relationship advice : जब भी शादी और जीवनसाथी के चुनाव की बात आती है, तो हमारे सामने 2 रास्ते होते हैं. एक रास्ता पूरी तरह व्यावहारिक है जो पैसों, मकान और पिता की संपत्ति को देखता है और दूसरा रास्ता जज्बाती है जो प्यार और स्वभाव को प्राथमिकता देता है.

जीवनसाथी का चुनाव करते समय अकसर यह सवाल सामने आता है कि प्राथमिकता किसे दी जाए- पिता की संपत्ति और बनीबनाई छत को? लड़के की काबिलियत व कमाई को? या फिर उस के प्यार और स्वभाव को?

आज के दौर में न तो केवल कोरी भावुकता से जीवन चलता है और न ही सिर्फ पैसों की चमक से शांति मिलती है. आज की प्रैक्टिकल दुनिया में प्यार हवा में नहीं टिकता और केवल पैसा मानसिक सुकून नहीं दे सकता.

आइए, समझते हैं कि एक सुरक्षित, शांत और व्यावहारिक भविष्य के लिए जीवनसाथी चुनते वक्त किस पैमाने को किस नजरिए से देखना जरूरी है :

आप को जिंदगी से क्या चाहिए

रिश्ते की शुरुआत में ही अपनी सीमाओं और अपेक्षाओं को साफ कर देना चाहिए. अगर लड़का या लड़की पहले ही स्पष्ट कर दें कि वे जीवन से क्या चाहते हैं चाहे वह कैरियर हो, घर संभालना हो या काम का बंटवारा, तो शादी के बाद धोखे या निराशा की गुंजाइश खत्म हो जाती है.

इसी तरह जब शादी की बात हो तो पहले ही तय कर लें कि आप की प्रायोरिटी क्या है? आप को पैसा चाहिए, सब सुखसुविधा पहले से ही बनाबनाया चाहिए, प्यार चाहिए और संघर्षभरा जीवन नहीं चाहिए तो आप उसी हिसाब से फैसला लें.

पिता की संपत्ति सुरक्षा कवच है

किराए का मकान बदलने का तनाव, मकानमालिक की शर्तें और बजट का बड़ा हिस्सा किराए में चले जाना इंसान को मानसिक रूप से थका देता है. आज की महंगाई में शून्य से शुरुआत कर के अपना घर बनाना बेहद मुश्किल है. अगर लड़के के पास अपनी कमाई से मकान बनाने का जरीया नहीं है, लेकिन पिता का घर या संपत्ति मौजूद है, तो उसे एक ‘सुरक्षा कवच’ मानना गलत नहीं है. शादी में वित्तीय स्थिरता और छत होना जीवन की आधी चिंताओं को कम कर देता है. अपना घर और वित्तीय स्थिरता व्यक्ति को सुकून देती है, जिस से वह जीवन के अन्य बड़े फैसलों पर बेहतर ध्यान दे पाता है.

संकट के समय ढाल होता है अपना घर

नौकरी में मंदी, व्यापार में नुकसान या अचानक आने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के वक्त आर्थिक सुरक्षा ही परिवार को बिखरने से बचाती है. विपरीत परिस्थितियों में अगर सिर पर अपनी पक्की छत हो, तो इंसान दोबारा खड़े होने का हौसला आसानी से जुटा लेता है.

रिश्तों में तनाव कम होता है

अकसर परिवारों और शादियों में होने वाले बड़े तनावों की जड़ में आर्थिक अनिश्चितता होती है. जब बुनियादी जरूरतें पूरी होती हैं और भविष्य सुरक्षित दिखता है, तो रिश्तों में बेवजह की चिढ़ और तनाव कम होता है.

लड़के की कमाई को आत्मनिर्भरता और नीयत के रूप में देखें

वर्तमान सैलरी के आंकड़े से ज्यादा लड़के की ‘मेहनत करने की नीयत’ माने रखती है. एक काबिल और मेहनती इंसान आज भले कम कमा रहा हो, लेकिन मुश्किल समय में परिवार को उबारने का जज्बा रखता है. साथ ही यह भी जांचें कि क्या वह आर्थिक रूप से जिम्मेदार है? क्या उस में विपरीत परिस्थितियों में मेहनत कर के आगे बढ़ने का हौसला है? अगर है तो आप उस बारे में सोच सकती हैं.

लड़के का प्यार देखें

लड़के के प्यार को केवल मीठी बातों, वादों या तोहफों से नहीं, बल्कि उसशके गुस्से, बरताव और आप की सीमाओं के प्रति उस के आदर से आंका जाना चाहिए. व्यावहारिक जीवन में सच्चा प्यार वही है जो आप को मानसिक सुरक्षा और बराबरी का सम्मान दे सके. इंसान का असली चरित्र गुस्से में सामने आता है. अगर वह बातबात पर आप पर चिल्लाता है या अनियंत्रित हो जाता है, तो पैसों और सहूलियतों के बावजूद ऐसा प्यार आगे चल कर मानसिक घुटन बन जाता है. जब स्थितियां उस के मनमुताबिक न हों, तब उस का रवैया कैसा रहता है? क्या वह संवाद कर के रास्ता निकालता है या बात बंद कर के नीचा दिखाने की कोशिश करता है? क्या वह हर फैसला खुद थोपता है या आप के विचारों और फैसलों को भी बराबरी की अहमियत देता है?

पेरैंट्स पर लड़का चुनने की जिम्मेदारी न डालें

आप पेरैंट्स की निगाह से लड़के को खुद देखें. पेरैंट्स पर यह जिम्मेदारी न डालें कि वे लड़का आप के लिए चुनें. जो पैमाने हैं वह आप की हैसियत और उस की हैसियत से मेल खाते हुए हों. अगर आप ऐसे घर में रह रही है जहां मांबाप रोज एकदूसरे को पीटते हैं और आप को उस घर से निकालना है क्योंकि यह बिखरी हुए जिंदगी आप को नहीं चाहिए. इसलिए आप किसी लड़के के साथ प्रेम में पड़ जाती हैं. लेकिन समस्या यह है कि वह लड़का बहुत जल्दी गुस्सा हो जाता है. लेकिन उस लड़के में पौजिटिव बात यह है कि उस के पास थोड़ा बहुत पैसा है. ऐसे में उस के साथ  शादी कर लेने में कोई बुराई नहीं है.

जहां आप रह रही हैं वहां भी तो घुटन है. इसी तरह के कुछ निर्णय आप को अपने विवेक और अपनी प्रायोरिटी के हिसाब से लेने होंगे नाकि मांबाप के कंधे पर सिर रख कर फैसला लें.

इस के आलावा अगर कोई लड़का अपने लिए लड़की ढूंढ़ रहा है और लड़की को देखते हुए अगर आप को यह लगता है कि मुझे ऐसी लड़की चाहिए जो घर का काम करें, तो आप एमबीए लड़की को तो न ढूंढ़ें बल्कि जो टिफिन बना कर ला रही है और खिला रही है उसे ढूंढ़ें. अगर आपने एमबीए लड़की को चुना है, तो उस से यह आशा कतई मत करें कि वह आप के घर वालों की सेवा करेगी और आप के लिए बढ़ियाबढ़िया खाना बनाएगी. इस के विपरीत वह भी अपनी संडे की छुट्टी आराम कर के बिताएगी नकि घर का काम कर के. अगर आप को ऐसे लड़की चाहिए तो घरेलू लड़की लाएं.

एक सुखी शादी की नींव न तो केवल पैसों के ढेर पर रखी जा सकती है और न ही सिर्फ कोरी भावुकता पर. पिता की संपत्ति एक सुरक्षा कवच दे सकती है और लड़के की कमाई भविष्य का भरोसा, लेकिन उस घर को ‘घर’ बनाने का काम लड़के का स्वभाव और उस का प्यार ही करता है. शादी के फैसले में पिता की संपत्ति ‘सपोर्ट सिस्टम’ है, लड़के की अपनी कमाई ‘काबिलियत’ है और उस का स्वभाव ‘मानसिक शांति’ है.

एक सुरक्षित भविष्य के लिए तीनों का संतुलन जरूरी है. इसलिए किसी एक पैमाने को पूरी तरह न तो गलत कहा जा सकता है न ही सही.

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