‘‘रूही उठो बेटा वरना लेट हो जाओगी. अभी तो तुम्हें पैकिंग भी करनी है.
रात को पैकिंग क्यों नहीं की? मु?ो भी आज औफिस जल्दी जाना है वरना मैं तुम्हारी हैल्प कर देती. जल्दी से उठो.
‘‘ब्रेकफास्ट बना कर रख जाऊंगी खा लेना और समय से निकलना. मु?ो नहीं लगता आज तुम पहला लैक्चर अटैंड कर पाओ. और हां तुम्हारा साथ ले जाने का सामान भी मैं पैक कर रही हूं. आज का खाना तो घर का ही खा लेना. आज होस्टल से मत खाना. कम से कम एक दिन तो घर का खाना खाया जाएगा,’’ इस तरह बोलतेबोलते पूजा ?ाटपट किचन का काम भी निबटा रही थी और साथ में खुद का औफिस का बैग भी रैडी कर रही थी.
मगर जब थोड़ी देर तक पूजा ने देखा कि न तो रूही ने कोई जवाब दिया और न ही अभी उस ने बिस्तर छोड़ा.
‘‘ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ. रूही तो एक आवाज पर ही उठ जाती है, आज क्यों नहीं उठ रही? देखूं तो कहीं तबीयत तो खराब नहीं इस की. आजकल वायरल भी तो बहुत फैला हुआ है,’’ ऐसा खुद से ही बड़बड़ाते हुए वह रूही के कमरे की तरफ चल दी.
रूही को हाथ लगाते हुए कहा, ‘‘क्या हुआ बेटा तबीयत तो ठीक है? आज उठा क्यों नहीं मेरा बच्चा?’’
जब पूजा ने प्यार से रूही का गाल थपथपाया तो रूही उठ कर उस के गले लग कर सुबकने लगी, ‘‘मम्मा, मु?ो नहीं जाना उस कालेज, मैं यहीं आप के पास रह कर पत्राचार पढ़ लूंगी या फिर इसी शहर के कालेज में ही पढ़ लूंगी. मु?ो नहीं जाना आप से दूर.’’
पूजा ने उसे प्यार से चुप कराया, ‘‘रूही मेरा बच्चा इस में रोने वाली क्या बात है. अच्छा एक बात सचसच बताओ, तुम्हें मु?ा से दूर नहीं जाना या कोई और बात है?’’
‘‘नहीं मम्मा मु?ो आप से दूर नहीं जाना बस इसीलिए.’’
मगर जिस तरह रूही कहते हुए नजरें चुरा रही थी उस से पूजा का माथा ठनका कि अवश्य कोई बात है जिसे रूही शायद बताना नहीं चाहती.
आज औफिस में बहुत जरूरी मीटिंग थी इसलिए पूजा का औफिस जाना भी जरूरी था. इसलिए उस ने उसे ज्यादा कुछ न कहते हुए शाम को आ कर बात करने के लिए कह कर औफिस के लिए चली गई. पर पूजा को औफिस में भी चैन कहां. उस का किसी काम में मन ही नहीं लग रहा था. मीटिंग में भी उस ने खास इंटरैस्ट नहीं लिया, बस चुपचाप सब के व्यूज सुनती रही क्योंकि उस का ध्यान तो रूही में था कि ऐसा क्या हो गया जो वह कालेज नहीं जाना चाहती.
पूजा अपने कैबिन में गुमसुम सी बैठी थी कि चपरासी ने आ कर कहा, ‘‘बौस ने बुलाया है.’’
पूजा चुपचाप उठ कर बौस के कैबिन की तरफ चल दी.
‘‘मैं आई कम इन सर?’’
‘‘पूजा, यस, यस, औफकोर्स कम इन.’’
पूजा अंदर आ कर, ‘‘यस सर.’’
‘‘आओ पूजा बैठो,’’ कुरसी की तरफ इशारा करते हुए सर ने कहा और पूजा के बैठने के बाद उसे टेबल पर रखा पानी का गिलास दिया, ‘‘लो पहले पानी पीयो और रिलैक्स हो जाओ, फिर आराम से बात करते हैं.’’
पूजा ने आराम से कुरसी पर बैठ कर पानी पी पिया.
‘‘अब बताओ पूजा क्या बात है? आज तक मैं ने तुम्हें इतना परेशान कभी नहीं देखा, जबकि मैं तुम्हें 8-10 सालों से जानता हूं. जब से मैं ट्रांसफर हो कर इस ब्रांच में आया हूं तुम्हें बहादुर, निडर और साहसी देखा है. कभी न घबराने, हार न मानने या न ही डगमगाने वाली हो तुम. आज पहली बार मु?ो तुम्हारे माथे पर शिकन की लकीरें नजर आई हैं. ऐसा क्या हो गया है, किसी ने कुछ कहा तो बताओ?’’
‘‘नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं, किसी ने कुछ नहीं कहा, बस रूही को ले कर थोड़ा सा परेशान थी.’’
‘‘क्यों क्या हुआ रूही को? वह तो बहुत सम?ादार बच्ची है. 2-4 बार तुम्हारे साथ आई तो उस से बातचीत करने पर मैं ने महसूस किया कि वह तुम्हारी तरह बहुत हिम्मत वाली है. कोई परेशानी है तो तुम मु?ा से बे?ि?ाक शेयर कर सकती हो.’’
‘‘सर, आप को याद है जब रूही ने 12वीं कक्षा पास की थी, तब वह
मैकेनिकल इंजीनियरिंग करना चाहती थी और वह भी पीयूसे कहती थी मम्मा यहां जगाधरी जैसे छोटे शहर में नहीं पढ़ना मु?ो. मु?ो तो बड़ी यूनिवर्सिटी में पढ़ना है बल्कि यहां तक भी कहा था कि वह कुछ न कुछ कर के अपना खर्चा भी स्वयं निकालेगी. तब आप से मैं ने सलाह ली तो आप ने भी यही कहा था कि उसे भेज दूं, वहां आगे बढ़ने का स्कोप है.’’
‘‘हांहां मु?ो अच्छे से याद है. तुम घबरा रही थी कि वह तुम्हारे बिना रह नहीं पाएगी.’’
‘‘जी सर और उस ने एक साल बड़े अच्छे से निकाला. वह खुद कहती थी मम्मा अगर मैं ऐसा सोचूंगी तो मैं रह नहीं पाऊंगी. मु?ो अकेले रहना सीखना होगा. तभी तो मैं आप का बेटा बन कर आप का सहारा बन पाऊंगी. आज वही रूही कालेज न जाने के लिए रो रही है. उस ने मु?ा से कहा तो यही है कि वह मु?ा से दूर नहीं रहना चाहती. लेकिन मेरा मन कह रहा है कि यह बात नहीं है कुछ और बात है जिसे वह मु?ो बता नहीं पा रही.’’
‘‘पूजा तुम चिंता मत करो, मीटिंग हमारी सक्सैस रही. उम्मीद है टैंडर हमें ही मिलेगा. इस का फैसला तो अगले हफ्ते होगा. अब कोई खास काम नहीं है, तुम ऐसा करो अब घर चली जाओ और रूही के साथ 2 दिन बिताओ और प्यार से उस से पूछो कि क्या बात है. वह अवश्य तुम्हें बताएगी. बस उसे थोड़ा वक्त देना.’’
‘‘जी सर, धन्यवाद सर आप ने हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन किया है. मैं अभी चली जाती हूं घर और कल तक मैं उस के साथ ही रहूंगी ताकि वह अपने मन की बात तसल्ली से मु?ो बताए.’’
पूजा ने घर आ कर रूही से सामान्य तरीके से बातचीत की. खाना खा कर दोनों मांबेटी टीवी चला कर बैठ गईं.
‘‘रूही क्या कहती है शाम को मूवी चलें? सुना है बहुत अच्छी मूवी है.’’ रूही ने चुपचाप सिर हिला दिया.
पूजा ने औनलाइन टिकट बुक कर लिए. शाम को दोनों मांबेटी मूवी देखने गईं. वहीं पर बर्गर और कौफी ले ली. घर आ कर खाने की इच्छा ही नहीं हुई.
‘‘रूही कुछ खाना है क्या? कहो तो बना दूं?’’
‘‘अरे नहीं मम्मा मेरा तो पेट फट जाएगा आज. एक तो मूवी में इतनी कौमेडी कि
हंसहंस कर पेट में बल पड़ गए उस पर इतना हैवी बर्गर था. लगता है बर्गर वाले ने इस मूवी को देखने वालों के लिए स्पैशल बर्गर बनाया था. वह मजा आ गया. जितना आज हंसे इतना तो कभी नहीं हंसे.’’
‘‘हां यह तो है और मेरी आंखों के सामने तो बारबार वही सीन आ रहा है जब दूल्हे का मामा गधे को…’’ आगे वह बात ही पूरी न कर सकी और दोनों खूब हंसी.
थोड़ी देर बाद रूही जब बिलकुल अच्छे से मां से बातें करने लगी तब…
‘‘रूही, बेटा अब खुल कर बता मु?ो. तु?ो वहां कालेज में क्या प्रौब्लम है? क्यों तू वहां से पढ़ाई बीच में छोड़ना चाहती है?’’
‘‘मम्मा मैं ने आप को लास्ट टाइम बताया था न कि अतुल सर क्लास में मु?ा से ही अधिकतर सवाल पूछते हैं और अच्छे से पढ़ने और सम?ाने पर मैं सारे जवाब सही देती हूं और वे हर वक्त क्लास में मेरा ही उदाहरण देते हैं कि रूही को देखो ट्यूशन ग्रुप भी पढ़ाती है और खुद भी पढ़ती है, तुम सब से बैस्ट स्टूडैंट है वह. तुम्हें रूही से कुछ सीखना चाहिए.
‘‘अब वे किसी न किसी बहाने मु?ो छूने लगते हैं. जैसे मैं ने किसी सवाल का जवाब दिया तो मेरे पास आ कर शाबाश रूही कहते हुए मेरी पीठ पर हाथ फिराते हैं, कभी मु?ो गले से लगाने की कोशिश करते हैं. 1-2 बार तो मु?ो औफिस में बिना वजह बुला कर अपने साथ लिपटा लिया और बोले कि तुम बहुत अच्छी लगती हो. तुम मेरी फेवरेट स्टूडैंट हो. मैं बड़ी मुश्किल से खुद को छुड़ा कर बाहर आई और संयोग से और लैक्चरार भी वहां आ गए.
‘‘और मम्मा उन्हें क्लास में ऐसा करते देख कर 3-4 लड़के भी कभीकभी मु?ो बहाने से टच करते हुए कहते हैं कि रूही तो सर की बैस्ट स्टूडैंट है. कीप इट अप रूही. ऐसा कहते हुए मेरी पीठ पर या गाल पर हाथ फिराते हैं.’’
पूजा सम?ा गई कि रूही के भोलेपन और अकेलेपन का सब नाजायज फायदा उठाने की फिराक में हैं. अब न तो पूजा नौकरी छोड़ कर रूही के साथ रह सकती थी और न ही रूही को इतनी अच्छी यूनिवर्सिटी छोड़ कर यहां छोटे से कसबे में ला सकती थी. रूही के सिवा और है भी तो कोई नहीं कैसे करे, किसे रूही की निगरानी के लिए उस के पास भेजे. फिर उस ने सोचा ये सब तो रूही को अकेले ही हैंडल करना होगा.
‘‘रूही आज तुम्हें मैं एक कहानी सुनाती हूं,’’ और पूजा ने रूही को अपनी गोद में लिटाया और कहानी सुनाने लगी:
‘‘एक लड़की थी भोलीभाली सी. उसे एक कालेज में एक लड़के से प्यार हो गया. लड़की पंजाबी और लड़का पंडित. लड़की के मातापिता को कोई एतराज नहीं था. वे नए ख्यालात के लोग थे लेकिन लड़के के मातापिता को एतराज था इस शादी से. लेकिन आखिर इकलौता बेटा जिस की जान उस पंजाबी लड़की में है, अगर वही न रहा तो क्या करेंगे इस जिद्द और जीवन का. इसलिए शादी की रजामंदी तो दे दी लेकिन उसे अपनी पत्नी को ले कर अलग रहने को कह दिया.
दोनों की शादी हो गई. दोनों अलग घर में रहने लगे. 1 साल बाद उन की एक प्यारी सी गुडि़या जैसी बेटी पैदा हुई. जब गुडि़या 3 साल की हो गई तब उन्होंने सोचा कि अब उस के लिए एक भाई लाना चाहिए. इस फैसले को लिए अभी एक ही दिन हुआ था कि लड़के का औफिस लौटते हुए ऐक्सीडैंट हो गया. ऐक्सीडैंट भी इतनी बुरी तरह कि औन द स्पौट ही लड़के की मृत्यु हो गई.
एक तो लड़के के मातापिता पहले से उसे पसंद नहीं करते थे अब तो बेटे की मौत का जिम्मेदार भी उसे ही ठहराने लगे. वह लड़की अकेली सहमी सी, छोटी सी बच्ची गोद में, पति की मृत्यु हो गई और सासससुर पहले से ही उसे नापसंद करते और अब तो बेटे की मौत भी उस के सिर मढ़ दी. दिनरात आंसू बहाती रहती. घर खर्च इत्यादि मातापिता देने लगे. गुडि़या को स्कूल में दाखिला भी दिलाना था. मातापिता ने करा दिया. लेकिन वह हर वक्त डरीसहमी, छुईमुई सी रहती. लेकिन उसी की कालोनी में उसी की हमउम्र उस की एक सहेली बन गई थी. किरण नाम था उस का. वह एक स्कूल में टीचर थी. उस ने उस लड़की को सम?ाया, ‘‘सुन तु इस तरह अगर दुनिया से डरेगी तो यह दुनिया तु?ो और डराएगी, तु?ो जीने नहीं देगी यह दुनियां और फिर सोचो इस छोटी सी जान का कौन है? इस की मां भी तुम हो और पिता भी तुम. तुम्हें इसे पढ़ानालिखाना है. इसे तुम्हीं तो पालोगी और आज अभी तुम्हारे भाई की शादी नहीं हुई कल को जब तेरे भाई की शादी हो गई तब? तू पढ़ीलिखी है अपने पैरों पर खड़ी हो कर दुनियां को दिखाओ, किरण ने उस लड़की को मोटिवेट किया, उसे हिम्मत बंधाई. उस के सारे सर्टिफिकेट निकालवाए. 1-2 जगह उस का सीवी बना कर भेजा. किरण के हौंसला देने पर उस लड़की ने सोचा कि बात तो सही है. यदि मैं ऐसे ही रही तो मेरी गुडि़या का क्या होगा? कब तक मैं दूसरों के सहारे जीऊंगी.
और वह खुद ही अपना सीवी ले कर चल पड़ी जमाने की पथरीली राहों पर. अच्छी पढ़ीलिखी होने पर नौकरी तो अच्छी मिल गई मगर हरकोई उस की काबिलियत से पहले उस के जिस्म का मुआयना करता. कब तक सहती वह. बेशक पति की मृत्यु के बाद उस ने बहुत सी मुश्किलों का सामना किया लेकिन उस ने अब सहना छोड़ दिया क्योंकि अब वह चंडी बन चुकी थी. जब भी कोई गलत हाथ उस की तरफ बढ़ता तोड़ देती उस हाथ को. जब भी कोई गंदी नजर उस की ओर उठती आंखें निकाल लेती उस की वह. सब को मुंहतोड़ जवाब देना सीख लिया. उस की हिम्मत, हौसले के आगे औफिस हो या घरबाहर कोई भी उसे छू नहीं सकता.
आज उस लड़की की हरकोई इज्जत करता है क्योंकि उस ने इस मतलबपरस्त दुनिया में जीना सीख लिया है. जब तक किसी दूसरे के सहारे जीओगे तब तक जिंदगी जिंदगी नहीं बल्कि भीख होगी. अगर इज्जत से जीना है तो बैसाखियों को छोड़ कर खुद के पैरों पर खड़ा होना होगा.
‘‘बस मम्मा मैं सब सम?ा गई और यह भी जान गई कि यह कहानी किस की है. अब आप देखना आप की बेटी कुछ बन कर ही आएगी वहां से. मैं अभी अपना सामान पैक करती हूं. कल सुबह मु?ो कालेज जाना है.’’
अगले दिन अतुल सर ने रूही को क्लास में प्यार से अपने साथ चिपकाते हुए
कहा, ‘‘रूही डियर कहां रह गई थी? कल क्लास में क्यों नहीं आई? तुम्हारे बिना तो हमारा मन ही नहीं लगा कल.’’ सर के ऐसा करते और कहते ही पूरी क्लास हंसने लगी.
‘‘चटाक,’’ यह क्या इतनी जोर से आवाज और पूरी क्लास में सन्नाटा छा गया. रूही का जोरदार हाथ सर के गाल पर पड़ा था. सब लड़कियां क्लास में खड़ी हो कर तालियां बजा रही थीं. लड़के शर्म और घबराहट से सिर नीचा किए बैठे थे और अतुल सर महोदय गाल पर हाथ रखे चुपचाप क्लास से बाहर चले गए.
इधर पूजा सोचने लगी किसी औरत को बेसहारा देख कर हरकोई सहारा देने के बहाने उस के शरीर का सौदा क्यों करता है? क्या स्त्री की इतनी ही औकात है?
नहीं दोस्त स्त्री की औकात इतनी नहीं. स्त्री अपनी औकात दिखाती नहीं इसलिए पुरुष की नजर में उस की कोई औकात नहीं वरना जिस दिन स्त्री अपनी औकात पर आ गई तो पूरी सृष्टि को तहसनहस भी कर सकती है स्त्री. इसलिए हमेशा स्त्री का सम्मान करें.
