Breast Ironing: अकसर सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं. इन में से कुछ रिवाज तो महिलाओं की सुरक्षा और कल्याण को ध्यान में रख कर भी बनाए जाते हैं जो आखिर में उन के अधिकारों और स्वतंत्रता का हनन ही करते हैं. भले ही आज हम देखते हैं कि महिलाओं की जिंदगी बदल रही है, वहीं दूसरी ओर हमें किसी ऐसे रिवाज के बारे में पता चल जाता है जहां महिलाओं के साथ रीतिरिवाजों के नाम पर बेरहमी होती है जो आप को सोचने पर मजबूर कर दे कि क्या वाकई दुनिया आगे बढ़ रही है? क्या वाकई नियमकानून महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं? इन्हीं में से एक प्रथा है ‘ब्रैस्ट आयरनिंग.’

‘ब्रैस्ट आयरनिंग’ की इस प्रथा को लड़की की मां या कोई अन्य औरत (बहन, मामी, चाची, दादी आदि) अंजाम देती है. मान्यता यह है कि गरम चीजों से ब्रैस्ट दागने से लड़कियों की छाती चपटी हो जाती है और उन पर पुरुषों का ध्यान नहीं जाता. लड़कियां जब प्यूबर्टी के करीब आती हैं तो खुद उन की मां, पत्थर या लोहे को गरम कर उन की छाती पर दाग देती हैं और उन को इलास्टिक बैंडेज से बांध देती हैं.

ऐसा हफ्ते में 2 या 3 बार किया जाता है. यह प्रैक्टिस काफी दर्दनाक होती है क्योंकि प्यूबर्टी में ब्रैस्ट की ग्रोथ होना शुरू हो जाती है और इस प्रोसैस में लड़कियों के ब्रैस्ट में पहले ही कुछ दर्द होता है. ऐसे में गरम पत्थर से दागे जाने पर यह और भी भयानक हो जाता है.

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