दुनिया के सब से अमीर आदमी का नाम बिल गेट्स है और उन का घर ई होम का एक अच्छा उदाहरण है. लेकिन केवल बिल बेट्स क्यों, आप भी अपने घर को ई होम बना सकते हैं यानी एक ऐसा घर जो वायरलैस नैटवर्क से जुड़ा हो और घर के सभी गैजेट्स इस वायरलैस नैटवर्क के द्वारा नियंत्रित हों.

ऐसा घर बनाना 50 हजार में भी संभव है, लेकिन घर के कमरों की संख्या और अन्य कारणों से ई होम बनाने का खर्च बढ़ सकता है. इंटीरियर डिजाइनर मधुप्रिया की मानें तो घर के खुद के द्वारा संचालित होने की सुविधा और सुरक्षा के फायदे को देखते हुए इस में लगने वाली राशि कोई ज्यादा नहीं है. माईक्रोसौफ्ट कंपनी बिल गेट्स की कंपनी जीओस इंटरनैशनल के साथ मिल कर दिल्ली, मुंबई, बैंगलुरु, हैदराबाद, चैन्नई और सूरत में ई होम बना रही है. बाद में 20 अन्य शहरों में भी यह सुविधा शुरू की जाएगी. रिमोट से परदे को उठाने से ले कर मनपसंद फिल्म तथा सुरक्षा के उपाय देने वाली माईक्रोसौफ्ट कंपनी के सभी उत्पाद ई होम में उपयोग में आ जाते हैं. माईक्रोसौफ्ट सैमसंग, आईरीवर, जीओस तथा अन्य की सहायता से आप को ई होम की सुविधा उपलब्ध कराता है.

ई होम विंडोज पर आधारित है. विंडोज एक्सपी मीडिया सैंटर प्लेटफार्म पर संगीत के लिए जून उपकरण (आईपौड का विकल्प), गेम बौक्स (गेम स्टेशन), एमएसएन तथा विंडोज मोबाइल एकदूसरे से जोड़ दिए जाते हैं. आप के ई होम में जैसे ही कोई प्रवेश करता है आप के मोबाइल पर आप को इस की सूचना मिल जाती है. आप के द्वारा दिए गए प्रोग्राम के अनुसार किसी के घर आने पर अलार्म बजने लगेगा तथा घर में लगे कैमरे उस व्यक्ति की सभी गतिविधियों की फोटो क्लिक करने लगेंगे. आप के घर में कौन आया है और वह क्या कर रहा है, यह आप के मोबाइल पर भी आने लगेगा. आप के घर का सिक्यूरिटी सिस्टम पुलिस थाने को भी इस की सूचना दे देगा.

घर में आप की पत्नी तथा बच्चे क्या कर रहे हैं, इस की भी जानकारी हर क्षण आप के अपने मोबाइल पर मिलती रहेगी. आप के घर का नौकर अपना काम आप के बताए अनुसार कर रहा है अथवा नहीं, यह जानकारी भी आप को मिल जाएगी. यदि दिन का समय है तो घर की सभी खिड़कियां खुद खुल जाएंगी और रात होने पर सभी दरवाजे खुद लौक हो जाएंगे. ई होम के सहारे आप दफ्तर में काम करते समय भी पूरी तरह अपने घर को अपनी इच्छानुसार नियंत्रण में रख सकते हैं. घर में लगा मीडिया सैंटर आप को संगीत, वीडियो, रेडियो, टीवी, डीवीडी, इंटरनैट डाउनलोड, इंटरनैट चैट, सर्च और ई मेल भेजने व पाने की सुविधा उपलब्ध करा देगा. आप रिमोट कंट्रोल के सहारे औनस्क्रीन मेनू पर जा कर म्यूजिक से ले कर चैटिंग या ब्लौगिंग आदि का मजा ले सकेंगे.

कैसे बनता है डिजाइनर घर

अब सभी बडे़ शहरों में डिजाइनर फ्लैटों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है. जो ग्राहक डिजाइनर फ्लैट खरीदना चाहते हैं, वे बिल्डर से नैकेड फ्लैट ही खरीदते हैं. पटना के लोकप्रिय होम्स प्राइवेट लिमिटेड के अजीत कुमार के अनुसार, नैकेड फ्लैट का अर्थ बिना दरवाजाखिड़की लगा फ्लैट है. डिजाइनर फ्लैट खरीदने वाला नैकेड फ्लैट खरीद कर अपनी इच्छानुसार दरवाजेखिड़कियां आदि लगाता है. फ्लैटों के फर्श पर भवन निर्माता मारबल भी नहीं लगाता, लेकिन डिजाइनर फ्लैट के ज्यादा शौकीन ग्राहक इस काम में बिल्डर की मदद जरूर लेते हैं. डिजाइनर आशियाने की चाहत का इच्छुक कस्टमर प्रत्येक सप्ताह अपने आर्किटैक्ट से मिल कर फ्लैट में लगने वाली आवश्यकताओं की समीक्षा करता है तथा बिल्डर और आर्किटैक्ट के बीच पीआरओ का भी काम करता है. सामान्यतया कस्टमर एक व्यक्ति को फ्लैट में दिन के समय काम देखने की जिम्मेदारी सौंप देता है. लेकिन इन सब से पहले वह अपनी पूरी जरूरत अपने आर्किटैक्ट को बताता है ताकि आर्किटैक्ट बिल्डर द्वारा बनाए गए नक्शे की सीमा के अंदर ही जितना ज्यादा संभव हो ग्राहक की आवश्यकतानुसार डिजाइनर फ्लैट तैयार कर सके.

पटना के बोरिंग रोड स्थित जे.जे. कौंप्लैक्स नामक डिजाइनर अपार्टमैंट बनवाने वाले दीपक कुमार के अनुसार, डिजाइनर फ्लैट एक समय बाद ग्राहक को सस्ता पड़ता है, क्योंकि यह एक निवेश का काम करता है.

‘‘वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह बैंक एफडी की तरह सुरक्षित है,’’ यह कहना है इस योजना के जानकारों का.

‘‘रीयल एस्टेट आज के जमाने में निवेश का एक अच्छा माध्यम बन रहा है,’’ यह कहना है दलाल स्ट्रीट जर्नल के कार्यकारी संपादक जे.पी. सेठी का.

उन के अनुसार रीयल एस्टेट स्थानांतरण के द्वारा कोई भी व्यक्ति अपने बुढ़ापे को सुरक्षित बना सकता है. इस योजना से आर्थिक स्वतंत्रता मिल जाती है जो कि आज के ग्लोबलाइजेशन के जमाने में, जब संयुक्त परिवारों का विघटन हो रहा है, अति आवश्यक होता जा रहा है.

कला नहीं विज्ञान है यह

आज के जमाने की आवश्यकता ऐसे स्टाइलिश होम की है, जहां पहुंच कर उस का मालिक दिन भर की सारी थकान भूल जाए. मन करे तो गार्डन में लगे झूले पर बैठ मनपसंद संगीत मोबाइल या आईपौड पर सुन सके या अपने घर के पर्सनल वर्क स्टेशन पर लगे इंटरनैट कनैक्शन को खोल वाल स्ट्रीट जर्नल की लीड स्टोरी देख सके. मन करे तो अपने लिविंग रूम में प्रसिद्ध चित्रकार मनजीत बाबा, मंजू डोडिया या जेमनी राया जोगन की कलाकृतियों को दीवारों पर देख मानसिक प्रसन्नता महसूस कर सके. डिजाइनर होम का सीधा सा अर्थ है घर के मालिक और परिवार की आवश्यकता को पूरा करने वाला कलात्मक मकान या फ्लैट.

अब डिजाइनर होम का एक अर्थ ग्रीन होम भी है. मकान और फ्लैट की सजावट अब महज कला नहीं पूरा विज्ञान है. बिल्डर, कस्टमर, आर्किटैक्ट और इंटरनल आर्किटैक्ट फिर परंपरागत सिविल इंजीनियर और राजमिस्त्री सब की मेहनत से बनता है डिजाइनर होम. अब इसी कारण इसे ग्रीन होम या फ्लैट भी बनाने की कोशिश हो रही है.

बेहतर स्वास्थ्य के लिए

पटना में डिजाइनर होम्स की अपेक्षा डिजाइनर फ्लैटों की संख्या ज्यादा है. सेन ऐंड लाल कंसल्टैंट के कृष्ण लाल के अनुसार, पटना में डिजाइनर कौंसैप्ट पर पहला अपार्टमैंट बोरिंग रोड स्थित बसंत बिहार कालोनी का पुष्पांजलि अपार्टमैंट है. पाटलिपुत्र स्थित एजेंसी गार्डन भी एक अच्छा डिजाइनर होम कौंसैप्ट वाला अपार्टमैंट है. एक साधारण अपार्टमैंट के एक जनरल फ्लैट की अपेक्षा डिजाइनर होम कौंसैप्ट पर बना अपार्टमैंट का फ्लैट कीमत में ग्राहक को कम से कम दोगुने का पड़ता है. वैसे रहने वाला इस से ज्यादा खर्च भी कर सकता है. आई एम स्पैशल, माई चौइस इज स्पैशल की विचारधारा वालों के लिए डिजाइनर होम या डिजाइनर फ्लैट एक खास एहसास कराता है.

छज्जूबाग के शांति कुंज में रहने वाली वीणा गुप्ता का फ्लैट इस की अच्छी मिसाल है. उन के अनुसार, डिजाइनर होम टाइम मैनेजमैंट तथा डिजाइनर लिविंग के उद्देश्य से बनाए जाते हैं. मकान या फ्लैट में पेड़पौधों का रहना अति आवश्यक है. पेड़पौधे वातावरण व घर में ग्रीन इफैक्ट पैदा करते हैं, जो मनुष्य के तनाव को कम करता है. ग्लोबलाइजेशन के दौर में बिल्डिंग की रेटिंग यू.एस. ग्रीन बिल्डिंग के रेटिंग सिस्टम के अनुसार की जाती है और सभी अच्छे बिल्डर अपनी बिल्डिंग, कौंप्लैक्स या मल्टी रेजिडेंशियल कम शौपिंग मौल व यूरो पार्क की रेटिंग यू.एस. की रेटिंग एजेंसी से कराना चाहते हैं.

यू.एस. संस्था भारत में कई बिल्डरों को गोल्ड रेटिंग भी दे चुकी है. इस से ऊपर की रेटिंग प्लैटिनम की भी भारत की कुछ अपकमिंग प्रोजैक्ट्स को मिलने की संभावना है. इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के अनुसार लीड सर्टिफिकेट (यू.एस.) वाले ग्रीन होम्स अभी लगभग 20,000 वर्गफुट का है जिन के आने वाले वर्षों में बढ़ कर 10 हजार मिलियन स्क्वेयर फुट हो जाने की संभावना है.

कम लागत

अब डिजाइनर ग्रीन बिल्डिंग, होम आदि में सोलर पैनल (सौर ऊर्जा व बरसात के पानी के सही इस्तेमाल के लिए), फ्लाइऐश बेस्ड सीमैंट, सिरैमिक टाइल्स, रिसाइकिल्डवाटर और इको फ्रैंडली कैमिकल्स के साथसाथ ओवरहैड खर्च कम करने की भी कोशिश की जा रही है. ‘‘ऐसे अपार्टमैंटों, फ्लैटों या होम्स की बनावट ऐसी होती है कि उन का बिजली का बिल समान वर्गफुट वाले एक साधारण घर की तुलना में आधा आता है. ग्रीन हाउस रहने के कारण घर में नैचुरल हवा ज्यादा आती है तथा इस में रहने वाले साधारण मकानों में रहने वालों की अपेक्षा कम बीमार पड़ते हैं,’’ यह कहना है डा. सुनील कुमार का.

‘‘डिजाइनर ग्रीन होम या फ्लैट बनाने के लिए बिल्डर इंजीनियरों व आर्किटैक्ट के अतिरिक्त पर्यावरण विशेषज्ञों को भी अपने टीम में शामिल करते हैं. इस के अतिरिक्त ऐनर्जी सेविंग डिवाइसेज बेचने वाली कंपनियों के अधिकारियों की भी मदद ली जानी चाहिए. सोलर ऐनर्जी सस्ती बैठती है इस कारण डिजाइनर होम या फ्लैट में सोलर सिस्टम का प्रयोग किया जाना चाहिए,’’ यह कहना है बिहार राज्य बिजली बोर्ड के पूर्व अधिकारी व तकनीकी सलाहकार जगदीश प्रसाद वर्मा का. उन का पाटलिपुत्र के लोटस अपार्टमैंट में फ्लैट डिजाइनर फ्लैट का एक अच्छा उदाहरण है.

क्लासिकोन कंपनी के बिल्डर दीपक कुमार सिन्हा के अनुसार, डिजाइनर होम या फ्लैट का इको फ्रैंडली होने के अतिरिक्त भूकंपरोधी होना भी आवश्यक है.

इक्विटी होम योजना

भारती अपार्टमैंट, रूकनपुरा के बिल्डर राकेश के अनुसार बिल्डिंग को भूकंपरोधी बनाने में खर्च काफी बढ़ जाता है मगर फ्लैट लेने वाले को यह जरूर देख लेना चाहिए कि फ्लैट भूकंपरोधी है अथवा नहीं. पटना की जमीन भूकंप से प्रभावित होने वाली स्थिति में है, इस कारण इस मुद्दे पर ध्यान देना जरूरी है. भारत सरकार इक्विटी होम योजना लाने की तैयारी कर रही है. इक्विटी होम योजना के अंतर्गत आप बिना फ्लैट या मकान खरीदे भी अपना मकान रखने जैसा सुख प्राप्त कर सकेंगे. इक्विटी होम्स का कौंसैप्ट भारत सरकार को अमेरिका से मिला है. मानसरोवर अपार्टमैंट के राकेश और क्लासिकोन कंपनी के दीपक कुमार सिन्हा के अनुसार, इक्विटी होम्स कौंसैप्ट में वित्त संस्थान डैवलपर्स से बिल्डिंग, मकान और अपार्टमैंट खरीद कर रहने वालों को रैंट पर देती है. इस योजना में मकान लेने वाले को रैंट के अतिरिक्त कुछ प्रीमियम भी प्रत्येक माह देना होता है. वित्त संस्थान को जब फ्लैट में लगने वाली कुल लागत मिल जाती है, तो रहने वाले को मकान का डीड तैयार कर दे दिया जाता है. इस योजना का सब से बड़ा लाभ यह है कि कस्टमर को वन टाइम डाउन पेमैंट नहीं करनी पड़ती. तो आप भी अब मौडर्न बन जाएं और नए जमाने के ई होम्स में रहने का आनंद उठाएं.

VIDEO : फंकी पाइनएप्पल नेल आर्ट

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