मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन भारत की पहली मिस यूनिवर्स बनी जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला. लेकिन यह जर्नी इतनी आसान नहीं थी, मिस यूनिवर्स बनने से पहले मिस इंडिया प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेने में सुष्मिता सेन थोड़ा घबरा रही थी, क्योंकि इस प्रतियोगिता में ऐश्वर्या राय भी हिस्सा ले रही थी . क्योंकि सुष्मिता सेन ऐश्वर्या राय की तरह बेहद खूबसूरत नहीं थी , बल्कि एक एवरेज लड़की थी और ऐसे में उनको डर था कि मिस इंडिया प्रतियोगिता के दौरान ऐश्वर्या राय जैसी खूबसूरत प्रतियोगी के सामने क्या वह टिक पाएंगी.

सुष्मिता सेन ने अपने एक इंटरव्यू के दौरान अपनी इस उलझन का जिक्र करते हुए बताया , कि मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता से पहले जब मिस इंडिया प्रतियोगिता की बारी थी तो उस दौरान सुष्मिता सेन अपनी जीत को लेकर कॉन्फिडेंट थी, लेकिन जब उन्होंने मिस इंडिया प्रतियोगिता में प्रतियोगी के रूप में ऐश्वर्या राय को देखा तो सुष्मिता का विश्वास डगमगा गया , और उन्होंने मिस इंडिया प्रतियोगिता का फॉर्म वापस लेने के बारे में सोचा , ऐश्वर्या राय के अलावा भी अन्य शहरों से कई खूबसूरत मॉडल इस प्रतियोगिता में शामिल हुई थी. सुष्मिता के अनुसार जब मैं अपनी मां से अपने प्रतियोगिता में हारने के डर को लेकर बात की तो मेरी मां ने मुझसे कहा अंधों में काना राजा तो कोई भी बन सकता है.. मजा तो तब है जब मुश्किलों का सामना करके तुम यह प्रतियोगिता जीतो.

अपनी मां की बातों से प्रभावित होकर मैं मिस इंडिया प्रतियोगिता का हिस्सा तो बनी लेकिन मैंने अपनी मां को प्रतियोगिता के दौरान आने के लिए मना किया. क्योंकि मैं अपनी मां के सामने हारना नहीं चाहती थी . लेकिन उस वक्त मुझे बहुत ज्यादा आश्चर्य हुआ जब मैं सभी प्रतियोगियों को हराकर मिस इंडिया बनी और मिस इंडिया का ताज अपने सर पर सजाया. उस वक्त मेरे मन में यही ख्याल आया कि मेरी मेहनत से ज्यादा उस दौरान मेरे नसीब ने मेरी लक ने मेरा साथ दिया ,

क्योंकि मिस इंडिया की प्रतियोगिता में जितनी मेहनत मैंने की थी ,उतनी ही मेहनत बाकी प्रतियोगियों ने भी की थी लेकिन उस वक्त मेरी लक ने मेरा साथ दिया और मैं मिस इंडिया प्रतियोगिता जीत गई. मेरी मां मेरे साथ नहीं थी क्योंकि मैंने खुद ही उनको आने से मना किया था, लेकिन मिस इंडिया बनने के बाद जब मैं मिस यूनिवर्स के लिए गई तो मैं अपनी मां को अपने साथ ही रखा क्योंकि मिस इंडिया बनने के बाद मेरे अंदर थोड़ा आत्मविश्वास भी बढ़ गया था.

और जब मैं पहली मिस यूनिवर्स बनी 1994 में उस वक्त मेरा और मेरी मां का खुशी का ठिकाना नहीं था .
उस दौरान मिस यूनिवर्स और मिस इंडिया बनने के बाद मैंने यही जाना और सीखा कि जिंदगी में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए आपके सामने चाहे जो कोई भी हो, आपको अपनी तरफ से 100 प्रतिशत देने के लिए तैयार रहना चाहिए .नतीजा चाहे जो हो .

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