लेखक- रेणुका पालित

मैं अपने घर  के बरामदे में बैठा पढ़ने का मन बना रहा था, पर वहां शांति कहां थी. हमेशा की तरह हमारे पड़ोसी पंडित ओंकारनाथ और मौलाना करीमुद्दीन की जोरजोर से झगड़ने की आवाजें आ रही थीं. वह उन का तकरीबन रोज का नियम था. दोनों छोटी से छोटी बात पर भी लड़तेझगड़ते रहते थे, ‘‘देखो, मियां करीम, मैं तुम्हें आखिरी बार मना करता हूं, खबरदार जो मेरी कुरसी पर बैठे.’’

साथ ही मिलेगी ये खास सौगात

  • 2000 से ज्यादा कहानियां
  • ‘कोरोना वायरस’ से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • हेल्थ और लाइफ स्टाइल के 3000 से ज्यादा टिप्स
  • ‘गृहशोभा’ मैगजीन के सभी नए आर्टिकल
  • 2000 से ज्यादा ब्यूटी टिप्स
  • 1000 से भी ज्यादा टेस्टी फूड रेसिपी
  • लेटेस्ट फैशन ट्रेंड्स की जानकारी
Tags:
COMMENT