहले करें. अगर सुबह आपको औफिस में प्रोजेक्ट सबमिट करना है, तो पहले उसका काम खत्म करें, क्योंकि आप वर्किंग वुमन हैं, अगर बच्चों को ऐसी स्थिति में आप कम समय दे पा रहीं हैं तो, घर के सदस्यों के मदद लें, और प्यार और सहयोग के साथ अपना कार्य पूर्ण करने के बाद बच्चों और परिवार के साथ समय व्यतीत करें. हां एक बात का ध्यान रखें, कार्य बढ़ने की स्थिति में अपने परिवार के जिम्मेदार लोगों को सूचित करें, और आपसी समझ से घर परिवार की जिम्मेदारी निभाएं.

4. अपने मनपसंद काम को दे ज्यादा समय

आपको क्या चाहिए ये तय करें. ज्यादा पैसों के लिए ज्यादा काम करना पड़ता है, ऐसी स्थिति में आप जो काम पसंद से कर रही हैं वही करें. अगर घर में ज्यादा वक़्त देने से आप को ख़ुशी मिल रही है, तो उसे अधिक महत्व दें.

5. मन से करें काम

काम से प्रेम होना बहुत ज़रूरी है. कम काम करें लेकिन अच्छा काम करें, तो आप खुश रहेंगी, मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगी.

6. खुद के लिए निकालें समय

खुद के लिए समय रखें. अपने लिए समय होना भी ज़रूरी है, इस वक़्त में आप सिर्फ वह करें, जो आपको अच्छा लगता हो. ये आराम का वक़्त भी हो सकता है. इस समय अन्य कोई कार्य न करें.

7. आसान तरीका ढूंढे

यह ध्यान रखें, की आप वर्किंग होते हुए सभी जिम्मेदारियों को नहीं निभा सकती, ऐसी स्थिति में आप वही जरूरी कार्य करें जो आप के अलावा और दूसरा नहीं कर सकता, आधुनिकता के दौर में औनलाइन शौपिंग का महत्त्व समझें, घर के समान आर्डर करना, कपडे खरीदना, बिल जमा करना आदि कार्य आप औनलाइन भी कर सकती हैं. इससे आप थकेंगी कम, और वही समय आप परिवार को दे सकती हैं.

अगर सोचें, तो ऐसा कोई क्षेत्र  नहीं, जहां महिलाओं ने अपनी छाप न छोड़ी हो.अपनी लगन, मेहनत, और दृढ़ता से महिला खुद में साफ़ सोच लाती हैं, जिससे वह फैसला ले पाती है. तभी आज हमारे बीच इंद्रा नूई (सी इ ओ पेप्सिको),  हेलेन केलर, और बुला चौधरी जैसी महान महिलाएं हैं.

ऐसी महिलाएं हमें भविष्य में भी प्रेरित करती रहेंगी. खुद खुश रहेंगी, तभी दूसरों को खुश रख पाएंगी. अपनी सोच समझ पर टिके रहे. इस तरह से आप अपनी सभी जिम्मेदारियों को सही से निभा पाएंगी.

चौथापन- भाग 1 : मुन्ना के साथ क्या हुआ

वह एक कोने में कुरसी पर बैठे कोई किताब पढ़ रहे थे. अचानक उन्होंने ऊब कर किताब एक ओर  रख दी. आंखों  से चश्मा उतार कर मेज पर रख दिया. रूमाल से आंखें साफ कीं और निरुद्देश्य खिड़की  से बाहर की चहलपहल देखने लगे.

‘‘दादाजी, यह कामिक्स पढ़ कर सुनाइए जरा,’’ उन की 10 वर्ष की नातिन अंजू रंगबिरंगी पुस्तकें लिए कमरे में पहुंच गई.

‘‘लाओ, देखें,’’ उन्होंने बड़े चाव से  पुस्तकें ले लीं.

वह पुस्तकों के चित्र तो देख पा रहे थे, किंतु चश्मा लगाने के बाद भी उन पुस्तकों को पढ़ पाना उन्हें बड़ा कठिन लग रहा था. फिर नाम भी क्या थे पुस्तकों के, ‘आग का दरिया’, ‘अंतरिक्ष का शैतान’.

‘‘छि: छि:… ये क्या हैं? अच्छी पुस्तकें पढ़ा करो, बेटे.’’

‘‘अच्छी कौन सी, दादाजी?’’

‘‘जिस पुस्तक से कोई अच्छी बात सीखने को मिले. बच्चों के लिए तो आजकल बहुत सी पत्रपत्रिकाएं  निकलती हैं.’’

‘‘आप नहीं जानते, दादाजी, ये थ्री डायमेंशनल कामिक्स हैं. इन को पढ़ने के लिए अलग से चश्मा मिलता है. यह देखिए.’’

‘‘अरे, यह कोई चश्मा है? लाल पन्नी लगी है इस में तो. इस से आंखें खराब हो जाएंगी. फेंको इसे.’’

‘‘आप को कुछ नहीं मालूम, दादाजी,’’ अंजू ने उपेक्षा से कहा और पुस्तकें ले कर तेजी से बाहर चली गई.

वह अकुलाए से अपनी जगह पर बैठे रह गए और सोचते रहे. शायद वह वर्तमान से कट चुके हैं. उन का जमाना लद चुका था. उन के सिद्धांत, आदर्श ओैर विचार अब अप्रासंगिक हो चुके थे.

अभी कुछ ही दिन पहले की तो बात थी. उन के बेटे मुन्ना  ने भी यही कहा था. हुआ यों था कि उस दिन वह कारखाने में मौजूद थे. नौकर ने एक ग्राहक को बिल दिया तो उन्हें वह बहुत ज्यादा लगा. वह एक प्रकार से ग्राहक को लूटने जैसा ही  था. उन्होंने नौकर को डांट दिया और जोर दे कर उस से बिल में परिवर्तन करने को कहा.

उसी दिन मुन्ना रात को घर आने के बाद  उन पर बहुत बिगड़ा था, ‘बाबूजी, आप तो बैठेबिठाए नुकसान करवा देते हैं. क्या जरूरत थी आप को  कारखाने में जा कर कीमत कम करवाने की?’

‘मैं ने तो उचित दाम ही लगाए थे, बेटा. वह नौकर बहुत ज्यादा  बिल बना रहा था.’

‘आप बिलकुल नहीं समझते, बाबूजी. इतना बड़ा कारखाना चलाना आज के जमाने में कितना मुश्किल काम है. अब कामगारों को वेतन कितना बढ़ा कर देना पड़ता है, जानते हैं आप? नई मशीन की किश्त हर माह देनी पड़ती है सो अलग. फिर आयकर भी इसी महीने में भरना है.’

उन की दृष्टि में ग्राहकों से मनमाना पैसा वसूल करने का यह कोई उचित तर्क नहीं था, लेकिन वह चुप ही रह गए.

एक बार वह बीमार पड़ गए थे. 2-3 महीने तक कारखाने नहीं जा सके. बस, तभी अचानक मुन्ना ने उन की गद्दी हथिया ली. फिर मुन्ना यह सिद्ध करने की कोशिश करने लगा कि वह व्यापार में उन से अधिक कुशल है.

जहां उन्हें ग्राहक से 4 पैसे वसूल करने में कठिनाई होती थी वहां मुन्ना बड़ी आसानी से 6 पैसे वसूल कर लेता था. उस ने बैंकों से ऋण ले कर अल्प समय में ही नई मशीनें मंगवा ली थीं. किस आदमी से कैसे काम लिया जा सकता है, इस काम में मुन्ना खुद को उन से कहीं अधिक दक्ष होने का दावा करता था.

जब वह स्वस्थ हो कर कारखाने पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कारखाने का शासन सूत्र मुन्ना अपने हाथों में दृढ़ता से थामे हुए है. एक बार हाथों में शासन सूत्र  आने के बाद कोई भी उसे सरलता से वापस नहीं करना चाहता.

अब मुन्ना कारखाने के तमाम कार्य अपनी मरजी से करता था. उन की ठीक सलाह भी उसे अपने मामलों में दखलंदाजी लगती थी. मुन्ना अकसर उन्हें एहसास दिलाता था, ‘बाबूजी, डाक्टर ने आप को पूरी तरह आराम करने के लिए कहा है. आप घर पर रह कर ही आराम किया करें. कारखाने का सारा कारोबार मैं संभाल लूंगा. आप बेकार उधर की चिंता किया करते हैं.’

जब उन की पत्नी इंदू जिंदा थी तो उस का भी यही विचार था. वह प्राय: कहा करती थी, ‘आज नहीं तो कल, मुन्ना को ही तो संभालना है कारखाना. वह व्यापार को बढ़ा ही रहा है, घटा तो नहीं रहा? वैसे भी अब लड़का बड़ा हो गया है. बाप का जूता उस के पैर में आने लगा है. उन्हें खुद आगे हो कर मुन्ना को कारोबार सौंप देना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार आदमी को चौथेपन में सांसारिक झंझटों से संन्यास ले लेना चाहिए.’

और इस तरह बीमारी के दौरान अकस्मात ही उन की इच्छा के विरुद्ध कारखाने से उन का निष्कासन हो गया था.

उन्होंने एक नजर नाश्ते की प्लेट पर डाली. आज फिर घर का नौकर बड़ी उपेक्षा से उन के सामने सिर्फ मक्खन लगे स्लाइस रख गया था. उन के अंदर ही अंदर कुछ घुटने सा लगा था, ‘यह भी कोई नाश्ता है? बाजार से डबलरोटी मंगवाई और चुपड़ दिया उस पर जरा सा मक्खन.’

जब इंदू थी तब उन के लिए बीसियों तरह के तो लड्डू ही बनते थे घर में. मूंग के, मगज के, रवे के वगैरहवगैरह. मठरी, सेव और कई तरह के नमकीन भी परोसे जाते थे उन के आगे. पकवानों का तो कोई हिसाब ही नहीं था और अब मात्र मक्खन लगे डबलरोटी के टुकड़े.

वह खीज उठे और उठ कर सीधे अंदर गए, ‘‘बरसात में डबलरोटी क्यों मंगवाती हो, बहू? घर में ही कुछ मीठा या नमकीन बना लिया करो. कल जो डबलरोटी आई थी उस में फफूंद लगी हुई थी.’’

‘‘डाक्टर ने उन्हें अधिक घीतेल खाने की मनाही कर दी है. अगर आप को डबलरोटी पसंद नहीं है तो आप के लिए दूसरा इंतजाम हो जाएगा,’’ बहू ने रूखेपन से जवाब दिया.

दूसरे दिन उन के लिए जो नाश्ता लगाया गया वह होटल से मंगवाया गया था. एक प्लेट में बेसन का लड्डू तथा थोड़ा सा चिड़वा था. बरसात के कारण चिड़वा बिलकुल हलवा बन गया था. लड्डू बेशक स्वादिष्ठ था, परंतु उस में वनस्पति घी इतनी अधिक मात्रा में था कि खाने के बाद उन्हें बहुत देर तक खट्टी डकारें आती रही थीं.

सुंबुल को पिता ने दोबारा दी वॉर्निंग, शालीन और टीना को लेकर कही ये बात

हर साल की तरह इस साल भी बिग बॉस एक हिट शो की तरह ही लोगों की बीच लाइमलाइट में बना हुआ है, जिसकी टीआरपी भी हर दिन लिस्ट में टॉप नंबर पर होती जा रही है.  शो में हर दिन नया ड्रामा लोगों को काफी  एंटरटेन कर रहा है. इसी बीच हर साल की तरह ही पेरेंटस बिग बॉस के घर में आए और सभी को गेम सुधारने के नए तरीके बताएं. आइए आपको बता दें, कि इन दिनों बिग बॉस के घर में क्या-क्या हुआ.

बिग बॉस 16 की रेस में कौन हुआ बाहर

बिग बॉस 16 में बीते दिन कंटेस्टेंट गौतम विज का एलिमिनेशन हुआ, जिसे फैंस को बड़ा झटका लगा. दूसरी ओर टीना दत्त और सुंबुल तौकीर खान की लड़ाई ने फैंस को काफी एंटरटेन किया. इसी बीच घर में कंटेस्टेट को अपने घर में पेरेंटस बात करने का मौका मिला. जी हां, घर में सुंबुल को ये मौका दिया गया कि वह अपने पिता से बात कर सकें.

 

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सुंबुल के पिता ने कही ये बात

सुंबुल के पिता ने उन्हें खेल में बने रहने के लिए नए-नए तरीके बताए, उनके पिता ने उन्हे यहा तक कहा कि वह टीना दत्ता और शालीन भनोट को अपनी औकात दिखाए कि वो क्या कर सकती है और क्या है? इसी बीच सुंबुल अपने पापा से बात करते हुए भावुक हो उठी और पिता से कहा कि ” पापा मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है” बता दें, कि सुंबुल इससे पहले भी अपने पिता से बात कर चुकी है. लेकिन, पिता के समझाने के बाद भी सुंबुल कुछ बेहतर करती नज़र नही आ रही है.

 

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पहले भी आ चुके हैं सुंबुल के पिता

बिग बॉस 16 के दूसरे हफ्ते में भी सुंबुल के पिता बिग बॉस में नज़र आए थे. जहां उन्होंने शालीन भनोट और टीना दत्ता को जमकर फटकारा और सुंबुल को जीतने के लिए नए तरीको के सुझाव दिए थे. इसके अलावा उन्होने बाकी केंटेस्टे की जमकर तारीफ भी की था. देखना ये रहेगा कि सुंबुल अपने पिता की बातों को कितना सीरियस लेती है और शो में कबतक टीकी रहती है.

ब्रेन स्ट्रोक से इस एक्ट्रेस का हुआ निधन, 24 साल की उम्र में कहा दुनिया को अलविदा

पिछले दिनों एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से कई बुरी खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें कम उम्र के कलाकारों की अचानक मौत फैंस को हैरान कर रही है. इसी बीच बीते लगभग एक महीने ब्रेन स्ट्रोक से जूझ रहीं बंगाली एक्ट्रेस ऐन्द्रिला शर्मा (Aindrila Sharma Died) जिंदगी की जंग हार गई हैं. वहीं रविवार को एक्ट्रेस को 24 साल की कम उम्र में निधन हो गया है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

कैंसर से लड़ चुकी थीं ऐन्द्रिला

 

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‘जियो काठी’, ‘झुमुर’ और ‘जीवन ज्योति’ जैसे सीरियल्स का हिस्सा रह चुकीं एक्ट्रेस ऐन्द्रिला शर्मा बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रहने वाली थीं. वहीं दो बार कैंसर को मात भी दे चुकी थीं और टीवी इंडस्ट्री में लगातार काम कर रही थीं. लेकिन गंभीर बिमारी से जूझने के बाद भी वह ठीक नहीं हुई और उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ, जिसके बाद बीते दिन उनका निधन हो गया.

इस बीमारी से थीं पीड़ित

 

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एक्ट्रेस ऐन्द्रिला शर्मा गंभीर बीमारी इविंग सारकोमा से पीड़ित थीं, जो कि बेहद दुर्लभ कैंसर है, जिसमें हड्डियों में या हड्डियों के आसपास के कोमल ऊतकों में होता है. इस बीमारी का इलाज सर्जरी और कीमोरैडिएशन के जरिए किया जाता था. वहीं बीते एक नवंबर को ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद एक्ट्रेस को हावड़ा के एक निजी हौस्पिटल में एडमिट किया गया था, जिसके बाद 20 नवंबर को 24 साल की उम्र में एक्ट्रेस ने दुनिया को अलविदा कह दिया.

बता दें, एक्ट्रेस के निधन पर बंगाली टीवी इंडस्ट्री के कई सेलेब्स ने दुख जताया है. यही नहीं बंगाल की मुख्यमंत्री ने भी एक्ट्रेस की मौत पर उनके परिवार को सांत्वना देने की बात कही है.

टीन क्रश: जिम्मेदारी का एहसास

किशोरावस्था मनुष्य के जीवनकाल का वह समय है, जब न तो बचपन रहता है और न ही जवानी आई होती है. यह दौर किशोरों में शारीरिक व मानसिक परिवर्तन व विकास का होता है. बदलावों के इस दौर से गुजर रहे किशोरों में क्रश के भाव उपजना आम बात है. क्रश एक तरह का आकर्षण है, जो उस के साथ पढ़ने वाले किशोर या किशोरी किसी के प्रति भी उपज सकता है.

क्रश को ज्यादातर लोग प्यार की श्रेणी में ही रख कर देखते हैं, लेकिन यह प्यार से एकदम अलग होता है, क्योंकि प्यार एक बार हो गया तो यह जीवन भर बना रहता है. किशोरों में होने वाला क्रश जनून की हद तक जा सकता है. क्लास में एकदूसरे के हावभाव, बौडी लैंग्वेज, पढ़ाई में तेजतर्रार होने, अलग पहनावा व हेयरस्टाइल, बनसंवर कर रहने के चलते भी हो सकता है. कभीकभी किसी की मासूमियत देख कर भी क्रश हो सकता है.

किशोरावस्था में होने वाले क्रश के दौर में अगर सावधानी न बरती जाए तो यह कैरियर व पढ़ाई को तो बरबाद करता ही है साथ ही जिस के प्रति आकर्षण है उस की पढ़ाई व कैरियर भी चौपट हो सकता है. ऐसे में क्रश विपरीत लिंग के प्रति मात्र आकर्षण ही नहीं बढ़ाता बल्कि जिम्मेदारी का एहसास कराने की पहली सीढ़ी भी माना जाना चाहिए. अगर आप के किशोर मन में किसी के प्रति आकर्षण है तो उस के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभा कर उस की नजर में अच्छे बन सकते हैं.

क्रश को बनाएं जिम्मेदारी

आप को जब भी किसी के प्रति क्रश हो तो उस के पीछे न भागें और न ही उसे ले कर पढ़ाई व कैरियर से मुंह मोड़ें बल्कि उसे भी समझने की कोशिश करें और जरूरत पड़ने पर उस की पढ़ाईलिखाई में भी मदद करें. कई बार देखा गया है कि जिस के प्रति आप क्रश के भाव रखते हैं वह अपनी पढ़ाई व कैरियर को ले कर निर्णय लेने की स्थिति में नहीं होता. ऐसे में उसे एहसास करा सकते हैं कि आप उस के करीबियों में से हैं और उस की समस्या का निदान आसानी से कर सकते हैं. अगर आप को उस के पढ़ाई व कोर्स से जुडे़ सवालों के जवाब न भी पता हों तो अपने किसी जानने वाले की मदद से उस की मदद कर सकते हैं.

कभीकभी पढ़ाई के बीच कैरियर का सवाल आप के क्रश के लिए असमंजस की स्थिति पैदा कर देता है. ऐसे में आप उसे उबारने में बेहतर मददगार साबित हो सकते हैं. आप उसे समझा सकते हैं कि उस का मन जिस कैरियर को चुनने के लिए गवाही दे रहा हो, वह उसे चुने.

आप की यह जिम्मेदारी आप के क्रश को एहसास करा सकती है कि आप उस का भला ही सोचते हैं. जैसा कि जाहनवी के साथ हुआ. 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली जाहनवी का अपने सहपाठी नीरज के साथ क्रश था, जिस के चलते वह स्कूल जल्दी पहुंच जाती और स्कूल के गेट पर खड़ी हो कर नीरज का इंतजार करती. नीरज के स्कूल आने के बाद जाहनवी का मन गुलजार हो जाता, लेकिन  जिस दिन नीरज स्कूल न आता उस दिन जाहनवी का मन पढ़ाई में नहीं लगता.

जब नीरज को जाहनवी के इस लगाव के बारे में पता चला तो उस का भी जाहनवी के प्रति आकर्षण बढ़ गया. परंतु वह समझदार निकला. उसे लगा कि इस के चलते जाहनवी की पढा़ई व कैरियर पर प्रभाव पढ़ रहा है. अत: उस ने उसे सचेत किया और कहा कि हम एकदूसरे को पसंद करते हैं, लेकिन इस का हमारी पढ़ाई पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए.

साथ ही उस ने उस की पढ़ाई में भी मदद की. इस से जाहनवी अपनी क्लास के बच्चों के समकक्ष पहुंच गई. इस प्रकार जिम्मेदारी का एहसास हो तो क्रश मजबूत बनता है वरना बरबादी का कारण.

बुरी आदतों को छुड़ाने में करें मदद

अगर आप के साथ किसी का क्र्रश है तो आप सिर्फ उस की पढ़ाईलिखाई या कैरियर के मामले में ही मदद नहीं कर सकते बल्कि आप उस में आई बुराई को भी दूर करने में मदद कर सकते हैं. आप के क्रश को तंबाकू, सिगरेट, गुटका, शराब आदि व्यसनों की लत है तो उस की इस बुरी लत को छुड़ाने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं. आप इन से होने वाली हानि से बचाने के लिए उस से जुड़ी जागरूकता सामग्री, पत्रपत्रिकाएं, साहित्य, गिफ्ट कर उन की मदद कर सकते हैं. अगर आप के प्रयास के चलते आप का क्रश इन बुरी आदतों को छोड़ता है तो निश्चित ही उस का लगाव आप के प्रति और बढ़ जाएगा.

सोशल मीडिया से डालें मदद करने की आदत

अगर आप खुद के क्रश के लिए सचमुच समर्पित हैं तो इस में सोशल मीडिया आप का बेहतर मददगार साबित हो सकता है. आप सोशल मीडिया के जरिए अपने साथी के सवालों का समाधान चैट बौक्स या वीडियो कौलिंग के जरिए कर सकते हैं.

सैक्स संबंध बनाने से बचें

चिकित्सक डा. श्यामनारायण चौधरी के अनुसार किशोरावस्था में अपने से विपरीत लिंग के प्रति क्रश होना और उस को ले कर सैक्स संबंध बनाने के सपने देखना आम बात है. इस का एक बड़ा कारण किशोरों में कई तरह के हारमोनल चेंज

होना है. ऐसी स्थिति में किशोर जिस से क्रश रखते हैं उस के साथ सैक्स अपराध करने में भी नहीं हिचकते. ऐसे में जब तक आप इस स्थिति में न पहुंच जाएं कि आप परिपक्व सैक्स के बारे में पूरी तरह से जानकारी प्राप्त कर लें, इन चीजों से दूरी बना कर रखना ही ज्यादा उचित होगा.

क्रश के चलते जिम्मेदार बनें व निम्न बातों का ध्यान रख कर आदर्श प्रस्तुत करें : 

– अपने क्रश को ले कर खुद की भावनाओं पर संतुलन बनाना सीखें.

– अपने क्रश की रुचि और पसंदनापसंद को जानें, इस से आप को उस की मदद करने में आसानी होगी.

– अगर आप का क्रश अत्यधिक शरमीला है तो आप आत्मविश्वास जगाने में उस की मदद करें.

– आप अपने क्रश की दिनचर्या की जानकारी रखें. इस से आप को उस की मदद करने में आसानी होगी.

– क्रश पर भरोसा करना सीखें.

– अच्छे कपडे़ पहनें, अच्छा हेयरस्टाइल रखें, खुद साफसफाई रखें और क्रश को भी इस के लिए प्रेरित करें.

– जब भी क्रश के साथ बैठें तो पढ़ाई से जुड़ी बातों से शुरुआत करें ताकि वह भी अपनी पढ़ाई व कैरियर से जुड़ी समस्याओं को आप से शेयर करे, जिस से आप उस की मदद कर पाएंगे, लेकिन जब लगे कि वह आप की बातों को गंभीरता से नहीं ले रहा, तो टौपिक चेंज करें और हलकीफुलकी बातें करें.

युवा पीढ़ी और पढ़ाई

प्यार करने में कितने जोखिम हैं, यह शीरीं फरहाद, लैला मंजनू से ले कर शंकुलता दुष्यंन, आहिल्या इंद्र, हिंदी फिल्म ‘संगम’ जैसे तक बारबार सैंकड़ों हजार बार दोहराया गया है. मांबाप, बड़ों, दोस्तों, हमदर्दों की बात ठुकरा कर दिल की बात को रखते हुए कब कौन किस गहराती से प्यार कर बैठे यह नहीं मालूम. दिल्ली में लिवइन पार्टनर की अपनी प्रेमिका की हत्या करने और उस के शव के 30-35 टुकड़े कर के एकएक कर के कई दिनों तक फेंकने की घटना पूरे देश को इसी तरह हिला दिया है जैसा निर्भया कांड में जबरन वहशी बलात्कार ने दहलाया था.

इस मामले में लडक़ी के मांबाप की भी नहीं बनती और लडक़ी बिना बाप को बताए महीनों गायब रही और बाप ने सुध नहीं ली. इस बीच यह जोड़ा मुंबई से दिल्ली आ कर रहने लगा और दोनों ने काम भी ढूंढ़ लिया पर निरंतर ङ्क्षहसा के बावजूद लडक़ी बिना किसी दबाव के बावजूद प्रेमी को छोड़ कर न जा पाई.

ज्यादा गंभीर बात रही कि लडक़े को न कोई दुख या पश्चाताप था न ङ्क्षचता. लडक़ी को मारने के बाद, उस के टुकड़े फ्रिज में रख कर वह निश्ङ्क्षचतता से काम करता रहा.

जो चौंकाने वाला है, वह यह व्यवहार है. अग्रेजी में माहिर यह लडक़ा आखिर किस मिट्टी का बना है कि उसे न हत्या करने पर डर लगा, न कई साल तक जिस से प्रेम किया उस का विद्रोह उसे सताया. यह असल में इंट्रोवर्ट होती पीढ़ी की नई बिमारी का एक लक्षण है. केवल आज में और अब में जीने वाली पीढ़ी अपने कल का सोचना ही बंद कर रही है क्योंकि मांबाप ने इस तरह की प्रोटेक्शन दे रखी थी कि उसे लगता है कि कहीं न कहीं से रुपए का इंतजाम हो ही जाएगा.

जब उस बात में कुछ कमी होती है, जब कल को सवाल पूछे जाते हैं, कल को जब साथी कुछ मांग रखता है जो पूरी नहीं हो पाती तो बिफरता, आपा खोता, बैलेंस खोना बड़ी बात नहीं, सामान्य सी है. जो पीढ़ी मांबाप से जब चाहे जो मांग लो मिल जाएगा की आदी हो चुकी हो, उसे जरा सी पहाड़ी भी लांघना मुश्किल लगता है, उसे 2 मंजिल के लिए भी लिफ्ट चाहिए, 2 मील चलने के लिए वाहन चाहिए, और न मिले तो वह गुस्से में कुछ भी कर सकती है.

यह सबक मांबाप पढ़ा रहे हैं. मीडिया सिखा रहा है. स्कूली टैक्सट बुक्स इन का जवाब नहीं है. रिश्तेनातेदार हैं नहीं जो जीवन के रहस्यों को सुलझाने की तरकीब सुझा सकें. और कुछ है तो गूगल है. व्हाट्सएप है, फेसबुक है, इंस्टाग्राम है. ट्विटर है जिन पर समझाने से ज्यादा भडक़ाने की बातें होती है.

पिछले 20-25 सालों से धर्म के नाम पर सिर फोड़ देने का रिवाज सरकार का हिस्सा बन गया है. हिंसक देवीदेवताओं की पूजा करने का हक पहला बन गया है. जिन देवताओं के नाम पर हमारे नेता वोट मांगते हैं, जिन देवताओं के चरणों में मांबाप सिर झुकाते हैं, जिन देवीदेवताओं के जुलूस निकाले जाते हैं सब या तो हिंसा करने वाले हैं या हिंसा के शिकार हैं.

ऐसे में युवा पीढ़ी का विवेक, डिस्क्रीशन, लौजिक दूसरे के राइट्स के बारे में सोचने की क्षमता आएगी कहां से आखिर? न मांबाप कुछ पढऩे को देते है, न बच्चे कुछ पढ़ते हैं. न मनोविज्ञान के बारे में पक जाता है न जीवन जीने के गुरों के बारे में. नेचुरल सैक्स की आवश्यकता को संबंधों का फेवीफौल मान कर साथ सोना साथ निभाने और लगातार साथ रातदिन महीनों सालों तक रहने से अलग है.

युवाओं को दोष देने की हमारी आदत हो गई है कि वे भटक गए हैं. जबकि असलियत यह है कि भटकी वह जैनरेशन है जिस ने एमरजैंसी में इंदिरा गांधी के गुणगान किया, जिस ने ओबीसी रिजर्वेशन पर हल्ला किया, जिस के एक धड़े ने खालिस्तान की मांग की और फिर दूसरे धड़े ने मांगने वालों को मारने में कसर न छोड़ी. भटकी वह पीढ़ी है जिस ने हिंदू मुसलिम का राग अलापा, जिसने बाबरी मसजिद बनवाई. जिस ने हर गली में 4-4 मंदिर बनवा डाले जिस ने लाईब्रेरीज को खत्म कर दिया, जिस ने बच्चों के हाथों में टीवी का रिमोट दिया.

आज जो गुनाह हमें सता रहा है, परेशान कर रहा है वह इन दोने उस पीढ़ी से सीख कर किया जो देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार है, जो बाबरी मसजिद तोडऩे की जिम्मेदार है, जो करप्शन की गुलाम है. जो पैंपरिंग को पाल देना समझती है. जरा सा कुरेदेंगे तो सदा बदबूदार मैला अपने दिलों में दिखने लगेगा, इस युवा पीढ़ी में नहीं जिसे जीवन जीने का पाठ किसी ने पढ़ाया ही नहीं.

अब साफ-सफाई की नो टैंशन

घर के कामों में सब से बड़ा काम सफाई का होता है. घर बड़ा हो या छोटा, सफाई का काम सभी को करना पड़ता है औैर वह भी अलगअलग कमरों में अलगअलग तरीके से. मसलन, रसोई हो या बाथरूम, बैडरूम हो या डाइनिंगरूम हर जगह सफाई करने का अलग तरीका होता है. सलीके से सफाई न होने पर घर में पनपने वाले कीटाणु परिवार की सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं.

स्टीम क्लीनिंग

अमूमन गृहिणियां पानी के साथ कैमिकल, साबुन और कास्टिक का इस्तेमाल कर घर की सफाई करती हैं. ये वस्तुएं भले ही घर को चमका दें, लेकिन इन से घर पूरी तरह स्वच्छ होगा, इस की गारंटी नहीं होती. लेकिन स्टीम क्लीनर्स 99.9% तक बैक्टीरिया का खात्मा करने की क्षमता रखते हैं. इन की खासीयत यह है कि इन में 100 डिग्री सैल्सियस तक पानी को गरम कर उस की भाप से सफाई की जाती है.

स्टीम क्लीनिंग का आधार

कार्चर स्टीम क्लीनिंग सिस्टम के साथ मल्टीपल ऐक्सैसरीज मिलती हैं, जिन का इस्तेमाल विभिन्न तरीके से अलगअलग स्थान को साफ करने में किया जा सकता है.

नोजल्स: इस का इस्तेमाल सख्त स्थान को साफ करने के लिए किया जाता है. जैसे कि घर का फर्श. कमर को झुका कर फर्श पर झाड़ू और पोंछा लगाना हर किसी के बस का नहीं होता. बावजूद इस के गंदगी कुछ हद तक ही साफ हो पाती है. लेकिन स्टीम नोजल भाप से फर्श की अच्छी तरह सफाई कर देता है.

ब्रश अटैचमैंट: सिंक और किचन स्लैब्स को साफ करने के लिए अब हाथों को घिसने की जरूरत नहीं है, क्योंकि स्टीम क्लीनिंग सिस्टम में ब्रश अटैचमैंट्स भी मौजूद हैं, जो आसानी से सिंक और स्लैब्स साफ कर देते हैं.

स्टीम हौसेस: अमूमन बाथरूम में टाइल्स लगी होती हैं. बाथरूम की साफसफाई के दौरान ज्यादा ध्यान टाइल्स को चमकाने पर दिया जाता है, जबकि असली गंदगी टाइल्स के बीच की दरारों में होती है. टाइल्स के बीच छिपी गंदगी को साफ करने के लिए स्टीम हौसेस परफैक्ट क्लीनिंग टूल है.

क्लौथ किट: ओवन, फ्रिज और मिरर की सफाई बिना कपड़े के अधूरी है. स्टीम क्लीनिंग सिस्टम की क्लौथ किट इस तरह की चीजों को साफ करने में कामयाब है.

स्टीम क्लीनिंग के फायदे

  1. इस के द्वारा साफसफाई में किसी भी कैमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि सिर्फ पानी की भाप के इस्तेमाल से सफाई की जाती है.
  2. 1 लिटर पानी से 1,700 लिटर भाप तैयार होती है. खास बात यह है कि भाप से उन स्थानों की भी आसानी से सफाई की जा सकती है जहां दूसरे क्लीनिंग टूल्स नहीं पहुंच पाते.
  3. इस विधि से सफाई जल्दी होती है और वह भी कम पैसों में.

बढ़ते शुगर को ऐसे करें कंट्रोल

हम सभी जानते हैं कि खाने-पीने के रेडीमेड सामानों और सॉफ्ट ड्रिंक्स के जरिए हम सबसे ज्यादा शुगर (चीनी) कंज्यूम करते हैं. ये शूगर ही हमारे शरीर को कई तरह से सबसे ज्यादा नुकसान भी पहुंचाती है.

इस एक्स्ट्रा शुगर से आपकी सेहत को कोई भी फायदा नहीं होता बल्कि जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक ये शरीर में घटिया किस्म के कॉलेस्ट्रोल को बढ़ावा देती है जिससे आगे चलकर दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है.

ज्यादा शुगर वाली खाने-पीने की चीजें इस्तेमाल करने से डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है. एडल्ट्स को करीब 30 ग्राम शुगर एक दिन में कंज्यूम करने की सलाह दी जाती है जबकि 4 से 6 साल के बच्चों के लिए ये मात्रा 19 ग्राम और 7 से 10 साल के बच्चों के लिए 34 ग्राम है.

अगर आप मीठा खाने के बहुत ज्यादा शौकीन हैं और डायबिटीज जैसे इसके नुकसानों से भी बचे रहना चाहते हैं तो न्यूट्रीशन एक्सपर्ट डॉक्टर मर्लिन ग्लेनविल बता रहीं हैं ऐसे 6 तरीके जिससे आप अपनी आदत बदले बिना रह सकते हैं डायबिटीज से दूर.

1. बाहर संभल कर खाएं: सबसे ज्यादा शुगर बाहर से खाने-पीने वाली चीजों के जरिये कंज्यूम की जाती हैं. ऐसे में थोड़े सी सतर्कता से आप मीठा खाकर भी बीमारियों से बचे रह सकते हैं. आपको करना बस इतना है कि स्पैगिटी सॉस और मियोनीज की जगह ऑर्गनिक योगार्ट इस्तेमाल करें और ऐसी दुकानों पर खाएं जो अपने सॉस खुद तैयार करते हैं. घर में बने सॉस में अपेक्षाकृत कम शुगर होती है.

2. कम-कम खाइए लेकिन जरूर खाइए: डायबिटीज है और लो ब्लड शुगर जैसी दिक्कतों से जूझना पड़ता है तो साथ में चॉकलेट बार या मीठी बिस्किट्स का पैकेट रखिए. थोड़ा-थोड़ा खाइए लेकिन खाना अवॉयड मत कीजिये. नाश्ता, लंच और डिनर के आलावा दोपहर और शाम में स्नैक्स भी लीजिए. तीन घंटे से ज्यादा बिना खाए मत रहिए नहीं तो लो ब्लड शुगर की दिक्कत को झेलना ही पड़ेगा.

3. इस दौरान फास्टिंग से बचे: जब आपने अपनी डाइट से शुगर कम करने का जिम्मा उठाया है तो फास्टिंग से बचे. बालिग लोगों के हिसाब से एक पुरुष को दिन में 2500 कैलोरी जबकि महिला को कम से कम 2000 कैलोरी कंज्यूम करनी ही चाहिए. हालांकि डाइट में शुगर और कार्बोहाइड्रेट से बचें. बता दें कि लो या हाई ब्लड शुगर ही शरीर में इन्सुलिन के स्त्राव पर असर डालता है. इसके अलावा स्ट्रेस हारमोंस जैसे एड्रिलिन और कोरिस्टोल भी इसी से नियंत्रित होते हैं.

4. दिन में दूसरी बार कॉफी या चाय पीने से बचें: चाय या कॉफी के जरिये आप जो कैफीन कंज्यूम करते हैं अब उस पर भी कंट्रोल करने का समय आ गया है. चाय या कॉफी पीने से शरीर में एड्रिलिन और कोरिस्टोल हारमोन का स्त्राव होता है जिससे इन्सुलिन का स्त्राव अफेक्ट होता है. चाय या कॉफी आप में ज्यादा शुगर कंज्यूम करने की आदत को भी बढ़ावा देती हैं.

5. कार्बोहाइड्रेट के साथ डाइट में शामिल करें प्रोटीन: ये तो सब जानते हैं कि शरीर में पहुंचने के बाद कार्बोहाइड्रेट ही टूटकर शुगर में तब्दील हो जाता है. लेकिन आप जितना प्रोटीन का इस्तेमाल करेंगे वो कार्बोहाइड्रेट के शुगर में तब्दील होने की प्रक्रिया को उतना ही धीमा और नियंत्रित कर देगा. आप डाइट में मूंगफली जैसी चीजों को शामिल कर ऐसा कर सकते हैं.

6. ‘कम्फर्ट’ डाइट से बचें: आप जब भी स्ट्रेस्ड फील करते हैं कुछ मीठा खाना चाहते हैं और ज्यादातर लोग मीठा खाते भी हैं. स्ट्रेस की सिचुएशन में मीठे को ‘कम्फर्ट फ़ूड’ कहा जाता है, क्योंकि मीठा खाने से आप राहत महसूस करते हैं. लोग सिर्फ स्ट्रेस में ही नहीं, बोर होने, अकेले होने, दुखी होने और गुस्सा होने पर भी कम्फर्ट इटिंग करते हैं. बस आपको करना इतना है कि इसका दूसरा रास्ता निकालें और मीठा खाने की जगह किसी दूसरी एक्टिविटी में खुद को व्यस्त कर लें.

Winter Special: ताकि ठंडी हवाएं स्किन की नमी न चुराएं

हौलेहौले सर्दियों ने दस्तक दे दी है. इस मौसम का ठंडापन और रूखापन त्वचा से नमी को चुरा लेने वाला होता है, जिस से त्वचा सूखीसूखी, फटीफटी सी लगने लगती है और थोड़ी सैंसिटिव भी हो जाती है. लेकिन ऐसे मौसम में अगर आप चाहें तो सर्द हवाओं को अपनी त्वचा का दोस्त भी बना सकती हैं, जिस के उपाय बता रही हैं साकेत सिटी हौस्पिटल की डर्मैटोलौजिस्ट डाक्टर लिपि गुप्ता:

1. त्वचा क्यों होती है ड्राई

सर्दियों के मौसम में त्वचा इसलिए ड्राई हो जाती है क्योंकि खुश्क हवा त्वचा के नीचे से नमी सोख लेती है. त्वचा में नमी की कमी होने से सेल्स की बाहरी सतह सूखी हो कर चटकने लगती है, तो नमी का सुरक्षा कवच हट जाता है. इस से अंदरूनी त्वचा पर भी मौसम का असर होने लगता है. ऐसी त्वचा पर स्थायी या अस्थायी लकीरें अपना स्थान बनाने लगती हैं. ऐसा न हो इस के लिए आप आगे बताए जा रहे उपाय अपना कर त्वचा की देखभाल कर उस की नमी बरकरार रख सकती हैं.

2. हौट शौवर स्नान

इस मौसम में हर सुबह स्फूर्तिदायक गरम पानी से स्नान बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि ऐसा स्नान आप को ताजगी प्रदान करता है और त्वचा की हाइजीन को बनाए रखता है. पर यह ध्यान रहे कि पानी बहुत ज्यादा गरम नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह त्वचा की कुदरती नमी को सोख लेता है. अच्छी तरह से हाइड्रेटेड त्वचा के लिए कुनकुना पानी सब से बेहतर उपाय है.

3. बौडी औयलिंग

सर्दी के मौसम में खुश्क हवा से त्वचा को बचाने व सूखेपन को दूर करने का असरदार तरीका है कुनकुने तेल से मालिश करना. लेकिन मालिश के लिए ऐसे तेल का चुनाव करें जो बहुत ज्यादा चिकनाईयुक्त न हो और शरीर में जल्दी मर्ज हो जाने वाला हो. जैसे औलिव, जोजोबा और ऐलोवेरा औयल. तेल की मसाज सोने से पहले या नहाने से 1 घंटा पहले करें, जिस से तेल का असर बौडी पर अच्छी तरह से हो जाए.

4. फेसवाश कैसा हो

सरदी के मौसम में सब से ज्यादा चेहरे की देखभाल की जरूरत पड़ती है. इस के लिए संतुलित, सौम्य व हाइडे्रटिंग फेसवाश का इस्तेमाल करें, जिस में क्लींजिंग व मौइश्चराइजिंग जड़ीबूटियों के साथसाथ ऐलोवेरा पर्याप्त मात्रा में हो. ये तत्त्व त्वचा को हाइड्रेट करते हैं.

5. साबुन का चुनाव

त्वचा की नियमित सफाई व नमी के लिए ऐसे सौफ्ट साबुन का चुनाव करें जिस में औलिव औयल और ऐलोवेरा के गुण हों.

6. घरेलू मौइश्चराइजर

आधा चम्मच गुलाबजल में 1 चम्मच शहद मिलाएं और चेहरे पर आहिस्ताआहिस्ता मलें. इसे 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर पानी से साफ कर लें. शहद से सूखी त्वचा की नमी लौट आएगी. इस के अलावा नाखूनों के आसपास मौइश्चराइजर लगाएं क्योंकि पानी में ज्यादा देर काम करने से वे भुरभुरे और सूखे हो सकते हैं. आप दस्तानों का प्रयोग भी कर सकती हैं.

7. स्क्रबिंग

सर्दी के मौसम में धूलमिट्टी से त्वचा को बचाने के लिए सप्ताह में 2 बार स्क्रबिंग जरूर करवाएं. स्क्रबिंग त्वचा से जमा मैल और डैडस्किन प्रभावी तरीके से निकालने और त्वचा से अतिरिक्त मौइश्चर को सोखने में सक्षम होती है, इसलिए आप की त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाए रखती है.

8. टोनर और क्लींजिंग मिल्क

सर्दी के मौसम में पसीना न आने की वजह से लोग फेसवाश करने पर कम ध्यान देते हैं, जिस से त्वचा की सफाई बेहतर ढंग से नहीं हो पाती. ऐसे में अच्छी क्वालिटी के टोनर और क्लींजिंग मिल्क प्रभावी तरीके से त्वचा की गहराई से सफाई करते हैं और सूखी त्वचा को स्वच्छ, नर्म व नमीयुक्त बनाते हैं.

9. मौइश्चराइजर

सर्दी के मौसम में ऐसे मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें जो धूप से सुरक्षा दे. आप नौर्मल मौइश्चराइजर की जगह सेरेमाइकयुक्त मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें. सैलिब्रिटीज मेकअप ऐक्सपर्ट, आशमीन मुंजाल के अनुसार, मौइश्चराइजर त्वचा में पीएच बैलेंस को मैंटेन करता है. अगर पीएच बैलेंस बढ़ता है, तो ऐक्ने की शुरुआत होती है और अगर कम होता है, तो फेस पर रिंकल्स उभर आते हैं. इसलिए ऐसे मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें, जो त्वचा में पीएच बैलेंस सही बनाए रखे. इस के अलावा बादाम क्रीम, वैसलीन व ग्लिसरीन का इस्तेमाल करें. ये त्वचा पर एक सुरक्षा कवच बना देते हैं जिस से उस पर शुष्क हवाओं का असर नहीं पड़ता. अच्छा मौइश्चराइजर त्वचा की खोई नमी तो लौटाता ही है, साथ ही नए ऊतकों को पैदा करने में भी मददगार होता है. यह धूल, धूप और मौसम की तीखी मार से बचाते हुए मेकअप की नमी बनाए रखता है. जहां सूखी त्वचा के लिए सामान्य मौइश्चराइजर मददगार साबित होता है, वहीं तैलीय त्वचा के लिए औयलफ्री मौइश्चराइजर बेहतर विकल्प है.

10. सनस्क्रीन लोशन जरूर इस्तेमाल करें

डाक्टर लिपि के अनुसार, जाड़े में धूप भी आप की त्वचा पर सीधा असर डालती है, इसलिए गरमी की तरह ही जाड़े में भी सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल जरूर करें. दरअसल, सर्दी में भी अल्ट्रावायलेट किरणें नुकसानदेह होती हैं और चूंकि आप जाड़े में धूप में ज्यादा समय बिताती हैं, इसलिए त्वचा पर अल्ट्रावायलेट किरणों का असर भी ज्यादा होता है. सनस्क्रीन लोशन उस के असर से तो त्वचा को बचाता ही है, उस की वजह से आप की खुली त्वचा पर होने वाली फाइनलाइन झुर्रियों और ऐज स्पौट वगैरह से भी बचाता है.

11. खानपान का रखें खास खयाल

सर्दी के मौसम में अपने खानेपीने का खास खयाल रखें. अपनी त्वचा को हाइड्रेट करने के लिए दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीएं. इस मौसम में प्यास कम लगती है फिर भी आप कुछकुछ देर में कोई न कोई लिक्विड जरूर लेती रहें. गरम पानी में नीबू डाल कर भी पीएं. इस से शरीर से विषैले पदार्थ निकल जाते हैं और इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है. इस के अलावा ग्रीन टी, नारियल पानी, स्प्राउट, फल वगैरह लें. खानपान में संतुलन रखें व पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दें.

12. पर्याप्त नींद लें

त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए 7-8 घंटे नींद जरूर लें क्योंकि यह हमारी ऊर्जा को ताजा करती है और शरीर को फुरतीला बनाए रखती है.

कविता

गुज़रते मौसमों की

गुज़रती बातों में

रातों कि आहटों में

बातों कि चाहतों में

कभी रूठते कभी मुस्कराते

कभी बैठते तो कभी नाचते

उसको उसी की ही बातों में उलझाते

हर गुज़रते मौसम कि तरह

हम भी गुज़र जाते

फिर मिलते फिर बिछडते

फिर से गाते फिर से गुन गुनाते

उसकी मोहब्बत को

अपनी चाहतो से मिलाते

नए मौसम को इस बार

मौसम कि तरह ही मनाते

गुज़रते मौसमों की

गुज़रती बातों में

हम यूहीं गुज़र जाते

…संदीप भारती

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