बरात लड़की वालों के दरवाजे पर पहुंच चुकी थी. लड़की की मां दूल्हे की अगवानी के लिए आरती की थाली लिए पहले से ही दरवाजे पर खड़ी थीं. दूल्हे को घोड़ी से उतारने के लिए दुलहन के पिता और भाईर् आगे बढ़े. घोड़ी से उतरते ही दूल्हा लड़खड़ा गया तो उन्होंने सोचा बहुत देर से घोड़ी पर बैठा था, इसलिए ऐसा हुआ होगा. लेकिन स्टेज तक पहुंचतेपहुंचते उन को सारा माजरा समझ में आ गया. दूल्हे साहब ने जम कर शराब पी रखी थी, इसलिए उस से चला भी नहीं जा रहा था. किसी तरह उसे स्टेज पर ले जा कर कुरसी पर बैठाया गया. दोनों बापबेटे ने आंखोंआंखों में ही बात की.

बेटे ने अपने पिता के चेहरे पर चिंता की रेखाएं देख कर उन के कान में कहा, ‘‘कोई बात नहीं पापा, खुशी में ज्यादा पी ली होगी.’’

इस से पहले कि आपस में कुछ और कहते दुलहन के रूप में सजी तनीषा अपनी सहेलियों के साथ स्टेज पर पहुंच गई, वरमाला की रस्म अदायगी के लिए. लेकिन जैसे ही दूल्हे को कुरसी से उठने को कहा गया, वह जरा सा उठ कर फिर कुरसी पर धम्म से बैठ गया. इस बार 2 लोगों की मदद से उसे उठाया गया. उस ने तनीषा के गले में वरमाला डालने के लिए अपने दोनों हाथ हवा में लहराए, लेकिन यह क्या उस के हाथ बिना वरमाला डाले लहरा कर वापस आ गए. जब 2-3 बार ऐसा हुआ तो आसपास के लोग आपस में कानाफूसी करने लगे.

दुलहन के लिबास में लजाईशरमाई तनीषा ने सारा माजरा समझते ही उग्र रूप धारण कर लिया और जयमाला को स्टेज पर पटक कर बोली, ‘‘नहीं करनी मुझे इस शराबी से शादी,’’ और पैर पटकते स्टेज से जाने लगी, तो उस की इस अप्रत्याशित प्रतिक्रिया से सभी मेहमान सकते में आ गए.

इस से पहले कि कोई उसे रोके, वह अपने कमरे में गई और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया. दोनों पक्षों में हलचल मच गई.

तनीषा के मातापिता ने उसे दरवाजा खोलने के लिए कहा, तो वह इस शर्त पर खोलने को राजी हुई कि उस के निर्णय का विरोध नहीं होगा. दरवाजा खुलते ही सब यह देख कर हैरान रह गए कि उस ने दुलहन के कपड़े बदल कर साधारण कपड़े पहन लिए थे.

उस की मां यह देखते ही चीख पड़ी, ‘‘तेरा दिमाग खराब हो गया है… ऐसे कोई बरात दरवाजे से वापस करता है… कितने इंतजार के बाद तो यह दिन आया है और तू सब बरबाद करने पर तुली हुई है… तू ने यह सोचा कि कितने पैसों की बरबादी होगी? तेरे पापा कहां से लाएंगे इतने पैसे? बिरादरी में हम क्या मुंह दिखाएंगे? कितनी दूरदूर से लोग आए हैं, शादी में शामिल होने के लिए. तेरे इस बरताव के कारण कोई दूसरा रिश्ता होना भी मुश्किल हो जाएगा… बाद में सब ठीक हो जाता है, लेकिन तू किसी की सुने तब न…’’

‘‘नहीं, इस का निर्णय ठीक है, मैं अपनी बेटी को कुएं में नहीं धकेल सकता. वह जब ऐसे खास मौके पर भी इतनी पी कर आया है, तो उस का क्या विश्वास है कि उसे शराब की लत नहीं होगी… मेरी बेटी पढ़ीलिखी है, उसे अपने जीवन के निर्णय लेने का पूरा हक है… मैं लड़के वालों से सारी स्थिति का पता करता हूं, उस के बाद जो यह चाहेगी, वही होगा,’’ तनीषा के पिता ने अपनी पत्नी की बात काटते हुए कहा.

‘‘इस के साथ आप की बुद्धि पर भी पत्थर पड़ गए हैं… यह तो नासमझ है, आप को तो समझदारी से काम लेना चाहिए…’’ पत्नी ने आक्रोश में कहा.

‘‘मैं अपनी जान दे दूंगी, लेकिन ऐसे पियक्कड़ से शादी नहीं करूंगी. अपनी सहेलियों के सामने मेरा सिर शर्म से झुक गया… मेरा कितना मजाक बनाएंगी. आप को नहीं पता, कितनी बार मैं ने उन के सामने नशे में धुत्त व्यक्ति की ऐक्टिंग कर के उन्हें हंसाया है… उन के विरोध में बोला है, आज मेरा पति… मैं कल्पना भी नहीं कर सकती…’’ तनीषा ने रोतेरोते अपना निर्णय सुनाया.

यह सुन उस की मां उस के पापा की ओर देखते हुए बोलीं, ‘‘और चढ़ाओ बेटी को सिर… मैं ने कितनी बार समझाया कि बेटी को इतना मत पढ़ाओ, लेकिन मेरी सुनता कौन है… अब भुगतो, एक हमारा जमाना था…’’

वे कुछ और बोलतीं उस से पहले ही दूल्हे का भाई उन्हें यह कह कर बुलाने आया कि उस के मम्मीपापा उन से मिलना चाह रहे हैं. अभी तक तनीषा का भाई तथा और लोग मूक दर्शक बने खड़े थे. वे इधरउधर चले गए.

तनीषा के पापा ने अपनी पत्नी को साथ ले जाना उचित नहीं समझा और अपने

बेटे तथा उस के मामा के साथ उन से मिलने पहुंच गए. बैठने के बाद थोड़ी देर चुप्पी छाई रही. दुल्हे के मातापिता के चेहरों से शर्मिंदगी के भाव साफ झलक रहे थे. फिर पिता ने कहा, ‘‘माफ कर दीजिए, हमारे बेटे ने तो हमें कहीं का नहीं छोड़ा… उसे पीने की थोड़ीबहुत आदत है, लेकिन ऐसे मौके पर भी इतना पी कर आएगा, मैं सोच भी नहीं सकता था. असल में उस के दोस्तों ने ही उसे इस हाल में पहुंचाया. आप तो जानते हैं आज के बच्चों का लाइफस्टाइल, लेकिन मैं वादा करता हूं कि शादी के बाद आप को कभी शिकायत का मौका नहीं मिलेगा, कृपया रिश्ता स्वीकार कर लीजिए. इसी में दोनों परिवारों की भलाई है.’’

‘‘रमेशजी, मेरे परिवार की किस में भलाई है, इस के लिए आप को सोचने की आवश्यकता नहीं है. मैं ऐसे नशेड़ी दामाद को कभी स्वीकार नहीं कर सकता. आप ने मुझे धोखा दिया है. पहले क्यों नहीं बताया कि उसे नशे की लत है? यह तो अच्छा हुआ कि फेरों के पहले भेद खुल गया, नहीं तो मेरी बेटी की जिंदगी बरबाद हो जाती. अब हमारे धन और मानसम्मान की भरपाई कैसे होगी? मेरी बेटी को आप के बेटे के कुकृत्य से जो सदमा लगा है, उस के लिए आप के पास कोई समाधान है?’’

‘‘भाई साहब, मैं आप से दोबारा माफी मांगता हूं. असल में मैं ने सोचा था कि एक बार शादी हो जाएगी तो वह सुधर जाएगा…’’

उन की बात बीच में ही काटते हुए तनीषा के मामा बोले, ‘‘सुधारने के लिए हमारी ही बेटी मिली थी? अपने स्वार्थ के लिए हमारी बेटी के सपने चूरचूर करने का आप को क्या अधिकार था? अब यह शादी नहीं हो सकती और जो भी अभी तक कपड़े और गहनों का लेनदेन हुआ है, उस का हिसाब कर लीजिए.’’

दूल्हे को अब तक होश आ गया था, वह दूर सिर झुकाए बैठा था. उस के पिता भारी मन से उठे और उस के पास जा कर उसे कंधे से पकड़ कर उठाते हुए गाड़ी में बैठा कर चले गए. पीछेपीछे बाकी बराती भी अपमानित होने के कारण झल्लाए से लौट गए.

थोड़ी देर पहले जिस जगह चारों ओर सजेसंवरे लोगों की चहलपहल थी, बैंडबाजे की धुन पर बच्चे, जवान और बूढ़े थिरक रहे थे, वहां सन्नाटा पसरा था. किराए पर जो भी सामान आया था, उन्हें समेटने के लिए आए लोग प्रश्नवाचक दृष्टि से सारे वातावरण को घूर रहे थे. कमरे में एक ओर तनीषा घुटनों में मुंह छिपाए बैठी थी, तो दूसरी तरफ उस के मातापिता नि:शब्द पलंग पर लुढ़के थे. छोटा भाई आशीष बाहर सामान ढोने वालों को निर्देश दे रहा था.

सच में समय अपना कब क्या रंग दिखा दे, हम कल्पना भी नहीं कर सकते. हमें उस के आगे घुटने टेकने ही पड़ते हैं. अब इस परिवार को तनीषा के भविष्य के लिए नए सिरे से सोचना पड़ेगा. गलती किसी की और भुगतना पड़ेगा किसी और को. लोगों की यह धारणा कब बदलेगी कि विवाह कोई जादू की छड़ी है कि उस के होते ही कोई इनसान बदल जाएगा? मांबाप जब अपने बेटे की नशे की लत नहीं छुड़ा पाए, तो किसी अनजानी लड़की से कैसे उम्मीद कर सकते हैं और उस के लिए हम कैसे किसी दूसरे परिवार की लड़की को बली का बकरा बना सकते हैं?

दूल्हे पवन को इस घटना से बहुत बड़ा झटका लगा था. वह पढ़ालिखा था, एक अच्छी कंपनी में काम करता था. दोस्तों की गलत संगत से उसे पीने की लत लग गई थी, लेकिन ऐसे मौके पर भी उस के दोस्त ऐसी घटिया हरकत करेंगे, यह उस के लिए बहुत अप्रत्याशित था. सारे घटनाचक्र ने उस को झकझोर दिया था. उसे अपनेआप से घृणा होने लगी. उस के मनमस्तिष्क में आंदोलन चलने लगा कि उसे क्या हक था अपने कुकृत्य से मातापिता और किसी दूसरे परिवार को तबाह करने का. उसे आत्मग्लानि हुई और वह पश्चात्ताप की आग में जलने लगा. फिर मन ही मन प्रतिज्ञा की कि वह इस का प्रायश्चित्त कर के रहेगा.

यह सचाई है कि जब हम कुछ ठान लेते हैं, तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता. उस ने मन ही मन शराब और शराबी दोस्तों से किनारा करने की ठान ली. वह अपने मातापिता के पास जा कर उन के पैरों से लिपट कर खूब रोया और माफी मांगते हुए बोला कि वह अब कभी शराब को हाथ नहीं लगाएगा. वे लोग अपमानित हो कर इतने सकते में थे कि कुछ भी नहीं बोले.

पवन की तनीषा के घर जाने की हिम्मत नहीं थी, लेकिन उस ने मोबाइल पर माफी मांगने का मैसेज छोड़ा और लिखा कि अपने कुकृत्य के लिए वह बहुत शर्मिंदा है और उस का प्रायश्चित्त कर के रहेगा. हो सके तो उस के लिए वह इंतजार करे. तनीषा ने कोई उत्तर नहीं दिया.

पवन ने अपने सभी दोस्तों से किनारा कर लिया और डाक्टर के पास अपने पीने की समस्या को ले कर गया. उस का इलाज शुरू हो गया. उस ने औफिस के बाद अधिकतर समय जिसे वह अपने दोस्तों के साथ बिताता था, अपने परिवार के साथ बिताने लगा. पार्टियों में जाना बंद कर दिया.

आरंभ में उसे काफी बेचैनी हुई, लेकिन धीरेधीरे उस में परिवर्तन आने लगा. पवन के मातापिता उस की इस अप्रत्याशित प्रवृत्ति को देख कर दंग रह गए. मन ही मन तनीषा को धन्यवाद देने लगे कि उस के द्वारा विवाह को ठुकरा देने के कारण ही उस में यह परिवर्तन आया है. वे उस के सुखद भविष्य के लिए आशान्वित हो गए. अत: तनीषा को अपनी बहू के रूप में देखने की कल्पना करने लगे, लेकिन अगले ही पल फिर यह सोच कर उन का मन बुझ जाता कि यदि उस ने स्वीकार नहीं किया तो?

तनीषा के घर में जब भी उस के विवाह की चर्चा होती, तो वह उठ कर चली जाती. उसे बहुत मानसिक आघात लगा था. उसे वे दिन याद आते थे जब वह सगाई के बाद कई बार पवन से मिली थी और फोन पर तो उस से उस की लगभग प्रतिदिन बात होती थी. उसे पहले ही पता होता कि वह पियक्कड़ है, तो कभी उस से रिश्ता नहीं रखती. उस ने अपने मातापिता से कह दिया कि वह अभी मानसिक रूप से विवाह के  लिए बिलकुल तैयार नहीं है, इसलिए उसे उस के हाल पर छोड़ दें. नौकरी तो वह करती ही थी, व्यस्त रहने के लिए उस ने हौबी क्लास जौइन कर ली.

समय बीतता गया. करीब 1 साल बाद हिम्मत कर के पवन तनीषा के औफिस पहुंच गया. उसे अचानक देख कर वह अचकचा गई और फिर बोली, ‘‘तुम यहां किसलिए आए हो? मैं तुम से कोई संपर्क नहीं रखना चाहती.’’

‘‘प्लीज एक बार मेरी बात सुन लो, मैं बदल गया हूं, अपनी बुरी आदत मैं ने छोड़ दी है.’’

लेकिन तनीषा ने उस की एक न सुनी पवन उस की इस प्रतिक्रिया के लिए पहले से

ही तैयार था. 1 हफ्ते बाद वह फिर उस से मिला और बोला, ‘‘मैं प्रायश्चित्त करना चाह रहा हूं, प्लीज माफ कर दो.’’

लेकिन इस बार भी तनीषा ने उस की बातों को अनसुना कर दिया और पहले वाला ही जवाब दिया.

मगर पवन निराश नहीं हुआ. उस ने अपना प्रयत्न जारी रखा. धीरेधीरे उस के मिलते रहने से तनीषा का दिल पिघलने लगा. एक दिन जब पवन ने उस से कहा कि वह उस से बहुत प्यार करता है और उस के बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता, तो उस के दिमाग में हलचल मच गई और वह सकारात्मक रूप से सोचने पर मजबूर हो गई.

अब वह उस से मिलने लगी. जब उसे पवन पर पक्का विश्वास हो गया, तो उस ने अपने मातापिता को सारी स्थिति से अवगत कराया और बोली, ‘‘यदि वे ठीक समझें तो उस के घर जा कर उस के मातापिता से मिल लें और सारी स्थिति पता करें.’’

उस के पिता बोले, ‘‘लेकिन इस बात की क्या गारंटी है कि वह शादी के बाद दोबारा नहीं पीना आरंभ कर देगा?’’

‘‘पापा, हम आज की स्थिति देख कर ही निर्णय ले सकते हैं, भविष्य को किस ने जाना है. ऐसा भी तो हो सकता है कि कोई शादी के पहले न पीता हो, बाद में पीने लग जाए.’’ बेटी की यह बात सुन कर उन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और फिर पवन के मातापिता से मिलने का  प्रोग्राम बना लिया.

जब उन्होंने पवन के मातापिता को अपने आने की सूचना दी, तो वे इस अप्रत्याशित मिली खुशी से फूले नहीं समाए और उन की अगवानी की तैयारी में जुट गए.

पवन को भी लगा कि उस का प्रायश्चित्त करना सफल हो गया. दोनों परिवार जब आपस में मिले, तो खुशी से एकदूसरे के गले लग गए.

पवन के पिता बोले, ‘‘मैं आप की बेटी का कर्जदार हूं, हम अपने बेटे को नहीं बदल पाए, लेकिन आप की बेटी ने बदल दिया.’’

‘‘हां भई, अब देर किस बात की, जल्दी से इन की शादी करवाओ.’’

‘‘देर आए दुरुस्त आए,’’ तनीषा के पापा बोले.

‘‘लेकिन मेरी एक शर्त है,’’ यह सुन कर तनीषा के पिता हैरान से रह गए.

तनीषा के पिता को हैरान खड़ा देख पवन के पिता बोले, ‘‘इस बार शादी का सारा खर्च मेरी तरफ से…’’

तनीषा और पवन कनखियों से एकदूसरे को देखते हुए मुसकरा रहे थे.

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