गृहशोभा विशेष

अच्छी सेहत के लिए संतुलित आहार बहुत जरूरी है. खासतौर पर मां को विशेष पोषण की जरूरत होती है. परिवार की देखभाल और काम के बीच संतुलन बनातेबनाते महिलाएं अपने आहार पर ध्यान नहीं दे पाती हैं जबकि सही भोजन न केवल ऐनर्जी देता है, बल्कि वजन भी सामान्य बनाए रखता है.

महिलाओं की पोषण संबंधी जरूरतें कुछ खास होती हैं. उन के आहार में विशेष विटामिन और मिनरल्स होने चाहिए. गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के समय तो खासतौर पर उन्हें इन की जरूरत होती है. अपने आहार को सेहतमंद और संतुलित बनाना कई बार मुश्किल हो सकता है.

कैलोरी: ऐक्टिविटीज के साथसाथ कैलोरीज को संतुलित करना बहुत जरूरी है. महिलाओं में पेशियां कम होती हैं और वसा की मात्रा अधिक. उन के शरीर का आकार पुरुषों की तुलना में छोटा होता है. ऐसे में उन्हें अपने शरीर के वजन और ऐक्टिविटीज लैवल को सामान्य बनाए रखने के लिए कम कैलोरी की जरूरत होती है. आमतौर पर एक सक्रिय मां को औसतन 1800 से 2200 कैलोरी प्रतिदिन चाहिए होती है.

विटामिन और मिनरल: एक सक्रिय मां के आहार में कैल्सियम, आयरन और फौलिक ऐसिड तीनों जरूरी होते हैं.

प्रजनन स्वास्थ्य: जीवन की विभिन्न अवस्थाओं में जैसे गर्भावस्था, स्तनपान के दौरान या रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं की पोषण संबंधी जरूरतें अलगअलग होती हैं.

स्वास्थ्य समस्याएं: आजकल माताओं में पोषण से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं आम हो गई हैं. जैसे सेलिएक रोग, लैक्टोज इन्टौलरैंस, विटामिन, मिनरल और आयरन की कमी के कारण खून की कमी.

मैटाबोलिज्म: महिलाओं में कैलोरी बर्र्न होने का तरीका पुरुषों से अलग होता है. आराम या व्यायाम करते समय उन के शरीर में पुरुषों की तुलना में कम कैलोरी बर्न होती हैं.

आयरन से युक्त पदार्थ: महिलाओं की अच्छी सेहत और ऊर्जा का स्तर सामान्य बनाए रखने के लिए आयरन बहुत जरूरी है. रैड मीट, चिकन, फिश, पालक, बींस, दालें और अनाज में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है. पौधों से मिलने वाला आयरन शरीर में आसानी से अवशोषित हो जाता है बशर्ते इसे विटामिन सी के स्रोत के साथ खाया जाए. आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाता है, जो खून में औक्सीजन ले जाने के लिए जरूरी है. यह त्वचा, बालों और नाखूनों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए भी जरूरी है.

मासिकधर्म के दौरान महिलाओं के शरीर से काफी रक्तस्राव हो जाता है. ऐसे में उन्हें पुरुषों की तुलना में आयरन की जरूरत दोगुनी मात्रा में होती है. गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान तो आयरन की जरूरत और बढ़ जाती है.

महिलाओं के आहार में आयरन की कमी के कारण उन में खून की कमी हो जाती है. खून की कमी से शरीर में ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है, महिला थकान महसूस करती है. थोड़ा सा व्यायाम करने पर भी उस की सांस फूलने लगती है. आयरन की कमी का असर मूड पर भी पड़ता है. इस से डिप्रैशन हो जाता है. स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है, एकाग्रता कम होने लगती है.

प्रजनन वर्षों के दौरान फौलिक ऐसिड: गर्भवती महिलाओं के आहार में पर्याप्त मात्रा में फौलिक ऐसिड होना चाहिए. इस से बच्चे में जन्मजात दोषों की संभावना को कम किया जा सकता है.

महिला को रोजाना 400 माइक्रोग्राम फौलिक ऐसिड की जरूरत होती है. इसलिए अपने आहार में रोजाना फौलिक ऐसिड से युक्त पदार्थ शामिल करें. सिट्रस फलों, हरी पत्तेदार सब्जियों, बींस, मटर आदि में प्राकृतिक फौलिएट पाया जाता है. अनाज, चावल और ब्रैड में भी फौलिक ऐसिड पाया जाता है.

रोजाना कैल्सियम की जरूरत: स्वस्थ हड्डियों और दांतों के लिए मां को रोजाना कैल्सियम से युक्त पदार्थों का सेवन करना चाहिए. कैल्सियम हड्डियों को मजबूत बनाता है. औस्टियोपोरोसिस को रोकता है. दिल की गतियों को नियमित रखता है और सुनिश्चित करता है कि हमारा तंत्रिका तंत्र ठीक से काम करे.

औस्टियोपोरोसिस हड्डियों की ऐसी बीमारी है, जिस में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और आसानी से टूट सकती हैं. लो फैट या फैट फ्री दूध, दही, चीज, कैल्सियम, फोर्टिफाइड खा•पदार्थों जैसे रस और अनाज में कैल्सियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है.

कैल्सियम की कमी से चिड़चिड़ापन, चिंता, तनाव, अवसाद, नींद न आना आदि परेशानियां हो सकती हैं. अगर भोजन में पर्याप्त कैल्सियम न हो तो शरीर की कोशिकाएं अपने काम को ठीक से करने के लिए हड्डियों से कैल्सियम सोखने लगती हैं, जिस से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और औस्टियोपोरोसिस हो जाता है. महिलाओं में औस्टियोपोरोसिस की संभावना पुरुषों की तुलना में अधिक होती है. इसलिए जरूरी है कि वे अपने आहार में कैल्सियम, मैग्निशियम और विटामिन डी का भरपूर सेवन करें.

सही आहार लें

पोषक पदार्थों से युक्त आहार महिला के व्यस्त जीवन में ऊर्जा देता है और उसे बीमारियों से बचाता है. रोजमर्रा के सेहतमंद आहार में शामिल हैं:

  • साबूत अनाज जैसे साबूत अनाज की ब्रैड, रोटी, चावल या ओट.
  • कम वसा या वसारहित डेयरी उत्पादों की 3 सर्विंग्स जिन में कम वसा या वसारहित दूध, दही या चीज शामिल है.
  • 500 ग्राम प्रोटीन जैसे चिकन, मछली, अंडा, सोयाबीन, बींस, मटर.
  • 2 कप मौसमी फल.
    ढाई कप सब्जियां.

इन पदार्थों का सीमित मात्रा में करें सेवन

किभी भी उम्र में वजन पर नियंत्रण रखने के लिए महिलाओं को बहुत अधिक चीनी या वसा से युक्त पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. मसलन:

  • सौफ्ट ड्रिंक, चीनीयुक्त मीठे पेयपदार्थ, कैंडी, बेक किए और तले खा•पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करें.
  • फुल फैट के बजाय लो फैट यानी कम वसा से युक्त डेयरी एवं मीट प्रोडक्ट्स का सेवन करें.
  • सैचुरेटड फैट, वसा से युक्त खा•पदार्थ का सेवन सीमित मात्रा में करें जैसे फैटी मीट, चीज, फैट डेयरी प्रोडक्ट्स और बेक किए खा•पदार्थ.

व्यायाम करना भी है जरूरी

कामकाजी महिलाओं और गृहिणियों के लिए सही आहार लेने के साथसाथ नियमित व्यायाम करना भी जरूरी है. व्यायाम एवं जीवनशैली से जुड़ी कई अन्य चीजें हड्डियों को सेहतमंद बनाने के लिए जरूरी हैं. रोजाना व्यायाम करने से वजन नियंत्रित रहता है, पेशियां मजबूत होती हैं, तनाव नहीं होता है. व्यायाम जैसे चलना, डांस करना, वेट लिफ्टिंग से औस्टियोपोरोसिस की संभावना कम होती है.

– साक्षी चोपड़ा, बैरिएट्रिक न्यूट्रिशनिस्ट, जेपी हौस्पिटल, नोएडा 

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