‘मैनिपुलेटिव’ एक ऐसा शब्द जो अक्सर महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है. यहां तक की पौराणिक कथाओं से लेकर धार्मिक शास्त्रों तक, भारतीय टेलीविजन पर सीरियल्स से लेकर मुख्यधारा की पॉप संस्कृति तक, एक सामान्य विषय है, और वो सिर्फ और सिर्फ मैनिपुलेटिव का है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या महिलाएं सच में मैनिपुलेटिव होती हैं या वो पितृसत्ता का शिकार होती हैं?

पुराने समय से बातों जोड़-तोड़ करने वाली महिलाओं को खराब माना जाता था. इन महिलाओं को असंस्कारी के रूप में चिह्नित किया जाता है. इस तथ्य से कोई इनकार नहीं करता है कि बेईमानी और असावधानी किसी भी व्यक्ति को शोभा नहीं देता. चाहे जो भी हो हम इन मूल्यों और मापदंडों को एक ऐसे समाज में कैसे निर्धारित करते हैं, जहां महिलाओं को उस तरह से अस्तित्व में रहने की अनुमति नहीं है जिसकी वो हकदार हैं. अच्छे इरादों के साथ झूठ बोलना झूठ के रूप में नहीं गिना जाता है, जो हमें बताया जाता है. लेकिन महिलाओं के समय में इसे किसी गुनाह से कम नहीं माना जाता.

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