गृहशोभा विशेष

शारदा चिट फंड घोटाले में घेर लिए जाने के बाद 80 के दशक के जूनियर अमिताभ कहे जाने वाले मिथुन चक्रवर्ती ने इस घोटालेबाज कंपनी का प्रचारप्रसार करने के लिए ली गई करोड़ों रुपए की फीस वापस कर दी. हालांकि इस से उन भुक्तभोगियों का कोई भला नहीं होने वाला, जिन्होंने शारदा चिट फंड कंपनी के बतौर बैंड ऐंबैसेडर मिथुन दा के आह्वान पर इस कंपनी की लुभावनी वित्तीय निवेश योजनाओं पर दांव लगाया था, बावजूद इस के सैलिब्रिटीज से हासिल फीस वापस कर के कोर्ट ने कम से कम ऐसे लोगों को सबक सिखाने का एक काम तो किया ही है कि भविष्य में वे किसी कंपनी का प्रचारप्रसार करने के लिए उस के बारे में कुछ भी कहने और बोलने से पहले थोड़ी तो उस की छानबीन कर लें. अमिताभ और माधुरी भी नैस्ले की मैगी का खूब जम कर प्रचार करते थे. अब उन के खिलाफ भी अदालत में याचिका दायर हो गई है. अंतिम  फैसला क्या आता है, पता नहीं.

सचाई कुछ और

लेकिन इस से यह बात पता चलती है कि सैलिब्रिटीज किसी चीज को बेचने के लिए कुछ भी कहें जरूरी नहीं कि वह सच ही हो. चूंकि वे आम जनता के बीच लोकप्रिय होते हैं, तमाम आम लोग उन में अपना नायक, अपने सपनों के किरदार देखते हैं, इसलिए उन की कही तमाम बातों पर यकीन कर लेते हैं. अपने चाहने वालों के इस भरोसे को सैलिब्रिटीज खूब भुनाते हैं. पहले तो वे इस लोकप्रियता को शैंपू, साबुन और परफ्यूम जैसी चीजों को खरीदने की सलाह दे कर ही भुनाते थे, मगर अब इस से भी दो कदम आगे बढ़ गए हैं और अपनी लोकप्रियता की आड़ में अपने नाम से तैयार किए गए उत्पाद बेच रहे हैं. अब बिपाशा बसु को ही लें. पहले उन्होंने मीडिया के जरीए खुद को एक फिटनैस आइकोन की तरह स्थापित किया, अब उसी छवि को अपनी फिटनैस सीडी के कारोबार में तबदील कर दिया है. उन्होंने कुछ साल पहले अपनी फिटनैस संबंधी जब तीसरी डीवीडी जारी की थी, तो रातोंरात वह डीवीडी बैस्ट सेल की कैटेगरी में आ गई थी जबकि वह थोड़ीबहुत कीमत की नहीं, बल्कि पूरे 7 हजार की थी. अब बाजार में चर्चा है कि ये बंगाली मुहतरमा फिट रहने के लिए स्पैशल योगासनों की सीडी ले कर आ रही हैं, जिस की कीमत 10 हजार होने की संभावना है.

लोकप्रियता की कीमत

बिपाशा के नक्शेकदम पर अब रानी मुखर्जी भी चलने की तैयारी कर रही हैं. यह तो हम जानते ही हैं कि पिछले 4 सालों में आदित्य चोपड़ा से शादी के अलावा उन के खाते में और कोई दूसरी उपलब्धि नहीं है. एक नायिका के रूप में उन का समय ठीक नहीं चल रहा है. इसलिए रानी मुखर्जी इन दिनों कई फैशन शोज में चीफ गैस्ट के रूप में पहुंच रही हैं और शो के अंत में फैशन को ले कर भाषण देने का काम कर रही हैं. सुना है, इस के लिए वे अच्छाखासा मेहनताना वसूलती हैं और अब तो यह भी खबर है कि फैशन को प्रमोट करने के लिए वे जल्द ही एक किताब लिखेंगी जो देश के एक बड़े अंगरेजी अखबार में किस्त दर किस्त प्रकाशित होगी. टीवी न्यूज चैनलों ने पारंपरिक सैलिब्रिटी की संकीर्ण परिभाषा को बदल दिया है. अब सैलिब्रिटी की सूची काफी लंबी हो गई है. इस कारण अब सैलिब्रिटी सिर्फ क्रिकेटर या फिल्मी हीरोहीरोइन भर ही नहीं रह गए, बल्कि उन में मीडिया ऐक्सपर्ट, समसामयिक मामलों में टिप्पणी करने वाले सोशलाइट और टैलीविजन की बहसों में सक्रिय रहने वाली शख्सियतें भी शामिल हो गई हैं.

जो दिखता है वही बिकता है

अब सुहेल सेठ को ही लें. अभिजात्य जीवनशैली, किसी भी मामले में टिप्पणी करने की उन की खूबी (चाहे कचरा ही बोलें) बाजार गुरु की उपाधि, लेखक और न जाने क्याक्या उन की शान में कहा और लिखा जा सकता है. सुहेल सेठ की ताजा मास्टर पीस सलाह यह है कि एक ही समय पर सारी सही जगहों में मौजूदगी जरूरी है. यह थोड़ा गुरु गंभीर वाक्य है. इसलिए हो सकता है कि आप की समझ में न आए पर चिंता की कोई बात नहीं. हम भी तो सलाह देने के लिए ही बैठे हैं. तो सुनिए सुहेल सेठ के गुरु गंभीर वाक्य का मतलब है हर उस जगह अपना थोबड़ा (चेहरा) मौजूद रखने की कोशिश करिए, जहां कैमरा क्लिक करता हो, क्योंकि जो दिखता है, वही बिकता है. लेकिन सुहेल सेठ का दर्शन यहीं तक सीमित नहीं है. वे कहते हैं कि जो दिखता है, वही प्यारा भी लगने लगता है. शायद उन की यह समझ विज्ञापनों के मनोविज्ञान से बनी है कि जिस विज्ञापन को बारबार दिखाया जाता है, लोग उस उत्पाद के प्रति आकर्षित होते ही हैं, भले ही वह कितना भी गयागुजरा क्यों न हो. तो सुहेल सेठ की सुनिए. हर सही जगह मौजूद रहने की कोशिश कीजिए. आखिर यह एक सैलिब्रिटी की फिलहाल महत्त्वपूर्ण पर मुफ्त की सलाह है.

पैसों की कीमत

अमित बर्मन को हो सकता है वे पाठक ज्यादा न जानते हों जो सिर्फ हिंदी का अखबार पढ़ते हैं या फिर अंगरेजी के उन अखबारों को नहीं देखते जिन के शहरी लाइफस्टाइल से संबंधित बड़ेबड़े पुलआउट हैं. बहरहाल, अमित बर्मन डाबर समूह के युवा चेयरमैन हैं, उद्योगपति हैं. बाजार में उन के उत्पादों की अच्छीखासी मांग है, इसलिए जाहिर है उन से सलाह भी वैसी ही मांगी जाएगी या ली जानी पसंद की जाएगी जिस में कारोबारी गुर हों. तो अमित बर्मन भी अपनी पृष्ठभूमि का महत्त्व जानते हैं. शायद इसी वजह से उन की सलाह कारोबार से जुड़ी है. उन की सलाह कई स्तरों की है, जिस का सार है कि अच्छा कारोबारी बनना है तो यह जानने की कोशिश करें कि ग्राहक चाहता क्या है? वे अपने गुरु वाक्य को कुछ इस तरह वर्गीकृत करते हैं- आप के उत्पाद की कीमत वाजिब होनी चाहिए. इसे अंगरेजी में स्मार्ट प्राइसिंग कहते हैं. अमित के मुताबिक बिजनैस में सफलता का कम से कम भारत में यह मूलमंत्र है कि आप का उत्पाद सस्ता हो. वे मानते हैं कि थोड़ी क्वालिटी कम अच्छी हो तो चलेगा, लेकिन दाम ज्यादा हो तो चीज नहीं बिकेगी. इसलिए वे युवा कारोबारियों को सलाह देते हैं कि वे अपने उत्पादों की कीमत कम रखें, क्योंकि हिंदुस्तान का अच्छाखासा कमाने वाला शख्स भी सस्ती भद्दी चीजें खरीदना चाहता है. हालांकि वे तीखे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते. वे इसे थोड़ा नरमी से कहते हैं. मसलन, वे कहते हैं कि भारतीय उपभोक्ता अपने पैसों की कीमत अच्छी तरह से जानते हैं और कम पैसे में कैसे बेहतर सुविधा पाई जा सकती है, यह भी वे जानते हैं.

पचानी पड़ेगी सलाह

सिकंदर से ले कर नैपोलियन तक ने यह गंभीर सीख देने की कोशिश की है कि आदमी अपनी हर हार से सीखता है. लेकिन अब इस गंभीर सीख को देने वाले गौतम गंभीर हैं. गौतम किस्सा सुनाते हैं, ‘‘मैं 10वीं कक्षा में फेल हो गया. यह भयानक अनुभव था. मैं क्रिकेट का दीवाना था और मुझे लगा इस क्रिकेट ने मुझे डुबो दिया. मैं फट पड़ा. मां ने कहा सवाल यह नहीं है कि तुम शुरुआत कैसे करते हो? सवाल यह है कि तुम खत्म कैसे करते हो?’’ गौतम बताते हैं कि सीख यही थी कि कुछ भी करो, मगर निगाह निशाने पर ही रखो. हर हार आप को एक नई जीत का रास्ता दिखाती है, क्योंकि उस में एक सीख होती है. बहरहाल, गौतम गंभीर को अपनी सलाह देने का ज्यादा मौके या मंच नहीं मिलते, फिर भी जब कोई मौका मिलता है, वे अपने जूनियरों से ले कर उन तमाम लोगों को भी यह सीख देने से अपनेआप को नहीं रोक पाते जो उन की तरफ इस के लिए देखते हैं.

उम्र पीछे चलती है

गुजरे जमाने में अनगिनत विशेषणों से नवाजी गईं वहीदा रहमान आज भी कुछ विशेषणों पर अपना हक जता सकती हैं. मसलन, आप यह नहीं कह सकते कि 72 साल के बाद आप आकर्षण की दुनिया से बाहर हो जाते हैं. वहीदा रहमान को देखिए और उन की यह लाखों रुपए कीमत वाली सलाह सुनिए. वहीदा कहती हैं कि उम्र को सम्मान के साथ स्वीकारो तो वह भी आप को सम्मानजनक बनाए रखती है. अगर आप अपनी उम्र को तार्किक ढंग से स्वीकारते हैं तो न सिर्फ आप खुद को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं बल्कि, लोग भी आप को बेहतर तरीके से समझते हैं. यही वजह है कि उम्र को स्वीकरते और सम्मान देते हुए वहीदा रहमान ने 72 की उम्र में अपने बाल काले नहीं किए. वे कहती हैं कि बाल काले करने के बाद भी मैं 17 की नहीं लगूंगी. खुद को धोखे में भले रखूं, लेकिन इन तरीकों से मुझे लोग ज्यादा पसंद नहीं करने लगेंगे. वहीदा की एक और नेक सलाह है कि अपनी उम्र के अनुसार ही टिप्पणी करो और  उसी के हिसाब से काम करो. जितने के हो, उतने ही दिखो. उम्र के हिसाब से ही अपनी राय बनाओ और गलतफहमी में न फंसो कि उम्र आप के पीछे चलती है. हां, उन की एक सब से कीमती सलाह यह है कि शांत रहें. शांति में हर अशांत सवाल का जवाब छिपा है.

बीमारी को मात

लीजा कहतीं हैं कि जैसे ही आप को पता चले कि आप किसी बड़ी बीमारी से ग्रस्त हैं तो चेहरे पर मुरदनी मत आने दीजिए. चेहरे पर हंसी का गुलाल बिखेरिए. बीमारी के साथ जीना और उसे स्वीकार करना आधी बीमारी खत्म कर देता है. हालांकि वे यह भी कहती हैं कि सब में जीने और लड़ने का जज्बा अलगअलग होता है. जिस तरीके से आप सहज महसूस करें, जिस भी तरीके से आप अपने बुरे समय से नजर मिला सकें, मिलाएं, क्योंकि मर्ज को मात देने का मजबूत तरीका यही है.

नेक सलाहों के बदले

अब यह जुमला तो आप ने अपनी दादीनानी से ले कर मां और पिताजी से होते हुए बड़े भाई तक से भी सुना होगा कि मुसीबत के समय छोटे से छोटा पैसा भी काम आता है. लेकिन जब यही बात अभिनेता सुशांत सिंह कह रहे हों तो माने रखती है. सुशांत के मुताबिक जो शख्स अपनी जिंदगी में पैसे को महत्त्व नहीं देता, एक दिन वह उसी पैसे के लिए मुहताज होता है. उन की नेक सलाहों में कई बातें  शामिल हैं. मसलन, आलसी मत बनो, खूब मेहनत करो वगैरहवगैरह. इस पुरानी कहावत में वे अपनी टिप्पणी का तर्क कुछ यों जोड़ते हैं कि आप जिस तरह पैसा खर्च करते हैं वह तरीका ही आप के पास पैसे होने या न होने की गारंटी देगा. अपनी 1-1 पाई का महत्त्व समझना चाहिए, क्योंकि हमें हर पल पैसे खर्च करने पड़ते हैं. मतलब क्या है? उन की इस बात का मतलब यह है कि महीने की शुरुआत में ही अंधाधुंध खरीदारी कर के अपनी जेब खाली न कर बैठें बल्कि महीने के अंत में बड़ी खरीदारी करें ताकि महीने के अंत में पैसे की समस्या न खड़ी हो. एक बार आप में यह आदत बन जाए तो फिर आप अपनी बड़ी से बड़ी जरूरत भी इस बचत की आदत के चलते पूरा कर सकते हैं.

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