महंगे परिधानों और गहनों से लदी महिलाएं जब बड़ीबड़ी गाडि़यों से राजाओं की तरह सजेधजे अपने पतियों के संग उतरीं तो सभी की नजरें उसी ओर घूम गईं.

उन के स्वागत और सम्मान में हाल के मुख्यद्वार पर कुछ लोग फूलमालाएं ले कर खड़े थे और उन्हें सब से आगे की तरफ ले जा रहे थे. सब से आगे उन के लिए महंगे सोफे लगे थे जिन पर जा कर वे लोग विराजमान हो गए.

पीछे बैठे लोग भी समझ गए थे कि वे जरूर बड़ी हस्ती के लोग हैं. दरअसल, आज जो महान विभूति यहां प्रवचन देने आए हैं, ये उन के उच्च स्तरीय शिष्यों के परिवार के लोग हैं, जिन्हें यहां खास स्थान मिला है.

ऐसा नजारा देश के किसी भी कोने में चले जाएं हर जगह देखने को मिल जाएगा. अब प्रवचन भी तो एयरकंडीशंड कमरों में होते हैं जहां एअरकंडीशंड लंबी गाडि़यों में आने वालों का खास ध्यान रखा जाता है.

सत्संग की महिमा

नेहा जब विवाह कर अपनी ससुराल में गई तो उस के यहां इष्ट देव को पूजने जाने का रिवाज है. सब बड़ी गाड़ी ले कर वहां पहुंच गए, गरमी बहुत तेज थी और लंबी कतार में खड़े होने के बाद दर्शन हो रहे थे. नेहा ने मन ही मन सोचा आज तो गरमी में शरीर का बेहाल हो जाएगा. किंतु कतार छोड़ आगे भेज दिया गया और

जल्दी से दर्शन कर बड़ी रकम भेंट चढ़ा कर वे लौट आए.

उस के सास व ससुर बहुत प्रसन्न थे कि झट से काम हो गया. किंतु नेहा की तीसरी आंख खुल गई थी, उस से रहा न गया तो अपनी अफसर सास से पूछ, ‘‘बैठी कि मां यह क्या हम इष्ट देव के यहां भी अपनी पहचान और रूतबे से दूसरों को पीछे छोड़ आग निकल जाते हैं? क्या फायदा ऐसे धर्म का? कम से कम वहां तो सभी को बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए?

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