भूखे रहने से नहीं, खाने से होगा पेट कम

क्या आप भी बढ़ते वजन, निकलते पेट और कमरा रूपी कमर से परेशान हैं? क्या आप भी अपने पुराने फिगर को मिस कर रही हैं? मोटापा आज के समय की एक बहुत बड़ी समस्या है. यह सिर्फ वयस्कों की ही समस्या नहीं है पर बच्चों और टीनेजर में भी मोटापा फैल रहा है.

मोटापे को कंट्रोल करने के लिए, सबसे पहले आपको अपने डाइट पर नजर रखनी होगी. कुछ महिलायें ये समझती हैं कि मोटापे को नियंत्रित करने के लिए खाना बंद कर देना चाहिए. डाइटिंग का मतलब भूखे रहना नहीं होता है. इसके साथ ही रेगुलर एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है. डाइटीशियन की मानें तो सही समय पर सही डाइट से आप अपना वजन कम कर सकती हैं. वजन कम करने के लिए सही मात्रा में फल सब्जियां लेना बहुत जरूरी है. फलों में भरपूर मात्रा में विटामिन और फाइबर होता है. इससे आपकी इम्युनिटी भी बढ़ती है.

इन फलों को खाकर आप मोटापा कम कर सकती हैं:

1. सेब

सेब प्रोपर डाएजेशन के लिए बहुत फायदेमंद हैं. सेब खाने से आपकी भूख भी कंट्रोल में रहती है. सेब लाल और हरे दोनों ही रंगों में पाया जाता है. सेब में कई विटामिन और मिनरल होते हैं. इसमें भरपूर फाइबर भी पाया जाता है.

2. चेरी

चेरी भी वजन कम करने बहुत कारगर है. खाली पेट चेरी खाना स्वास्थय के लिए बेहद फायदेमंद होता है.

3. स्ट्रॉबेरी

स्ट्रॉबेरी न सिर्फ आपके एक्सेस फैट को कंट्रोल करता है बल्की आपकी खूबसूरती को भी निखारता है. प्रतिदिन 5-6 स्ट्रॉबेरी खाना आपको अंदर से फिट और बाहर से कुदरती निखार देगा.

4. अनार

अनार खाने से न सिर्फ आपका पेट कम होगा बल्कि आपके शरीर में खून की मात्रा भी बढ़ेगी. अनार खाने या अनार का रस पीने से आप फिजीकली फिट रहेंगी. जिन महिलाओं को खून की कमी है उनके लिए अनार खाना बहुत फायदेमंद है. दिन भर आपको पूरे घर की देखभाल करनी पड़ती है, वर्किंग महिलाओं के लिए ये और मुश्किल हो जाता है. पर सिर्फ एक अनार खाने से आप अपने शरीर की कुछ हद तक देखभाल कर सकती हैं.

5. प्लम

प्लम के आकार पर मत जाइए. सुबह प्लम खाने से आप पूरे दिन एनर्जेटिक फील करेंगी. कमर घटाने के साथ ही यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है.

जानें क्या हैं फिटनैस से जुड़े 10 मिथ और उनके सच

लेखिका- शकुंतला

आजकल युवाओं में अपनी बौडी को हैल्दी बनाने का क्रेज है. इस के लिए वे तरहतरह के व्यायाम करते हैं, जिम जाते हैं और डाइटिंग करते हैं. फिटनैस को ले कर अकसर उन के मन में कुछ गलतफहमियां रहती हैं, जिन्हें मन से निकाल देना ही बेहतर होगा.

1. व्यायाम के पहले स्ट्रैच करना जरूरी है:

कुछ लोगों का कहना है कि व्यायाम करने से पहले स्ट्रैच करना चाहिए, जबकि इस से बेहतर व्यायाम के बाद डाइनामिक स्ट्रैच करना होता है जब जौइंट्स और मसल्स गरम रहती हैं. इस से स्ट्रैस कम होता है, मसल्स टैंशन कम होती है, पोस्चर और रक्तसंचार बेहतर होता है.

2. जिम में घंटों ऐक्सरसाइज करना ज्यादा लाभदायक:

यह भी सही नहीं है. ज्यादा समय तक व्यायाम या वर्कआउट करने से अच्छा है जो भी करें धैर्य से करें और सही तरीके से वर्कआउट से सर्वाधिक लाभ के लिए ऐरोबिक ऐक्सरसाइज से पहले स्ट्रैंथ ट्रेनिंग लेनी चाहिए. इस से शरीर में मौजूद कार्बोहाइड्रेट की खपत पहले होती है.

इस के बाद ऐरोबिक ऐक्सरसाइज  करने से बौडी का फैट और कोलैस्ट्रौल जलता है. सिर्फ जिम में वर्कआउट से ही सबकुछ ठीक नहीं होता है, साथ में कुछ मौडरेट ऐक्सरसाइज जैसे वाकिंग, स्विमिंग, साइक्लिंग आदि भी करते रहना चाहिए.

3. स्ट्रैंथ ट्रेनिंग बंद होने से मसल्स फैट में बदल जाती हैं:

मसल्स कभी फैट में नहीं बदलती हैं. स्ट्रैंथ ट्रेनिंग बंद होने से मसल्स मास घट सकता है, जिस के चलते मैटाबोलिज्म कम हो जाएगा. मैटाबोलिज्म धीमा होने से कम कैलोरी जलेगी और वजन बढ़ने की संभावना रहेगी. मोटापा बढ़ने से कोलन, पैंक्रियाज, किडनी, गालब्लैडर, ब्रैस्ट आदि अंगों में कैंसर की संभावना बढ़ जाती है.

4. बौडी फैट जलाने का लक्ष्य साध सकते हैं:

वर्कआउट से आप अपने शरीर का फैट तो जला सकते हैं पर आप शरीर के किसी खास अंग के फैट का जलना सुनिश्चित नहीं कर सकते हैं. वर्कआउट के दौरान आप की बौडी का फैट जलेगा पर बौडी किसी मनचाहे अंग का फैट जलाने का लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकती है.

5. ज्यादा वजन उठाने से बौडी टोन और शेप बेहतर होगी:

वेट लिफ्टिंग से बौडी टोन और शेप अच्छी होती है पर इस से आप बौडीबिल्डर की तरह नहीं दिख सकते. महिलाओं में टेस्टोस्टेरौन की मात्रा बहुत कम होती है, जिस के चलते उन में मसल्स बिल्डिंग पुरुषों जैसी नहीं हो सकती है. वेटलिफ्टिंग से आप की कैलोरी अवश्य जलेगी और हैल्दी वेट मैंटेन रहेगा. हैल्दी वेट अनेक रोगों को दूर रखता है.

6. क्रंचेज एक बेहतर वर्कआउट है:

क्रंचेज बैली फैट जलाने में सक्षम नहीं होता है. इस के लिए कार्डियो वर्कआउट और रिजिस्टैंस ट्रेनिंग बेहतर ऐक्सरसाइज है.

7. ऐक्सरसाइज कर आप कुछ भी खा सकते हैं:

ऐक्सरसाइज का मतलब यह नहीं है कि आप का खानपान मनचाहा होगा. संतुलित और पौष्टिक आहार किसी भी ऐक्सरसाइज या वर्कआउट से ज्यादा जरूरी है. समुचित आहार  वेट मैनेजमैंट और स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है. ऐक्सरसाइज या वर्कआउट आप को उचित खानपान से समझौता करने की इजाजत नहीं  देता है.

8. ट्रेडमिल पर ज्यादा चलने से वजन मैंटेन रहेगा:

ट्रेडमिल पर ज्यादा देर वर्कआउट करने से वजन ठीक रहेगा ऐसा कुछ नहीं है उलटे यह आप की कैलोरी जलाती है. ट्रेडमिल एक कार्डियो ऐक्सरसाइज है. वेट मैनेजमैंट के लिए अलग से वेट ट्रेनिंग वर्कआउट करना पड़ता है.

9. जब तक पसीना न निकले वर्कआउट पूरा नहीं होता है:

यह सब के लिए जरूरी नहीं है विशेषकर वेट लिफ्टर के लिए. वजन बढ़ाने के क्रम में बीचबीच में उसे कुछ मिनट रिलैक्स करना पड़ता है ताकि उस का नर्वस सिस्टम रिकवर कर सके और अत्यधिक वजन उठाने के लिए तैयार हो सके. इस दौरान उसे पसीना नहीं भी आ सकता है.

10. प्रत्येक वर्कआउट के बाद इलैक्ट्रोलाइट जरूरी है:

नौर्मल वर्कआउट के बाद स्पोर्ट ड्रिंक्स या इलैक्ट्रोलाइट जरूरी नहीं है. 1 घंटे से ज्यादा कार्डियो वर्कआउट या लंबी मैराथन रनिंग के मध्य में इसे लिया जा सकता है अन्यथा स्पोर्ट ड्रिंक्स पीने से अनावश्यक शुगर मिलेगा और फैट जलाने की प्रक्रिया में बाधा होगी.

जानें पैदल चलने का सही तरीका क्या है

लेखिका- दीप्ति गुप्ता

वॉक करना यानि पैदल चलना एक शानदार एरोबिक एक्सरसाइज है और आपके मेटाबॉलिज्म को शुरू करने के लिए एक अच्छा तरीका है. बावजूद इसके कई लोग आजकल पैदल चलने से बचते हैं. थोड़ी दूरी तक भी जाना हो, तो समय बचाने के लिए टू या फोर व्हीलर का इस्तेमाल कर लेते हैं. जो गलत है. जर्नल मेडिसिन इन साइंस एंड स्पोट्र्स एंड एक्सरसाइज के अनुसार, पैदल चलने से पुरानी से पुरानी बीमारी को दूर करने में मदद मिलती है. अगर आप भी अक्सर एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए लिफ्ट या फिर व्हीकल का इस्तेमाल करते हैं, तो जरा पैदल चलने के फायदों के बारे में जान लीजिए. इसके तमाम फायदों के बारे में जानने के बाद आप पैदल चलने की कोशिश जरूर करेंगे.

पैदल चलने का सही तरीका क्या है-

पैदल तो हर कोई चल सकता है, लेकिन इसका भी एक विशेष तरीका होता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. अगर आप बहुत ज्यादा फिजिकली एक्टिव नहीं रहते , तो आपको पैदल चलने की शुरूआत 10 मिनट से करनी चाहिए. हर दिन अपनी वॉकिंग एक-एक मिनट बढ़ाते जाएं. इस तरह का अभ्यास आपको तब तक करना है, जब तक आपके पैदल चलने का समय 120 मिनट न हो जाए. जब 110 दिन बाद आपकी वॉकिंग कैपेसिटी 120 मिनट की हो चुकी हो, उस वक्त आप एक घंटा मॉर्निंग वॉक कर रहे होंगे और एक घंटा ईवनिंग वॉक कर रहे होंगे. यहां 120 मिनट का मतलब है, कि एक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए कम से कम इतने मिनट तो पैदल चलना ही चाहिए. इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुसार, एक व्यक्ति को 10 हजार कदम रोजाना पैदल चलना चाहिए.

पैदल चलने के फायदे –

वजन घटाए- पैदल चलना कैलोरी जलाने और वजन कम करने का एक प्रभावी तरीका है. रोजाना 30 मिनट तक पैदल चलने से वजन घटाने में बहुत मदद मिलती है, साथ ही आपका स्वास्थ्य भी ठीक बना रहता है.

दिल को रखे दुरूस्त- 

पैदल चलने से दिल के स्वास्थ्य में सुधार होता है. कई अध्ययनों से यह भी पता चला है कि पैदल चलने से हदय संबंधी घटनाओं का जोखिम 31 प्रतिशत तक कम हो सकता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार हर वयस्क को सप्ताह में पांच दिन कम से कम 30 मिनट तक तेज चलना चाहिए.

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करे- 

बेशक आपको पैदल चलने में आलस आता हो, लेकिन अपने बीपी को रेगुलेट करने के लिए आपको हर दिन वॉक करनी ही चाहिए. यह वॉक आप मार्केट जाते समय कर सकते हैं या ऑफिस में भी कर सकते हैं. हर दिन 10 हजार कदम चलने से रक्तचाप में गिरावट आती है और स्टेमिना भी बढ़ता है.

जोड़ों को मजबूत बनाए-

नियमित रूप से पैदल चलने या वॉक करने से जोड़ों के बीच चिकनाई में सुधार होता है साथ ही यह मांसपेशियों को मजबूत करने का काम करती  है. जिन लोगों को अक्सर घुटनों में दर्द रहता है, उनके लिए पैदल चलना बहुत फायदेमंद है. इससे पुरानी से पुरानी ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या बहुत जल्दी खत्म हो जाती है.

फेफड़ों की क्षमता बढ़ाए-

रोजाना किसी न किसी रूप में पैदल चलने से आपके फेफड़ों की क्षमता बढ़ सकती है. दरअसल, जब आप चलते हैं, तो आप अधिक मात्रा में ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं. अधिक मात्रा में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का यह आदान प्रदान आपके फेफड़ों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है.

स्ट्रेस दूर करे- 

आप मानें या ना मानें, लेकिन हर दिन वॉक करने से आपका खराब मूड भी अच्छा हो जाता है. कई अध्ययनों में यह साबित हुआ है कि फिजिकल एक्टिविटी अवसाद को रोकने में मदद कर सकती है. इतना ही नहीं पैदल चलने से परिसंचरण में सुधार होता है, जिससे तनाव को कम करने में मदद मिलती है.

पैदल चलने के लिए टिप्स-

– यदि आप अभी-अभी पैदल चलना शुरू कर रहे हैं, तो शुरूआत में आप बहुत ज्यादा लंबी दूरी तक न चलें.

– हर दिन 10 मिनट तक चलने की कोशिश करें. धीरे-धीरे इस अवधि को बढ़ाकर 30 मिनट प्रतिदिन करें. फिर आप सुबह 30 मिनट और शाम को भी 30 मिनट पैदल चल सकते हैं.

पैदल चलना एक अच्छा शारीरिक व्यायाम है, तो बेहतरीन स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है. लेकिन, पैदल चलने से पहले और बाद में वॉर्म अप और कूल डाउन एक्सरसाइज जरूर करें.

वजन बढ़ाने के लिए अपनाएं ये 10 उपाय

जिस तरह वजन का बढ़ना एक बीमारी है, उसी तरह से वजन का जरुरत से ज्यादा कम होना भी एक बीमारी ही है. अगर शरीर बहुत कमजोर और दुबला-पतला हो तो आपका हर कोई मजाक उड़ाता है और आप हर जगह हंसी का पात्र बनते हैं.

वजन की कमी को दूर करने के लिए आपको कुछ खास खाद्य पदार्थ को अपने रोज के भोजन में शामिल करना चाहिए. हम आपको बताएंगे कि किन चीजों को खाने से आप आसानी से अपने आपको चुस्त-दुरुस्त और हष्ट-पुष्ट बना सकते हैं.

1. आलू

आलू कार्बोहाइड्रेट का एक अच्छा और संपूर्ण स्रोत है, आलू खाने से मोटापा बढ़ता है. आपको आलू को उबालकर उसे दूध के साथ खाना चाहिए, इससे आपको जल्दी फायदा होगा.

2. अनार

अनार विटामिन का अच्छा स्रोत माना जाता है. बहुत से गुणों से भरपूर अनार आपके शरीर में खून को बढ़ाता है. कई स्वास्थ्य सलाहकर, अच्छे स्वास्थ्य की दृष्टि से इसे एक महत्त्वपूर्ण फल मानते हैं. अनार का नियमित रूप से सेवन करने से रक्त संचार की गति भी बढ़ती है और आपका मोटापा बढ़ता है.

3. बादाम

रोज रात को बादाम की पांच से सात गिरी को पानी में भिगो कर रख दें और सुबह उनका छिलका उतारकर उन्हें पीसकर, उसमें लगभग 30 ग्राम मक्खन और मिश्री मिलाकर इस मिश्रण को डबल रोटी या सामान्य रोटी के साथ खाएं. वजन बढ़ाने के लिए आप इसे खाने के बाद फिर एक गिलास गर्म दूध भी पी सकते हैं. नियमत ऐसा करने से वजन बढ़ने के साथ-साथ आपकी स्मरण शक्ति भी तेज होती है.

4. दूध और रोटी

जो लोग मोटे नहीं है और अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं उन्हें रोजाना दूध के साथ रोटी खानी चाहिए.

5. घी

मोटापे के लिए घी बहुत ही फायदेमंद और आवश्यक है. वजन बढ़ाने और मोटे होने के लिए आपको गर्म रोटी और दाल में घी मिलाकर खाना चाहिए. इसके अलावा शक्कर में घी मिलाकर खाने से भी मोटापा बढ़ता है.

6. पनीर

पनीर खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ वाला प्रोटीन का भी एक अच्छा स्रोत है, इसलिए अगर आप अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं तो नियमित रूप से पनीर खाना शुरू कर दें.

7. छुहारा

पौष्टिक तत्वों से भरपूर छुहारा आपके शरीर में रक्त बनाता है और इसे बढ़ाने में भी मदद करता है. रोज रात सोने से पहले, एक ग्लास दूध में छुहारे को उबाल कर उसे पीने से चर्बी बढ़ती है और शरीर स्वस्थ्य दिखाई देता है.

8. दालें और सब्जियां

मोटे होने की इक्षा रखने वाले लोगों को छिलके वाली उड़द की दाल, अंकुरित दाले, काले चने, मूंगफली, मटर, गाजर का रस, आंवला आदि का अधिक सेवन करना चाहिए. ये सभी वजन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ हैं.

9. सोयाबिन

सोयाबिन कैलोरी, प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन बी और आयरन से भरपूर होता है. सोयाबिन एक ऐसा पदार्थ है, जो मोटापा बढ़ाने और कम करने दोनों काम करती है.

10. केला

कैलोरीज, कार्बोहाइड्रेट्ज और पोटेशियम आदि उर्जा के स्रोत केले में भरपूर मात्रा में  होते हैं, अगर आप वाकई अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं तो रोजाना एक ग्लास गर्म दूध के साथ दो केले अवश्य खाएं.

Winter Special: कालेज के बाद भी रहें तरोताजा

कालेज लाइफ में युवतियों में एकदूसरे से आगे निकलने की होड़ रहती है. बात चाहे पढ़ाई की हो, सुंदरता की हो या फिर हौट दिखने की, खुद को सब से बेहतर साबित करने के लिए युवतियां हरसंभव प्रयास करती हैं.

खुद को फिट रखने के लिए जहां जिम जौइन करती हैं, पार्कों में अकसर सुबह फिटनैस के तमाम उपाय अपनाती दिखती हैं, वहीं सुंदर लुक के लिए डिजाइनर कपड़े पहनती हैं. मौडर्न ड्रैसेज, मिड्डी, शौर्ट्स, जैगिंग्स का उन का सलैक्शन लाजवाब होता है. उन्हें लगता है कि बस वे सब पर छा जाएं. इस से उन के दोस्त बनेंगे जिस से वे अपने ग्रुप के साथसाथ अपने कालेज में भी चर्चित होंगी.

युवतियां अपने बाहरी रंगरूप को संवारने में ही आगे नहीं रहतीं, बल्कि अपनी जानकारी व इंटैलिजैंसी का लोहा मनवाने के लिए भी एकैडमिक रिजल्ट को सही रखने के साथसाथ तमाम कालेज ऐक्टिविटीज में बढ़चढ़ कर भाग लेती हैं.

स्मार्ट दिखने, आगे रहने, ऐक्टिविटीज में भाग लेने व खुद को ऐनर्जैटिक रखने के ये तमाम प्रयत्न कालेज लाइफ खत्म होते ही डंप हो जाते हैं और उन की दिनचर्या में ढीलापन व सुस्ती हावी हो जाती है.

आखिर ऐसा क्यों होता है कि कालेज खत्म होते ही युवतियों के स्वभाव में चेंज आने लगता है. ये ढीलापन ड्रैस सैंस में, फिटनैस में, नौलेज में, बात करने के तरीके में भी स्पष्ट झलकने लगता है. कारण बताते हुए आकांक्षा कहती है कि कालेज लाइफ के बाद भी ऐसा लगने लगता है कि हम ने न तो ड्रैस फ्रैंड्स को दिखानी है और न ही अपना लुक. सिर्फ घर में ही तो रहना है इसलिए अब तो नाइट सूट में ही पूरे दिन मजे से रहो. जब चाहे सो कर उठो, जो मरजी खाओ, जितना चाहे टीवी देखो, पढ़ो या नहीं पढ़ो, सब अपनी मरजी के अनुसार होता है.

  1. मनमरजी को कहें बाय

कहने को तो मरजी कालेज में भी चलती है, लेकिन तब वह कुछ हद तक हमारी पर्सनैलिटी में निखार लाती है. घर बैठ कर मनमरजी चलाना खुद के लिए फायदेमंद साबित नहीं होता.

पेरैंट्स जब इस सुस्ती व ढीलेपन पर बारबार टोकते हैं तो उन्हें भी वे नजरअंदाज करती हैं. सुस्ती व ढीलापन शरीर के साथसाथ मानसिक तनाव भी देता है, जिस से निकलना आसान नहीं होता.

अनुपमा सिन्हा कहती है, ‘‘कालेज के बाद आप रैस्ट मूड में हैं, आप का कमरा, ड्रैसेज, किचेन सब अस्तव्यस्त है, परंतु घर के बाकी सदस्य हमारे इस बदले लाइफस्टाइल से कितने डिस्टर्ब हो रहे हैं, यह समझने के मैनर्स तो हम में होने चाहिए,’’ लेकिन अनुपमा की बात काटते हुए शशांक बोला, ‘‘यार, हर समय, हर जगह तो हम खुद को नियमों में नहीं बांध सकते. आफ्टर औल, रिलैक्सेशन भी तो कोई चीज है, क्या हम इसे भी फुलफिल ऐंजौय नहीं कर सकते.’’

इन दोनों के मत को इस प्रतिनिधि ने कुछ यंगस्टर्स के सामने रखा तो अधिकतर गर्ल्स का यही कहना था कि ऐंजौय करने की भी एक सीमा होनी चाहिए. इसलिए मनमरजी को कहें बाय और अपनी पर्सनैलिटी को कहें हाय.

2. फिटनैस का फंडा

कुछ भी खानेपीने से परहेज करें

कालेज टाइम में आप ने अपना खाने का जैसा रूटीन बना रखा था उसी का पालन करें. ऐसा न हो कि जो मिला, जितनी बार मिला, खा लिया. अपने पेट को फैलता हुआ कुआं न बनाएं. फास्ट फूड से परहेज रखें, क्योंकि इस में कैलोरी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिस से मोटापा बढ़ता है. मोटापा बढ़ने से कौन्फिडैंस लैवल भी घटेगा.

पोषक तत्त्वों से भरपूर डाइट लें. फल व सब्जियों में रस व फाइबर होने से ये जहां आप को ऊर्जा प्रदान करेंगे, वहीं इन से आप को लंबे समय तक भूख भी नहीं लगेगी. जब आप पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन करेंगी तो इस से आप फिट तो रहेंगी ही साथ ही आत्मविश्वास भी बरकरार रहेगा.

दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कालेज से पासआउट स्नेहा ने बताया कि जब मैं कालेज में पढ़ती थी तो अपनेआप को फिट रखती थी, लेकिन जैसे ही कालेज की पढ़ाई खत्म हुई मैं ने खुद पर ध्यान देना ही छोड़ दिया, जिस का नतीजा यह हुआ कि कालेज में जो दोस्त मेरी फिटनैस और अपटुडेट रहने की तारीफ करते नहीं थकते थे आज वही मुझे बेवकूफ व झल्ली कहने से नहीं हिचकते. इसलिए मैं कालेज पासआउट युवतियां, जो घर में रहती हैं, से कहना चाहूंगी कि कालेज छूटने के बाद भी अपनी दिनचर्या पर विशेष ध्यान दें.

3. ऐक्सरसाइज जरूर करें

भले ही कालेज टाइम में आप बहुत ज्यादा ऐक्सरसाइज यह सोच कर न करती हों कि कालेज आनेजाने में ही काफी ऐक्सरसाइज हो जाती है, लेकिन ऐसी सोच कालेज के बाद सही नहीं है, क्योंकि घर पर रहने से शारीरिक व्यायाम कम ही हो पाता है जिस से मोटापा व अन्य बीमारियां बढ़ने की आशंका बनी रहती है, इसलिए ऐक्सरसाइज का रूटीन जरूर बनाएं.

रोजाना सुबह जल्दी उठ कर पार्क जाएं. पार्क जाने से जहां आप का ऐक्सरसाइज का रूटीन बनेगा वहीं आप का प्रकृति से लगाव भी बढ़ेगा. हो सकता है कि आप पार्क में जा कर ऐक्सरसाइज करने के मूड में न हों, ऐसे में आप जिम भी जौइन कर सकती हैं. लेकिन एक बात का ध्यान जरूर रखें कि ऐक्सरसाइज कभी न छोड़ें.

अंजू वर्मा का कहना है कि मैं कालेज टाइम में बहुत पतली थी. मुझे लगता था कि मैं हमेशा ऐसी ही रहूंगी, इसलिए मैं ने कालेज के बाद ऐक्सरसाइज करना छोड़ दिया, जिस का रिजल्ट यह हुआ कि मैं मोटी हो गई. आज मुझे इस बात का बहुत पछतावा है. काश, मैं उसी समय संभल जाती तो आज मेरी ऐसी हालत न होती.

दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कालेज से ग्रैजुएट दीक्षा का कहना है कि मैं ने अपना वही रूटीन रखा जो मेरा कालेज टाइम में था. ऐसा मैं इसलिए भी कर पाई, क्योंकि हमारे परिवार में सभी का सुबह जल्दी उठ कर ऐक्सरसाइज करने का रूटीन है. इस से मैं अब भी वैसी की वैसी ही हूं.

4. वजन पर नियंत्रण रखें

हफ्ते में एक बार वजन जरूर कराना चाहिए ताकि अगर आप का वजन बढ़ रहा है तो उसे शुरुआती दौर में ही नियंत्रित किया जा सके.

अगर आप ने जिम जौइन कर रखा है तो वहां रोजरोज वजन तौल कर खुद को परेशान न करें, क्योंकि यदि वजन बढ़ता है तो तनाव भी बढ़ता है. यदि आप को लग रहा है कि आप वजन पर नियंत्रण नहीं रख पा रही हैं तो अपने जिम के डाइटीशियन से डाइट चार्ट बनवा लें. फिर भी अगर वजन कम न हो तो चिकित्सक की राय लें. इस प्रकार आप खुद को फिट रख पाएंगी. इस विषय पर खासतौर से ध्यान दें कि अनेक कंपनियों के आज सप्लिमैंट्स फूड्स के नाम से कुछ पेय पदार्थ मार्केट में हैं, जिन्हें सुबह और रात को लेने से नाश्ता व रात का खाना नहीं खाना होता है लेकिन कहीं ये पेय पदार्थ आप की सेहत से तो खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं, इसलिए इन से सजग रहें.

5. स्मार्टनैस बरकरार रखें

खुद को समय के अनुसार ढालें. ऐसा न सोचें कि अब मुझे देखने वाला कौन है जो मैं कपड़ों पर या किसी अन्य चीज पर इतने पैसे खर्च करूं. स्मार्टनैस खुद के लिए भी बहुत महत्त्व रखती है. इस से आप कौन्फिडैंट भी फील करेंगी.

यहां स्मार्टनैस का मतलब सिर्फ कपड़ों से ही नहीं है बल्कि आप के बात करने के ढंग, भाषाशैली आदि से भी है. आप यह बात अच्छी तरह जानती हैं कि आज के युवक उन्हीं लड़कियों को पसंद करते हैं जो हर चीज में स्मार्ट हों इसलिए समय की मांग और खुद के लिए स्मार्टनैस को बरकरार रखें.

इस बारे में स्नेहा का कहना है कि मैं कालेज टाइम से ही अपनी स्मार्टनैस के लिए जानी जाती हूं. मेरे दोस्त मुझे स्मार्टी कह कर बुलाते थे. जब मैं ने कालेज छोड़ा तभी निश्चय कर लिया था कि मैं अपनी इस स्मार्टनैस को हमेशा बरकरार रखूंगी और मैं ने रखा भी. इसलिए हर किसी को हमेशा अपनी स्मार्टनैस का ध्यान रखना चाहिए.

6. रुचि वाले सब्जैक्ट की ट्यूशन पढ़ाएं

आप कालेज की पढ़ाई के बाद अपने ज्ञान को लौक न करें. आप ट्यूशन पढ़ा कर अपनी नौलेज को बरकरार रख सकती हैं. अगर आप में सीनियर क्लास के बच्चों को पढ़ाने का कौन्फिडैंस नहीं है तो प्राइमरी क्लास के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाएं. इस से आप का ज्ञान तो बढ़ेगा ही साथ ही घर बैठे आप की पौकेटमनी भी बन जाएगी. इस से आप आत्मनिर्भर भी बनेंगी. इस फैसले से आप के पेरैंट्स आप पर बहुत गर्व करेंगे.

इस संबंध में नेहा का कहना है कि कालेज के बाद जब मैं काफी समय तक खाली बैठी तो काफी बोरियत होने लगी साथ ही नकारात्मक विचार भी मन में आने लगे. तभी मेरे दोस्त ने मुझे ट्यूशन पढ़ाने की सलाह दी. उस की इस सलाह ने मेरी जिंदगी बना दी. आज मेरा अपना ट्यूशन सैंटर है और मैं महीने के 50 हजार रुपए कमा लेती हूं.

रेखा का इस संबंध में कहना है कि मेरी इंगलिश सब्जैक्ट  में खास रुचि है, लेकिन उस के बावजूद मैं ने अपनी इस क्षमता का फायदा नहीं उठाया, जिस का मुझे आज तक पछतावा है. मेरे दोस्त आज काफी आगे निकल गए हैं लेकिन मैं वहीं की वहीं हूं, सिर्फ सही निर्णय न लेने के कारण.

7. नौलेज अपडेट करती रहें

अगर आप पूरे दिन में 6 घंटे टीवी देख रही हैं तो उस में से 2 घंटे न्यूज, डिस्कवरी, नौलेज वाले चैनल्स जरूर देखें. इस से आप वर्ल्ड में घटित घटनाएं जान सकती हैं, साथ ही अगर आप किसी ऐग्जाम वगैरा की तैयारी कर रही हैं तो उस में भी आप को इस का काफी लाभ मिलेगा.

नौलेज अपडेट रखने का सब से बड़ा फायदा यह होता है कि आप समूह में बात करने से पीछे नहीं रहेंगी. जब आप को विषय की संपूर्ण जानकारी होगी तो आप अपना पक्ष भी रख सकेंगी. इस का सामने वाले पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा. हो सकता है कि इस से आप को कहीं अच्छी नौकरी का अवसर भी मिल जाए.

इस संबंध में स्वीटी का कहना है कि मैं अपने कालेज की टौपर रही हूं, लेकिन कालेज के बाद मैं ने नौलेज अपडेट करने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जिस का मेरी पर्सनैलिटी पर तो प्रभाव पड़ा ही, साथ ही मुझे कही नौकरी भी नहीं मिली.

8. बुक्स पढ़ती रहें

कालेज के बिजी शैड्यूल की वजह से अकसर ऐसा होता होगा कि आप कोर्स के अलावा अन्य लेखकों की किताबें नहीं पढ़ पाई होंगी. तो अब तो गोल्डन टाइम है, जितनी बुक्स पढ़ सकें, पढ़ें. बुक्स में जो तथ्य आप को रोचक लगते हैं उन्हें एक डायरी में नोट करती रहें. आप अपनी यह रोचक जानकारी फेसबुक व व्हाट्सऐप पर सब के साथ शेयर कर सकती हैं, अगर किसी लेखक की जीवनदर्शन संबंधी कोई बात आप के दिल को छू जाए तो उसे भी शेयर करना न भूलें, क्योंकि आपाधापी, भागदौड़, फुल टैंशन लाइफ में ऐसे थौट्स मन को सुकून देते हैं. बुक्स अपने फ्रैंड्स के साथ भी शेयर कर सकती हैं. जिस बुक को पढ़ रही हैं उस के औथर का इंटरनैट से जीवनवृत्तांत भी खंगाल डालिए, उन का लाइफस्टाइल भी आप की लाइफ को स्टाइल देगा.

9. हौबी क्लासेज जौइन करें

आप की जो हौबी हो उसे बढ़ाएं. जैसे खाना बनाना, सिंगिंग, डांसिंग आदि जो अच्छा लगता हो उस की क्लासेज जौइन करें. इस से आप बोर भी नहीं होंगी और कुछ नया भी सीखेंगी. भविष्य में यह आप के काम आएगा. खाली समय का सदुपयोग करने वालों की ही जीत होती है.

Winter Special: जीरो फिगर की दीवानगी

हर कोई हीरो बनना चाहता है जीरो नहीं, लेकिन जब बात परफैक्ट बौडी फिगर की आती है, तो युवाओं में जीरो साइज बौडी फिगर का जबरदस्त क्रेज दिखाई देता है जहां हर युवक रितिक रोशन जैसा दिखना चाहता है और हर युवती करीना जैसी परफैक्ट फिगर पाना चाहती है और चाहे भी क्यों न भला, आखिर परफैक्ट बौडी पर ही तो हर पोशाक जंचती है.

दुनिया से साइज जीरो फिगर का परिचय पहली बार 1966 में ब्रिटिश मौडल ट्वीगी ने कराया था. भारत में जीरो साइज फिगर को युवाओं के बीच पौपुलर किया प्रसिद्ध अभिनेत्री करीना कपूर ने. फिल्म ‘रिफ्यूजी’ की 65 किलोग्राम की करीना ने जब फिल्म ‘टशन’ के लिए अपना वजन घटा कर 49 किलोग्राम किया, तो देशभर के युवा उन की जीरो साइज सैक्सी फिगर के दीवाने हो गए.

30-22-32 की जीरो फिगर में पतली कमर न केवल खूबसूरती का आईना होती है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहतर होती है, क्योंकि मोटापा या बेडौल शरीर ब्लड प्रैशर, शुगर, थायराइड, हार्ट संबंधी अनेक गंभीर बीमारियों को न्योता देता है. टीवी, पत्रपत्रिकाओं, फिल्मों में दिखते जीरो साइज मौडल भी युवाओं को जीरो साइज बौडी पाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. जीरो साइज के दीवाने युवा डाइट कंट्रोल कर के जिम जौइन कर तरहतरह की सर्जरी करवा कर जीरो साइज पाने की रेस में खड़े हैं.

वे हर रोज सुबह उठ कर अपना वजन नापते हैं और इंचीटेप से कमर का नाप लेते हैं. उन का एकमात्र ध्येय होता है, जीरो साइज फिगर पाना. फिर चाहे उस के लिए उन्हें कुछ भी क्यों न करना पड़े.

छोटे परदे पर साइज जीरो का जनून

साइज जीरो वाली पतली कमर व परफैक्ट फिगर वाली छोटी परदे की सभी नाजुक बालाएं मानती हैं कि साइज जीरो यानी ब्यूटी व अट्रैक्शन और इसी सोच के आधार पर आज सभी हौलीवुड बालाएं जीरो फिगर के फंडे को अपना रही हैं. फिर चाहे वे ‘एक हजारों में मेरी बहना हो’ की क्रिस्टल डिसूजा हों, ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ की सनाया ईरानी हों, ‘सास बिना ससुराल’ की ऐश्वर्या सखूजा हों, ‘उतरन’ की टीना दत्ता हों या फिर ‘बालिका वधू’ की प्रत्यूषा बनर्जी हों.

गैजेट्स भी भुना रहे हैं जीरो फिगर ट्रैंड को

जीरो फिगर की दीवानगी अब लैपटौप में साफ दिखाई दे रही है. हाल ही में सोनी कंपनी ने अपना अल्ट्रा स्लिम लैपटौप ‘वायो ऐक्स’ लौंच किया, जिसे बौलीवुड की जीरो फिगर ब्यूटी करीना ने प्रमोट किया.

करीना कपूर की जीरो साइज फिगर में रुजुता दिवाकर का योगदान

करीना कपूर को जीरो साइज फिगर दिलाने में करीना की डाइटीशियन रुजुता का बहुत बड़ा यो गदान था. रुजुता मानती हैं कि जीरो साइज फिगर पाने के लिए मुख्य 4 बातों पर ध्यान देना चाहिए. 1. सुबह उठने के बाद चाय या कौफी बिलकुल न लें, बल्कि 10-15 मिनट के भीतर कुछ फल खाएं या हैल्दी स्नैक्स लें. 2. दिनभर में हर 2 घंटे के अंतराल पर कुछ न कुछ थोड़ाथोड़ा खाएं. यानी दिनभर में 8-9 बार कुछ न कुछ खाएं. 3. भोजन की मात्रा आप की कार्यक्षमता यानी आप दिन भर में कितनी कैलोरी बर्न करते हैं, इस बात पर निर्भर करती है. 4. रात का भोजन सोने से 2 घंटे पहले कर लें. दिन भर के खाने में एक सेब, अंडे की सफेदी, दूध, चीज, स्लाइस, मुट्ठी भर मेवे अवश्य शामिल करें. दिनभर में 5 लिटर पानी पीएं. इस से आप की त्वचा पर चमक आएगी. वजन कम करने के लिए रोजाना 45 मिनट तक ऐक्सरसाइज व जौगिंग करें व अच्छी नींद लें.

जीरो फिगर बौडी पाने की राह में डाइट की भूमिका

डाइटीशियन गीतू अमरनानी कहती हैं, आजकल युवाओं में जीरो फिगर बौडी पाने का जबरदस्त क्रेज है. जीरो फिगर बौडी पाने के लिए डाइट का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. कुछ युवा जीरो फिगर बौडी पाने के लिए भूखे रह कर अपने शरीर के साथ खिलवाड़ करते हैं, जो एकदम गलत है. जीरो फिगर बौडी के लिए आप का डाइट प्लान ऐसा होना चाहिए जिस में सभी जरूरी पोषक तत्त्व मसलन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल या जरूरी फैट हों. डाइट प्लान आप के वजन व हाइट के अनुसार होना चाहिए.

वजन कम करने के लिए केवल डाइटिंग के बजाय ऐक्सरसाइज को भी शामिल करें. ज्यादा डाइटिंग से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हारमोन बढ़ जाते हैं और आप सामान्य से ज्यादा खाना खाने लगते हैं. डाइट में अनाज, फल, सब्जियां शामिल करें. इस से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी व मैडिकल जटिलताएं भी नहीं होंगी.

खाने में जंकफूड से दूर रहें. आप की डाइट ऐसी हो जो आप के स्वास्थ्य के लिए भी सही हो. जीरो साइज फिगर पाने के लिए ऐसी डाइट लें जो आप के शरीर को ताकत दे. खाने में हाईफाइबर चीजें शामिल करें. इस से शरीर का मैटाबौलिज्म रेट बढ़ने के साथसाथ कैलोरी जल्दी घटने में भी मदद मिलती है. डाइट में सूप, सलाद, नारियल पानी व ग्रीन टी शामिल करें. खाने में छोटा या रैगुलर साइज चुनें. खाना धीरेधीरे खाएं. हर कौर को 20 सैकंड तक चबाएं. इस से पाचनशक्ति बढ़ेगी और आप को मनचाही फिगर पाने में मदद भी मिलेगी.

ऐक्सरसाइज को न करें नजरअंदाज

‘‘अगर आप जीरो फिगर बौडी पाना चाहते हैं तो आप को डाइट के साथसाथ अपने ऐक्सरसाइज शैड्यूल पर भी ध्यान देना होगा,’’ यह कहना है कृष्णा नगर, दिल्ली के रिदम जिम की संचालिका पूजा का. पूजा बताती हैं, ‘‘एक रात में जीरो फिगर बौडी पाना असंभव है, लेकिन सही डाइट प्लान व नियमित ऐक्सरसाइज द्वारा आप जीरो साइज बौडी अवश्य पा सकते हैं. शरीर के ऊपरी हिस्से से वजन कम करने के लिए पुशअप करें, शोल्डर प्रैस से शरीर सुडौल बनता है व कमर पतली तथा शरीर स्ट्रीमलाइंड बनता है. पेट के निचले हिस्से से फैट कम करने के लिए एब्डौमिनल क्रंच करें. इस के अलावा टे्रडमिल व स्टेपिंग मशीन का प्रयोग कर के भी आप परफैक्ट जीरो बौडी फिगर पा सकते हैं.’’

पूजा बताती हैं कि जीरो फिगर बौडी पाने की चाह में वजन एकदम से न घटाएं. इस से त्वचा ढीली हो कर लटक सकती है, जबकि सही तरीके से वजन घटाने व डाइट लेने से मसल्स मजबूत व बौडी शेप में आ जाती है. व्यायाम शरीर की जरूरत व क्षमता के अनुसार करें. ऐक्सरसाइज के दौरान सिप कर के कुनकुना पानी पीना न भूलें, ताकि पसीने के रूप में निकलने वाले तरल पदार्थों की पूर्ति हो सके. वर्कआउट के साथ मनचाहा खाना खाने का लाइसैंस न लें. सही डाइट व रैगुलर वर्कआउट से आप मनचाही फिगर पा सकते हैं. वर्कआउट अपने वजन, लंबाई, आयु, दिनभर की गतिविधियां मैटाबौलिक रेट, डाइट व जीवनशैली के अनुसार करें. कोई भी ऐक्सरसाइज करने से पहले ऐक्सपर्ट की राय अवश्य लें.

पूजा कहती हैं, ‘‘जीरो साइज में बुराई नहीं है, लेकिन जीरो साइज फिगर के लिए हैल्थ के साथ खिलवाड़ न करें. जीरो फिगर पाने के लिए क्रैश डाइट व ऐक्सरसाइज के गलत तरीकों को अपना कर शरीर के साथ खिलवाड़ न करें. खूबसूरती व परफैक्ट फिगर के साथसाथ हैल्थ को भी पूरा महत्त्व दें.’’

जीरो फिगर स्टार अभिनेता- अभिनेत्रियां

सोनम कपूर : आप को यह जान कर हैरानी होगी कि आज की जीरो फिगर सोनम कपूर का वजन किसी समय 86 किलो था. सोनम कपूर अपनी डाइट में पेयपदार्थों को भरपूर शामिल करती हैं. वे हर 1-2 घंटे में नारियल पानी पीती हैं. इस के अलावा वे खीरे का रस व छाछ भी खूब पीती हैं. सोनम चीनी व नमक सोचसमझ कर ही लेती हैं.

प्रतीक बब्बर : ‘‘अगर आप फिट नहीं हैं, तो जिंदगी में कुछ भी ऐंजौय नहीं कर सकते.’’ प्रतीक का मानना है कि हर किसी को रैगुलर वर्कआउट करना चाहिए. प्रतीक की फेवरेट परफैक्ट बौडी फिगर में मेल सैलेब्रिटी हग जैकमैन व रितिक रोशन हैं जबकि फीमेल सैलेब्रिटी मेगन फौक्स व प्रियंका चोपड़ा हैं.

करीना कपूर : जीरो फिगर की सिंबल करीना के अनुसार, ‘‘सैक्सी नहीं है मोटापा. भला मोटी हो कर कोई हौट कैसी लगेगी. अच्छी फिगर हर फीमेल का सपना होता है. बौडी के फैट डिपौजिट्स पर गर्व भला कैसे किया जा सकता है.’’

कैटरीना कैफ : हाल ही में कैट ने धूम-3 में मिस्टर परफैक्शनिस्ट आमिर खान को टक्कर देने के लिए 2 महीने में 5 किलोग्राम  वजन कम कर के स्वयं को स्लिम व स्किनी टीम में शामिल कर लिया है.

वजन घटाने में मददगार जीरो नूडल्स

‘डेली मेल’ की एक खबर के अनुसार जापान में वजन घटाने में मददगार जीरो नूडल्स पेश किए गए हैं. ये जीरो नूडल्स एशियन ग्राउंड रूट कौंजेक और 96 प्रतिशत पानी से तैयार किए गए हैं. इन के निर्माताओं का दावा है कि ये नूडल्स न केवल कैलोरी की मात्रा कम करेंगे बल्कि आप के दिमाग को सोचने के लिए भी प्रेरित करेंगे कि आप ने पेट भर भोजन कर लिया है.

हाल ही में इसराईल सरकार ने अल्ट्रास्लिम होने से जुड़े तमाम रिस्क देखते हुए एक कानून द्वारा मौडल पर बैन लगा दिया है. कानून के अनुसार, मौडल को मौडलिंग करने के लिए सही बीएमआई मैंटेन करना होगा. मौडल को अपनी मैडिकल रिपोर्ट में प्रूव करना होगा कि वह हैल्दी है और अंडरवेट नहीं अर्थात उस का बीएमआई 18.5 से कम नहीं है. ऐसा कानून बनाने वाला इसराईल दुनिया का पहला देश है. 

ये 4 आदतें बढ़ाती हैं आपका मोटापा

अपने चारों ओर मोटापा या मोटे लोगों को देखना एक सामान्य बात है, पर मोटापा कोई आम बात नहीं है बल्कि यह एक बीमारी का नाम है जिसे नियंत्रण में करना और रखना बहुत ही मुश्किल है. मोटापे के लिए कौन जिम्मेदार है. आप स्वयं ही इस बामारी के लिए उत्तरदीयी होते हैं.

यूं तो मोटापे के कई कारण होता हैं. जंक फ़ूड, अनियमित भोजन, तनाव, पूरी नींद न ले पाना आदि वजन को बढ़ाने के कारण होते हैं. मोटापे के कारण शरीर को कई अन्य बीमारियाँ घेर लेती हैं. आप जानते हैं कि मोटापा कई बीमारियों की जड़ होता है, आज हम आपको बताएंगे मोटापे के बढने के कारण .

कई लोग मोटे होने के बाद सोचते हैं कि कल से अपनी डाइटिंग और एक्सरसाइज शुरुआत कर देंगे, लेकिन सभी में कुछ गंदी आदते होती हैं जो कि आपको पतला नहीं होने देती. यदि आप अपने खाने-पीने पर कंट्रोल नहीं करते तो आप भले ही कितनी भी कोशिश कर लें, मोटापा कम नहीं कर सकेगें.

अगर आप मोटापा कम करना चाहते हैं, तो आपको अपनी कुछ आदतों को सुधारना चाहिए. यहां हैं कुछ गंदी आदते जिन्हें सुधार कर आप मोटापे से बच सकते हैं..

1. अधिक मीठा खाना

अगर नाश्ते की बात करें तो पैक्ड दही, चाय या कॉफी हर चीज में आपको शुगर या मीठे की मात्रा मिल ही जाती है. जो आपके शरीर में इकट्ठा होकर चर्बी का रूप धारण कर लेती है, इसलिए जब भी आप बाजार जाएं तो कुछ भी खरीदने से पहले उसमें उसका शुगर लेवल चेक कर लें.

2. रोज मिठाई का सेवन

आज के समय में कुछ लोगों को मीठा खाने की इतनी आदत पड़ चुकी है कि वे खाने के बाद मीठा जरूर खाते हैं. किसी-किसी डेजर्ट में काफी अधिक मात्रा में शुगर होती है जिसे रात में खाने से मोटापा तेजी से बढ़ता है .

3. हर समय खाते रहना

कुछ लोग फ्री टाइम में या अपने ऑफिस में बैठकर कुछ न कुछ खाते ही रहते हैं. ऐसी आदतों के चलते आप कभी पतले नहीं हो सकेंगे.यदि आप पैकिट में बंद स्नेक्स वगैरह लेते हैं तो उनमें काफी मात्रा में सोडियम, कार्बोहाइड्रेट और शुगर होता है, जो मोटापा बढ़ाने में मददगार होता है. अगर आप स्नैक्स ही खाना चाहते हैं तो घर पर बने हुए फाइबर युक्त आहार का सेवन करें.

दिनभर मुंह में कुछ लेकर चबाते रहना भी एक बहुत ही गंदी आदत होती है. ये आपको मोटापे को और अधिक बढ़ाती है.

4. रोजाना शराब की आदत

जो लोग डिनर के साथ में शराब भी लेते हैं उनके पेट में सीधे तौर पर शक्कर जाती है, जो उन्हें चाहकर भी पतला नहीं होने देती. यदि आप अपनी आदत को थोड़ा काबू में कर लेंगे तो कुछ ही दिनों में आप अपना वजन कम कर सकते हैं.

व्यायाम न करना

अपने शरीर से लगातार काम लेते रहिए. अगर आप अपने शरीर से लगातार काम नहीं लेतो हैं और खाना खाने के बाद लेटे ही रहते हैं, तो आप कभी भी पतले नहीं हो पाएंगे. मोटापे को घटाने के लिए शरीर का वर्कआउट करना जरुरी है. शरीर से रोज खूब सरा पसीना बहाने पर आपका फेट अपने आप कम हो जाता है.

कैसे रखें खुद का खयाल

दिल्ली, मुंबई समेत देश के 7 बड़े शहरों में किए गए एक सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. ‘द इंडियन वूमन हैल्थ-2021’ की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 67 फीसदी महिलाएं अपनी सेहत से जुड़ी समस्याओं के बारे में बात करने से हिचकती हैं. उन का कहना है कि हमारे स्वास्थ्य के बारे में बात करना समाज में वर्जित माना जाता है.

देश में कामकाजी महिलाओं की सेहत ठीक नहीं है. आधी से अधिक महिलाओं को काम के साथ स्वयं को स्वस्थ रखना चुनौती साबित हो रहा है. महिलाएं लगातार काम करने और अपने दायित्वों का पालन करते हुए खुद की सेहत को दरकिनार करती हैं.

‘द इंडियन वूमन हैल्थ-2021’ की इस रिपोर्ट के अनुसार 22 से 55 की उम्र की 59 फीसदी कामकाजी महिलाएं सेहत से संबंधित समस्याओं के कारण नौकरी छोड़ देती हैं. 90 फीसदी महिलाओं को पारिवारिक दायित्वों के कारण दिक्कत होती है.

52 फीसदी महिलाओं के पास नौकरी, पारिवारिक दायित्वों के साथ स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए समय नहीं होता है. रिपोर्ट के अनुसार देश में महिलाएं कार्यस्थल पर सेहत से जुड़ी समस्याओं, पीरियड्स, ब्रैस्ट कैंसर, गर्भाशय समेत तमाम समस्याओं पर बात करने से हिचकती हैं. उन का कहना है कि जब हमारी सेहत की बात आती है तो 80 फीसदी पुरुष सहयोगी संवेदनशील नहीं होते हैं.

चौंकाने वाले परिणाम

देश में प्रत्येक 4 में से 3 नौकरीपेशा महिलाओं का स्वास्थ्य घरदफ्तर की भागदौड़ और उन के बीच संतुलन साधने में कहीं न कहीं कमजोर पड़ जाता है. एसोचैम के एक सर्वेक्षण में यह परिणाम सामने आया है कि दफ्तर का काम, बच्चों और घर की देखभाल की वजह से बने दबाव के चलते उन की दिनचर्या काफी व्यस्त रहती है और समय के साथ कई लंबी और गंभीर बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं.

सर्वेक्षण में पाया गया कि 32 से 58 साल की आयु के बीच की तीनचौथाई कामकाजी महिलाएं अपनी कठिन जीवनशैली के कारण लंबी तथा गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाती हैं. उन्हें मोटापा, थकान, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, पीठ दर्द और उच्च कोलैस्ट्रौल जैसी बीमारियां घेर लेती हैं.

इस सर्वे के अनुसार कामकाजी महिलाओं में दिल की बीमारी का जोखिम भी तेजी से बढ़ रहा है. 60% महिलाओं को 35 साल की उम्र तक दिल की बीमारी होने का खतरा रहता है. 32 से 58 साल की उम्र की महिलाओं के बीच हुए इस सर्वे के अनुसार 83% महिलाएं किसी तरह का व्यायाम नहीं करतीं और 57% महिलाएं खाने में फलसब्जी का कम उपयोग करती हैं.

युवा लड़कियां जो इन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम होती हैं उन पर भी बाद में इस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं में घिर जाने का खतरा बना रहता है. सर्वेक्षण में शामिल महिलाओं में 22% पुरानी लंबी बीमारी से ग्रस्त बताई गईं जबकि 14% गंभीर बीमारी से पीडि़त बताई गईं. एसोचैम का यह सर्वेक्षण अहमदाबाद, बैंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, एनसीआर, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और पुणे में 32 से 58 साल की 2,800 महिलाओं पर किया गया. ये महिलाएं 11 विभिन्न क्षेत्रों की 120 कंपनियों में कार्यरत हैं.

अतिरिक्त तनाव और दबाव

महिलाओं पर अच्छा अभिभावक, अच्छी मां बनने का काफी दबाव रहता है और यह उन के तनाव का कारण भी बनता है. महिलाएं सुबह से शाम तक भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बार डाक्टर के पास भी नहीं जा पाती हैं.

एसोचैम द्वारा किए गए एक सर्वे से पता चलता है कि मां बनने के बाद कई महिलाएं नौकरी छोड़ देती हैं. सर्वे के मुताबिक 40% महिलाएं अपने बच्चों को पालने के लिए यह फैसला लेती हैं.

खुद की परवाह छोड़ कर मां जीती है बच्चे के लिए. बच्चे के जन्म से पहले ही मां अपने बच्चे का खयाल रखना शुरू कर देती है. जब बच्चा पेट में होता है तो हर मां ऐसी चीजें खाने से बचती हैं जिन से बच्चे की सेहत पर गलत असर हो. अपनी पसंद की चीजों को छोड़ कर हमेशा अच्छी चीजें ही खाती हैं ताकि बच्चे की हैल्थ अच्छी रहे.

फिर बच्चों के बड़े होने तक हर मां अपने बच्चों और घर के दूसरे सदस्यों के भी खानपान और सेहत का पूरा खयाल रखती हैं और इस कारण वे अपनी सेहत पर बिलकुल ध्यान नहीं दे पातीं. सेहत पर ध्यान न दे पाने से समय के साथसाथ कुछ बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है. ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं अपनी सेहत पर भी ध्यान दें.

याद रखिए आज बच्चे और परिवार आप की प्राथमिकता हैं, मगर बहुत जल्द वह समय आएगा जब बच्चे अपनी पढ़ाई या नौकरी के लिए दूर चले जाएंगे. यही नहीं शादी के बाद उन का अपना परिवार होगा और हो सकता है वे किसी और शहर या दूसरे देश में सैटल हो जाएं. ऐसे में आप को अपना संबल खुद बनना है. आप का जीवनसाथी आप के साथ होगा, मगर उन की देखभाल भी आप तभी कर सकती हैं जब खुद स्वस्थ रहें. बच्चे आप के ऊपर तभी तक निर्भर होते हैं जब तक वे बड़े नहीं हो जाते. उस के बाद आप को बाकी के 20-30 साल अकेले अपने बल पर ही बिताने हैं.

इस के लिए आप का शारीरिक और मानसिक रूप से हैल्दी रहना जरूरी है वरना आप दूसरों पर बोझ बन कर रह जाएंगी.

अपनी सेहत को इग्नोर न करें

बदलते वक्त ने महिलाओं को आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया है और उन की हैसियत एवं सम्मान में भी वृद्धि हुई है. अकसर यह देखा गया है कि जब महिलाएं घर, परिवार और कार्यस्थल हर जगह अपना दायित्व का पालन करती हैं उस वक्त वे अपनी सेहत पर बिलकुल ध्यान नहीं दे पाती हैं. जब परेशानी हद से ज्यादा बढ़ जाती है तब वे अपनी सेहत की जांच करवाती हैं. अत: बेहतर है कि वे समय रहते खुद का खयाल रखें.

समयसमय पर मैडिकल टैस्ट

घर के काम, बच्चों की जिम्मेदारियां, घरगृहस्थी और औफिस की टैंशन आदि के कारण महिला की सेहत पर गलत असर होता है और समय के साथ कई बीमारियां जन्म ले लेती हैं. इन बीमारियों से बचने का सब से अच्छा तरीका यह है कि समयसमय पर अपने कुछ मैडिकल टैस्ट कराए जाएं और डाक्टर को दिखाएं. अगर रिपोर्ट में कुछ गलत निकलता है तो डाक्टर समय रहते सही इलाज करेंगे जिस से बीमारी पर काबू पाया जा सकता है. मैमोग्राम, थायराइड, पैप स्मीयर, डायबिटीज, ब्लड प्रैशर आदि मैडिकल टैस्ट समयसमय कराती रहें.

खानपान का रखें ध्यान

सुबह जल्दी उठने से रात देर से सोने तक एक महिलाएं दिनभर घर के काम करने और अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में ही लगी रहती हैं. ऐसे में वे अपने खानपान पर ध्यान नहीं दे पातीं. कई बार तो वे खाली पेट रह कर भी घर के कामों में लगी रहती हैं. लेकिन ऐसा करना काफी गलत होता है. इसलिए खयाल रखें और रोजाना खाना समय पर व पौष्टिक लें. अपनी डाइट में फाइबर, प्रोटीन, फ्रूट्स, फल और सब्जियां भी शामिल करें.

फिजिकल ऐक्टिविटी

दिनभर घर के काम करने से आप की फिजिकल ऐक्टिविटी काफी हो जाती है. लेकिन इस के दूसरी ओर इन कामों से मानसिक थकान भी हो सकती है. इसलिए अपनी दिनचर्या में कुछ फन ऐक्टिविटीज डालने की भी कोशिश करें. ऐसा करने से आप का मूड सही रहेगा और फिजिकल ऐक्टिविटी भी हो जाएगी. आप समय निकाल कर गार्डनिंग कर सकती हैं, पार्क में घूमने जा सकती हैं, सहेलियों से मुलाकात कर सकती हैं.

आराम की भी है जरूरत

जैसेजैसे उम्र बढ़ती जाती है वैसेवैसे शरीर को अधिक आराम की जरूरत होती है. सुबह जल्दी उठने और रात देर से सोने के कारण कई बार नींद पूरी नहीं हो पाती होगी. इसलिए कोशिश करें कि आप कम से कम 8-9 घंटे की नींद जरूर लें. अगर किसी कारण से रात में पूरी नींद नहीं हो पाती तो दिन में भी 2-3 घंटे की नींद ले सकती हैं. ऐसा करने से थकान को दूर करने में मदद मिलेगी.

दूसरों से मदद लें

बच्चा छोटा होता है तो उस के काम बहुत ज्यादा होते हैं. बड़े होने के बाद भी एक मां के लिए बच्चे के सारे काम खुद संभालना कठिन होता है. इसी वजह से उसे अपने बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलता. इसीलिए जरूरी है कि आप घर के दूसरे सदस्यों की मदद लें ताकि अपने लिए थोड़ा समय बचा पाएं. अगर आप नईनई मां बनी हैं तो आप को अपना और ज्यादा खयाल रखना चाहिए. ऐसे में आप को बेहतर स्वास्थ्य के लिए चीजों को आसान बनाने की आवश्यकता है. आप पार्ट टाइम या फुलटाइम मदद के लिए घर में नौकर लगा लें. चाहें तो मदद के लिए मातापिता या सासससुर को बुला लें.

जिन घरों में पति या अन्य परिजन कामकाज में हाथ बंटाते हैं वहां महिलाओं का स्वास्थ्य अपेक्षाकृत बेहतर पाया जाता है. स्वस्थ महिला स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज का निर्माण करती है, इसलिए महिलाओं को तनावमुक्त और काम के बोझ से मुक्त रखना परिवार की जिम्मेदारी है.

तो शादी में रहेंगी फिट ऐंड फाइन

अपवाद को छोड़ दें तो हर युवक या युवती को अपने पूरे जीवन में दूल्हा या दुलहन बनने का मौका केवल एक बार ही मिलता है. इस मौके पर अधिकांश युवक वरुण धवन या आदित्य धर की तरह स्मार्ट ऐंड यंग और युवतियां यामी गौतम की तरह ब्यूटीफुल दिखना चाहती हैं.

शादी के मौके पर, शादी के आयोजन का सारा जिम्मा तो परिवार वालों का ही होता है. दूल्हादुलहन के जिम्मे तो केवल शादी के समारोह के समय अपने लिए परिधान चुनना, करीबी दोस्तों को इस समारोह में शिरकत के लिए आमंत्रण देना और खुद की फिटनैस की बात सोचना ही होता है.

इस मौके पर ज्यादातर युवकयुवतियां खुद को संवारने के लिए फिटनैस हासिल करने में जुट जाते हैं. फिटनैस हासिल करने के लिए इन दिनों उन्हें जम कर मेहनत करनी होती है.

संतुलित आहार और नियमित व्यायाम

स्वराज की शादी तो तय हो गई है, लेकिन उस की शादी 2 माह बाद होगी. इस अल्पाअवधि में ही स्वराज अपनी काया में ऐसा सुधार चाहता है कि लोग उस की ससुराल वालों को कहें कि लड़का तो आप ने पढ़ालिखा तो चुना ही है, खूबसूरत भी बहुत है.

अपनों और दूसरों से अपने व्यक्तित्व की प्रशंसा पाने के लिए स्वराज ने जिम जौइन कर लिया है. वहां वह जम कर पसीना बहाता है.

स्वराज से यह सवाल करने पर कि अपनी देहकाया संवारने की बात उस ने पहले क्यों नहीं सोची, शादी के समय ही फिट बौडी की याद कैसे आई? जवाब में उस ने कहा, ‘‘मु?ो अपने दोस्त गौतम की शादी की घटना याद है. मेरे दोस्त के फेरों के समय उस की होने वाली पत्नी प्रिया की बहुत सारी सहेलियां फुसफुसा रही थीं कि प्रिया के परिवार वालों ने लड़के का सिर्फ पद और परिवार ही देखा. यह लड़का तो प्रिया का जोड़ीदार कम अंकल ज्यादा दिख रहा है. प्रिया के परिवार वालों ने काश प्रिया के लिए ढंग का लड़का देखा होता. यह जोड़ी तो बिलकुल नहीं जम रही है.

‘‘सो जनाब, मु?ो और मेरी पत्नी को ले कर अगर कोई यह कहे कि यह जोड़ी तो जरा भी नहीं जम रही तो मैं यह बिलकुल नहीं सुनना चाहता. मु?ो पूरा भरोसा है अपनी शादी से पहले फिजिकली में ऐसी फिटनैस पा लूंगा कि लोग कहें कि वाह क्या शानदार जोड़ी है. जितनी सुंदर बेगम उतना ही खूबसूरत बादशाह.’’

केवल युवक ही नहीं, शादी से पूर्व युवतियां भी फिट बौडी पाने के लिए जी तोड़ मेहनत करती हैं.

स्मृति पेशे से ज्वैलरी डिजाइनर है. अपने इस काम की वजह से उसे कई घंटों तक एक ही जगह बैठ कर काम करना पड़ता है, इसलिए वह कुछ ओवर वेट हो गईर् है.

स्मृति सोचती है कि शादी के बाद हनीमून पर निकलने के समय उस के वेट की वजह से कोई उसे अपने पार्टनर की दीदी या आंटी न समझ ले, इसलिए वह अपनी शादी सी पहले नियमित जिम जा रही हैं और इस बात से काफी खुश है कि संतुलित आहार और नियमित व्यायाम की बदौलत अब वह पहले के मुकाबले कमउम्र वाली और ताजा दम भी लग रही है.

जिम जौयन करने की जरूरत क्यों

इस सवाल के जवाब में मधु का कहना है, ‘‘प्रत्येक युवती की बौडी शेप अलगअलग होती है. किसी युवती को अपनी ब्रैस्ट शैप तो किसी को अपनी थाइज और हिप्स को ले कर प्रौब्लम होती है. इस प्रौब्लम का समाधान केवल नियंत्रित आहार, डाइटिंग या खुद अपनी मरजी से ऐक्सरसाइज करने से नहीं हो सकता. मैं जिस जिम में जाती हूं वहां लेडी इंस्ट्रक्टर भी है तो साथ में डाइटिशियन भी. इस्ट्रक्टर की मदद से जहां प्रभावित भाग को संवारने में मदद मिलती है, वहीं डाइटिशियन की मदद से संतुलित व पौष्टिक आहार लेने की गाइडैंस मिलती रहती है.’’

रत्ना के पास जिम जाने, देह संवारने के लिए वक्त नहीं है, सो उस ने अपने घर पर ही ट्रेडमिल मशीन मंगा ली है. ट्रेडमिल मशीन के माध्यम से वह अपने घर पर ही लंबी सैर का लाभ लेने की कोशिश में लगी रहती है.

विवाहपूर्व संवरने का लाभ आज भी है

विवाहपूर्व संवरने का लाभ शादी के मौके पर तो मिलता ही है, 10-20 साल बाद जब आप अपनी शादी का वीडियो देखते हैं तो एक सुखद एहसास भी होता है. तब मर्द सोचता है कि कितना स्मार्ट था वह उन दिनों. तब कितने घने बाल थे सिर पर. तब न तो वह तोंदियल था और न ही आंखों पर आज की तरह मोटा चश्मा चढ़ा था.

महिलाएं सोचती हैं कैसी सुकुमारी सी थी वह तब. जो देखता था बस देखता ही रह जाता था. इसीलिए व्यायाम की आदत हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा होनी ही चाहिए. किसी कारणवश पहले भी शादी के समय यह आदत जरूर बना लेनी चाहिए और शादी के बाद उन्हें अपने से छोटे भाईबहनों को फिटनैस के गुण समझते हुए, ऐक्सरसाइज करने के लिए उत्साहित करते रहना चाहिए ताकि शादी के समय उन्हें  फिटनैस के लिए अधिक मेहनत करने की जरूरत ही न पड़े.

बढ़ते वजन से हैं परेशान

अकसर कोई अपने बढ़ते वजन को ले कर परेशान रहता है तो कोई अपने दुबलेपन के कारण. उन की समझ में नहीं आता कि उन का आहार कैसा हो. अगर आप के समक्ष भी यह परेशानी है तो परेशान न हों. इस संबंध में डाइटीशियन श्रेया कत्याल से की गई बातचीत पर गौर फरमाएं:

आहार का मतलब क्या है?

आहार का मतलब भोजन का स्वस्थ तरीका है, जिस में सभी पोषक तत्त्व मौजूद हों.

अच्छा भोजन व बुरा भोजन क्या है?

भोजन अच्छाबुरा नहीं होता है. हम कैसे, कब, क्या और कितना खाते हैं, वह उसे अच्छा या बुरा बनाता है. इसलिए व्यक्ति को सब कुछ खाना चाहिए, परंतु कम मात्रा में. खानेपीने की इच्छा का दमन करना शरीर से धोखा करना है.

स्वस्थ तरीके से इंसान 1 महीने में कितना वजन कम कर सकता है?

यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है. स्वस्थ तरीके से 1 महीने में औसतन कम से कम 3-4 किलोग्राम तक (1 किलोग्राम प्रति हफ्ते) वजन कम किया जा सकता है और ज्यादा से ज्यादा 8 किलोग्राम तक. वजन में कमी के साथसाथ जीवनशैली में परिवर्तन भी जरूरी होता है.

क्या स्वस्थ आहारशैली छोड़ने के बाद वजन फिर बढ़ जाएगा?

स्वस्थ तरीके से वजन में कमी लाने पर यह स्थिति आहार में परिवर्तन के बाद भी बनी रहती है. बावजूद इस के वजन में कमी तभी बनी रह सकती है, जब आप का ध्येय जीवनशैली में परिवर्तन हो. इसलिए जब आप एक बार आहार प्रबंधन के साथ सकारात्मक तौर पर जीवनशैली में परिवर्तन कर लेते हैं, तो आहारशैली से हटने के बावजूद आप अपनी यथास्थिति बनाए रख सकते हैं.

क्या आप वजन कम करने के लिए किसी खुराक, दवा आदि की सलाह देती हैं?

मैं वजन कम करने के लिए खुराक, दवा या किसी कृत्रिम तरीके पर भरोसा नहीं करती, क्योंकि लंबे अंतराल में इन चीजों के दुष्परिणाम सामने आते हैं.

ब्लड ग्रुप आधारित आहारशैली कितनी प्रभावी है और आप किस आधार पर आहार योजना तैयार करती हैं?

ए ब्लड ग्रुप आधारित आहारशैली एक सीमा तक ही सफल है. यह 100% सफल नहीं होती. यह प्रभावी तो है और इस के सकारात्मक परिणाम भी दिखते हैं, परंतु यह सभी लोगों पर पूरी तरह लागू नहीं की जा सकती. लोगों के लिए आहार योजना तैयार करते वक्त मैं उन के ब्लड ग्रुप को ध्यान में तो रखती हूं, परंतु वह पूरी तरह ब्लड ग्रुप पर आधारित नहीं होती. व्यक्ति विशेष की पसंदनापसंद व प्राथमिकता, दिनचर्या, जीवनशैली आदि आहार योजना बनाते वक्त अहम भूमिका निभाते हैं.

आमतौर पर यह कहा जाता है कि परहेज वाली आहारशैली के पश्चात त्वचा निष्प्रभाव हो जाती है. इस में कितनी सचाई है?

आहार योजना का पालन सिर्फ अतिरिक्त कैलोरी को खत्म करने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि आप की संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है. संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए पोषक तत्त्वों की सही खुराक लेना सुनिश्चित करने के लिए पूरे दिन के दौरान 5-6 बार भोजन करने की योजना तैयार की जाती है ताकि चयापचय प्रक्रिया मजबूत हो सके और आप ज्यादा ऊर्जावान महसूस कर सकें. स्वस्थ वसा को आप के आहार में शामिल किया जाता है तथा अस्वास्थ्यकर वसा को हटाया जाता है.

वजन कम करने के लिए क्या मिठाई खाना छोड़ना जरूरी है?

मिठाई पसंद करने वालों के लिए मेरा उत्तर न में है. हम एक निश्चित अंतराल के लिए आहार योजना का पालन कर सकते हैं और अपने पसंदीदा व्यंजन को हमेशा के लिए नहीं छोड़ सकते. इसलिए आप को जो पसंद है, खाएं परंतु सही ढंग व सही समय पर खाएं. एक वक्त के आहार के तौर पर मिठाई लें न कि खाना खाने के पश्चात मिठाई खाएं.

क्या रात्रि भोजन 8 बजे से पहले कर लेना चाहिए या फिर बगैर नमक का डिनर लेना चाहिए?

आप ने जितना वजन घटाया है, ऐसा नहीं है कि बगैर नमक का डिनर उसे हमेशा बनाए रखेगा, बल्कि त्याग किए हुए पानी के वजन को ही स्थिर रखेगा. इसलिए मैं नियमित तौर पर बगैर नमक के डिनर के पक्ष में नहीं हूं. इस के अलावा, कोई भी व्यक्ति बहुत लंबे समय तक बगैर नमक के डिनर या 8 बजे से पहले डिनर लेना जारी नहीं रख पाएगा. मैं ऐसी कोई सलाह नहीं देती, जिस पर लंबे समय तक अमल न किया जा सके. इसलिए सही वक्त पर डिनर लें ताकि डिनर व बिस्तर पर जाने के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतराल हो.

क्या आहार योजना के साथ कोई कसरत भी जरूरी है?

वजन में कमी लाने के मामले में 70% तक आहार और 30% तक कसरत की भूमिका मानी जाती है. इस के अलावा चूंकि वजन कम करने के प्रयास के दौरान जीवनशैली में परिवर्तन जरूरी होता है, इसलिए कुछ बुनियादी व्यायाम भी जरूरी हैं, क्योंकि आजकल ज्यादातर लोगों की जीवनशैली श्रमहीन हो चुकी है. व्यायाम हमारी चयापचय की प्रक्रिया को सुदृढ़ करता है तथा वजन कम होने की प्रक्रिया को गति प्रदान करता है.

श्रेया कत्याल, डाइटीशियन

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