Family Issue : अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है, तो ये लेख अंत तक जरूर पढ़ें…

सवाल

मेरे विवाह को 2 वर्ष हो चुके हैं. मेरे पति मुझ से नौकरी करवाना चाहते हैं जबकि मैं संतानोत्पत्ति चाहती हूं. मेरे पति की उम्र 38 वर्ष हो चुकी है, इसलिए यदि हम ने अभी से इस विषय में नहीं सोचा तो दिक्कत होगी. मैं भी इस वर्ष 30 की हो गई हूं. कृपया बताएं कि हमें क्या करना चाहिए?

जवाब
आप की उम्र 30 वर्ष हो चुकी है. अधिक विलंब करने से गर्भधारण करने और संतानोत्पत्ति में दिक्कत होगी, इसलिए आप को समय रहते संतानोत्पत्ति के लिए प्रयास करना चाहिए. आप के पति दिनोंदिन बढ़ती महंगाई के कारण चाहते होंगे कि आप नौकरी करें. यदि पति की आमदनी संतोषजनक नहीं है, तो आप घर पर रह कर ट्यूशन आदि कार्य कर के भी उन्हें आर्थिक सहयोग दे सकती हैं.

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आज लड़कियां ऊंची डिगरियां हासिल कर रही हैं. शादी से पूर्व ही वे जौब करने लगती हैं. शादी के बाद भी वे जौब जारी रखना चाहती हैं. पति या ससुराल के अन्य लोगों को भी इस में कोई आपत्ति नहीं होती, क्योंकि आज लड़के भी कामकाजी पत्नी चाहते हैं ताकि दोनों की आमदनी से अपनी गृहस्थी को चला सकें. लेकिन उन की लाइफ में नया मोड़ तब आता है जब उन के बच्चा होता है. जब तक वह स्कूल जाने नहीं लगता तब तक उसे अपनी मां की जरूरत होती है. ऐसे में उसे अपने बच्चे की परवरिश के लिए जौब छोड़ने पर मजबूर होना पड़ता है, क्योंकि उस के पास 2 ही विकल्प होते हैं कि या तो वह जौब कर ले या फिर बच्चे की परवरिश. वह शिशु की परवरिश की खातिर जौब छोड़ने का विकल्प चुनती है.

बच्चा मां पर निर्भर

आजकल एकाकी परिवारों का जमाना है. ऐसे में सासससुर या देवरानीजेठानी साथ नहीं रहतीं. प्रसव के बाद यदि प्रसूता अपनी मां या सास को बुलाती भी है तो वे कुछ दिन रह कर वापस चली जाती हैं. वे 4-5 साल तक साथ नहीं रह सकतीं. पति को भी अपने काम से इतना समय नहीं मिलता कि वह बच्चे की परवरिश में अपनी पत्नी का हाथ बंटाए. फिर वैसे भी बच्चे को पिता से ज्यादा मां की जरूरत होती है. मां की गोद में आ कर ही उसे सुरक्षा का एहसास होता है. कुछ बच्चे तो मां के बगैर 1 घंटा भी नहीं रहते. मां थोड़ी देर भी न दिखे तो रोरो कर बुरा हाल कर लेते हैं.

यद्यपि कामकाजी महिलाओं को प्रसव अवकाश मिलता है, लेकिन उस की भी एक सीमा है. कुछ महिलाएं गर्भावस्था में ही मातृत्व अवकाश लेना शुरू कर देती हैं, जो प्रसव के बाद समाप्त हो जाता है. जन्म के बाद शिशु पूरी तरह अपनी मां के दूध पर निर्भर करता है. शुरू के 6 महीने तक तो वह मां के दूध के अलावा पानी तक नहीं पीता. इस के बाद ही वह मां का दूध छोड़ कर अन्य खाद्य ग्रहण करने लगता है. शिशु स्तनपान की जरूरत को पूरा करने के लिए मां का घर पर रहना जरूरी है. इसलिए भी वह जौब छोड़ देती है.

कुछ दशक पहले तक जब महिलाएं कामकाजी नहीं होती थीं, बच्चे की परवरिश के लिए उन का जौब छोड़ने का प्रश्न ही नहीं था, लेकिन अब जबकि वे कामकाजी हैं, लगीलगाई जौब को छोड़ना उन्हें अखरता है. एक बार जौब छोड़ने के बाद यदि लंबा अंतराल हो जाता है, तो फिर न तो पुन: जौब करने का मन होता है और न ही जौब आसानी से मिलती है. जौब छोड़ने से उन की आर्थिक स्थिति यानी आमदनी पर प्रभाव पड़ता है. परेशानी यह है कि बच्चा होने से खर्च बढ़ते हैं और जौब छोड़ने से आय घटती है. ऐसे में आमदनी और खर्च के बीच तालमेल बैठाना मुश्किल हो जाता है.

बच्चे की खातिर जब जौब छोड़नी पड़ती है तो उन की पढ़ाईलिखाई बेकार चली जाती है. उन्हें इस बात का मलाल होता है. इसलिए यदि आप भी अपने बच्चे की खातिर नौकरी छोड़ रही हैं तो किसी तरह का मलाल नहीं पालें और न ही पछताएं. याद रहे, जौब के लिए तो सारी उम्र पड़ी है, लेकिन अभी आप की जिम्मेदारी अपने बच्चे के प्रति है, जिसे आप ने अपनी कोख से जन्म दिया है.

प्राथमिकता समझें

नौकर या आया के भरोसे बच्चे पल सकते हैं, लेकिन उन में वे संस्कार कहां से आएंगे जो आप दे सकती हैं? यदि आप अपनी मां, बहन, भाभी को बुला कर उन के भरोसे बच्चे को छोड़ कर जौब पर जाती हैं तो यह भी गलत है. उन का अपना घरपरिवार है, जिस के प्रति उन की जिम्मेदारी है. उन्हें परेशानी में डाल कर आप जौब पर चली जाएं, यह कोई बात नहीं हुई.

यदि आप किसी भी कीमत पर जौब छोड़ना नहीं चाहती थीं तो आप को संयुक्त परिवार में शादी करनी चाहिए थी. वहां इतने लोग होते हैं कि बच्चे को मां की जरूरत केवल स्तनपान के समय ही पड़ती है. उस की परवरिश के लिए दादादादी, चाचा, ताऊ, चाची, ताई, बूआ आदि होते ही हैं. ऐसे में आप कुछ महीनों का मातृत्व अवकाश ले कर फिर से जौब पर जा सकती हैं.

मातृत्व अवकाश के बाद काम पर लौटने या न लौटने का फैसला आप को सोचसमझ कर लेना चाहिए. हालांकि इसे ले कर आप दुविधा में हो सकती हैं. पर निर्णय तो लेना ही होगा. यदि आप नौकरी छोड़ने का निर्णय लेती हैं तो इस बात पर भी विचार कर लें कि आप सक्रिय कैसे रहेंगी, क्योंकि जैसेजैसे बच्चा बड़ा होने लगता है उसे आप की जरूरत कम होती जाती है. इसलिए आप नौकरी भले ही छोड़ दें, पर अपनेआप को व्यस्त रखने का कोई उपाय अवश्य ढूंढ़ लें ताकि आप की बुद्धि, योग्यता और प्रतिभा कुंठित न हो.

यदि आप के पति की आमदनी बहुत कम है तो फिर आप को नौकरी न छोड़ने का फैसला लेना पड़ेगा. इस के लिए कुछ समय तक अवैतनिक अवकाश भी लेना पड़े तो लें. हालांकि इस का असर प्रमोशन और कुल सेवा अवधि की गणना पर पड़ेगा, पर नौकरी तो कायम रहेगी.

आपको नौकरी जारी रखने, छोड़ने या ब्रेक लेने का फैसला पति और परिजनों की सहमति से ही लेना चाहिए अन्यथा वे दोष आप को ही देंगे. यदि नौकरी छोड़ती हैं तो क्यों छोड़ी और यदि नहीं छोड़ती हैं, तो क्यों नहीं छोड़ी, के ताने आप को ही सुनने पड़ेंगे. इसलिए इस का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लें. इस के दूरगामी परिणाम होते हैं.

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