Causes of spotting : असामान्य योनि रक्तस्राव को स्पॉटिंग (spotting) कहा जाता है, जो पीरियड साइकल के अलावा अन्य दिनों में होता है। यह बहुत ही आम समस्या है। अगर आमतौर पर आपके पीरियड्स नियमित रहते हैं और पीरियड्स जाने के कुछ दिन बाद दोबारा से हल्की-हल्की ब्लीडिंग हो रही है, तो यही स्पॉटिंग है। हालांकि यह आपकेअस्वस्थ होने का संकेत नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में यह चिंता की बात हो भी सकती है। इसलिए ऐसे मामले में डॉक्टर को दिखाना जरूरी हो जाता है। इस कंडीशन में डॉक्टर कुछ टेस्ट करवाते हैं जिससे पता चल सके कि यह स्पॉटिंग आपके लिए नॉर्मल है या फिर किसी बीमारी का संकेत।

वैसे हर बार ऐसा होने पर घबराने की जरुरत नहीं होती है. कई बार पीरियड शुरू होने से पहले होने वाली स्पॉटिंग, पीरियड आने का संकेत हो सकती है। वहीं, पीरियड खत्म होने के बाद कई बार हल्का-फुल्का ब्लड अंदर रह जाता है, जो स्पॉटिंग के तौर पर बाहर आता है।

स्पॉटिंग और पीरियड्स में क्या अंतर है?

स्पॉटिंग और पीरियड्स एक ही बात नहीं हैं। इनके बीच का अंतर जानने से आपको अपने मासिक धर्म चक्र को बेहतर ढंग से ट्रैक करने में मदद मिलती है। जैसे कि-
समय – स्पॉटिंग 1-2 दिन तक रहती है। मासिक धर्म 4-7 दिन तक रहता है।
कलर – धब्बे हल्के भूरे या गुलाबी होते हैं। मासिक धर्म का रक्त लाल होता है।
ब्लड फ्लो – स्पॉटिंग हल्की होती है। मासिक धर्म का प्रवाह स्थिर होता है।
लक्षण- स्पॉटिंग आमतौर पर बिना किसी ऐंठन के होती है। मासिक धर्म के दौरान अक्सर दर्द, सूजन और मूड में बदलाव होता है।

स्पॉटिंग इन वजहों से भी हो सकती है?

पेल्विक इंफ्लामेटरी डिजीज
एक से अधिक व्यक्ति से सेक्सुअल रिलेशनशिप बिल्ड करने से पेल्विक इंफ्लामेटरी डिजीज का खतरा बना रहता है। शरीर में इसका जोखिम बढ़ने से सिरदर्द, बुखार, पेट के निचले हिस्से में ऐंठन और ब्लीडिंग की समस्या बढ़ने लगती है। दरअसल, वेजाइना से रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स तक पहुंचने वाला संक्रमण पीरियड साइकिल न होने के बावजूद भी स्पॉटिंग की समस्या का कारण बनने लगता है। कई बार एसटीआई हिस्ट्री भी समस्या का कारण साबित होता है।

हार्मोनल असंतुलन
हार्मोनल असंतुलन स्पॉटिंग का सबसे सामान्य कारण है. जब शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, तो पीरियड्स में देर या चूक हो सकती है, जिससे हल्की स्पॉटिंग हो सकती है. इससे बचने के लिए रोजाना व्यायाम करें, बैलेंस डाइट लें और तनाव को कम करें.

गर्भनिरोधक गोलियां भी कारण हो सकती है
कई बार प्रग्नेन्सी रोकने के लिए हम अपनी मर्जी से या कैमिस्ट से पूछ कर कोई भी गर्भनिरोधक गोलियां कहानी शुरू कर देते है. ऐसा करना सही नहीं है क्यूंकि इस वजह से भी स्पॉटिंग हो सकती है. इसलिए तुरंत डॉक्टर को देखायें क्यूंकि हो सकता है वो गोली आपको सूट ना कर रही हो.

यूटेरस या सर्विक्स में इंफेक्शन होने पर
यूटेरस या सर्विक्स में इंफेक्शन होने पर पीरियड के अलावा हल्की ब्लीडिंग के साथ बदबू या जलन भी महसूस हो सकती है। इसलिए अगर आपको स्पॉटिंग हो रही है तो हो सकता है आपको इन्फेक्शन हो.

थायराइड असंतुलन
आपका थायरॉइड आपके मासिक धर्म चक्र सहित कई शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करता है। जब यह ठीक से काम नहीं करता है, तो हार्मोन का स्तर असंतुलित हो जाता है। इससे मासिक धर्म से पहले स्पॉटिंग हो सकती है।
कम सक्रिय और ज़्यादा सक्रिय थायरॉइड दोनों ही रक्तस्राव के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं। थकान महसूस होना, वज़न बढ़ना या कम होना, या बालों का पतला होना कुछ सामान्य लक्षण हैं। कुछ महिलाओं को तो हर समय ठंड लगती रहती है या उनका मूड बदलता रहता है। अगर आपको स्पॉटिंग के साथ-साथ ये लक्षण भी दिखें, तो अपने डॉक्टर से थायरॉइड टेस्ट करवाने के लिए कहें। यह जल्दी हो जाता है और बहुत कुछ समझा सकता है।

पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम
कई बार ऐसी महिलाएं जो पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम से ग्रसित होती हैं उनमें हार्मोंस के उतार चढ़ाव के कारण पीरियड्स न होते हुए भी वैजाइना से ब्लीडिंग होने की समस्या हो सकती है। पीसीओडी या पीसीओएस इनफेक्शन का तुरंत इलाज करवाना जरूरी होता है क्योंकि इससे कई तरह की समस्याएं हो जाती है जैसे कि अंडाशयों और डिंबवाही नलिकाओं में मवाद भरे फोड़े विकसित होना, पेट में अंदर की तरफ ऊतकों की पतली परत में जलन व सूजन, बुखार, स्पॉटिंग, मिचली और उल्टी।

थायराइड की समस्या भी बन सकता है कारण
ऑफिस ऑन वुमेन्स हेल्थ के अनुसार शरीर में थायराइड हॉर्मोन की कमी भी स्पॉटिंग का कारण साबित होती है। हर आठ में से 1 महिला थायरॉइड का शिकार होती है। शरीर में हाइपोथयरोइडिस्म और हाइपरथयरोइडिस्म दोनों ही स्थितियों में स्पॉटिंग की समस्या का खतरा रहता है। इसके अलावा इनफर्टिलिटी, वेटगेन और थकान की समस्या भी बनी रहती है।

स्पॉटिंग हो सकती है कैंसर का संकेत –
स्पॉटिंग खतरनाक कैंसर के कारण हो सकती है। अगर आपको स्पॉटिंग हो रही है तो इसे हल्के में ना लें। दरअसल, महिलाओं में सबसे अधिक होने वाले कैंसर में एंडोमीट्रियल, सर्वाइकल और ओवेरियन कैंसर आता है। ओवेरियन कैंसर को डिंब ग्रंथि या अंडाशय कैंसर भी कहा जाता है। जिसमें ओवरी में सिस्ट अर्थात ट्यूमर बनने शुरू हो जाते हैं और यही सिस्ट बाद में कैंसर का रूप धारण कर लेती है।
सामान्यतः इनमें से किसी भी कैंसर की पहचान नहीं हो पाती है, क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बेहद कम देखने को मिलते हैं या कहें कि इसके लक्षण आम दिनों के दर्द या साधारण लक्षणों में आते हैं। मगर जब यह कैंसर पेल्विक एरिया और पेट के आसपास फैलने लगता है, तभी इसकी पुष्टि हो पाती है। इसलिए अधिकांश मामलों में इसका इलाज तीसरे या चौथे चरण में ही होता है। यह कैंसर जब अपनी एडवांस स्टेज में पहुंचता है, तब कुछ लक्षण जैसे पेट में सूजन या पेट का फूल जाना, थोड़ा खाते ही भुख मिट जाना, वजन घटना, पेल्विक एरिया में दर्द, कब्ज़, बार-बार यूरिन की इच्छा और स्पॉटिंग नजर आते हैं। इन सभी कैंसर के लिए, प्रारंभिक पहचान महत्वपूर्ण है। यदि आप इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं, तो नियमित रूप से लगातार जांच के लिए जाएं।

डॉक्टर से कब मिलना ज़रूरी हो जाता है:

  • अगर आपको एक महीने में एक से ज़्यादा बार पीरियड आए
  • जब आप दिन में कभी चक्कर महसूस करें
  • जब हल्के पीरियड के साथ आपको मतली या बुख़ार आए
  • जब प्रेगनेंसी के दौरान ख़ास कर के शुरूआती तीन महीनों में स्पॉटिंग हो
  • लगातार 2–3 साइकिल तक स्पॉटिंग होना
  • स्पॉटिंग के साथ तेज़ पेट दर्द, चक्कर या कमजोरी
  • बदबूदार या रंग बदला हुआ डिस्चार्ज
  • मेनोपॉज़ के बाद हल्की भी ब्लीडिंग दिखना
  • इन स्थितियों में डॉक्टर से मिलना डर की वजह से नहीं, बल्कि स्पष्टता और सुरक्षा के लिए ज़रूरी होता है। Causes of spotting
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