Short Hindi Story : अपनी  सहेली सिम्मी की मैरिज ऐनिवर्सरी में जाने के लिए यामिनी तैयार हो कर खुद को आईने में निहारते हुए मुसकरा उठी और खुद में बुदबुदाते हुए बोली कि तुम्हें कोई हक नहीं बनता यामिनी कि तुम इतनी सुंदर दिखो और फिर खिलखिला कर हंस पड़ी.

यामिनी खूबसूरत तो है ही, उस पर मैरून कलर की इस साड़ी में उस की खूबसूरती और निखर रही थी. उस का दूध सा गोरा रंग, बड़ीबड़ी काली आंखें, लंबे काले बाल, ऊंचा कद, ओह, क्या रूप पाया है यामिनी ने.

लगता है प्रकृति ने सारी सुंदरता उसी में उड़ेल दी. कोई कह ही नहीं सकता कि वे 8 साल के बेटे की मां है. लगती है जैसे कोई 20-22 साल की लड़की हो. उम्र तो जैसे उस की ठहर सी गई है.

यामिनी अभी भी आईने के सामने खड़ी हो कर अपने सुंदर रूप को निहारे जा रही थी. अपनी लटों को उंगली में फंसा कर इतराए जा रही थी लेकिन जैसे ही उस की नजर पीछे खड़े शालिन पर पड़ी, उस का खिलता चेहरा एकदम से मुर झा गया. मुंह बिचकाते हुए भुनभुनाई कि हुंहु, यह देखो, लग गया चांद पर ग्रहण.

अपनी इतनी सुंदर बीवी को तैयार होते देख मन किया शालिन का कि आगे बढ़ कर उसे चूम ले. लेकिन ऐसा उस के हिस्से कहां.

‘‘ओह, क्या बात है. आज तो बहुत तैयार हुई जा रही है. लग रहा है तुम्हारी सहेली की नहीं, तुम्हारी मैरिज ऐनिवर्सरी हो.’’

शालिन की बात पर यामिनी ने उसे घूर

कर देखा.

‘‘अरे भई, मेरे कहने का मतलब है कि आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो. वैसे आज यह बिजली किस पर गिरेगी?’’

‘‘कम से कम तुम पर तो नहीं. चलो हटो,’’ यामिनी ने मुंह बनाया.

यामिनी को देख कर शालिन के मुंह से लार टपक रही थी. मन कर रहा था उस का कि उसे अपनी बांहों में भर ले. क्या करे बेचारा इंसान ही है और यामिनी कोई गैर थोड़े ही है. उस की पत्नी है तो इतना तो हक बनता ही है उस का. इसलिए जैसे ही उस ने यामिनी को अपनी बांहों में भरना चाहा, वह उस से दूर छिटक गई और चिढ़ती हुई बोली, ‘‘क्या कर रहे हो… मेरा मेकअप खराब करोगे क्या?’’

‘‘अरे, बीवी हो तुम मेरी और मेकअप का क्या है, फिर से कर लेना,’’ बोल कर शालिन फिर अपनी हसरत पूरी करने को आगे बढ़ा ही कि यामिनी ने बड़ी बेरहमी से उसे परे धकेल दिया और मुंह बना कर बोली, ‘‘अरे पागल तो नहीं हो गए. बात सम झ नहीं आती क्या तुम्हें बड़े आए प्यार जताने वाले. जाओ जा कर तैयार हो जाओ.’’

यामिनी ने दोबारा से खुद को आईने में निहारा, सब ठीक था. कुछ बिगड़ा नहीं था.

‘‘यह लो, अब तक यहीं खड़े हो. जाओ जा कर तैयार हो जाओ और जरा अच्छे से तैयार होना. पिछली बार की तरह फिर से मेरी खिल्ली मत उड़वाना.’’

यामिनी की बात पर शालिन वहां से जाने ही लगा कि पीछे से उस ने टोका, ‘‘सुनो, मैं ने जो कपड़े निकाल कर रखे हैं, वही पहनना. अलमारी से निकाल कर कोई लाल पीली, नीली शर्ट मत पहन लेना. ऐसे कलर तुम पर सूट नहीं करते और यह लो, यह क्रीम लगा लेना ताकि तुम्हारा रंग कुछ तो साफ दिखे,’’ बोल कर यामिनी पता नहीं किस से फोन पर हंसहंस कर बातें करने लगी.

यामिनी की बात का शालिन को बुरा तो लगा लेकिन यह कोई नई बात

नहीं थी. आदत हो चुकी थी अब तो उसे यह सब सुनने की. वैसे पता नहीं यामिनी को अपने पति से प्रौब्लम क्या है? औरों से तो वह कितनी हंसहंस कर बात करती है लेकिन अपने पति से ही सीधे मुंह बात नहीं करती. जबकि बेचारा शालिन अपनी पत्नी का मुंह ही ताकता रहता. उस की खुशी के लिए कुछ भी करने हो तैयार रहता. हां, दरअसल, शालिन यामिनी की तरह गोरा नहीं है न, इसलिए वह उसे भाव नहीं देती. जब देखो  िझड़कती रहती है.

यामिनी अपनी साड़ी ठीक कर ही रही थी कि तभी उस का 8 साल का बेटा विहान यह कहते हुए ठुनकने लगा कि उस से जूते नहीं पहने जा रहे हैं.

‘‘तो मैं क्या करूं? अब तुम्हारे जूते पहनाऊं? मेरे हाथ गंदे हो जाएंगे. जा जा कर अपने कालू बाप से बोल वे पहना देगा,’’ शालिन की तरफ देखते हुए यामिनी बोली, ‘‘जैसा बाप, वैसा बेटा.’’

यामिनी की बातें शालिन के दिल में नस्तर की तरह चुभ गईं. वह हर समय उस से ऐसे ही बात करती है जैसे वह उस का पति नहीं नौकर हो. यामिनी के मुंह से शालिन के लिए केवल कड़वाहट ही निकलती है.

सिम्मी की ऐनिवर्सरी पार्टी से वे लोग करीब रात 11 बजे घर पहुंचे. विहान तो गाड़ी में ही सो गया था. शालिन उसे गोद में उठा कर घर ले आया और बिस्तर पर सुला कर खुद भी उस की बगल में लेट गया और अपनी आंखें बंद कर लीं.

इधर खुद को अब भी आईने में निहारते हुए यामिनी मंदमंद मुसकराते हुए यह सोचने

लगी कि सिम्मी की पार्टी में वही सब के नजरों का केंद्रबिंदु बनी हुई थी और सब कैसे उस की सुंदरता का गुणगान कर रहे थे और सिम्मी के हसबैंड तो उस की बड़ाई करते नहीं थक रहे थे. देखा उस ने कैसे सिम्मी मन ही मन जलभुन रही थी. सोच रही होगी कि वह इतनी सुंदर, गोरी क्यों नहीं है.

‘अरे, तो सब को सुंदरता थोड़े ही मिल जाती है. यह तो अपनाअपना नसीब है’ यामिनी खुद में इतराई. ‘वैसे सिम्मी का हसबैंड भी किसी राजकुमार से कम नहीं दिख रहा था. लंबा, गोरा, स्मार्ट… जोड़ी तो हमारी फिट बैठती सच में. मगर सिम्मी की शादी हो गई उस से. मु झे तो सिम्मी से जलन हो रही थी. काश, मु झे भी ऐसा ही पति मिलता. मगर उफ जो मु झे यह कालाकलूटा मिल गया.

आईने से ही शालिन की तरफ देखती हुई यामिनी खुद में बुदबुदाई, ‘पता नहीं कौन से पाप किए थे जो मेरी शादी इसे कलूटे से हो गई. मु झे तो इसे अपना पति कहते भी शर्म आती है.

‘इसीलिए तो मैं इसे किसी से नहीं मिलवाती कि सब मेरा मजाक बनाएंगे. गुस्सा तो मु झे अपने मांबाप पर आता है कि उन्होंने मु झे जिंदगीभर के लिए काले पानी की सजा दे दी.’

भले ही यामिनी को लगा हो कि शालिन सो गया. लेकिन वह सोया नहीं था, बस आंखें बंद थीं उस की. शालिन को ले कर उस की क्या सोच है आज उसे सब पता चल गया.

जब यामिनी से उस की शादी हुई थी तब वह अपना काला रंग भूल कर कितना खुश हुआ था. लेकिन उसे क्या पता था कि यामिनी उस के इसी काले रंग को हथियार बना कर रोज उस पर वार कर उस के दिल को छलनी करती रहेगी. भले ही यामिनी की नजर में शालिन की कोई इज्जत न हो पर बाहर के लोग उसे इज्जत की नजर से देखते हैं, उस के काबिलीयत की तारीफ करते हैं पर अपनी पत्नी की नजरों में वह 2 कौड़ी का ही इंसान है, इसलिए क्योंकि उस का रंग काला है और उस की पत्नी दूध सी गोरी. उसे तो कोई हैंडसम जो उस के जैसा ही गोरा होता, लड़का चाहिए था. लेकिन मिल गया उसे शालिन.

तो मना कर देती न इस शादी के लिए. किस ने रोका था उसे? हर समय उसे यामिनी के हाथों तिरस्कार तो नहीं होना पड़ता न बातबात पर जो उसे ‘कालू, अमावस की रात’ बोल कर उस का दिल जलाती रहती है, उस से तो बच जाता वह. कभी तो मन करता है, शालिन का कि कह दे कि जाओ तुम, मैं तुम्हें नहीं पसंद हूं तो लेकिन फिर अपने बेटे की सोच कर खून का घूंट पी कर रह जाता. बहुत प्यार करता है वे अपने बेटे से और उस के लिए वह यामिनी की बेइज्जती भी सह जाता है.

कितनी बार सुन चुका है वह यामिनी के मुंह से कि उस ने अपने लिए किसी राजकुमार का सपना देखा था. लेकिन उसे शालिन जैसा काला पति मिल गया. कितनी बार यह भी सुना चुकी है कि काले रंग से उसे इतनी ज्यादा नफरत थी कि कभी उस ने काला अंगूर नहीं खाया, काले कपड़े नहीं पहने हर उस चीज से उसे नफरत है जो काली है. लेकिन उसे नहीं पता था कि जिस चीज से उसे इतनी ज्यादा नफरत है, एक दिन वही सदा के लिए उस के पल्ले पड़ जाएगी.

यामिनी को इस बात का भी घमंड है कि उस की सुंदरता के सामने ऐश्वर्या और करीना भी फेल हैं और जब वे पहनओढ़ कर अपने घर से बाहर निकलती तब सभी की नजरें उस पर टिक जातीं. महल्ले की औरतें भी उसे देख कर कहतीं कि इसे ब्याहने तो कोई राजकुमार ही आएगा देखना और यामिनी के मांपापा इस बात पर गर्व से भर उठते थे कि प्रकृति ने उन की बेटी को भरभर कर सुंदरता दी है, बस अब कोई अच्छा वर मिल जाए इस के वास्ते तो बस और कुछ नहीं चाहिए उन्हें. परेशानी यह थी कि  यामिनी के मांबाप की आर्थिक हालत खस्ता थी. दोनों वैसे तो सीधेसादे घरों से थे पर जो भी उन के पास था वे उसे पूजापाठों, आश्रमों, बड़े जागरणों में बरबाद कर चुके थे. उन्हें यह विश्वास था कि उन के घर तो खुद साक्षात लक्ष्मी ने उन की पूजा के फल से जन्म लिया है. उन्हें भरोसा था कोई सुंदर सा राजकुमार उसे ब्याह ले जाएगा.

कालेज की पढ़ाई पूरे होते ही यामिनी के लिए रिश्ता देखा जाने लगा.

लेकिन बात हर बार यहीं पर आ कर रुक जाती कि लड़का उस के जैसा गोरा नहीं है. इसलिए कोई मैच ही नहीं है इन का.

‘‘अरे, क्या मैचमैच लगा रखा है आप लोगों ने. क्या हो गया भैया जो लड़के का रंग उतना साफ नहीं है तो? यह तो देखो कि लड़का इतनी बड़ी विदेशी कंपनी में नौकरी करता है. लाखों में सैलरी है उस की तो और क्या चाहिए आप को? ऐसे तो उम्र निकल जाएगी लड़की की,’’ यामिनी के लिए रिश्ता ले कर आई उस की गीता बूआ बोली, ‘‘और वैसे भी लड़के का रूप नहीं गुण देखा जाता है भैया. लड़का सिर्फ नाम से ही शालिन नहीं है बल्कि व्यवहार से भी बहुत शालीन है. लड़के के मातापिता दोनों नौकरी में हैं. बैंगलुरु में उन का अपना बहुत बड़ा मकान है और सब से बड़ी बात कि शालिन उन का एकलौता बेटा है. मुंबई में नौकरी करता है तो और क्या चाहिए आप लोगों को? मैं यह बात दावे से कह सकती हूं कि अपनी यामिनी बेटी उस घर में बहुत सुखी रहेगी.’’

गीता बूआ की बात पर यामिनी के मांपापा सोचने पर मजबूर हो गए.

‘‘ज्यादा सोचविचार करने की जरूरत नहीं है क्योंकि लड़का मेरी बहू का चचेरा भाई है, इसलिए मु झे उन के बारे में सब अच्छे से पता है. मैं बता रही हूं भैया, अगर आप ने यह रिश्ता ठुकराया न तो पछताओगे. अरे, गीता बूआ की बात में दम था कि लड़के का रूप नहीं गुण देखा जाता है और अगर उन्होंने यह रिश्ता ठुकराया तो बहुत पछताएंगे. लेकिन यह बात यामिनी को कैसे सम झाते वे लोग क्योंकि उसे तो काले रंग से भी नफरत थी और उस ने तो बचपन से ही अपने लिए किसी राजकुमार का सपना देखा है?

अमीर घरों के गोरे लड़के या तो पढ़नेलिखने में निखट्टू होते थे और मांबाप के

गुलाम होते थे जिन्हें मोटा दहेज चाहिए था या वे स्तर देखते थे. शालिनी के मांबाप के पास दोनों नहीं थे. बिचौलियों ने ही रिजैक्ट कर दिया था शालिनी को देखे बिना. अमीर घरों के सुंदर लड़कों के लिए अमीर घरों की सुंदर लड़कियों की कमी भी तो नहीं है न.

यामिनी के लिए अब तक दसियों लड़के देखे जा चुके थे. लेकिन किसी लड़के का घरपरिवार और उन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी तो कोई लड़का एकदम साधारण नौकरी में था. किसी की हाइट छोटी थी तो किसी का रंग काला. लेकिन शालिन घरपरिवार से तो मजबूत था ही, नौकरी भी उस की हाई क्लास की थी. हां, रंग जरूर काला था. लेकिन सिर्फ काले रंग की वजह से इतना अच्छा लड़का छोड़ना मूर्खता ही लगी उन्हें. ऊपर से यामिनी की 2 और छोटी बहनें भी थीं. उन की भी शादी करनी थी. उस के पापा

2-3 सालों में रिटायर्ड होने वाले थे. इसलिए यह रिश्ता वे अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहते थे. यामिनी के पापा ने अपनी बेटी के सामने हाथ जोड़े कि वह इस रिश्ते के लिए मान जाए. पिता की आर्थिक स्थिति और उन की जिम्मेदारी को सम झते हुए, थोड़ी नानुकुर के बाद यामिनी इस शादी के लिए राजी तो गई पर मन से नहीं, मजबूरी में.

शालिन के मांपापा का रंग भी सांवला ही था. कहीं आगे की जैनरेशन ही न बिगड़ जाए, इसलिए शालिन के मांपापा अपने बेटे के लिए गोरीचिट्टी लड़की चाहते थे. दहेज की कोई डिमांड नहीं थी उन की.

बात चली तो जल्द ही दोनों की शादी तय हो गई. शालिन ने अपनी होने वाली दुलहन का चेहरा जीभर कर देखा पर यामिनी बड़ी मुश्किल से शालिन से नजर मिला पाई, यह वह उसे पसंद ही कहां था. मजबूरी की शादी थी यह तो. अब जो भी हो पर रोतेठुनकते वह मायके से विदा होकर अपने ससुराल पहुंच गई.

मुंह दिखाई पर महल्ले की औरतों ने यामिनी की सुंदरता की भरभर कर बढ़ाई करी. लेकिन एक औरत ने दबे में मुंह कह ही दिया कि लंगूर के मुंह में अंगूर और फिर मुंह पर कपड़ा रख कर कैसे खिलखिला कर हंस पड़ी थी.

एक औरत ने कहा, चलो, अच्छा ही हुआ, आगे कि जैनरेशन तो सुधर जाएगी यानी जितने मुंह उतनी बातें.

अपनी सुहागरात पर यामिनी सिरदर्द का बहाना कर सो गई. लेकिन सोई कहां थी बेचारी, रोई थी पूरी रात यह सोच कर कि उस के मांबाप ने उसे कहां फंसा दिया. जिस यामिनी को काले रंग से भी नफरत थी. आज वही काला रंग उस की लाइफ का हिस्सा बन चुका है.

शादी के बाद शालिन ने उसे दुनियाभर की खुशियां दीं. गहनेकपड़ों से लाद दिया.

उस की हर डिमांड पूरी की. विदेश भी घुमाने ले गया. लेकिन यामिनी को बस इसी एक बात का दुख था कि उस का पति काला है. काश, गोरा होता तो कितना अच्छा होता. लेकिन वे कहते हैं न कि किसी को मुक्कमल जहां नहीं मिलता. किसी को जमीं तो किसी को आसमां नहीं मिलता.

वैसे जबतब वे अपने पति पर खुन्नस तो निकालती ही उस के काले रंग को ले कर ताने मारने से बाज नहीं आती. और तो और अपने मांबाप को भी जीभर कर कोसती कि उन्होंने उस की जिंदगी बरबाद कर दी. शालिन उस की बातों को सीरियसली नहीं लेता, बस हंस देता. सोचता, भले यामिनी कुछ भी बोले, दिल की बुरी नहीं है. शादी के 2 साल बाद जब उस का बेटा पैदा हुआ तो वह और भी दुखी हो गई क्योंकि वह भी अपने पिता की तरह ही काला ही पैदा हुआ.

यामिनी बेटे के काले रंग पर भी ताने मारती कि बाप क्या कम था जो बेटा भी काला पैदा हो गया. पति व बेटे को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की नजरों से दूर रखती ताकि कहीं कोई यह न कह दे कि ये किस देश के प्राणी उठा लाई यामिनी? सब मजाक ही बनाते, खिल्ली उड़ाते उस की.

याद है अपनी शादी से पहले की बात उसे, जब उस की एक दोस्त नीलम की शादी हो रही थी, तब जयमाला के समय वह कितना हंसी थी लड़के के काले रंग को देख कर. सहेली के काले पति की खिल्ली उड़ाते हुए बोली थी नीलम को रात में भी लाइट जला कर रखनी पड़ेगी अपने घर में वरना उस के पति तो उसे दिखेंगे भी नहीं. आज वह उसी दौर से गुजर रही है. बल्कि शालिन तो नीलम के पति से भी ज्यादा काला है.

शालिन को पता है यामिनी को उस के काले रंग से चिढ़ है. वह उसे पसंद नहीं करती. यह शादी भी उस ने मजबूरी में की है. लेकिन इन सब में उस का क्या दोष है. बिना किसी गलती के वह बचपन से यह सब  झेलता आया है. दोस्त रिश्तेदार सब उस के काले रंग को ले कर मजाक उड़ाते और वे पड़ोस की चाची तो अकसर उसे देख कर हंसती हुई कहती थीं कि शालिन की मां, क्या खाया था तुम ने इस के जन्म के समय जो यह इतना कालाकलूटा पैदा हो गया? सुन, जब इस की शादी करना तो देखना कि लड़की गोरी हो. नहीं तो दोनों एकजैसे हुए तो इन के बच्चे भी जामुन जैसे काले पैदा होंगे.

चाची की बात पर वहां खड़ी सारी औरतें हंसने लगी थीं. लेकिन उस समय शालिन के दिल पर क्या गुजरती थी, यह तो वही जानता था. वे सोचते बच्चा है क्या ही सम झेगा. लेकिन ऐसे सोचने वाले यह भूल जाते हैं कि बच्चों में भी दिल और दिमाग नाम की कोई चीज होती है. उन्हें भी बातें बुरी लग सकती हैं.

चाची की बातों से आहत शालिन अपने कमरे में जा कर रोता, कईकई दिनों तक वह अपने घर से बाहर नहीं निकलता. वे तो बचपन की बातें थी लेकिन आज अपनी पत्नी के मुंह से अपने काले रंग को ले कर तानेउलाहने सुन कर शालिन कभीकभी आहत हो उठता है और सोचता है कि रात भी तो काली होती है और यामिनी के बाल, उस की आंखें भी तो काली है तो क्या वह उन्हें नोच कर फेंक देगी?

एक दिन औफिस से आ कर शालिन ने जब बताया कि उस का तबादला उस के होम

टाउन बैंगलुरु में हो गया, तो यामिनी का मूड ही खराब हो गया. शालिन को  झेल रही है कम है क्या, जो अब उस के मांबाप को भी वहां जा कर  झेलना पड़ेगा उसे और यामिनी की तो अपनी सास से जरा भी नहीं बनती. कैसे वह उस खड़ूस के साथ रह सकती है भला.

‘नहींनहीं, ऐसा नहीं हो सकता. मु झे कुछ करना होगा,

कोई बहाना बनाना होगा ताकि

मु झे शालिन के साथ बैंगलुरु

न जाना पड़े,’ मन ही मन यामिनी कोई तरकीब सोचने लगी.

‘‘देखो, तुम चले जाओ. मैं नहीं जाऊंगी.’’

‘‘क्यों, क्या हो गया?’’ शालिन हैरान था कि यामिनी उस के साथ बैंगलुरु जाने से मना क्यों कर रही है?

‘‘क्योंकि बैंगलुरु का हवापानी मु झे सूट नहीं करता, पता ही है तुम्हें और सब से बड़ी बात कि आरव की पढ़ाई का हरज होगा. अब किसी स्कूल में उस का एडमिशन हो पाएगा, बताओ? 1 साल मारा जाएगा. यहां इतने बड़े स्कूल में पढ़ रहा है. कई दोस्त भी बन चुके हैं उस के. बात को सम झो.’’

आरव ने भी अपने पापा के सामने वही बात दोहराई और कहा कि उसे बैंगलुरु नहीं जाना है, यहीं मुंबई में ही रहना है. यामिनी ने पहले ही उस के कान भर दिए थे कि वह वही बोले जो उस ने सम झाया है.

शालिन अकेले ही बैंगलुरु चला गया. छुट्टियों में कभीकभार आ जाता 1-2 रोज के लिए. शालिन के यहां न रहने पर यामिनी की तो पौबारह हो गई. मजे से वह अपनी सहेलियों के साथ घूमतीफिरती, शौपिंग करती, किट्टी पार्टी करती, मूवी देखने जाती. अब शालिन उसे पैसों की तो कोई कमी होने नहीं देता था तो दिक्कत क्या थी. सबकुछ यामिनी के मुताबिक हो रहा था. लेकिन इन सब के चक्कर में वह आरव की पढ़ाई पर जरा भी ध्यान नहीं दे पा रही थी. शालिन था तो रोज शाम को उ से बैठा कर पढ़ता था. लेकिन उस के यहां न रहने से आरव पढ़ाई पर बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा था, स्कूल से आने के बाद पूरा समय बस मोबाइल में घुसा रहता.

ऐग्जाम के बाद जब आरव का रिजल्ट आया तो वह मैथ में फेल हो गया.

लेकिन उस का भी दोष उस ने शालिन पर मड़ दिया कि अगर उस ने अपना तबादला रुकवा लिया होता तो आरव फेल न होता. लेकिन तबादला रुकवाना शालिन के हाथ में थोड़े ही था. लेकिन यह बात यामिनी को नहीं सम झा सकता था क्योंकि आज तक उस ने उस की कोई भी बात सम झी जो आज सम झती. कहा था कि उस के साथ बैंगलुरु चले. मांबाप दोनों के साथ होने से बच्चे कंट्रोल में रहते हैं. लेकिन नहीं उसे मुंबई की हवा जो लग गई थी. खैर, अब यह देखना था कि किया क्या जा सकता है. शालिन ने कहा कि वह आरव के लिए कोई मैथ का टीचर रख दे.

यामिनी ने आरव के मैथ टीचर से फोन पर बात की तो उन्होंने उसे स्कूल मिलने के लिए बुलाया. बोला कि आरव मैथ में बहुत वीक है. उस के लिए मैथ का कोई अच्छा ट्यूटर रखना होगा.

‘‘लेकिन सर, मैं कहां से ट्यूटर ढूंढूं. आप ही कोई अच्छा ट्यूटर बता दें तो बड़ी मेहरबानी होगी.’’

यामिनी ने दीपेश सर से रिक्वैस्ट की तो वे बोले कि वे जल्द ही आरव के लिए कोई अच्छा टीचर ढूंढ़ कर बताएंगे. फिर कहने लगे कि वे भी बच्चों को पर्सनल ट्यूशन देते हैं.

‘‘अरे, तो फिर मु झे और कहीं ढूंढ़ने की क्या जरूरत है.’’  यामिनी तो खुश ही हो गई यह जान कर कि उसे बैठेबैठाए अपने बेटे के लिए इतना अच्छा टीचर मिल गया. जातेजाते उस ने दीपेश सर को अपने घर का पता दे दिया और बोला कि कल से ही वे उस के बेटे आरव को पढ़ाने आ सकते हैं.

अब दीपेश सर रोज शाम को आरव को मैथ पढ़ाने उस के घर आने लगे. जब दीपेश सर आरव को पढ़ा रहे होते तो यामिनी उन के लिए चायनाश्ता कभी मेड के हाथों तो तभी खुद रख जाती. आरव की पढ़ाई के साथसाथ वे स्कूल में भी उस का बहुत ध्यान रखते थे. कभी स्कूल वैन, हड़ताल या किसी और वजह से आरव को लेने नहीं आ पातीं तो दीपेश सर ही उसे अपनी गाड़ी से स्कूल ले जाते और घर भी छोड़ जाते.

आरव की पढ़ाई के साथसाथ वे स्कूल में उस के खानेपीने का भी बहुत ध्यान रखते. इस तरह से आरव को पढ़ाते हुए उन्हें 1 साल हो गया. दीपेश सर यामिनी के लिए एक फैमिली मैंबर की तरह बन गए थे. शालिन ने भी कई बार आरव की पढ़ाई को ले कर फोन पर दीपेश सर से बात की, पर उस की बात, व्यवहार से वह उसे ठीक आदमी नहीं लगा. लेकिन उस के लगने न लगने से क्या फर्फ पड़ने वाला था क्योंकि यामिनी का वह फैवरिट था. बढ़ाई करते नहीं थकती थी दीपेश सर की. खैर, जो भी हो पर दीपेश सर के पढ़ाने का ही नतीजा था कि आरव अगली बार मैथ में अच्छे नंबरों से पास हो गया.

उस रोज दीपेश सर को उदास देख कर यामिनी ने पूछा, ‘‘क्या बात है? कोई

परेशानी तो नहीं है?’’ उस पर दीपेश सर बोले, ‘‘मां की तबीयत ठीक नहीं है. घुटनों की समस्या बढ़ गई है. चलफिर नहीं सकती ठीक से. डाक्टर से दिखाया तो बोले कि जल्द ही उन का औपरेशन कराना पड़ेगा. लेकिन वे इतने पैसे कहां से लाएंगे.’’

‘‘कितना खर्च बताया डाक्टर ने?’’ यामिनी के पूछने पर दीपेश सर बोले कि दोनों घुटनों के औपरेशन में करीब डेढ़ से 2 लाख का खर्चा बताया है. 1 लाख तो कहीं से इंतजाम कर लिया है उस ने. लेकिन अब और पैसे कहां से लाएगा सम झ नहीं आ रहा है.

‘‘सर आप यह रखिए,’’ नोटों का बंडल दीपेश सर के हाथों में पकड़ाते हुए यमिनी बोली, ‘‘आप अच्छे से अपनी मां के घुटनों का औपरेशन कराइए.’’

‘‘पर इतने पैसे. नहींनहीं, मैं आप से ये पैसे नहीं ले सकता मैडम,’’ दीपेश सर ने पैसे उसे देते हुए कहा.

‘‘अरे, क्यों नहीं ले सकते. आप की मां मेरी कुछ नहीं लगतीं क्या? और मैं ये पैसे उधार दे रही हूं आप को. जब होगा लौटा दीजिएगा. लेकिन अभी आप इन्हें रख लीजिए.’’ शालिन बहुत पैसे उसे घर खर्च के लिए देता था उन्ही से ही ये पैसे उस ने बचाए थे. उस के पास सस्ता बैलेंस था हालांकि वह अपने पर खूब खर्च भी करती थी.

‘‘ठीक है मैडम, मैं ये पैसे आप को जल्द ही लौटा दूंगा,’’ दीपेश ने यामिनी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि आज के जमाने में उस की जैसी महिला कहां मिलती है जो किसी की मदद के लिए आगे आए.

असल बात यह थी कि दीपेश कौन सा मां के घुटनों के औपरेशन की बात कर रहा था क्योंकि उस की अपनी मां को मरे तो 5 साल हो गए थे. वह यामिनी से  झूठ बोल रहा था. दरअसल, शुरू में ही उस ने यामिनी को देख लिया था. उस के आलीशान घर, गाड़ी और उस के रहनेसहने के ढंग से सम झ गया था कि यह औरत बहुत पैसे वाली है और इस से पैसा झटका जा सकता है.

दीपेश का काम ही था अपने क्लास के कुछ बच्चों को कुछ नंबरों से फेल कर देना और फिर उन के पेरैंट्स को इस बात के लिए कन्विंस करना कि उन का बच्चा मैथ में कमजोर है और उसे पर्सनल ट्यूशन की जरूरत है. यामिनी के साथ भी उस ने यही किया. स्कूल के अलावा वह बच्चों की पर्सलन ट्यूशन क्लास लेते थे और इस से उस की अच्छी कमाई होती थी.

वैसे सच बताएं तो यामिनी को भी दीपेश का संग अच्छा लगता था क्योंकि उसके जैसा

ही सुंदर, स्मार्ट, गोरे आदमी की कल्पना की थी उस ने. लेकिन मिल गया उसे शालिन जैसे कालाकलूटा इंसान.

दीपेश ने यामिनी के मनोभावों को पहले ही भांप लिया था. तभी तो वह कभी उस के बालों का, कभी उस की फिगर की तो कभी उस की सुंदरता की बढ़ाई करते नहीं थकता था. कहता कि लगता ही नहीं है कि यामिनी 9 साल के बेटे की मां है. उस की उम्र तो 24-25 से ज्यादा की लगती ही नहीं है.

दीपेश के मुंह से अपनी बढ़ाई सुन कर यामिनी मन ही मन इतरा उठती थी. फिर सोचती कि काश दीपेश जैसा ही कोई स्मार्ट, गोराचिट्टा लड़का मिल जाता उसे तो उस की जिंदगी कितनी ज्यादा खूबसूरत होती.

मगर यामिनी सम झ ही नहीं पा रही थी कि ये सब दीपेश के पैसा लूटने का तरीका है. वह वह जान चुका था कि यामिनी का पति बहुत बड़ा आदमी है और पैसे वाला है. इसलिए ही तो यामिनी के सामने खुद को अच्छा, शरीफ इंसान दिखाने की कोशिश करता. जताता कि वह आरव का बहुत खयाल रखता है.

एक दिन दीपेश को जब यह बात पता चली कि यामिनी के पास लाखों के जेवर हैं तो वे उन जेवरों को हथियाने का तरकीब सोचने लगा कि ऐसा क्या किया जाए जो अपने से यामिनी उसे सारे जेवर दे और कर्ज के सारे पैसे भी माफ कर दे. लेकिन इस के लिए क्या किया जाए यह सम झ नहीं आ रहा था उसे. यामिनी ने एक दिन उस की मुश्किल आसान कर दी यह बता कर की अगले दिन आरव का बर्थडे है, तो दीपेश को ही उस की सारी तैयारी करनी होगी क्योंकि शालिन को छुट्टी नहीं मिली तो वह तो नहीं आ पाएगा आरव के जन्मदिन पर.

यामिनी की बात सुन कर दीपेश के मन में हजारों लड्डू फूट पड़े ‘इसे ही तो कहते हैं सोने में सुहागा’ दीपेश खुशी से उछल पड़ा. अब तो वह जेवर, पैसों के साथसाथ यामिनी के शरीर को भी पाना चाहता था अब. जन्मदिन की पार्टी घर पर ही रखी गई थी. आरव के क्लास फैलोस उन के पेरैंट्स और यामिनी के सारे दोस्त आए थे. सब ने पार्टी को खूब ऐंजौय किया.

पार्टी के बाद सारे मेहमान जा चुके थे. आरव भी थक कर सो चुका था. दीपेश भी

जाने ही वाला था कि यामिनी ने उसे यह कह कर रोक लिया कि रात काफी हो चुकी है, बारिश भी जोर से हो रही थी, इसलिए वह आज रात यहीं रुक जाए.

दीपेश तो यही चाहत था. उसे मेहमान वाला कमरा बता कर यामिनी भी अपने कमरे में सोने जा ही रही थी कि पीछे से दीपेश ने टोका.

‘‘यामिनी क्यों न 1-1 कप कौफी जाए?’’

‘‘अरे, क्यों नहीं, मैं अभी बना लाती हूं,’’ यामिनी ने कहा, लेकिन दीपेश कहने लगे कि वह कौफी बहुत अच्छी बनाता है.

‘‘ओके, फिर आप ही कौफी बनाइए. मैं नहा कर रात के कपड़े पहन कर आती हूं.’’

कुछ ही देर में दीपेश 2 कप काफी बना लाया और दोनों यहांवहां की बातें करते हुए कौफी के घूंट भरने लगे.

‘‘कौफी बहुत अच्छी बनी है सच में.’’

‘‘थैंक यू’’ मुसकराते हुए दीपेश बोला और बड़ी गौर से उस ने यामिनी की तरफ देखा. नाइटी में यामिनी का बदन बहुत सैक्सी लग रहा था.

कौफी पीने के बाद यामिनी को लगा जैसे उस का सिर घूम रहा है. ‘शायद

नींद की वजह से’ यामिनी को लगा. उस ने मुसकरा कर दीपेश को ‘गुड नाइट’ कहा और अपने कमरे की तरफ जाने लगी. पीछे से दीपेश भी उस के कमरे में पहुंच गया. उस ने पहले से ही छिप कर घर की तैयारी करते हुए उस कमरे में कैमरा लगा रखा था ताकि बाद में वह यामिनी को ब्लैकमेल कर सके.

‘‘अरे सर, कुछ चाहिए क्या आप को?’’

लेकिन वह बोला, ‘‘क्या कुछ देर और मैं तुम्हारे साथ बैठ कर बात नहीं कर सकता?’’

‘‘हां, कहिए न’’  यामिनी बोली, लेकिन उसे दीपेश के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे थे. इसलिए उस ने थके होने की बात कही ताकि वह वहां से गेस्टरूप में चला जाए.

मगर दीपेश तो अपनी औकात में आ गया और यामिनी को यहांवहां छूने लगा.

‘‘दीपेश, यह क्या कर रहे हैं आप? जाइए यहां से नहीं तो मैं चिल्लाऊंगी,’’ यामिनी ने नकली डर दिखाते हुए कहा. उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि दीपेश उस के साथ ऐसा इतना जल्दी कुछ कर सकते हैं. वह चिल्लने का नाटक करना चाहती थी पर दीपेश ने अपने मुंह से उस का मुंह बंद कर दिया. यामिनी दीपेश का साथ चाहती थी पर उस से ज्यादा कुछ करने की हिम्मत उस में नहीं थी. उसे लगा कि कहीं कोई गलती हो गई उस से जो उस ने इस हैवान पर विश्वास किया.

कितना सम झाया था शालिन ने उसे कि दीपेश अच्छा इंसान नहीं लगता उसे. लेकिन उस ने क्या कहा था? जैसे उस का रंग काला है वैसे ही दिल भी काला है. फिर शालिन ने कुछ कहना ही छोड़ दिया था. वह दीपेश की बातों में आ कर आज तक उसे कितने पैसे दे चुकी है. बचत के ही पैसे दिए थे पर थे तो शालिन की मेहनत की कमाई के ही न. उसे लगने लगा कि दीपेश जैसे फक्कड़ इंसान के लिए शालिन जैसी सोने की खान को तो नहीं छोड़ा जा सकता. तभी कोल पर शालिन का नाम चमकने लगा. कह डर गई कि कहीं किसी ने शालिन को बता तो नहीं दिया कि दीपक रात वहां ठहरा हुआ है? पार्टी में बहुत से लोग थे जिन में से कुछ पर शालिन के एहसान थे. कोई भी उस का भांडा फोड़ सकता है.

अब यामिनी को सम झ में आ रहा था कि दीपेश कितना घटिया इंसान है. लेकिन

अब पछताए होत क्या जब चिडि़या चुग गई खेत. इस सुनसान सर्द भरी रात में कौन आता उसे यहां बचाने? अपने पैसे और सुंदरता के घमंड में चूर वह तो इस सोसायटी के आसपास के लोगों से ठीक से किसी से बात तक नहीं करती थी. इसलिए किसे क्या पड़ी थी उस की.

दीपेश अभी यामिनी के साथ कुछ गंदी हरकत करता कि शालिन ने उसे पीछे से धर दबोचा. अचानक शालिन को यहां देख यामिनी उस से लिपट गई और फूटफूट कर रोने लगी. वह बहुत कुछ बताना चाहती थी शालिन को पर उस के मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी.

‘‘तुम घबराओ मत, मैं आ गया हूं,’’ उस ने पास पड़ा दुपट्टा यामिनी को ओढ़ाते हुए कहा और लगा दीपेश पर मुक्के बरसाने यह कह कर कि उसे क्या लगा उसे कुछ नहीं पता. उस के सारे गंदे इरादे उसे पता थे उसे. इतनी धुनाई कि उस ने दीपेश कि वह अधमरा हो गया. उस का मोबाइल फोन भी तोड़ दिया और पुलिस को फोन करने ही लगा कि यामिनी ने उसे यह कहते हुए रोक दिया कि आरव को सब पता चल जाएगा.

शालिन ने उसी वक्त उसे धक्के मार कर घर से बाहर निकाल दिया और कहा कि दोबारा उस ने यहां का रुख भी किया तो सीधा जेल जाएगा. यह कह कर उस ने यामिनी को गले से लगा लिया मानो वह दीपेश से उस के अब तक बने संबंधों की कोई परवाह नहीं करता.

आज यामिनी को यह बात अच्छे से सम झ में आ गई कि इंसान का रंग नहीं, मन

सुंदर होना चाहिए. यामिनी अपने पति के कंधे पर सिर रख कर सिसकते हुए कहने लगी, ‘‘शालिन, मैं हमेशा तुम्हें डिसरिस्पैक्ट करती रही. तुम्हारे रंग को ले कर कोसती रही. कोयला, अमावश की रात, चांद पर ग्रहण और न जाने क्याक्या कहती रही, तुम्हारी बेइज्जती करती रही. लेकिन कभी तुम ने मु झे पलट कर जवाब नहीं दिया. मैं तुम्हारे मन की सुंदरता को क्यों नहीं देख पाई? मु झे माफ कर दो शालिन, प्लीज.’’

‘‘अरे, ये सब तो पतिपत्नी के बीच होता ही रहता है. तुम माफी मांग कर हमारे रिश्ते को छोटा मत बनाओ,’’ शालिन ने बड़े प्यार से यामिनी के गालों को सहलाते हुए कहा.

‘‘लेकिन तुम ने तो कहा था कि तुम्हें छुट्टी नहीं मिली, नहीं आ पाओगे, फिर?’’

यामिनी के सवाल पर शालिन हंसते हुए बोला कि वे आरव को उस के जन्म दिन पर सरप्राइज देना चहता था लेकिन अफसोस कि उस की फ्लाइट मिस हो गई और फिर दूसरी फ्लाइट ले कर आने में उसे समय घंटों लग गया.

‘‘अच्छा,’’ यामिनी मुसकरा पड़ी और बोली कि आज अगर वह समय पर नहीं आता तो अनर्थ हो जाता.

‘‘मैं कैसे नहीं आता? चलो, अब उठो.

मु झे सुबह निकलना भी है,’’ शालिन ने उठते

हुए अपने कमरे में जाते हुए कहा तो यामिनी

ने यह कह कर उस का हाथ पकड़ लिया कि

अब वह यहां नहीं रहेगी. उस के साथ जाएगी.

इस बार शालिन अकेले बैंगलुरु नहीं गया बल्कि यामिनी और आरव भी उस के साथ गए. दोनों ने वह रात पहली बार असली में पतिपत्नी की तरह बिताई.     द्य

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