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‘‘मैं इतनी जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं ले सकती हूं. मुझे सोचने के लिए थोड़ा समय चाहिए,’’ मानसी ने नजरें चुराते हुए कहा और फिर अपने कमरे की ओर जाने लगी. वह तलाक की बात को वहीं खत्म कर देना चाहती थी.

‘‘ठीक है, कुछ दिन सोच लो. फिर हमें अपना फैसला बता देना,’’ नीरज ने कहा.

मानसी अपने कमरे में आ कर खूब रोई. वह राघव को सबक सिखाना चाहती थी, लेकिन उस ने कभी तलाक के बारे में नहीं सोचा था. भैयाभाभी ने कितनी आसानी से तलाक लेने के लिए कह दिया, उसे राघव पर गुस्सा आने लगा, जिस ने उसे लेने आना तो दूर, एक फोन भी नहीं किया. अगर राघव को अपनी गलती का एहसास हो जाता और वह मानसी से माफी मांग कर उसे घर ले जाता, तो बात इस हद तक बढ़ती ही नहीं. अच्छा हुआ जो उस ने उन से सोचने के लिए समय मांग लिया. अब वह अपने तरीके से उन से तलाक के लिए इनकार कर देगी. फिलहाल तो बात कुछ दिनों के लिए टल ही गई है.

उस दिन के बाद भैयाभाभी ने मानसी से तलाक का जिक्र नहीं किया. भैया अपने औफिस के कामों में व्यस्त रहे और भाभी को अपनी शौपिंग, किट्टी पार्टी व ब्यूटीपार्लर से फुरसत नहीं थी. मानसी को लगा शायद वे दोनों समझ गए होंगे कि मानसी राघव से तलाक नहीं लेना चाहती है. इसलिए उस ने भी इस बारे में ज्यादा नहीं सोचा.

एक सुबह तीनों बच्चों के स्कूल जाने के बाद मानसी अपने कमरे में बैठी मैगजीन के पन्ने पलट रही थी. तभी शालिनी ने उसे आवाज दे कर बाहर आने के लिए कहा.

मानसी बाहर आई तो देखा लिविंगरूम में शालिनी भाभी अपने ममेरे भाई कौशिक के साथ बैठी थीं. यह वही कौशिक था, जिस के साथ भाभी कभी उस की शादी करवाना चाहती थीं. मानसी उस के गर्ममिजाज और बुरी आदतों से अच्छी तरह वाकिफ थी. वह उसे बिलकुल पसंद नहीं करती थी. लेकिन अब जब उन का सामना हो ही गया है तो वह कर भी क्या सकती है. जब शालिनी ने उसे वहां बैठने के लिए कहा तो उस ने कौशिक से औपचारिकतावश नमस्ते की और उन के पास बैठ गई.

शालिनी ने उन दोनों को बातें करने के लिए कहा और खुद काम का बहाना बना कर वहां से उठ कर चली गई. कौशिक मानसी को ऊपर से नीचे तक निहारने लगा. मानसी उस के सामने बहुत ही असहज महसूस कर रही थी. उस ने अपना पूरा ध्यान मेज पर रखे फूलदान पर केंद्रित कर दिया.

‘‘दीदी बता रही थीं कि तुम आजकल अपने पति का घर छोड़ कर यहीं

रह रही हो. अब आगे क्या करने का इरादा है?’’ कौशिक ने मानसी को इस प्रकार देखते हुए पूछा मानो उस का आंकलन कर रहा हो.

मानसी कुछ कह पाती उस से पहले ही शालिनी वहां आ गई और मानसी की ओर से कौशिक को उत्तर देने लगीं, ‘‘करना क्या है, सब से पहले तो उस राघव को इस की जिंदगी से बाहर निकालना है. इस के भैया ने तो वकील से बात कर के उसे तलाक के पेपर्स तैयार करने के लिए भी कह दिया है.’’

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मानसी का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया. उसे लगा कि भैयाभाभी समझ गए होंगे कि वह राघव से तलाक नहीं लेना चाहती है. लेकिन वे तो वकील से तलाक के कागजात तैयार करवा रहे हैं.

उस ने अपने जज्बातों पर काबू करते हुए कहा, ‘‘लेकिन भाभी मैं ने तो इस बारे में अभी कुछ सोचा ही नहीं है. मैं ने भैया से कहा भी था कि मुझे फैसला लेने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए.’’

‘‘और कितना वक्त चाहिए? तुम पहले भी राघव से शादी करने का गलत फैसला ले कर अपनी जिंदगी बरबाद कर चुकी हो. तुम्हारी वजह से हमें भी लोगों की कितनी बातें सुननी पड़ीं. अब तुम्हें उस से तलाक ले कर अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरू करने का मौका मिल रहा है, तो उस मौके को अपने हाथ से क्यों गंवाना चाहती हो?

वैसे भी तुम अपनी मरजी से ही राघव का घर छोड़ कर हमारे यहां रह रही हो. न वह तुम्हें लेने आया और न ही तुम्हारा वापस जाने का कोई इरादा है. जब तुम और राघव साथ रहना ही नहीं चाहते हो तो बेकार में इस रिश्ते का बोझ क्यों ढोना? तलाक लो और बात को खत्म करो,’’ शालिनी ने मानसी से दोटूक शब्दों में कहा.

‘‘भाभी, यहां बात सिर्फ मेरी और राघव की नहीं है. हमें कोई भी फैसला लेने से पहले मुसकान के बारे में भी सोचना होगा,’’ मानसी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा.

‘‘मुसकान के बारे में तुम क्यों सोचोगी? वह राघव की जिम्मेदारी है. उस के बारे में जो भी सोचना होगा राघव सोचेगा. वैसे भी तलाक के बाद मुसकान उसी के साथ तो रहने वाली है,’’ शालिनी ने सहजतापूर्वक कहा.

‘‘क्या? भाभी यह आप क्या कह रही हो? मुसकान मेरी बेटी है. मैं उसे खुद से अलग करने के बारे में सोच भी नहीं सकती हूं. मैं मुसकान के बिना मर जाऊंगी,’’ मानसी शालिनी की बात सुन कर बौखला गई.

‘‘वाह, यह वैसे ही न जैसे तुम राघव के बिना जी नहीं सकती थीं. मानसी यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है. तुम्हें राघव से तलाक ले कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना है. मुसकान तुम्हारे साथ रहेगी तो तुम्हें मूव औन करने में दिक्कत आएगी. कौन पति अपनी पत्नी की पहली शादी से पैदा हुई बेटी को पालना चाहेगा,’’ शालिनी ने नाटकीय ढंग से आंखें घुमाते हुए कहा.

‘‘दूसरी शादी? आप और भैया मेरी दूसरी शादी करवाना चाहते हैं?’’

‘‘हां, इसीलिए तो कौशिक यहां आया है.’’

‘‘मुझे यकीन नहीं आ रहा है कि आप और भैया मेरी पीठ पीछे इतना कुछ कर रहे हैं.’’

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‘‘इस में इतनी हैरानी वाली क्या बात है? राघव से तलाक के बाद तुम्हें किसी न किसी से दूसरी शादी तो करनी ही है, तो कौशिक क्यों नहीं? मैं ने कौशिक से बात भी कर ली है. इसे तुम से शादी करने में कोई प्रौब्लम नहीं है.’’

‘‘प्रौब्लम माई फुट. न तो मैं राघव से तलाक लूंगी और न ही आप के भाई से शादी करूंगी,’’ मानसी ने 1-1 शब्द पर जोर देते हुए शालिनी को अपना फैसला सुना दिया और अपने कमरे में जा कर दरवाजा बंद कर लिया.

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