एसआईपीआरआई के प्रमुख डैन स्मिथ का मानना है कि कोरोना वायरस के संकट की वजह से यूरोपीय देशों और अमेरिका में संभवतया आर्थिक मंदी ने दुनिया की ताक़त के पश्चिम से पूरब को ट्रांस्फ़र होने के लिए ज़रूरी पृष्ठभूमि मुहैया कर दी है.

एक न्यूज़ एजेंसी को दिए इंटरव्यू में डैन स्मिथ ने जोर दिया कि, “दुनिया की ताक़त के अमेरिका से चीन में ट्रांस्फ़र होने के संकेत मिल चुके हैं और लंबी मुद्दत के दौरान तेज़ आर्थिक विकास इसका सबसे बड़ा तत्त्व है. यह प्रक्रिया 2008 के वैश्विक आर्थिक व वित्तीय संकट के उभरने के वक़्त से अच्छी तरह ज़ाहिर हुई है, इसलिए मेरे विचार में दुनिया की ताक़त के पश्चिम से पूरब को ट्रांस्फ़र होने के लिए ज़रूरी पृष्ठिभूमि तैयार हो गई है. लेकिन, मैं जितना विकास की उम्मीद कर रहा था, उससे कम विकास हुआ है.

डैन स्मिथ ने कहा कि शायद एक या दो संकट से पश्चिम के युग के ख़त्म होने और पूरब के युग के शुरू होने की वास्तविक निशानी ज़ाहिर हो जाए.

कोरोना वायरस की वजह से लगभग पूरी दुनिया थम सी गई है. सबकुछ ठप है. मगर जिस देश से पूरी दुनिया इस हाल में पहुंची उस देश के बाज़ार फिर से खुल गए हैं. बंद दुनिया के बंद बाजारों के बीच उसने अपने बाज़ार खोल दिए हैं ताकि वह उस कोरोना के कारोबार से मुनाफा कमा सके जिस कोरोना को फैलने देने का दोषी वह खुद ही है. चीन ने सिर्फ एक महीने के अंदर कोरोना के नाम पर जितना व्यापार किया है वह आंखें खोलने वाला है.  कहने वाले कह रहे हैं कि कोरोना की आड़ में चीन दुनिया का अगला सुपरपावर बनने के लिए अपनी चाल चल चुका है.

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क्या आपको पता है कि दुनियाभर को मास्क, पीपीई सप्लाई करने वाले चीन ने जनवरी महीने से ही इनकी जमाखोरी शुरू कर दी थी, जिसका फायदा उसको ऐसा मिला है कि कोरोना काल में दुनिया के टौप 100 अरबपतियों में सिर्फ चीन के अरबपतियों की संपत्ति बढ़ी है. यह सवाल इसलिए क्योंकि बंद पड़ी दुनिया में एक जगह ऐसी है जहां सारे बाजार खुले हैं. सारा कारोबार जारी है, कारखाने चल रहे हैं, मशीनें फटाफट माल बना रही हैं. दुनिया को कोरोना से लौक करके चीन अनलौक हो गया है. वह दुनिया के बाजारों को वीरान करके अपने बाजारों से दुनिया चला रहा है.

आंकड़ों पर एक नजर :

चीन के एक्सपोर्ट डिपार्टमेंट के आकंड़े बताते हैं कि चीन दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में 3.86 बिलियन यानी 3.60 अरब मास्क बेच चुका है. 3.7 अरब प्रोटैक्टिव क्लोथिंग पीस चीन ने दुनिया में पहुंचा दिए हैं. 16,000 वैंटिलेटर और 20.84 लाख कोरोना टैस्टकिट उसने दुनिया को बेचे और ये सारा निर्यात सिर्फ एक महीने यानी 1 मार्च से 1 अप्रैल के बीच किया गया है.

घुटनों पर सुपरपावर :

अमेरिका जैसे सुपरपावर के साथसाथ इटली, स्पेन, जरमनी, फ्रांस जैसे विकसित देशों की इकोनौमी भी इस वक्त घुटने पर है जबकि चीन की इकोनौमी नई ऊंचाइयां छू रही है.

चीन दुनिया के लोगों का सिर्फ जीवन ही नहीं, बल्कि उनसे उनकी दौलत भी छीन रहा है. कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर के अमीरों को बड़ा नुकसान हुआ है. लेकिन चीन के अरबपतियों को इस संकट से बड़ा फायदा हुआ है.

चीन में अरबपतियों की संख्या बढ़ी :

चीन की एक संस्था हू-रन  की एक रिसर्च के मुताबिक,  दुनिया के 100 टौप अरबपतियों में सिर्फ 9 प्रतिशत की संपत्ति बढ़ी है और ये सभी अरबपति चीन से हैं. जबकि, दूसरे देशों के 86 प्रतिशत अरबपतियों की संपत्ति पहले से कम हुई है. वहीं, 5 प्रतिशत अरबपतियों की संपत्ति में कोई अंतर नहीं आया है. यही नहीं, दुनिया के 100 टौप अरबपतियों की लिस्ट में चीन के 6 नए लोग शामिल भी हुए हैं जबकि भारत के 3और अमेरिका के 2 लोग अब इस लिस्ट से बाहर हो गए हैं.

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चीन का मनी प्लान :

यह सच है कि महामारी पर चीन के मनी प्लान की भनक किसी को नहीं लगी. अब 3 महीने बाद आलम यह है कि चीन से तो कोरोना खत्म हो गया लेकिन बाकी देश अब उसी चीन के दरवाजे पर इन सामानों के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं.

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