ये साडि़यां आज की भारतीय महिला के लिए डिजाइन की गई हैं. ये कल्चर, कौन्फिडैंस और कंटैंपररी स्टाइल को एकसाथ खूबसूरती से निभाती हैं. मौडर्न कट, समय से परे रहने वाली कारीगरी और सहज अंदाज से अपनी अलग पहचान बनाती हैं.
भारतीय फैशन की बदलती दुनिया में जहां विरासत और आधुनिकता लगातार एकदूसरे से जुड़ते हैं, साडि़यां फिर से ट्रेंड बदल रही हैं और महिलाएं इस सदाबहार परिधान को नए तरीके से जी रही हैं. इन्हीं में नव्यासा बाय लिवा समकालीन भारतीय महिला की नई आवाज बन कर उभरी है. वह महिला जो कंफर्ट को उतना ही महत्त्व देती है जितना ऐलिगैंस को, जो अपनी अलग पहचान और सहज स्टाइल के साथ सस्टेनेबिलिटी को भी उतना ही चाहती है.
लिवा द्वारा बनाया गया और आदित्य बिड़ला गु्रप की विरासत पर टिका नव्यासा सिर्फ साड़ी का ब्रैंड नहीं है. यह गति, सहज बहाव, रचनात्मकता और खुद को जताने का जश्न है. यह उस आजादखयाल महिला के लिए है जो आत्मविश्वास से जिंदगी जीती है. ब्रैंड का नजरिया साफ है, साडि़यां जितनी खूबसूरत लगती हैं उतनी ही पहनने में आजाद भी लगनी चाहिए.
लाइफस्टाइल की समझ.
नव्यासा को अलग बनाती है उस की आज की महिला की लाइफस्टाइल की सम?ा. आज की महिला लगातार अलगअलग रोल और जगहों के बीच आतीजाती रहती है, बोर्डरूम से ब्रंच तक, औफिस मीटिंग से छोटीछोटी सैलिब्रेशन तक, त्योहारी जमावड़े से ट्रैवल डायरी तक. उसे ऐसा फैशन चाहिए जो उस की रफ्तार के साथ चले, बिना कंफर्ट या स्टाइल से सम?ाता किए. नव्यासा इस जरूरत को खूबसूरती से पूरा करती है. हलकी साडि़यां जो मुलायम, सांस लेने वाले कपड़े से बनती हैं, सहजता से लिपटती हैं और त्वचा पर पंख जैसी लगती हैं.
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दशकों तक साड़ी का मतलब था भारी लिबास, जटिल प्लेट्स और सिर्फ खास मौकों का पहनावा. नव्यासा इस सोच को बदलती है और साड़ी को रोजमर्रा के जीवन में आसान, पहनने लायक और बहुपयोगी बनाती है. इस के बहते हुए कपड़े महिलाओं को खुल कर, आत्मविश्वास से चलने देते हैं जिस से साड़ी ‘खास मौके का कपड़ा’ कम और निजी स्टाइल का हिस्सा ज्यादा बन जाती है.
नव्यासा साडि़यों का सब से खास पहलू है इस का फैब्रिक. ब्रैंड की पहचान है मुलायम, बहते हुए कपड़े, जिन में सुघड़ता के साथ आसानी भी है. चाहे लंबे वर्कडे हों, दिन के इवेंट हों या हलकी शाम की महफिल, ये साडि़यां ऐलिगैंस से समझौता किए बिना कंफर्ट देती हैं. इन का हलकापन खासकर यंग कस्टमर और प्रोफैशनल महिलाओं को भाता है जो साड़ी को सुंदर तो मानती हैं पर पहले उसे रोज पहनना मुश्किल समझती थीं.
पहनावे में बदलाव
पिछले कुछ सालों में मौडर्न इंडियन वर्कप्लेस में भी पहनावे का बदलाव आया है. महिलाएं प्रोफैशनल सैटिंग में पारंपरिक फौर्मल पहनावे से आगे बढ़ कर ऐथनिक फैशन आजमा रही हैं. नव्यासा के हलके प्रिंट, समकालीन डिजाइनें और आसान ड्रैप इस बदलाव में बिलकुल फिट बैठते हैं. ये साडि़यां पौलिश्ड और रिलैक्स्ड के बीच का सही संतुलन रखती हैं जिस से महिलाएं औफिस में सुघड़ दिखती हैं और दिनभर कंफर्टेबल भी रहती हैं.
नव्यासा हलके सैलिब्रेशन और सोशल गैदरिंग के लिए भी बिलकुल ठीक हैं. लंच गैदरिंग, फैस्टिव औफिस पार्टी, छोटा पारिवारिक फंक्शन, गैलरी ओपनिंग या डैस्टिनेशन ब्रंच, ये साडि़यां ऐसे हर मौके में सहजता से ढल जाती हैं. इन का कम सजावटी ग्लैमर और क्रिएटिव डिटेलिंग इन्हें इतना बहुपयोगी बनाता है कि इन्हें दिन की सादगी के लिए मिनिमल स्टाइल किया जा सकता है या शाम की शान के लिए ऐक्सैसराइज किया जा सकता है.
समकालीन बनावट
डिजाइन नव्यासा के अंदाज में अहम भूमिका निभाती है. कला, प्रकृति, ऐब्स्ट्रैक्ट ऐक्सप्रैशन और मौडर्न क्रिएटिविटी से प्रेरित इन साडि़यों में अनोखे प्रिंट और सोचसम?ा कर चुने गए पैटर्न होते हैं जो पारंपरिक ऐथनिक पहनावे से अलग खड़े होते हैं. पेंटर जैसे फूल, ज्यामितीय डिजाइन, ब्रश स्ट्रोक से बने मोटिफ और समकालीन बनावट, हर साड़ी एक विजुअल कहानी कहती है.
समकालीन फैशन में पर्सनलाइजेशन भी तेजी से अहम हो रहा है और नव्यासा इस बदलती सोच के साथ बिलकुल मेल खाती है. साड़ी सिर्फ कपड़ा नहीं रह जाती बल्कि यह खुद को जताने का कैनवस भी बन जाती है.
महिलाएं इन साडि़यों को कई तरह से स्टाइल कर सकती हैं. बैल्ट, जैकेट, स्टेटमैंट ब्लाउज, स्नीकर्स, हील्स या हस्तनिर्मित गहनों के साथ ताकि लुक पूरी तरह उन का अपना लगे. स्टाइल की यह आजादी खासकर यंग कस्टमर के लिए माने रखती है जो साड़ी को नए और गैरपारंपरिक तरीके से फिर से खोज रही हैं. उन के लिए साड़ी अब रीतिरिवाज या परंपरागत अपेक्षाओं तक सीमित नहीं बल्कि यह बहती हुई, ऐक्सपैरिमैंटल और डीपली पर्सनल बन गई है. नव्यासा इस भावना को खूबसूरती से पकड़ती है. महिलाओं को ‘फ्रीस्टाइल’ जिंदगी जीने और अपने हिसाब से फैशन अपनाने के लिए प्रेरित करती है.
ऐसे समय में जब सस्टेनेबिलिटी फैशन में अहम बात बन रही है, नव्यासा का नजरिया भी समयोचित और प्रासंगिक लगता है. कस्टमर अब इस बात को ले कर ज्यादा जागरूक हैं कि वे क्या पहनते हैं और उस का कंफर्ट और पर्यावरण पर क्या असर पड़ता है. नव्यासा का फोकस फ्लूडिटी, टिकाऊपन और थौटफुल कारीगरी पर है ताकि फैशन विकल्पों की बढ़ती मांग से मेल खा सके.
कपड़े की पहचान
जब परिधान लाइटवेट, इजी टू ड्रैप और पहनने में कंफर्टेबल होता है तो स्वाभाविक रूप से यह महिला के खुद को कैरी करने के अंदाज को बदल देता है. वह ज्यादा फ्री हो कर चलती है, काम करती है, सैलिब्रेट करती है, ट्रैवल करती है. यही आजादी उस कपड़े की पहचान बन जाती है. आज के कस्टमर ऐसे ड्रैप अपना रहे हैं जो वर्सटाइल, ?ां?ाट मुक्त और फैशन फौरवर्ड हों और नव्यासा इस बदलाव में सब से आगे खड़ा है.
लाइट वेट फैब्रिक, समकालीन अंदाज और सहज ऐलिगैंस को जोड़ने की नव्यासा की क्षमता इसे साड़ी कल्चर के इस नए दौर में अलग पहचान देती है. उस महिला के लिए जो चाहती है कि उस का वार्डरोब उस के बदलते लाइफस्टाइल को दिखाए. नव्यासा सिर्फ खूबसूरत साडि़यां नहीं देता. यह आजादी देता है, चलने की आजादी, जताने की आजादी, निजी बनाने की आजादी और यह फिर से तय करने की आजादी कि आज की दुनिया में साड़ी का मतलब क्या है.
ऐसे फैशन परिदृश्य में जहां अलग पहचान ही असली लग्जरी बन रही है, नव्यासा हमें याद दिलाता है कि स्टाइल सब से ज्यादा ताकतवर तब लगता है जब वे एफर्टलैस, पर्सनल और ट्रू टु वनसैल्फ हो. ब्रैंड सिर्फ साडि़यां नहीं बना रहा वह आधुनिक महिला होने के कई डाइमैंशंस का जश्न मनाने वाला एक कंटैंपररी मूवमैंट आंदोलन बना रहा है.
