राइटर – हरीशचंद्र पांडे

Stories :  आज  भावना अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थी. उस का दिल रहरह कर भर आता था. वह बहुत कुछ बोल कर मन को हलका कर लेना चाहती थी. मगर मजबूर थी. सच यह है कि वह किसी से कुछ कह भी तो नहीं सकती थी. उसे सम?ा ही नहीं आता कि अब क्या करे और क्या न करे.

आज भावना की आंखों में भय है, हताशा है, निराशा है, शर्म है. मगर वह खुद में ही घुट कर रह गई है.

भावना अपने सच्चे और अच्छे पति भूदेव से कुछ बात करना चाहती. मगर उस की हिम्मत ही नहीं होती. बेटी इन दिनों तीसरी क्लास की तैयारी में जुटी है. उसे पलभर की भी फुरसत नहीं है. वह इतनी मासूम है कि उस से भी कुछ कहना संभव नहीं. अपनी आंखों में आंसू भर कर भावना अतीत में लौट गई…

भावना बला की खूबसूरत थी. तीखे नैननक्श और कातिलाना अदा. जो देख ले वह भावना का दीवाना हो जाए. जब वह 21 साल की थी तो उसे कालेज के साथी भूदेव ने जन्मदिन के मौके पर सोने की चेन उपहार में दी. गरीब घर की भावना ने सोना कभी देखा तक नहीं था. उस की मां भी सोने का पानी चढ़े जेवर पहनती थी.

उस समय कालेज का अंतिम वर्ष चल रहा था. भूदेव उसे मन ही मन चाहता था. भावना को अच्छी तरह से पता था कि कालेज के 90त्न लड़के उस पर फिदा थे. सब उस के आसपास मंडराते रहते. खुद को भावना का सच्चा आशिक कहते.

मगर भावना धरातल पर रहती थी. जीवन के सारे कटु, सत्य जानती थी. भावना को सच्चा प्यार ही नहीं सच्ची दौलत भी चाहिए थी. भूदेव के पिता का आइसक्रीम का बिजनैस था. भावना ने सोने की चैन देख ही ली थी. वह भूदेव की हो गई थी. पहले सगाई और फिर विवाह कर के

वह भूदेव की अर्धांगिनी बन गई थी. दोनों की जातियां अलग थीं और इकौनोमिक स्टैंडर्ड भी पर भूदेव की जिद पर उस के पेरैंट्स आखिर मान ही गए थे.

भूदेव के पास भावना की कल्पना से भी अधिक दौलत थी. उस ने पति भूदेव को अपनी स्मार्टनैस से अपना गुलाम बना रखा था. भूदेव के सभी दोस्त उस से जलने लगे थे. भावना की खूबसूरती सब को डसने लगी थी. वैसे सब

भूदेव को बारबार बुलाते थे ताकि भावना से बात हो सके. भावना तो इस सब से बेखबर अपनी ही धुन में मस्त रहती थी. शादी के 1 साल बाद भूदेव ने उसे समझाया भी कि यह आइसक्रीम का बिजनैस तुम भी सीख और सम?ा लो. तुम भी एक नया ब्रैंड बना लो. मगर भावना को तो काम करना ही नहीं था. आराम और पकवान, यही उस के जीवन का मूल मंत्र था.

3 साल बाद भावना एक परी सी बिटिया की मां भी बन गई थी. मां बनने के बाद भावना और भी अधिक सुंदर हो गई. दुबलीपतली देह भरने लगी थी. बदन और भी अधिक गदरा गया था. 3 साल तक वह बेटी की ममता में बंध सी गई थी. मगर समय तो बीतता ही जा रहा था.

3 साल बाद बेटी को स्कूल में दाखिला दिला दिया. अब भावना फिर से बेपरवाह सी होने लगी.

यह उन दिनों की बात है जब सर्दी का नशीला मौसम शुरू हुआ था. बेटी तीसरी क्लास में आ गई थी. इन दिनों उस की छुट्टियां चल रही थीं. उसे 2 दिनों के लिए उस की नानी अपने साथ ले गई थी. भावना के पति भूदेव का भी बिजनैस का औफ सीजन था तो वह 2 दिनों के लिए अपने पुश्तैनी कसबे चले गए थे. भावना की एक के बाद एक किट्टी पार्टी थी. वह अकेली ही घर पर रुक गई थी. एक शाम भूदेव के मैरिड मित्र मनोज उन के घर पर आए. लंबे कद और आशिकाना मिजाज के मनोज को भावना भी खूब पसंद करती थी. मनोज को नहीं मालूम था कि भूदेव घर पर नहीं होगा. वह पहले भी कई बार बिना बताए आ चुका था. उस के भूदेव के साथ बिजनैस रिलेशंस भी थे. वह कुछ रफ मैटीरियल सप्लाई करता था. मनोज ने भावना से ऐसी बहकीबहकी बातें कीं कि वह मनोज के प्रेम जाल में जानबूझ कर फंसने लगी.

भावना को पता तो था कि कालेज में मनोज भी उस का एक आशिक हुआ करता था. मगर भावना उसे भाव तक न देती थी. कारण यह था कि मनोज का बिजनैस ज्यादा अच्छा नहीं चल रहा था. आज भी कमाऊ भाई के फार्महाउस के मुफ्त में मजे ले रहा था. मगर वह अब उसे भूदेव का मित्र मान कर उस का लिहाज कर लेती थी. अब कालेज का जमाना वह भूल भी गई थी.

अगले दिन मनोज उसे किट्टी तक छोड़ने गया और वापस लेने भी आया.

किट्टी में आज भावना ने ड्रिंक भी लिया था. मौका पा कर मनोज ने उसे एकाध पैग और पिला दिया. भावना पूरी तरह बहक चुकी थी. उसे अपना होश ही न था. मनोज उसे अपने फार्महाउस ले गया. भावना के गोरे और गदराए जिस्म में डूब कर वह तरोताजा हो गया. उस ने भावना के नग्न शरीर की अपने साथ फोटो भी खींच लिए और वीडियो भी बना लिया.

आधी रात को भावना को होश आया तो वह एकदम नग्न थी मनोज की बांहों में. वह घबरा सी गई. मगर मनोज ने चुंबनों की बरसात कर उसे मदहोश कर दिया.

कसमसा कर भावना उस की बांहों में सिमट गई. अगली सुबह मनोज ने उस से माफी मांगी और उसे सकुशल घर पहुंचा दिया. भावना ने भी कुछ हफ्ते बाद खुद को संतुलित किया. वह इसे कोई सपना सम?ा कर भूलने की कोशिश करने लगी.

मगर अब मनोज अपनी गंदी नीयत पर आ गया. वह भावना को फोटो और वीडियो भेज कर ब्लैकमेल करने लगा. भावना ने उसे अब तक 50 हजार रुपए दे दिए थे. मगर अब मनोज उस से गहने और जेवर की मांग कर रहा था. भावना इसी सिलसिले में परेशान थी.

आज भावना ने आत्महत्या का पक्का फैसला कर लिया था. उसे यह बात सम?ा में आ गई थी कि मनोज उसे बरबाद कर के ही दम लेगा. मगर इस में भूदेव का नुकसान हो रहा था. इसलिए भावना अब और ऐसी दोहरी जिंदगी नहीं जीना चाहती थी.

भावना ने पति भूदेव को सब सच बताते हुए एक पत्र लिखा. उसे अपने सिरहाने रखा और फिर ढेर सारी स्लीपिंग पिल्स गटक लीं.

भावना ने अचानक अपने सिर पर किसी का हाथ महसूस किया. पति भूदेव थे. भावना अस्पताल में थी. उस की घबराहट का पार न था. पति ने उसे अभी कुछ नहीं बताया. मगर भावना का तो हाल बुरा था. वह अपने पति से नजर तक न मिला पा रही थी. बिटिया घर पर नानी के साथ थी. उस का ऐग्जाम था. उसे बस यही बताया था कि मम्मी को बुखार आ गया है.

2 दिन बाद अस्पताल से घर आई. भावना ने भूदेव से रोरो कर माफी मांगी. मगर भूदेव ने उसे पहले ही माफ कर दिया था. मनोज को पुलिस ने 10 दिन हिरासत में रखा. भूदेव के वकील ने सम?ौता करा दिया था और उस से 20 लाख वसूले थे जो उस ने पिता की संपत्ति में अपना हिस्सा भाई को दे कर जमा किए थे.

भूदेव ने भावना को भरोसा दिलाया कि वह इसे बुरे सपने की तरह भूल जाए.

अब अपने बारे में सोचे, आगे जीवन को और उजला तथा खुशनुमा बनाने के बारे में विचार करे.

भावना को अब कोई डर न था. पति ने उस का हाथ थाम लिया था. संतोष प्रकट करते हुए भावना ने भूदेव का हाथ चूम लिया. अब वह आगे का जीवन सकारात्मक तथा गतिमान बनाना चाहती थी.

भूदेव जानता था कि भावना जैसी पत्नी मिलना आसान नहीं है. जीवन में गलतियां होती हैं, ऐक्सीडैंट होते हैं पर लोग जीना नहीं छोड़ते. ट्रैकिंग करने वाले एक बार फिसलने के बावजूद चलते रहते हैं और सी में स्वीमिंग करने वाले बड़ी लहरों की चपेट में आने और लाइफ गार्ड के हाथों बचाए जाने के बाद भी स्वीमिंग नहीं छोड़ते. एक मिस्टेक पर वह दूसरी मिस्टेक शादी तोड़ने की थोप कर अपनी जिंदगी बरबाद नहीं करना चाहता था.

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