‘कभीकभी मेरे दिल में खयाल आता है कि ये बदन ये निगाहें मेरी अमानत हैं, ये गेसुओं की घनी छांव है मेरी खातिर, ये होंठ और ये बांहें मेरी अमानत हैं...’ गाने की इन पंक्तियों को सुन कर जो पहला खयाल जेहन में आता है वह यह है कि पुरुष को यह अधिकार किस ने दिया कि वह किसी भी महिला को यह कह सके कि तुम्हारा शरीर, तुम्हारी खूबसूरती और तुम्हारा वजूद मेरे लिए है या मेरी अमानत है? हां, प्यार और उस में लिप्त प्रेमी के लिए यह कहना भावों में बहने समान है, परंतु क्या यह समाज को आईना दिखाने जैसा नहीं है? क्या यह लोगों की सोच को उजागर करने जैसा नहीं है? क्या यह सोच हर लड़की के जीवन को प्रभावित नहीं करती?

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