आज के समय में शादी शुदा महिला घरगृहस्थी के संभालने के  साथ काम भी करती हैं लेकिन अभी भी ऐसी बहुत सी महिलाएं है जो घरपरिवार के बीच अपने सपनों, अपनी इच्छाओं को दबा देती हैं. ऐसी महिलाओं के लिए रश्मि सचदेवा ऐसी उदाहरण है, जिन्होंने ने घरपरिवार की जिम्मेदारी को निभाने के साथ अपने सपनों को भी एक नई उड़ान दी.

रश्मि सचदेवा एक ऐसी महिला हैं, जिनकी शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी. कम उम्र में शादी हो जाने के बावजूद उन्होंनें अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया और साथ ही अपने सपनों को भी नई पहचान दी. आज रश्मि सचदेवा एक पत्नी और मां के साथसाथ ब्यूटी क्वीन भी हैं. रश्मि ‘मिसेज दिल्ली’, ‘मिसेज इंडिया’ और ‘मिसेज यूनिवर्स यूरो एशिया’ जैसे कई खिताब अपने नाम कर चुकीं है. वह फाउंडेशन अगेंस्ट थैलेसीमिया की ब्रैंड एम्बैस्डर भी हैं.

रश्मि सचदेवा इन दिनों चर्चा में हैं. दरअसल, रश्मि ज़ी टीवी के नए शो “ दिल्ली डार्लिंग्स” का हिस्सा बनने जा रही हैं. यह एक रिएलिटि शो है. जिसमें दिल्ली की हाई सोसायटी महिलाओं के रियल लाइफ में होने वाला ड्रामा देखने को मिलेगा. इस शो के लौंच के दौरान रश्मि सचदेवा ने बताया कि किस तरह वो एक गृहिणी से ब्यूटी क्वीन बनीं.

सवाल- कैसा महसूस हुआ आपको इस शो ‘दिल्ली डार्लिंग्स’ का हिस्सा बन कर?

इस शो का हिस्सा बन कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा हैं. मुझे बहुत खुशी है एक बार फिर मुझे एक नई पहचान मिली है. इतना आसान नहीं होता कि आपको नेशनल टैलीवजन के अंदर लीड रोल मिले. इस शो को लेकर मैं बहुत ज्यादा उत्साहित हूं.

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सवाल-  आपकी शादी सिर्फ 18 वर्ष की उम्र में हो गई थी. और शादी के बाद लड़कियों की जिंदगी जिम्मेदारियों में ही उलझ कर रह जाती हैं, उस के बाद भी जो मुकाम आप ने हासिल किया, वह आज हम सब के सामने है. यह सफर कैसे तय किया?

मेरी शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी और शादी के 1 साल में ही मैं मां भी बन गई थी. उस के बाद मैं ने कोई काम नहीं किया, मैंने अपना पूरा समय आउट औफ चौइस अपने पति और बच्ची को दिया. 20 वर्ष तक मैं सिर्फ एक गृहिणी बन कर रही और इस बात का मुझे कोई अफसोस भी नहीं है क्योंकि उस समय मेरे लिए मेरा परिवार ज्यादा जरूरी था. 20 साल बाद मुझे एक अवसर मिला “ मिसेज दिल्ली एनसीआर ब्यूटी पेजेंट के लिए जिसके लिए मेरी बेटी ने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया था. उस समय मैं बहुत घबराई हुई थी. आप स्कूल और कालेज के समय में बहुत कौन्फिडैंट रहते हो लेकिन 20 साल घरेलू औरत रहने के बाद वो कौन्फिडैंट, खुद पर से विश्वाश कहीं न कहीं खत्म हो जाता है. लेकिन मेरी बेटी और परिवार ने फिर से मेरे अंदर कौन्फिडैंट जगाया, उन्हें लगता था मैं यह कर सकती हूं और मैंने किया भी. ‘मिसेज दिल्ली एनसीआर’ का खिताब जीतने के बाद मेरे अंदर कौन्फिडैंट, खुद पर विश्वास फिर बढ़ गया.

सवाल-  क्या इस सफर में परिवार का साथ भी मिला, या ये सब खुद ही करना पड़ा?

मेरी बिटिया ने मुझे नई पहचान दिलाने में बहुत मदद की. मेरे पति भी हमेशा मेरा साथ देते हैं. मैं मानती हूं कि ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए परिवार का सहयोग बहुत जरूरी है. आज मैं जो भी हूं परिवार की वजह से हूं.

सवाल-  आपने एक इंटरव्यू में आपने कहा था की जब आप ने अपना सफर शुरू किया था तो आप गृहशोभा, सरिता जैसी मैगज़ीनों में अपनी तस्वीरें भेजा करती थीं. आज उसी पत्रिकाओं के लिए इंटरव्यू देते हुए कैसा फील हो रहा है?

बहुत अच्छा लग रहा है. मुझे याद है कुछ साल पहले मैं गृहशोभा के कवर पेज पर भी आई थी. वह कवर मैंने माधुरी जी, ज़ीनत अमान के साथ शेयर किया था. मैं गृहशोभा की बहुत बड़ी फेन हूं. गृहशोभा और सरिता हिंदी की प्रसिद्ध पत्रिकाओं में से एक हैं.  इन्हें आज भी लोग बहुत चाव से पढ़ते हैं. मैं दिल से गृहशोभा और सरिता शुक्रिया अदा करती हूं इन्होनें मुझे इतना बड़ा अवसर दिया.

सवाल-  पहले ‘मिसेज दिल्ली एनसीआर’ फिर ‘मिसेज इंडिया’, ‘मिसेज एशिया इंटरनेशनल’ और फिर ‘मिसेज यूनिवर्स यूरो एशिया’ का खिताब जीतने का तजरबा कैसा रहा.?

“नथिंग इज इंपौसिबल” मैं हर महिला से यहीं कहना चाहती हूं कि अगर मैं कर सकती हूं तो आप भी कर सकती हैं. जो महिलाएं यह सोचती हैं कि अब शादी हो गई, बच्चे हो गए, अब उन का टाइम निकला गया तो मैं उन्हें यह बताना चाहती हूं कि टाइम कुछ नहीं होता, अपने सपनों को मरने मत दीजिए उन्हें नए पंख दो और अपने सपनों की उड़ान एक बार जरूर भरो.

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सवाल- आप की 24 साल की एक बेटी है, उस के बावजूद आप खुद 25 साल की लगती हैं, यह फिटनैस और हैल्थ आप कैसे मैंटेन करती हैं? अपनी डाइट और फिटनैस शैड्यूल के बारे में बताए.

मैं आपको बता दूं मैं जिम बिलकुल नहीं करती मुझे थायराइड की दिक्कत है, इसलिए मैं वौक करती हूं. मैं डाइटिंग भी नहीं करती, लेकिन खानेपीने पर मैं जरूर ध्यान देती हूं. तला हुआ खाना, चावल इन सबको मैं अवौइड करती हूं. पानी ज्यादा से ज्यादा पीती हूं.

सवाल-   इतना हैकटिक शैड्यूल होने के बाद भी आप घर और बाहर दोनों कैसे मैनेज करती हैं?

घरबाहर मैनेज करना बिलकुल भी आसान नहीं होता, लेकिन परिवार का साथ हो तो सब मुमकिन हो जाता है. आप अपने परिवार को निराश कर के कोई भी काम नहीं कर सकतीं इसलिए मैं उन्हें भी अपना पूरा समय देती हूं. अगर आप घर से खुश हो कर निकलती हैं तो आपका पूरा दिन अच्छा जाता है. इसलिए परिवार को खुश रखना बेहद जरूरी है. मेरे अंदर यह कला है. मैं घर और बाहर आसानी से मैनेज कर लेती हूं. इसमें मेरा परिवार भी मुझे पूरा सपोर्ट करता है.

सवाल-  क्या आप अपनी बेटी को भी फ़ैशन और ग्लैमर की दुनिया में देखना चाहती हैं?

उसकी अपनी मरजी है. अगर वह भी इस फील्ड को चुनना चाहती है तो मुझे खुशी ही होगी.

सवाल-  वह औरतें, या लड़कियां जो आप की तरह ज़िंदगी में कुछ करना चाहती हैं, उन्हें आप क्या मैसेज देना चाहेंगी?

यहीं मैसेज देना चहुंगी कि ‘उम्र एक संख्या की तरह हैं’ अगर मैं कर सकती हूं तो आप सब भी कर सकती हैं. मुझे कई बार सुनने को मिलता है कि बोलते हैं अब तो आपकी बेटी की शादी की उम्र हो रही है और आप ये सब कर रही हैं. ऐसे लोगों को नजरअंदाज करें और अपने मन की करें अपने सपनों को पंख दें. एक बार जब आप अपनी मंजिल तक पहुंच जाते हैं तब आप की आलोचना करने वाले भी आप की तारीफ करने लगते हैं.

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