Rajeev Khandelwal : टीवी और फिल्म ऐक्टर राजीव खंडेलवाल, जो टीवी इंडस्ट्री की जानीमानी हस्ती हैं और मशहूर रियलिटी शो ‘सच का सामना के’ होस्ट रह चुके हैं, अब काफी समय बाद महिलाओं को सम्मान देने वाला रियलिटी शो ‘तुम हो ना’ से सोनी चैनल में ऐंट्री कर रहे हैं.
राजीव खंडेलवाल, जो औरतों का बहुत सम्मान करते हैं अपनी मां के बहुत ज्यादा लाडले रहे हैं. उन की मां आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपनी मां की यादें राजीव हमेशा दिल में संजोए रखते हैं.
दिलचस्प बातें
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान राजीव खंडेलवाल ने अपनी मां को याद करते हुए कुछ दिलचस्प बातें बताईं जो दिल को छूने वाली हैं.
राजीव के अनुसार, जब भी मैं अपनी मां की बात करता हूं तो उन का भोलाभाला, मुसकराता हुआ चेहरा मेरी आंखों के सामने घूम जाता है और आंखें नम हो जाती हैं.
वे कहते हैं कि पिताजी मिलिट्री में थे इसलिए वे ज्यादा घर पर नहीं रहते थे, लिहाजा मां ने ही हम तीनों भाइयों की परवरिश अकेले की थीं। उन्होंने कभी भी लड़का या लड़की में भेदभाव नहीं किया इसलिए वे हम तीनों से ही घर के सारे काम करवाती थीं जैसे कपड़े साफ कराना, बर्तन धुलवाना, झाड़ूपोंछा लगाना, खाना बनाना वगैरह.
वे हंसते हुए कहते हैं कि मेरे 2 बड़े भाई घर के कामों में कामचोरी करते थे, इसलिए मैं ही अपनी मां को हर तरह से मदद करता था। अगर वे रोटियां बेलती थीं, तो मैं उन के साथ रोटियां सेंका करता था। ऐसे ही मेरी मां कांजी की हुई कड़क साड़ी पहनती थीं, तो मैं उन की साड़ी की प्लेट्स ठीक करने में भी मदद करता था क्योंकि कड़क साड़ी होने की वजह से वे अकेले साड़ी नहीं पहन पाती थीं।
हमेशा रखा खयाल
राजीव बताते हैं कि जब मेरी मां थक कर बाहर से आती थीं, तो मैं उन को अदरक वाली कड़क चाय बना कर देता था क्योंकि हमारे घर में कोई लड़की नहीं थी यानी मेरी कोई बहन नहीं थी, इसलिए मैं ही अपनी मां की हर तरह से सेवा करता था।
वे कहते हैं कि मां मुझ से हमेशा कहती थीं कि तुम मेरी बेटी है बेटा नहीं क्योंकि जितना प्यार एक बेटी अपनी मां से करती है, इतना ही प्यार तुम मुझ से करते हो, इसलिए तुम मेरी बेटा नहीं बेटी हो.
थोङे भावुक होते हुए राजीव बताते हैं कि आज मां इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उन के सिखाए संस्कार हमारी जिंदगी में खून की तरह शामिल हो गए. उन्होंने कभी भी मुझे या मेरे भाइयों को औरत और मर्द में फर्क रखना नहीं सिखाया। हमेशा औरतों का सम्मान करना सिखाया। इस का नतीजा यह है कि बचपन से ले कर आज तक मुझे हर उम्र की महिलाओं से प्यार मिला है। कुछ तो मेरे लिए अपनी बची हुई पूंजी से स्वैटर और शाल खरीद कर मुझे गिफ्ट करती हैं. मैं जिस शहर में घूमने जाता हूं फिर चाहे वह कश्मीर हो या कोई और जगह, वहां की औरतों ने मुझे न सिर्फ प्यार दिया, बल्कि ढेर सारे गिफ्ट भी दिए।
सबकुछ मां की वजह से
वे कहते हैं कि आज मुझे महसूस होता है कि मां के दिए हुए संस्कारों की वजह से ही मैं आज महिलाओं के बीच खासतौर पर लोकप्रिय हूं. मैं अपनी मां को नमन करना चाहूंगा और यह कामना करूंगा कि वे जहां भी रहें खुश रहें.
