Bollywood Shooting Hours : एक समय में बौलीवुड हीरोइनों का सफल कैरियर काल काफी कम सालों का होता था क्योंकि खूबसूरत से खूबसूरत और सफल हीरोइनों की जैसे ही शादी हो जाती थी या वे बच्चे की मां बन जाती थीं तो उन के अभिनय कैरियर पर पूर्णविराम लग जाता था। इस के पीछे की खास वजह यह थी कि कोई हीरोइन शादीशुदा होने के बाद कई दृश्य जैसे इंटीमेट सीन्स, अंग प्रदर्शन के लिए मना कर देती थीं. समय की पाबंदी भी एक समस्या थी।
दरअसल, शादी के बाद बच्चे और परिवार की प्राथमिकता के चलते हीरोइनों का ध्यान अपने अभिनय कैरियर से भटकने लगता है, जिस के चलते मेकर्स ऐसी हीरोइनों पर पैसा लगाने के लिए तैयार नहीं होते, जिन की वजह से फिल्म को नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में शादी के बाद कई हीरोइनें अच्छा रोल न मिलने की वजह से या तो घर बैठ जाती हैं या भाभी और मां के किरदार निभाने लगती हैं, जिस के चलते एक समय में कई हीरोइनें फिल्मी कैरियर खत्म होने के डर से या तो लंबे समय तक शादी ही नहीं करती थीं या शादी होने के बावजूद अपनेआप को कुंआरी बताती थीं.
शादी को रखती हैं छिपा कर
मशहूर अभिनेत्री जूही चावला ने अपनी शादी होने की खबर को काफी समय तक छिपा कर रखा था. माधुरी दीक्षित, शिल्पा शेट्टी, रवीना टंडन और श्रीदेवी जैसी हीरोइनों ने अपने फिल्मी कैरियर को बचाए रखने के चक्कर में लंबे समय तक शादी नहीं की थी.
लेकिन कुछ सालों बाद ऐसा दौर भी आया जब शादीशुदा हीरोइनों ने अपना अलग मुकाम बनाया, जिस की शुरुआत मशहूर अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया ने की और 2 बच्चियों के जन्म के बाद फिल्मों में फिर से वापसी की और फिल्म ‘सागर’, ‘जांबाज’, ‘राम लखन’, ‘एतबार’ जैसी सुपरहिट फिल्में दीं।
डिंपल कपाड़िया की तरह ही कई और हीरोइनों ने शादी के बाद भी अपना अभिनय कैरियर जारी रखा और वे सभी सीन्स करना स्वीकारने लगीं जो फिल्म के लिए जरूरी हैं फिर चाहे वह अंग प्रदर्शन हो, इंटीमेट या किस सीन हो या ऐक्शन सीन ही क्यों न हो। आज की हीरोइन शादी और बच्चे के बावजूद फिल्म के लिए हर तरह के सीन करने को तैयार हैं।
आज का दौर शादीशुदा हीरोइनें
ऐसे में हीरोइन के लिए शादीशुदा होने पर फिल्में न मिलने का जो टैंशन था वह खत्म हो गया और आज के समय में आलिया भट्ट, कियारा आडवाणी, दीपिका पादुकोण आदि कई सारी हीरोइनें शादी के बाद भी फिल्मों में सक्रिय हैं.
लेकिन हाल ही में नईनई मां बनीं दीपिका पादुकोण ने एक बड़ी फिल्म करने से सिर्फ इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि वे शर्तों के अनुसार उस बड़ी फिल्म में काम करना चाहती थीं. दीपिका की शर्त थी कि वे फिल्म की शूटिंग सिर्फ 8 घंटे ही करेंगी और शनिवार और रविवार को पूरी तरह छुट्टी रखेंगी क्योंकि फिल्मी कैरियर के अलावा अब उन की पर्सनल लाइफ और बेटी की जिम्मेदारी भी है जिसे वे प्राथमिकता देती हैं. फिल्म के मेकर को दीपिका की यह शर्त मंजूर नहीं थी। इसलिए उस बिग बजट फिल्म मेकर ने दीपिका को हटा कर दूसरी हीरोइन को साइन कर लिया.
दीपिका की तरह कई हीरोइनें भी इस बात से सहमत हैं कि ऐक्टिंग कैरियर के अलावा उन की अपने घर और बच्चों के प्रति भी जिम्मेदारी है, इसलिए वे शूटिंग के लिए पूरा दिन नहीं दे सकतीं। हालांकि ये सभी हीरोइनें शादी और बच्चे के बावजूद पूरी तरह फिट ऐंड फाइन हैं और शादी होने का उन के अभिनय कैरियर पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। यही वजह है कि मेकर्स भी शादीशुदा हीरोइनों को धड़ल्ले से साइन कर रहे हैं और हिचकिचा नहीं रहे.
ऐसे में कहना गलत न होगा कि आज जितनी भी सफल हीरोइनें हैं वे न सिर्फ शादीशुदा हैं बल्कि एक बेटी या बेटे की मां भी हैं. फिर चाहे वे आलिया भट्ट हों, यामी गौतम हों, कियारा आडवाणी हों, प्रियंका चोपड़ा हों या दीपिका पादुकोण ही क्यों न हों. लेकिन इन सभी हीरोइनों का शूटिंग को ले कर जो 8 घंटे की शिफ्ट और शनिवार रविवार की छुट्टी की मांग कहां तक सही है? क्या मेकर्स को उन की बात माननी चाहिए या इस बात का भी कोई और सोल्यूशन निकल सकता है?
कितना सही कितना गलत
आज के समय में 75% औरतें वर्किंग वूमन हैं जो शादीशुदा और बच्चा होने के बावजूद अपने घर से बहुत दूर भी काम करने जाती हैं और उस दौरान उन का बच्चा घर में ही होता है। बच्चे को संभालने के लिए ऐसी कामकाजी औरतें अपना कोई सुरक्षित जुगाड़ करती हैं फिर चाहे नौकरानी रखनी हो या घर के किसी सदस्य को बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी देनी हो. बात अगर आम औरतों की है तो उन की नौकरी के लिए 7 या 8 घंटे पक्के होते हैं, बाकी जो ट्रैवलिंग में वक्त होता है वह अलग. लेकिन ऐसा ही कुछ अगर वकील, डाक्टर, जर्नलिस्ट, साइंटिस्ट या कारपोरेट वर्ल्ड से जुड़ी महिलाओं के बारे में हो तो यहां पर समय की पाबंदी लगाना मुश्किल है क्योंकि ऐसी पोजिशन पर रहने वाली महिलाओं को कभी भी और कितने भी घंटे के लिए बाहर रहना पड़ सकता है। कई बार 2-3 दिन, तो कई बार 2-3 महीने भी।
जिम्मेदार पोस्ट पर काम करने वाली महिलाएं समय की पाबंदी के साथ काम नहीं कर सकतीं क्योंकि जिस कंपनी ने उन को हायर किया है और उसे सारा काम सिखाया है और वह कंपनी उसे काम का पूरा पैसा भी देती है तो वह उस महिला से 100% काम भी चाहेगी। ऐसे में अगर वह महिला शादीशुदा और बच्चे होने की वजह से 8 घंटे तक ही काम करने की डिमांड करती है, तो ऐसे में कंपनी का मालिक तो यही सोचेगा कि इस से अच्छा तो मैं किसी आदमी को ट्रैंड करता जो बिना किसी डिमांड के कंपनी का काम पूरी ईमानदारी से करता.
अगर ग्लैमर वर्ल्ड की भी बात करें तो एक हीरोइन जब सफलता के शिखर तक पहुंचती है तो उस की उम्र 28 से 30 के करीब हो जाती है। ऐसे में सफल कैरियर के बीच अगर वह शादी और बच्चा करती है तो उस का फिल्मी कैरियर ढलान पर आ खड़ा होता है क्योंकि फिर उस हीरोइन का ध्यान फिल्मी कैरियर से ज्यादा अपने बच्चों पर और शादीशुदा जीवन पर होता है. कैरियर को संभालते हुए शादीशुदा जीवन और बच्चे को संभालना जिस हीरोइन को अच्छे से आता है वही अपने अभिनय कैरियर में आगे बढ़ पाती है क्योंकि जो मेकर उस हीरोइन को करोड़ों में फीस देगा वह उस से काम के लिए समय भी चाहेगा.
शादीशुदा और बच्चे की देखभाल और काम के प्रति तालमेल बैठाने के कुछ उपाय
हमारे समाज में यह एक धारणा बन गई है कि अगर एक लड़की शादीशुदा और बच्चे की मां है और साथ ही वह प्रोफैशनली भी सफल है तो बच्चों की खातिर उस को अपना सफल कैरियर ताक में रख कर घर बैठना चाहिए और बच्चे और घर को संभालना चाहिए. अगर कोई प्रोफैशनल औरत ऐसा नहीं करती तो समाज के लोग ताना मारमार कर उस का जीना दूभर कर देते हैं। यह सब नजरअंदाज करते हुए कामकाजी महिलाएं फिर चाहे वह हीरोइन हो या किसी और क्षेत्र की, कुछ ऐसे रास्ते खोज सकती है जो उन के कामकाजी जीवन और घरेलू जीवन में सही तालमेल बैठा सकता है जैसे सब से पहले अपने बच्चों को संभालने के लिए ऐसा बंदोबस्त करे जिस पर आप पूरी तरह से विश्वास कर पाएं फिर चाहे वह भरोसेमंद नौकर हो या परिवार का कोई सदस्य, जिस के पास अपने बच्चों को पूरी तरह सौंप पाएं ताकि जब आप काम पर हों तो आप टैंशन फ्री रहें।
दूसरा, अगर आप ग्लैमर वर्ल्ड से हैं तो आप फिल्म के डाइरैक्टर के साथ बात कर के सुबह के बजाय दोपहर 12 से 1 बजे की शिफ्ट या बच्चों के हिसाब से समय एडजस्ट कर के अपनी फिल्म की शूटिंग पूरी कर सकती हैं।
अगर आप आउटडोर जा रहे हैं तो बच्चे के साथ नौकर को साथ में ले कर जा सकती हैं जो आप के बच्चे को पूरी तरह संभालता हो.
अगर बच्चे को ज्यादा समय देने की बात है तो आप एक फिल्म कम साइन करें। कुछ समय तक पार्टी फक्शन में जाने में समय बरबाद न करें और वह समय अपने बच्चों को दें. वैसे भी बच्चों को मां कुछ समय के लिए चाहिए होती है, जैसे सुबह के वक्त के कुछ घंटे। बाद में तो बच्चा सो जाता है।
शुरुआत के कुछ साल बच्चे को मां की जरूरत ज्यादा होती है। उस के बाद जैसे ही वह स्कूल जाने लगता है उस के बाद मां के साथ वक्त बिताने के लिए भी बच्चों के पास वक्त ही नहीं होता क्योंकि स्कूल, ट्यूशन अदर ऐक्टिविटीज में उस का पूरा वक्त निकल जाता है।
सच बात तो यह है कि आज ही नहीं बल्कि बरसों से एक कामकाजी मां बच्चों के साथ उन की देखभाल करते हुए अपने प्रोफैशनल काम को भी पूरी ईमानदारी से करती आई है। पुराने जमाने की रानी लक्ष्मी बाई, झांसी की रानी अपने बच्चों को छोड़ कर दुश्मनों से युद्ध करने मैदान में उतर जाती थीं, लेकिन बच्चों के नाम पर अपनेआप को कमजोर दिखा कर कभी पीछे नहीं हटती थीं.
कहने का मतलब यह है कि कड़ी मेहनत के बाद एक उच्च स्थान पाने वाली अभिनेत्री या अन्य किसी क्षेत्र की सफल महिला सिर्फ बच्चों के नाम पर अपना बनाबनाया कैरियर दांव पर नहीं लगा सकती, बल्कि बीच का रास्ता निकाल कर दोनों जगह तालमेल बैठा सकती है, अगर वह दिल से चाहे तो.
