Comedy : मैं  और मेरा साढ़ू संजय अपने सासससुर और अपनीअपनी पत्नी से बच कर घर से यह कह कर कि अभी आते हैं, कुछ काम याद आ गया एक झटके में निकल गए थे कि कहीं कोई रोक न ले. 2 दिन से इधर से उधर भागभाग कर थक गए थे क्यों थक गए थे? बताता हूं सासूमां यानी लता मम्मीजी का 60वां जन्मदिन है तो उन की बेटी मेरी पत्नी, तारिका और मेरी साली देविका. अपना बैस्ट देना चाहती हैं या यह कहूं कि हम से, इस घर के दामादों से बैस्ट दिलाना चाहती हैं, औनलाइन के जमाने में जब सबकुछ एक फोन से हो सकता है, मैं और संजय अपनीअपनी पत्नी के आदेशानुसार सासूजी की पसंद की हर चीज का इंतजाम कर रहे हैं. मेरी अपनी मां के जन्मदिन पर मैं ने इतना न किया जितना मुझे अब करना पड़ रहा है. मेरी अपनी मां तो एक साड़ी और एक अच्छे डिनर में खुश हो गई थीं. यहां तो ऐसा लग रहा है जैसे 60 साल का हो कर सासूमां ने मेरे ऊपर कोई एहसान किया है. हद है मैं और संजय तेजतेज कदमों से चल कर एक कैफे में जा कर बैठ गए और एकदूसरे को तरस भरी नजरों से देख चैन की ठंडी सी सांस ली. पहले हम दोनों में ऐसी बौंडिंग नहीं थी पर 2 लोगों का दुख एकजैसा हो तो उन्हें आपस में जोड़ देता है.

यह बनारस का एक छोटा सा कैफे है जो हमारी ससुराल के पास ही है. हम यहां जल्दी से आ कर बैठ सकते थे सो यहीं आ बैठे हैं. इस समय अगर आप हमारी शक्लें देखें तो आप को बिलकुल नहीं लगेगा कि आज हमारी ससुराल में कोई फंक्शन है और हम दामाद हैं. हम अच्छे कपड़ों में कोई नौकर से लग रहे हैं, कम से कम मुझे तो ऐसी ही फीलिंग आ रही है.

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