‘‘अमांयार क्यों मुंह लटकाए बैठे हो?  जाओ ऐश करो, तुम्हारी दिलरुबा जल्द ही तुम्हारी बेगम बनने जा रही. क्या तकदीर लिखवा कर लाए हो ऊपर वाले से,’’ रमेश जब भी चुहल करता तो लखनवी अंदाज में बात शुरू कर देता.

विजय उदास स्वर में बोला, ‘‘अभी तेरी शादी फिक्स नहीं हुई है न इसीलिए तू मेरा दर्द नहीं सम झ सकता.’’

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