Stories : ‘‘मैं   तुम से बेइंतहा प्यार करती हूं शेखर. तुम्हारे बगैर जी न सकूंगी,’’ मैं ने कल्पना को कभी इतना हताशनिराश नहीं देखा था. कहते हैं आंखें दिल का आईना होती हैं. मैं ने उस की पारदर्शी आंखों में झांक कर देखा तो कुछ देर के लिए मैं भी उदास हो गया.

‘‘आंसू पोंछ लो,’’ मैं ने उस की तरफ अपना रूमाल बढ़ाया. वह अपने बैग से रूमाल निकाल कर आंखों को पोछने लगी.

‘‘क्या फिर कुछ हुआ?’’ मैं ने क्षणांश चुप्पी के बाद भीगे स्वर में पूछा.

‘‘सुधीर ने मुझ पर हाथ उठाने की कोशिश की,’’ और कल्पना की आंखें पनीली हो गईं.

‘‘इतना गिर सकता है?’’ मैं ने ‘इतना’ पर जोर दिया.

‘‘कहता है मेरा चालचलन ठीक नहीं है. ठीक ही कहता है क्योंकि मैं तुम से मुहब्बत करती हूं. वह मेरी मुहब्बत के काबिल नहीं.’’

‘‘छोड दो उसे.’’

‘‘छोड़ कर जाऊंगी कहां?’’ कल्पना ने सही कहा. अकेले रहेगी तो हजार बेशर्म निगाहें पीछा करेंगी. खुद मेरा अधेड बौस कल्पना के रंगरूप पर मोहित है. कई बार कार से घर छोड़ने की पेशकश कर चुका है, जिसे कल्पना ने साफसाफ ठुकरा दिया.

तभी वेटर आया. कौफी के 2 मग रख कर चला गया. मैं ने खाने का और्डर देना चाहा मगर कल्पना ने मना कर दिया.

‘‘कल्पना, मैं अपने वादे से मुकरूंगा नहीं. बस पापा को मना लूं. सब ठीक हो जाएगा,’’ मेरे कथन से उसे तसल्ली हुई. रात 8 बजने को थे. हम दोनों जल्दीजल्दी कौफी खत्म कर के अपनेअपने फ्लैट की तरफ निकल पड़े.

मेरा मन कल्पना को ले कर उद्विग्न था. करवटें बदलते बारबार कल्पना का

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