Bollywood Stars : जिंदगी का सफर तभी सुहाना और खुशनुमा होता है, जब उस सफर में हम दिल खोल कर ऐंजौय करते हैं और छोटीछोटी बातों में खुशियों का एहसास करते हैं। जैसे ट्रेन छूट जाने पर भागते हुए ट्रेन पकड़ लेना और उस के बाद बैठने के लिए सीट मिल जाना, खाली रास्ते पर मस्ती से बाइक चलाना, भीड़ भरी बस में बैठने के लिए सीट मिल जाना वगैरह।
यह सब बातें छोटी जरूर हैं लेकिन जो सफर के दौरान इन छोटीछोटी बातों पर खुश होता है और ऐंजौय करते हुए अपना सफर तय करता है, उस इंसान को यह यादगार सफर हमेशा याद रहता है। इन छोटीछोटी जीत में मिली सफलता के बाद चेहरे पर एक विजयी मुसकान आ जाती है. खासतौर पर तब जब एक समय के बाद कोई आम इंसान अपना खास मुकाम हासिल कर लेता है। उस के पास महंगी गाड़ियां, नाम, शोहरत, पैसा, बंगले होते हैं, कई सारी कारों के काफिले के साथ सड़कों पर गुजरता है और अमीर इंसान कहलाता है.
ऐसे ही कई बौलीवुड स्टार्स हैं जिन के पास आज महंगी कारें हैं. वे टाइट सिक्योरिटी में चलते हैं, लेकिन आज भी उन को अपना वह संघर्ष भरे दिनों में लोकल ट्रेन, बस, औटो रिकशा का सफर याद है.
अगर ग्लैमर वर्ल्ड या बौलीवुड स्टार्स की बात करें तो बौलीवुड में अमिताभ बच्चन, सलमान खान, शाहरुख खान जैसे कई स्टार्स हैं जो महंगी कारों के काफिले के साथ सफर करते हैं. ये घर से निकलते हैं तो उन की कार के आगेपीछे 2-3 कारों का काफिला जरूर होता है. वे जहां भी जाते हैं उन की शोहरत पहले पहुंच जाती है.
लेकिन एक सच यह भी है कि आलीशान कारों में घूमने वाले ये सितारे एक समय संघर्ष से भरी जिंदगी भी जी चुके होते हैं. उस दौरान यही स्टार्स महंगी कारों में नहीं बल्कि बस, ट्रेन और रिकशे में सफर करते थे और काम पाने के लिए स्ट्रगल करते थे. इस स्ट्रगल के पीरियड में मंजिल तक पहुंचने के लिए लोकल ट्रेन, रिकशा और बस का सफर उन की जिंदगी का हिस्सा रह चुका है, जिसे वे आज भी नहीं भूले हैं और जहां ट्रेन और बस का ट्रैवल संघर्ष के दिनों में ये स्टार्स मजबूरी में करते थे, वहीं आज सफल होने के बाद भी ट्रेन, रिकशा, बस में ट्रैवल करना पुरानी यादों को ताजा करने जैसा है।
ये स्टार्स मेट्रो में सफर करते दिखें
आप को यह जान कर बढ़िया लगेगा कि बौलीवुड के कई स्टार्स पिछले दिनों मैट्रो में सफर करते हुए नजर आए। ऐसा करने के पीछे एक वजह यह भी है कि जहां स्टार्स को अपनी महंगी कारों में सफर करते समय शूटिंग स्थल तक पहुंचने में कई घंटे लग जाते थे, मैट्रो और लोकल ट्रेन या बाइक में आधे घंटे में यह सफर तय हो जाता है.
बौलीवुड स्टार्स का पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर दिलचस्प किस्सों के साथ
महंगी और बड़ी कारों में सफर करने वाले ऐक्टर व ऐक्ट्रैस आम इंसानों की तरह कई बार आजादी से भरी जिंदगी जीने की चाह रखते हैं. जैसे महंगी कारों में घूमने के बजाय पूरी मस्ती में लोकल ट्रेन, बस, रिकशा, मैट्रो ट्रेन में आम लोगों की तरह सफर करना, रास्ते में गोलगप्पे, चाट, वडा पाव खाना, बिना किसी की परवाह किए बेफिक्री की जिंदगी जीना, बिलकुल वैसी जैसी फिल्मों में आने से पहले यही स्टार्स संघर्ष के दिनों में पैसे बचाते हुए बिना किसी की परवाह किए अपनी जेब के हिसाब से ट्रैवल करते थे. लेकिन आज जबकि सबकुछ उन के पास है लेकिन वह बेफिक्री की जिंदगी, आजादी से घूमने का मजा, आज कई सारे स्टार्स मिस करते हैं.
एक सच यह भी है कि अपनी प्राइवेट कार का सफर जहां 1-2 घंटे का होता है, वहीं ट्रेन और मैट्रो में आधा घंटे के अंदर लंबा सफर तय हो जाता है। यही वजह है कि कई सारे स्टार्स जैसे रितिक रोशन, आयुष्मान खुराना, माधुरी दीक्षित, रवीना टंडन, विद्या बालन, अक्षय कुमार आदि अपना मुंह कवर कर, मास्क, हेलमेट, स्कार्फ से ढंक कर अपनी पहचान छिपा कर मैट्रो या रिकशे में सफर कर चुके हैं ताकि उन को लंबे ट्रैफिक में फंस कर परेशान न होना पड़े और कुछ ही मिनटों में वे शूटिंग स्थल पर पहुंच जाएं.
अक्षय कुमार बाइक से टाइम पर पहुंच जाते हैं
इसी बात को मद्देनजर रखते हुए अक्षय कुमार ने एक इंटरव्यू में बताया कि कई बार वे जुहू से फिल्मसिटी हैलमेट पहन कर बाइक से निकल जाते हैं. हैलमेट की वजह से उन की पहचान छिपी रहती है और ढाई घंटे में कार का सफर बाइक से आधे घंटे में ही पूरा हो जाता है और वे टाइम पर पहुंच भी जाते हैं.
अक्षय के अनुसार, फिल्मों में आने से पहले वे बस में भी ट्रैवल करते थे और ट्रेन में भी ट्रैवल करते थे। आज भी कई बार अक्षय समय बचाने के लिए मोटर बाइक और मैट्रो से ट्रैवल करते हैं.
अक्षय की तरह ही गोविंदा ने भी संघर्ष के दिनों में रोज विरार से अंधेरी बांद्रा तक का सफर ट्रेन से तय किया है।
इतना ही नहीं गोविंदा ने बताया था कि फिल्मों में संघर्ष के दौरान वे विरार में रहता थे। विरार से बांद्रा और अंधेरी का सफर 1 से डेढ़ घंटे का होता है। लिहाजा, इस दौरान वे फिल्मों में काम पाने के लिए लोकल ट्रेन में सफर किया करते थे। उस दौरान उन की मां भी नौकरी करती थीं इसलिए वे उन के आने से पहले ही उन के लिए ट्रेन के महिला कंपार्टमेंट में जा कर उन के लिए सीट पकड़ लेते था ताकि वे लंबा सफर बैठ कर तय कर सकें.
गोविंदा के अनुसार, सफल ऐक्टर बनने के बाद एक बार मेरी कार खराब हो गई थी तो मेरे ड्राइवर ने मुझे रिकशा में बैठा दिया। उस वक्त जब रिकशेवाले ने मुझे अपने रिकशे में बैठे देखा तो खुशी के मारे वह इतना पागल हो गया कि अपने सभी पहचान वालों को रिकशा चलातेचलाते कौल कर के बता रहा था कि मेरे रिकशे में गोविंदा बैठे हैं. उस की खुशी देख कर मुझे हंसी भी आई और खुशी भी हुई। मैं ने उस को ₹1000 निकाल कर दिए तो वह बोला कि मैं इस को खर्च नहीं करूंगा क्योंकि यह पैसा मुझे हीरो नंबर वन गोविंदा ने दिया है।
सलमान खान लेट नाइट रिक्शा में घूमते हैं
गोविंदा की ही तरह सलमान खान भी लेट नाइट रिकशा में घूमने का मजा लूटते हैं। उन का एक पहचान वाला खास रिकशावाला है, जो सलमान के बुलाने पर रात को 2-3 बजे भी सलमान के घर पहुंच जाता है और रात में वे रिकशा में घूमते हैं। कई बार तो सलमान गोविंदा के घर रिकशा से पहुंचते हैं और गोविंदा को भी बाहर बुला लेते हैं रिकशा में घूमने के लिए।
इस के अलावा सलमान को साइकिल में घूमने का भी शौक है। वे अकसर अपनी साइकिल में हैलमेट पहन कर बांद्रा की सड़कों पर सवारी करते नजर आते हैं।
बौलीवुड हीरोज की तरह हीरोइनें भी फिल्मों में आने से पहले बस, ट्रेन, रिकशा में ट्रैवल करती थीं। अपने उसी दौरान के अनुभव को साझा करते हुए विद्या बालन ने बताया कि फिल्मों में आने से पहले जब वे ट्रेन और बस में ट्रैवल करती थीं तो उस दौरान उन की बहुत सारी सहेलियां बन गई थीं, जिन से उन को कुछ जानने और सीखने को मिलता था।
इसी तरह रवीना टंडन, माधुरी दीक्षित, अनन्या पांडे, शिल्पा शेट्टी आदि कई हीरोइनें लोकल सफर का आनंद उठाती थीं।
विद्या बालन के अनुसार, आज भी कई बार वे स्कार्फ से चेहरा कवर कर के औटो रिक्शा में ट्रैवल करने जाती हैं और कई बार रास्ते में गोलगप्पे खाने का मजा लेती हैं.
दिल्ली की रहने वाली तापसी पन्नू ने दिल्ली में बस में सफर करने का अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब वे फिल्मों में आने से पहले दिल्ली की बस में ट्रैवल करती थीं तो बस में कुछ आवारा लड़के चांस मारने की कोशिश करते थे. उस वक्त वे हाथ में सैफ्टी पिन या सुई रखती थीं और उस वक्त जो भी उन को टच करने की कोशिश करता था तापसी उस को पिन चुभो देती थीं.
इन हीरोइनों के अनुसार फिल्मों में आने के बाद अकेले ट्रेन या बस में ट्रैवल करना खतरे से खाली नहीं है, इसलिए ऐसा रिस्क कम ही लेते हैं. लेकिन कई बार मन जरूर होता है कि पहले की तरह आजादी से बस ओर मैट्रो में घूमने का आनंद उठाएं क्योंकि मशहूर होने की वजह से मुंबई में आजादी से घूमना मुश्किल है। इसलिए कई हीरोइनें मुंबई से बाहर विदेशों में जब ट्रैवल करती हैं तो वहां पर मैट्रो और लोकल गाड़ियों में घूमने का आनंद उठाती हैं.
इस बात से यही निष्कर्ष निकलता है कि अमीरी चाहे कितनी ही लग्जरियस व आरामदेह हो लेकिन जो मजा आजादी के साथ घूमने और मस्ती करने में है वह सबकुछ होने के बाद भी नहीं महसूस होता. आजादी का अलग ही मजा होता है जो दिल को सुकून और अलग ही खुशी देता है.
