Online Payment Fraud : तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ स्मार्टफोन आज केवल मनोरंजन का साधन भर नहीं है ये हामारी रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल हो चुका है और जीवन की जरूरत बन गया है. सुबह की चाय से लेकर घर का राशन खरीदने तक, बिजली का बिल भरने से लेकर किसी दोस्त को पैसे भेजने तक, कैब बुक करने से लेकर फ्लाईट बुक करने तक लगभग हर काम मोबाइल के जरिए आसानी से किया जा सकता है.
यूपीआई, गूगल पे, फोनपे और पेटीएम जैसे डिजिटल पेमेंट माध्यमों ने ये सब बोहत ही आसान बना दिया है. अब जेब में ज्यादा नकद पैसे रखने की जरूरत ही नहीं महसूस होती. बस मोबाइल निकाला, क्यूआर कोड स्कैन या फिर नंबर डाला या फिर सीधे ऑनलाइन पेमेंट आप्शन चूज़ किये और कुछ ही सेकंड में हो गया पेमेंट.
लेकिन डिजिटल पेमेंट ने हमारी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, उतना आर्थिक असुरक्षा से भी जोड़ दिया है. एक गलत क्यूआर एक गलत नंबर एक गलता लिंक और आपका सारा पैसा गायाब. फिर आप साईबर सेल और पुलिस में उसकी शिकायत तो कर सकते हैं लेकिन पैसे को वापी मिला असंभव है.
डिजिटल पेमेंट के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़े हैं. साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं. कभी कैशबैक और इनाम का लिंक भेजकर, तो कभी गलत क्यूआर देकर लोगों को जाल में फंसाया जाता है. ऐसे में सवाल यह है कि स्मार्टफोन से ऑनलाइन पेमेंट करते समय हम अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित कैसे रखें?
लापरवाही से पेमेंट, बड़ा नुकसान
ऑनलाइन होने वाली धोखाधड़ी का सबसे बड़ा कारण अधिकतर हमारी लापरवाहियां होती हैं. क्यूआर स्कैन करते समय पेमेंट को अच्छे से चैक न करना, अनजान लिंक पर क्लिक कर देना या किसी व्यक्ति के कहने पर अपना ओटीपी और यूपीआई पिन साझा कर देते हैं. यही गलतियाँ साइबर अपराधियों के लिए रास्ता खोल देती है. तो इन सबसे कैसे बचा जाये आइये जानते है
यूपीआई पिन और ओटीपी को रखें गोपनीय
ऑनलाइन पेमेंट करते समय यूपीआई पिन और ओटीपी किसी के साथ साझा न करें. कई लोग बहकावे में आकर बिना सोचे समक्षे सामने वाले व्यक्ति आपना यूपीआई पिन या फिर ओटीपी दे देते है. यूपीआई पिन और फिर ओटीपी बैंकिग व्यवस्था की सुरक्षा में बेहत ही सेंसिटिव चीज है, ये बिलकुल आपके बैंक लोकर में लगे ताले की चाबी की तरह है. किसी को भी यूपीआई पिन और ओटीपी देना अपने बैंक के ताले की चाबी देने जैसा है. इसलिए यूपीआई पिन और ओटीपी के मामले में हमेशा सावधीनी बरते.
ध्यान रखें, यूपीआई पिन का इस्तेमाल सिर्फ पैसे भेजने के लिए किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं. यदि कोई व्यक्ति आपको पैसे देने की बात करना है और आपसे यूपीआई पिन डालने को कहता है, तो ऐसा न करे. आप बैंक बैलेंस साफ हो सकता है. इसी तरह ओटीपी किसी भी तरह की पेमेंट करने के लिए होता है पेमेंट मंगवाने के लिए नहीं. दोनों ही सूरतों में:
- इस बात का भी ध्यान रखने कि कोई भी बैंक, सरकारी संस्था या पेमेंट सेवा आपसे फोन पर आपका ओटीपी, एटीएम पिन या यूपीआई पिन नहीं मांगती. अधिकतर मे ये फोन से भी संपर्क नहीं करती और अगरी करते भी है तो आपको सीधे ऑफिस बुलाया जाता है. फोन पर ओटीपी, एटीएम पिन या यूपीआई पिन मांगने वाले केवल फ्रैड ही हो सकते है.
- अनजान व्यक्ति पर विश्वास न करे. किसी भी अंजान व्यक्ति को अपना पिन शेयर न करे.
- सार्वजनिक स्थानों पर पेमेंट करते समय अपने फोन की स्क्रीन को दूसरों की नजरों से बचाएं.
- अपना पिन 1234, 0000 या अपने जन्म के वर्ष जैसा आसान नंबर में न रखें. इंन्हे हैक करना आसान होता है.
क्यूआर कोड स्कैन करते समय बरतें सावधानी
आजकल दुकानों, रेहड़ियों और छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े शोरूम तक हर जगह क्यूआर कोड से छोटी-बड़ी पेमेंट की जाता है. गलत क्यूआर स्कैन करने से पैसा किसी के भी खाते में जा सकता है.
साइबर ठगी करने वाले असली क्यूआर कोड के ऊपर अपना नकली क्यूआर कोड चिपका देते हैं, जिससे भुगतान दुकानदार की बजाय सीधे ठग के खाते में चला जाता है या फिर स्कैन करने पर फर्जी वेबसाइट खुल जाती है या पॉप-अप आ जाता है. ऐसा होने पर आपकी निजी जानकारी या बैंकिंग डिटेल्स चोरी हो सकती है. कई बार ऐसा भी होता है कि स्कैन करते ही आपके फोन पर ऑटोमैटिक पेमेंट रिक्वेस्ट या मैलवेयर डाउनलोड हो जाता है, जिससे पूरा बैंक खाता खाली हो सकता है.
ऐसे में पेमेंट करने से पहले स्क्रीन पर दिखने वाले रिसीवर का नाम, राशी और बैंक वेरीफाइड टिक को जरूर देखे. सब सही और वैरीफाई हो तभी आगे बढ़े.
यदि क्यूआर स्कैन करते ही सीधे यूपीआई पिन डालने का पेज खुल जाए या कोई पॉप-अप कुछ डाउनलोड करने को कहे, तो तुरंत रूक जाये और पेमेंट कैंसल कर दें.
दोनों सूरतों में दुकानदार या कस्टूमर केयर से इसका कारण पूछे और पेमेंट का सुरक्षित तरीका देखे.
मोबाइल में रखें मजबूत सुरक्षा व्यवस्था
स्मार्टफोन अब सिर्फ फोन नहीं है इसमें हमारी बैंकिंग, निजी तस्वीरें, संपर्क नंबर और कई महत्वपूर्ण जानकारियां होती हैं. इसलिए मोबाइल की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना भी एक भूल है. इसके लिए
- अपने फोन में मजबूत पासवर्ड, पिन या फिंगरप्रिंट लॉक लगाएं. 123 या 8976, अपने जन्मदिन की तारीख या कोई भी ऐसा नंबर जिसकी जानकारी आपके अलावा और भी कई लोगों को है को अपने पिन का रूप न दे.
- पेमेंट से जुड़े ऐप्स को समय-समय पर अपडेट करते रहें, क्योंकि नए अपडेट में सुरक्षा से जुड़ी कमियों को दूर किया जाता है.
- इसके अलावा किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें. इन ऐप्स से आपके मोबाइल की स्क्रीन को देखा सकता हैं और आपकी निजी जानकारी बड़ी आसानी से चुराई जा हैं.
- पेमेंट करते समय हमेंशा ऑफिसियल वैबसाईट या एप का ही इस्तेमाल करे.
सार्वजनिक वाई-फाई से पेमेंट करने से बचें
रेलवे स्टेशन, कैफे, मॉल और सार्वजनिक स्थानों पर मिलने वाले मुफ्त वाई-फाई के लालच में न रहे. इंटरनेट चलाने के लिए भले ही ये सुविधाजनक लगता है, लेकिन बैंकिंग और ऑनलाइन पेमेंट के लिए इसका इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है.
हैकर्स आपके फोन और वाई-फाई राउटर के बीच के बने कनेक्शन को हैक कर इससे जैसे पासवर्ड, यूपीआई पिन या क्रेडिट कार्ड नंबर जैसी जानकारी सीधे हासिल कर सकते है.
इसलिए जितना हो सके पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करने से बचे. खासकर ऑनलाइन पेमेंट करते समय अपने मोबाइल के सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करें और अपना फोन किसी अनजान व्यक्ति के हाथ में देकर पेमेंट न करें.
धोखाधड़ी होने पर क्या करें
अगर आपके साथ ऑनलाई धोखाधड़ी हो जाती है, तो घबराने के बजाय तुरंत कदम ये उठाएं.
- सबसे पहले अपने बैंक और संबंधित पेमेंट सेवा को इसकी जानकारी दें.
- जरूरत पड़ने पर खाते या पेमेंट माध्यम को अस्थायी रूप से बंद करवाएं.
- शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत काल करे.
- इसके अलावा आधिकारिक वेबसाइट (https://cyberpolice.nic.in/) पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
- धोखाधड़ी से जुड़े संदेश, फोन नंबर, लेन-देन की जानकारी और स्क्रीनशॉट जैसे प्रमाण सुरक्षित रखें.
- शिकायत करने में देरी न करें, क्योंकि शुरुआती समय में की गई कार्रवाई पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ा सकती है.
जानकारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा
डिजिटल पेमेंट अब सुविधा नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है. इससे न तो पूरी तरह दूरी बनाई जा सकती है और न ही हर ऑनलाइन सुविधा को खतरा मानकर चला जा सकता है. जरूरी यह है कि हम तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षित और समझदार तरके से करें.
चाहे बच्चें हो या बुजुर्गों, परिवार के हर मैंबर को ऑनलाइन फ्रोड के बारे में बताये. खासतौर पर बुजुर्गों को, उन्हें बैंकिंग और यूपीआई से जुड़े नियमों के बारे में जरूर समझाये, क्योंकि इसका शिकार होने वालों सबसे बड़ा नंबर इनका ही है.
