Short Story : ऐसा साथी जो मुसकराते हुए बीवी के हर मूड को सम झे, गलतियों पर भी प्यार से मुसकराए और रिश्ते को भरोसे और धैर्य से सींचे.
जहां बीवी के हर सवाल का मीठा जवाब देना, मौडल हसबैंड वह है जो इंस्टाग्राम पर ‘क्वीन’ लिखना और सासससुर के जोक्स पर खुल कर हंसना, सब हुनर में शामिल है.
आज के दौर में लड़कियों के जीवनसाथी चुनने की सोच में जबरदस्त क्रांति आ गई है. अब वे केवल लंबाई, रंगत, सैलरी या सिक्स पैक ऐब्स नहीं देखतीं. अब तो खोज होती है, अच्छा हसबैंड मैटीरियल. यानी ऐसा साथी जो कपड़े की तरह नापतोल कर फेरों के लिए फिट हो जाए, न सिकुड़े, न रंग छोड़े.
‘हीरो मैटीरियल’ और ‘बास मैटीरियल’ के जमाने को पीछे छोड़ते हुए अब लड़कों का अपग्रेड हुआ है, हसबैंड मैटीरियल में.
यह कोई मामूली योग्यता नहीं. इस के लिए लड़के को ऐसी बालटी बनना होता है जिस में रोमांस घुला हो और जिस में उबालने पर भी मिठास न खत्म हो. न बड़े बैंक बैलेंस की जरूरत, न भारी बौडी बिल्डिंग की.
जरूरत बस इतनी, बीवी के हर सवाल पर मुसकराते हुए तुरंत सही जवाब देना, जैसे ‘‘क्या मैं मोटी लग रही हूं?’’ बिना िझ झक ‘‘नहीं बिलकुल नहीं’’ बोलना.
एक सच्चा हसबैंड मैटीरियल बनने के लिए लड़कों को कई परीक्षाएं देनी होती हैं.
शौपिंग में 5 घंटे बिना उबासी लिए टिके रहना, सामाजिक सरोकारों वाले धारावाहिक में क्रिकेट मैच का बलिदान करना, इंस्टाग्राम पर बीवी को ‘क्वीन’ कह कर हार्ट इमोजी चिपकाना, यह सब बुनियादी योग्यता है.
हसबैंड मैटीरियल वह दुर्लभ जीव है जो बीवी के नम होते ही खुद की आंखों में नमी घोल ले.
जिस के लिए बीवी के स्वादहीन खाने में भी मिर्ची के बजाय मीठा स्वाद दिखे और ससुराल की फीकी चाय भी ‘वाहवाह’ कह कर पी जाए.
सासससुर के हंसीमजाक पर दिल खोल कर हंसना, इस का स्वाभाविक गुण होना चाहिए.
आजकल मम्मियां तो सीधे पूछती हैं, ‘‘बेटा, खाना बना लेते हो?’’
जवाब में वही सही है जो गर्व से बोले, ‘‘जी, सब बना लेता हूं.’’
जो अपने जन्मदिन पर खुद को तोहफा दे कर खुश हो लेता था, उस के लिए हसबैंड मैटीरियल बनना वैसा ही कठिन है जैसे भैंस को ऊंची ऐड़ी के सैंडल पहनाना.
हसबैंड मैटीरियल बनने के लिए लड़कों को डैमेज कंट्रोल में माहिर होना पड़ता है.
जब बीवी पूछे, ‘‘क्या मैं पहले जैसी लगती हूं?’’ तो बिना रुके जवाब देना होता है, ‘‘तुम अब और भी मासूम और स्मार्ट दिखती हो.’’
‘‘हसबैंड मैटीरियल कोई रैडीमेड कपड़ा नहीं है.’’ यह वह शख्स है जो खुद को प्यार की सिलाई, भरोसे के बटन और हंसी के धागों से बुनता है.
जो रोज किसी ऐरैगैरे की पूजा की जगह ‘‘बीवी हमेशा सही होती है’’ मंत्र का 21 बार जाप करे. इस से ज्यादा कल्याण होगा बजाय किसी और भंय के.
जो बीवी की बात मानने के लिए अपनी एमबीए डिगरी तक गिरवी रख दे.
एक आदर्श हसबैंड मैटीरियल के मुंह में शहद, दिल में बर्फ और जेब में कैश
होना चाहिए. अन्य और भी गुण निम्नानुसार हैं:
जो बीवी के हर मूड को गूगल ट्रांसलेट से भी तेज सम झे.
जो बीवी के गुस्से को फेस मास्क सम झ कर झेले और हर नया बैग देख कर आईपीएल के छक्के जैसा उत्साह दिखाए.
जो शौपिंग के बाद कहे, ‘‘तुम्हारी पसंद का तो जवाब नहीं.’’
‘‘जो मफलर पहन कर बीवी को जैकेट ओढ़ा दे.’’
जो बिना कहे बरतन मांज दे और हर महीने खुद पूछे, ‘‘कुछ नया चाहिए क्या?’’
अगर सही और ठोस हसबैंड मैटीरियल बनना है तो इन सभी गुणों को आत्मसात करना होगा, इन का लगातार अभ्यास करना होगा. तभी कहीं जा कर वह घड़ी आएगी जब कोई हुस्नपरी खुद आप को ‘हां’ कहेगी.
प्रेम सिर्फ दिखावे से नहीं बल्कि सम झदारी, धैर्य और छोटेछोटे त्यागों से मजबूत बनता है.
