Elephant Protection : हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कह दिया कि हाथियों के प्राकृतिक कौरिडोर में कोई रुकावट नहीं बन सकती. कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि 6 हफ्ते में देशभर के सभी हाथी कौरिडोर का सर्वे कर रिपोर्ट दी जाए.
जब जंगल की गहराइयों से गज की टोली निकलती है तो उस के पैरों की थाप से धरती ही नहीं पीढि़यों की यादें भी गूंजती हैं. पर आज वही राहें सिकुड़ रही हैं. सड़क, खेत, मकान और बीच में फंस गया है भारत का राजकीय पशु हाथी. यह फैसला सिर्फ हाथियों के लिए नहीं, हमारे, आप के लिए भी है क्योंकि जहां हाथी सुरक्षित होंगे वहां जंगल सुरक्षित होगा और जहां जंगल सुरक्षित वहां इंसान भी सुरक्षित रहेगा.
हाथी को ‘इकोसिस्टम इंजीनियर’ कहा जाता है. ये चलतेचलते जंगल में नए पेड़ों के बीज बो देते हैं. पानी के स्रोत खोजते हैं. जंगल को जिंदा रखते हैं. पहले जब हाथी आते थे तो वे फसल खाते थे पर खेत भी खाद से भर देते थे. अब रास्ते में फैक्टरी बन गई. अब न हाथी आते हैं न बारिश ठीक से होती है.
अलार्म सिस्टम: सैंसर वाले अलार्म जो हाथी आते ही बजें.
वैकल्पिक फसल: हाथियों को पसंद न आने वाली फसल जैसे अदरक, हलदी गांव के किनारे लगाएं.
मिल कर निगरानी: रात में युवाओं की टोली गश्त करे, पटाखे नहीं बल्कि तेज लाइट और आवाज से भगाएं.
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश एक चेतावनी भी है और उम्मीद भी. चेतावनी कि विकास के नाम पर हम प्रकृति से खिलवाड़ न करें और उम्मीद कि अभी भी वक्त है. जिस दिन हाथी का आखिरी कौरिडोर बंद हो जाएगा उस दिन समझ लेना जंगल का भी आखिरी दरवाजा बंद हो गया.
