अंजू मोदी एक इंडियन ड्रैस डिजाइनर हैं जिन्होंने बाजीराव मस्तानी, रामलीला जैसी लोकप्रिय फिल्मों के लिए कपड़े डिज़ाइन किये हैं. उन्हें 2016 में सर्वश्रेष्ठ कौस्ट्यूम डिजाइन के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार मिला. वह वर्ष 1990 से भारतीय फैशन उद्योग का एक अभिन्न अंग रही हैं. इस फेस्टिवल सीजन अंजू मोदी ने बीबा के साथ साझेदारी कर नया एनचांटेड फारेस्ट कलेक्शन डिज़ाइन किया है जो काफी हट कर है. इस में मैटेलिक एवं फ्लोरल प्रिंट्स, उच्चस्तरीय हैंड एंब्रायडरी तथा सिल्क, चंदेरी, मखमल और मोडल जैसे उम्दा कपड़ों पर  बारीकी से किया गया ज़री का काम शामिल है. पेश है उन से की गई बातचीत के मुख्य हिस्से

सवाल- अपने इस कलेक्शन के बारे में बताइए.

मैं हमेशा यह सोच कर नएनए डिजाइन ट्राई करती हूं ताकि जो लोग मेरे कपड़े पहनने वाले हैं, उन के पौइंट औफ व्यू को समझते हुए कुछ नया औफर कर सकूं. इस के साथ ही जरुरत और ट्रेंडस का भी ध्यान रखती हूं. हर कोई फेस्टिवल्स ,बर्थडे पार्टीज, न्यू ईयर पार्टीज और वेडिंगस आदि में कुछ नया और फैशनेबल चाहता है. मेरे कपड़े इसी हिसाब से डिजाइन किए गए हैं.

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इस कलेक्शन का नाम हम ने शुरुआत से ही एक स्टोरीलाइन के तहत रखा और वह था एनचांटेड फारेस्ट. आजकल हम जो पार्टी करते हैं वह सामान्यतः पार्क, लाउन्ज आदि में काफी पेड़पौधों और लाइटिंग के बीच होते हैं. ऐसे में जब शाम के समय खूबसूरत लड़कियां कलरफुल कपड़े पहन कर निकलती हैं तो दूर से ही नजर आती हैं. ऐसी इवनिंग पार्टीज में ब्राइट कलर्स अलग ही लुक देते हैं और खिल कर उभरते हैं.

सवाल- आप की नजर में फैशन क्या है ?

अपनी पर्सनैलिटी को समझते हुए जब आप किसी ट्रेंड को फौलो करते हैं और यह आप के कंफर्ट लेवल और पर्सनैलिटी के हिसाब का होता है तो इस से आप का कौन्फिडेंस लेवल हाई हो जाता है. इसे ही आप परफेक्ट फैशन कह सकते हैं.

सवाल- आप इस फील्ड में कैसे आई ?

वैसे तो मैं बचपन से पेंटिंग और स्केचिंग की शौकीन थी पर 27 साल पहले जब अर्निंग सिचुएशन सामने आई तो मैं ने सोचा कि मुझे तो यही काम आता है. मैं और क्या कर सकती हूं ? बस मैं ने इसी में आगे बढ़ने की सोची. उन दिनों फैशन इंस्टीट्यूट नहीं होते थे. फैशन का फील्ड पॉपुलर भी नहीं था. फिर भी मैं ने अपने तरीके से डिजाइनिंग शुरू की. अनारकली कपड़े बनाये और हिस्टोरिकल रिसर्च कर उन के रिफरेन्सेज से डिजाइनिंग की शुरुआत की. मेरे डिज़ाइन लोगों को पसंद आते गए और मेरा काम आगे बढ़ता गया.

सवाल- अपने परिवार के बारे में बताइए.

मेरा बेटा अंकुर मोदी और बहू प्रियंका मोदी भी इसी फील्ड में है. इन का एएमपीएम नाम का एक ब्रांड है जो काफी पौपुलर है. मेरे पति अब रहे नहीं. उन के जाने के बाद ही मैं ने यह काम शुरू किया.

सवाल- फिल्मों में आना कैसे हुआ हुआ ?

मैं तो कहूंगी कि संजय लीला भंसाली ने ही मुझे ढूंढ निकाला. मैं क्राफ्ट्स में गावों में काम किया करती थी. गांवगांव जाती, वही रहती. उसी दौरान लीला जी एक ऐसा डिजाइनर ढूंढ रहे थे जो हमारे देश के क्राफ्ट को समझे. उन्होंने मेरा काम देखा तो मुझे बुला लिया और काम दे दिया. बाजीराव मस्तानी और रामलीला में मैं ने ड्रेस डिजाइन किये है. उन के लिए मैं ने बहुत रिसर्च किया. रामलीला के लिए गुजरात का एकएक कोना देखा और कुछ नया ढूंढा तो बाजीराव मस्तानी के लिए महाराष्ट्र के पुणे नाशिक जैसी जगहों में घूमी. वहां के म्यूजियम में विजिट कर उस समय का पहनावा समझा.

सवाल- आज का फैशन ट्रेंड क्या है?

अभी इंडो वेस्टर्न लुक पसंद किये जा रहे हैं. बाजीराव मस्तानी के बाद शरारा काफी लोकप्रिय हुआ और फेस्टिवल्स में वैसे भी शरारा कुर्ती लुक परफेक्ट है. अनारकली भी आजकल डिमांड में है.

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सवाल- भारतीय महिलाओं पर कौन से कलर सब से अच्छे लगते हैं?

हमारे लोगों का कौम्प्लेक्शन एक तरह से व्हीटिश है. हम पर मसालों का कलर सब से अच्छा लगता है. उदाहरण के लिए मिर्च वाला लाल रंग ,मेहंदी वाला हरा रंग, चन्दन को घिसने पर गीले चन्दन का सुनहरा सुन्दर सा रंग ये सब भारतीय महिलाओं पर खिल कर आता है. इसी तरह बादामी रंग यानी बादाम भिगोने के बाद जो कलर निकलता है वह न वाइट है और न औफवाइट है, वह मार्बल जैसा रंग है. इसी तरह मैंगो येलो, सनफ्लावर येलो, मेरीगोल्ड येलो जैसे किस्मकिस्म के पीले रंग. डस्की ओल्ड रोज कलर यानी किताबों के बीच रखे हुए सूखे गुलाब का तरबूजी रंग, फालसाई रंग, ये  वे सारे रंग जो प्रकृति से प्रभावित हैं.

सवाल- आजकल फैशन में किस तरह के चेंजेज देख रही हैं आप?

आजकल वेस्टर्न या इंडियन फैशन नहीं रह गया है. कल्चरल फ्यूजन का जमाना है. हम एपल का फ़ोन रखते हैं, माथे पर बिंदिया लगाते हैं, इंग्लिश बात करते हैं, हिंदी भी समझते हैं, कॉफी पीते हैं ,यानी सब कुछ फ्यूज़न हो चुका है. पहनावा भी मिक्स चलता है. कपड़े भी फेस्टिवल्स के हिसाब से पहनते हैं. वैसे भी हमारा देश कलरफुल है. यहां के लोगों को कलरफुल कपड़े ही पसंद आते हैं.

सवाल- अगर कोई महिला डिजाइनर बनना चाहे तो आप उसे क्या सलाह देंगी?

उस को पहले खुद से सवाल करना होगा कि वह इस फील्ड में ग्लैमर और पब्लिसिटी के लिए आना चाहती हैं या पैशन के लिए. यदि उसे बस डिज़ाइनर ही बनना है तो देर न करे . किसी फैशन इंस्टिट्यूट में दाखिला ले और आगे बढ़े.

सवाल- आप को प्रेरणा किस से मिलती है ?

मुझे प्रकृति से प्रेरणा मिलती है. एक बार मैं प्लेन में जा रही थी तो बादलों का नजारा बेहद खूबसूरत लगा. यह विज़न दिल में समा गया लगा जैसे स्वर्ग यहीं है. तभी मैं ने सीकिंग पैराडाइज नाम का कलेक्शन लांच किया जिस में कश्मीरी पहनावे को आधार बनाया .

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सवाल- इस फील्ड में कास्टिंग काउच है या नहीं ?

ऐसा कुछ नहीं है. यह लड़की की मर्जी है. यदि आप ऊपर उठने के लिए कंप्रोमाइज नहीं करती तो कोई आप के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकता. लड़का और लड़की दोनों बराबर के भागीदार होते हैं. आप केवल पुरुषों को ही दोष नहीं दे सकती. आप के पास औप्शन हमेशा होते हैं. यदि कोई आप को ऐसा कुछ करने को कह रहा है तो वह काम छोड़ दे या उसे थप्पड़ लगा दे. फिर किसी की हिम्मत नहीं होगी ऐसा कुछ कहने की.

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