Hindi Stories : होटल    ‘हिल व्यू’ के अपने रूम में पैर रखते ही संदली के चेहरे पर ऐसी प्यारी हंसी आई कि अनुज ने उसे बांहों में उठा कर घुमा दिया.

‘‘अरे, छोड़ो कोई हमारे बैग ले कर आता ही होगा.’’

और हुआ भी यही, एक युवा स्टाफ ‘‘ओह, सौरी,’’ कहता हुआ बैग्स अंदर ले आया.

तब तक संदली जानबू झ कर इस खूबसूरत कमरे की शीशा विंडो के पास जा कर खड़ी हो गई थी. मनमौजी, खुशमिजाज अनुज स्टाफ को ‘‘थैंक यू’’ बोल रहा था.

वह लड़़़़़़का ‘‘एंजौय योर स्टे सर,’’ कह कर जा चुका था.

अनुज ने संदली की कमर में पीछे से हाथ डाल उस की सुंदर गरदन को चूम लिया, ‘‘अब बताओ, आते ही क्यों हंसी थी?’’

‘‘बैड देख कर. क्याक्या सजा देते हैं. बैड पर दिल बने हैं, दो डक साथसाथ रख दी हैं, गुलाब ही गुलाब. कितना सुंदर है न सबकुछ,’’ कहतेकहते संदली ने भी अनुज के कंधे पर सिर टिका दिया.

‘‘हां जान सब सुंदर ही होना चाहिए. होटल में बुकिंग के समय बोल दिया था हनीमून पर आ रहे हैं. आओ, बैड का उद्घाटन करते हैं,’’ अनुज ने संदली को फिर गोद में उठा लिया.

‘‘अरे, अरे फ्रैश तो होने दो, कपड़़़़़़े तो बदलने दो.’’

‘‘कपड़़ों का क्या काम,’’ कहतेकहते अनुज ने संदली को अपने पास बैठा कर उस के मेहंदी लगे हाथ चूम लिए, ‘‘तुम कितनी सुंदर हो संदली.’’

संदली धीरे से मुसकरा दी. आंखों से ही ढेर सा प्यार अपने 5 दिन पुराने पति पर उड़़़ेल दिया. अनुज धीरेधीरे नए बने पतिपत्नी के रिश्ते पर, संदली की देह के हर हिस्से पर अपने प्यार की मुहर लगाता रहा. संदली उस के प्यार में डूबतीउतराती रही और दोनों के पास से आती प्रेम की खुशबू मिल कर एक हो गई. देह के सुखद मिलन के बाद दोनों एकदूसरे से लिपटे ही रहे. अनुज ने छेडा, ‘‘अब फ्रैश नहीं होना है?’’

संदली को शरारत सू झी, ‘‘नहीं अब क्या फ्रैश होना. वैसे अनुज तुम्हारे से जो खुशबू आती है, मु झे बहुत अच्छी लगती है.’’

‘‘यह तुम्हारे साथ की खुशबू है, हमारे प्यारे रिश्ते की खुशबू है,’’ कहते हुए अपने सीने पर रखे संदली के सिर को अनुज ने चूम लिया.

कुछ पलों बाद संदली ने साइड में रखा तौलिया लपेटा और वाशरूम चली गई. तब तक अनुज अपने परिवार को बताता रहा कि वे दोनों सहीसलामत पहुंच गए हैं. संदली नहा कर ही निकली. अनुज उसे निहारने लगा, 27 साल की, साफ रंगत, कमर तक काले घने ताजाताजा धुले बालों को अभी एक टौवेल से लपेट लिया गया था. दूसरे टौवेल से संदली ने अपनी गरदन के नीचे का हिस्सा लपेट रखा था.

‘‘अब तुम भी फ्रैश हो लो.’’

यह सुनते ही अनुज उठा और वाशरूम जातेजाते संदली का टौवेल शरारत से नीचे खींच दिया. वह जैसे ही कुछ कहती, अनुज तब तक नहाने जा चुका था. अनुज की इस हरकत पर संदली मन ही मन मुसकरा दी. संदली ने अपना बैग खोला, एक बहुत स्टाइलिश सुंदर सी हलके आसमानी रंग की छोटी सी ड्रैस निकाली जो आज के दिन ही पहनने के लिए खरीदी गई थी. हनीमून पर आने की शौपिंग उस ने बड़े मन से की थी, होटल के रूम में पहने जाने वाले एक से एक सैक्सी कपड़े खरीदे थे. बालों को पोंछती हुई वह रूम की विंडो के पास आ कर बाहर का नजारा देखने लगी. यह मसूरी का एक शानदार रिजोर्ट था. सामने ही हरीहरी पहाडि़यां, बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां, सुंदर घाटियां, अद्भुत नजारा था. बाहर देखने से मन ही नहीं भर रहा था. जहां तक नजर जा रही थी, हर तरफ प्राकृतिक सुंदरता जैसे कह रही थी कि मु झ से नजर हटाना इतना आसान नहीं.

अनुज भी टौवेल लपेट कर बाहर आया तो संदली उसे देखती रह गई. 30 साल

का अनुज, लंबा, सुगठित देह, बालों से टपकता पानी, अब संदली तेजी से चल कर उस के पास आई और उस की कमर के इर्दगिर्द अपनी बांहें कस लीं. अनुज ने  झुक कर उस के होंठ चूम लिए फिर कहा, ‘‘तुम्हें भूख लग रही होगी न? चलो, लंच कर लें. रूम में ही खाओगी या बाहर चलें?’’

‘‘जैसा तुम चाहो.’’

‘‘मैं वही करूंगा जो तुम्हारा मन हो. इतनी सैक्सी ड्रैस पहन कर वैसे ही तुम मु झे कुछ सोचने का मौका नहीं दे रही हो. तुम्हारी छोटी बहन ने बताया था कि तुम्हें 1 बजे तक खाने की आदत है. मैं तुम्हारे बारे में सबपूछ कर आया हूं ताकि तुम्हें कोई परेशानी न हो,’’ कहतेकहते अनुज ने एक बार फिर उस के मेहंदी वाले हाथ चूम लिए. चूडि़़़यां  झन झना उठीं. अब तक संदली को एहसास हो गया था कि उस के पेरैंट्स ने उस के लिए अच्छा जीवनसाथी चुना है. दोनों की अरेंज्ड मैरिज थी. दोनों ही लखनऊ के रहने वाले थे.

‘‘यहीं रूम में खाना और्डर कर लें? फिर थोड़़़ा आराम कर के शाम को घूमने चलें?’’

अनुज ने फौरन अपनी सहमति दी. फिर दोनों ने मिल कर सोचा कि क्या और्डर किया जाए. रूम सर्विस के फोन नंबर पर खाना और्डर कर के दोनों खिड़की के पास रखी चेयर्स पर बैठ कर बाहर की सुंदरता निहारने लगे. फिर दोनों ने रूम में कई जगह कुछ रोमांटिक पोज में सैल्फीज लीं. रूम का इंटीरियर बहुत क्लासी था. बैड की दोनों ओर साइड टेबल्स थीं, जिन पर एकएक सुंदर शोपीस रखा था. विंडो के पास 2 आरामदायक चेयर्स के बीच में एक स्टाइलिश टेबल रखी थी. सामने ही लकड़़ी की अलमारी थी जिस में हैंगर्स थे. बैड के सामने दीवार पर एक टीवी था जिस के नीचे लंबी सी ड्राअर थी जिसपर एक ट्रे में केतली और कप, गिलास, पानी की बोतल रखी थी.

संदली ने भी अपने परिवार से और अनुज के पेरैंट्स से भी बात की. सब का हालचाल पूछा, अपना बताया. अनुज इकलौती संतान था. संदली की एक छोटी बहन थी, कनिका. दोनों परिवार इस विवाह से संतुष्ट और खुश थे. संदली पौलिटिकल साइंस में एमए कर चुकी थी, अब पीएचडी कर रही थी जिस में किसी को कोई आपत्ति नहीं थी. अनुज भी अच्छी जौब में था.

लंच आ गया, वेटर टेबल पर सब रख कर चला गया. अनुज ने अपने हाथ से संदली के लिए प्लेट में खाना लगाया. उसे दे कर अपने लिए खाना लिया.

खाना खाते हुए संदली ने पूछा, ‘‘अनुज, यहां मसूरी में देखने के लिए क्याक्या है? मु झे तो गूगल पर देखने का टाइम ही नहीं मिला.’’

‘‘मेरा दोस्त बता रहा था यहां कई दिलचस्प और सुंदर जगहें हैं, कैंपटी फाल्स तो तुम ने सुना ही होगा. गन हिल, माल रोड, मसूरी  झील, लाल टिब्बा, अभी तो इतना याद है, बाकी पूछते हुए घूम लेंगे. हमारे पास अभी 2 दिन हैं. अभी काम का प्रैशर काफी है, फिर जल्दी ही छुट्टियां ले कर कहीं और घूमने चलेंगे.’’

‘‘हांहां, कोई दिक्कत नहीं. आराम से सोचेंगे. अब तो जीवनभर का साथ है, घर में रहें या बाहर, बस साथ हों,’’ कहते हुए संदली ने अनुज को सब्जी लगे हाथों से फ्लाइंग किस कर दिया.

खाना खा कर दोनों थोड़ी देर लेट गए. पिछले कई दिनों की थकान थी.

2 घंटे दोनों गहरी नींद सो कर उठे. रूम के परदे हटा कर बाहर देखा, मौसम बहुत सुहावना दिखा.

संदली बच्चों की तरह मचल गई, ‘‘बस जल्दी से तैयार हो कर बाहर चलते हैं, बहुत अच्छा मौसम लग रहा है.’’

अनुज भी तुरंत उठ गया. संदली ने बहुत सुंदर पिंक कलर का टौप और ग्रे जींस पहनी. अनुज ने ब्लैक टीशर्ट और ब्लू जींस पहनी. दोनों हाथों में हाथ डाले रिजोर्ट से निकल गए.

माहौल इतना खुशनुमा था कि दोनों के मन खिल उठे. दोनों के चेहरे नए रिश्ते की आभा से चमक रहे थे. दोनों बहुत खुश थे. विवाह के ये दिन हर पतिपत्नी को याद रहते हैं. तनमन बातबात पर खिल जाता है. उन की उम्र के कई जोड़़़े टहल रहे थे, शायद वे भी हनीमून पर आए थे. दोनों पैदल ही लोगों से रास्ता पूछतेपूछते माल रोड की तरफ बढ़ रहे थे.

संदली एक जगह रुक कर एक बोर्ड पर लिखा पढ़़़ने लगी. लिखा था, ‘‘मसूरी की तलाश 1827 में एक साहसी सैन्य अधिकारी कप्तान यंग ने की.’’

अनुज ने उसे बताया, ‘‘कल कैंपटी फाल्स चलेंगे, वहां एक मशहूर  झरना है जो 40 फुट की ऊंचाई से गिरता है.’’

रोड पर काफी रौनक थी. इस समय शाम के 4 बज रहे थे. एकदूसरे का हाथ पकड़े चलते हुए दोनों को अपने पीछे कुछ दूरी पर अचानक एक आवाज और एक चीख सुनाई दी. दोनों ने चौंक कर पीछे देखा, 3 लोग एक खुली जीप चला रहे थे, शायद पीए हुए थे. उन तीनों के चेहरों पर बेफिक्री थी. एक आदमी रोड पर गिरा पड़़़ा था, शायद उस पर जीप चढ़ा दी गई थी. अनुज ने संदली का हाथ कस कर पकड़ लिया. किसी को कुछ सम झ नहीं आया कि हुआ क्या. अनुज और संदली ने सोचा, आपसी रंजिश का मामला है. कुछ लोग उस जीप को घेरने की कोशिश करने लगे थे.

तभी एक लड़के ने एक पिस्टल से हवाई फायर किया और फिर यों ही एक और

आदमी को गोली मार दी. अब लोगों को सम झ आया कि शायद कोई आतंकवादी गैंग है. यह विचार आते ही वहां ऐसी भगदड़ मची कि घबराहट से भरी चीखों की आवाजों से सड़क गूंज उठी. यह सोचीसम झी प्लानिंग का हिस्सा था, जीप में तीनों के पास पिस्टलें ही नहीं, राइफलें भी थीं.

लाशें इधरउधर बिखरती जा रही थीं और इस अचानक आई अनहोनी में एक दुकान के बाहर लगे बोर्ड के पीछे छिपे, अपनी जान बचाते संदली और अनुज पसीने में डूबे हुए थे. संदली को तसल्ली देता अनुज बारबार यही कहे जा रहा था, ‘‘तुम घबराओ मत संदली. मैं हूं न.’’

पर वक्त आज इस प्रेम के विरुद्ध था. एक नकाबपोश न जाने कहां से निकल कर अनुज के सामने आ गया. हंसते हुए कहने लगा, ‘‘पर तुम तो मरने जा रहे हो? तुम क्या कर लोगे?’’

संदली को जैसे ही सम झ आया कि क्या हो सकता है, वह उस आतंकवादी के पैरों पर गिर पड़ी, ‘‘इन्हें छोड़ दो, भैया. इन की जान की भीख मांगती हूं. हमारी अभी ही शादी हुई है.’’

अनुज को भी सम झ आ गया था कि वह नहीं बचेगा, वह बुत बन कर खड़ा था, कुछ नहीं सू झ रहा था. उस ने जीभर  कर अपनी नईनवेली पत्नी को निहारा जैसे उसे अपनी आंखों में कैद कर रहा हो. उसे नकाबपोश के सामने गिड़गिड़ाते देख, उस का कलेजा मुंह को आ रहा था. ऐसी स्थिति तो सपने में भी नहीं सोची थी. आंखों के आगे अपने मातापिता के चेहरे भी घूम गए. उस की हथेलियां पसीने से भीग रही थीं. संदली को एकएक पल भारी लगा. यह तो सपने में भी नहीं सोचा था. वह मौत के सामने हाथ जोड़ कर खड़ी हो गई, हाथपैर डर के मारे बिलकुल ठंडे, आंखों से बहते आंसुओं से सारा काजल चेहरे पर फैल गया था. कांपते स्वर में फरियाद की, ‘‘प्लीज इन्हें छोड़ दो प्लीज.’’

छटपटाते हुए चारों तरफ देखा, कोई चमत्कार हो जाए, कोई आ जाए और उस के अनुज को बचा ले. वह कभी अनुज को हड़बड़ा कर कहती, ‘‘अनुज, अनुज,’’ कभी नकाबपोश के सामने गिड़गिड़ाती, ‘‘प्लीज, नहींनहीं.’’

नकाबपोश के लिए यह सब माने ही नहीं रखता था, अगर

रखता तो दुनिया में रोज इतने निर्दोष अपनी जान क्यों गंवाते? धर्म ने, मजहब ने इन के दिमाग इतने कुंद कर दिए हैं कि इन पर किसी फरियाद का, किसी के आंसुओं का असर होता ही कहां है.

दोनों की हालत एक अनजाने खौफ से खराब थी, हिम्मत टूट रही थी और देखतेदेखते उस नकाबपोश ने अनुज के सिर में गोली मार दी और वहां से चला गया. पलभर के लिए तो संदली को यकीन नहीं आया कि उस की आंखों के सामने जो घटित हुआ है, क्या वह सचमुच हुआ है और जब सम झ आया तो वह अनुज पर  झुक कर उसे झं झ झोड़़़़ने लगी पर अनुज के शरीर में जब कोई हरकत नहीं हुई तो वह ऐसे बिलख कर रोई कि दूरदूर तक उस के रोने की आवाज गूंज गई. अब तक पुलिस तक यह खबर पहुंच गई थी. आतंकवादी जैसे अचानक आए थे, वैसे ही मौत का खेल खेल कर अचानक गायब हो चुके थे. जिन्होंने अपनों को खोया था, उन की चीखें दिल दहला रही थीं.

संदली अनुज को अपने सीने से लिपटाए बदहवास रोए जा रही थी, अपने घर से इतनी दूर, जहां कोई उस का अपना नहीं, नया शहर, अजनबी लोग. यहां कौन उस का दुख बांटता. सब गम में डूबे थे. धीरेधीरे आसपास के रहने वाले लोग लोगों की सहायता के लिए आगे आने लगे, पुलिस वाले एकएक को जा कर तसल्ली दे रहे थे.

संदली को कोई होश नहीं था. अनुजअनुज पुकारे जा रही थी, जानती थी, उस की आवाज अनुज तक अब कभी नहीं पहुंचेगी पर बेहाल थी, उस के मुंह से अनुज के अलावा कुछ और निकल ही नहीं रहा था. उसे देखते ही सम झ आ रहा था कि वह अपने हनीमून पर यहां आई होगी.

एक महिला पुलिसकर्मी ने उसे हिम्मत दी, उस का नाम, होटल का पता पूछा, कहा, ‘‘अपने परिवार के फोन नंबर दो, हम उन से बात करते हैं, मैं खुद आप को होटल छोड़ कर आती हूं. बाकी के काम हम पर छोड़ दो. आओ, तुम्हें होटल छोड़ दूं,’’ कहते हुए पुलिस कर्मी महिला ने बड़ी मुश्किल से उसे अनुज से अलग किया.

अब हर तरफ रोने की आवाजें थीं. जिस जगह थोड़़़ी देर पहले अपनी आंखों में ढेर से सपने संजोए नवविवाहित जोड़े हाथ में हाथ डाले घूम रहे थे, वहां अब एक साथी का हाथ छूट चुका था. बस ऐंबुलैंस और रोने की आवाजें रह गई थीं. लुटीपिटी सी संदली अपने पैरों को जबरदस्ती खींचती हुई पुलिस कर्मी के पीछे चल दी. इस समय वह भी जीतीजागती लाश ही लग रही थी.

ऐंबुलैंस में शवों को ले जाना शुरू हो गया था. अब तक सब इस दुर्घटना के बारे में जान चुके थे.

संदली को जब होटल के बाहर छोड़़़़़़ा गया, होटल का पूरा स्टाफ उस के दुख में दुखी था. एक लड़़़़़़की उसे उस के रूम में ले गई, दुखी स्वर में बोली, ‘‘आई एम सौरी मैम.’’

उस के जाने के बाद संदली ने कमरे में चारों तरफ नजर घुमाई पैर कांप गए. अनुज के

साथ बिताया एकएक पल आंखों के आगे घूम गया. अभी  तो यहीं था, अभी कहां चला गया. बस इतना छोटा साथ? ऐसा भी भला कहीं होता है? अभी तो उस की खुशबू हर कोने से आ रही है, ये उस के उतारे कपड़़े मेरे कपड़़ों में लिपटे पड़े हैं. थोड़ी देर पहले ही तो उस ने उस के मेहंदी वाले हाथ चूमे थे.

रोती हुई  वह बिस्तर पर बैठ गई, चादर पर हाथ फेरा, यहीं तो सोया था दोपहर में. यह उस के रूमाल से अब तक खुशबू आ रही है, पता नहीं, किस की खुशबू है, उस की या मेरी. अब तो हम दोनों एक ही हो गए थे न. तकिए के नीचे से अनुज का सफेद रूमाल  झांक रहा था, उस की टीशर्ट जिसे वह दोपहर में पहन कर सोया था, वह भी बिस्तर पर पड़ी थी. अभी तो गुलाब की पत्तियां भी नहीं सूखी थीं. संदली ने अनुज की टीशर्ट अपने सीने से लगा ली और फफकफफक कर रोते हुए निढाल सी हो गई.

कमरे के हर कोने से आती खुशबू में बहुत दर्द छिपे थे. अब दर्द ही दर्द था और कुछ नहीं.

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