देश में गरीब-अमीर की खाई को चौड़ा करने के लिए हर शहर में पते के अनुसार वर्ग भेद कर लिया गया था. एक जमाने में एक ही गली में छोटे और बड़े मकान हुआ करते थे पर अब लगभग हर शहर में या उपशहर में अमीरों के इलाके अलग हैं, मध्यवर्गों के अलग, गरीबों के अलग, मजदूरों के अलग. इन में भी धर्म और जाति का भेदभाव था. अब ऊंचे घरों की औरतों का गरीबों से संबंध केवल घरेलू नौकरों तक सीमित रह गया है. अब तो सब्जी वालों की दुकानें भी मौलों में खुलने लगी हैं जहां गरीब सब्जी वाला या सब्जी वाली नहीं दिखती.

साथ ही मिलेगी ये खास सौगात

  • 2000 से ज्यादा कहानियां
  • ‘कोरोना वायरस’ से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • हेल्थ और लाइफ स्टाइल के 3000 से ज्यादा टिप्स
  • ‘गृहशोभा’ मैगजीन के सभी नए आर्टिकल
  • 2000 से ज्यादा ब्यूटी टिप्स
  • 1000 से भी ज्यादा टेस्टी फूड रेसिपी
  • लेटेस्ट फैशन ट्रेंड्स की जानकारी
Tags:
COMMENT