क्या आपके फ्रिज से भी आती है बदबू

फ्रिज में हम खाने-पीने की चीजों को ये सोचकर रखते हैं कि वे वहां सुरक्षित हैं लेकिन अगर फ्रिज से बदबू आने लगे तो समझ जाइए कि आपके फ्रिज में रखा सामान सुरक्षित नहीं रह गया है.

कई बार ऐसा होता है कि फ्रिज में रखी चीजों की गंध आपस में मिलकर बदबू में बदल जाती है. या अगर कुछ सड़ जाए तो भी फ्रिज से बदबू आने लगती है.

ऐसे में फ्रिज की बदबू दूर करना बहुत जरूरी हो जाता है. फ्रिज की बदबू दूर करने के लिए आप ये घरेलू उपाय अपना सकती हैं.

खाने वाला सोडा

खाने वाले सोडा को फ्रिज में एक कटोरी में रख दें. इससे फ्रिज की बदबू चली जाएगी. आप इसे स्थायी रूप से भी इस्तेमाल कर सकती हैं.

नींबू

अगर आप चाहें तो नींबू की कुछ बूंदों को एक कटोरी में पानी के साथ मिलाकर रख सकती हैं. या फिर आधे कटे नींबू को यूं भी फ्रिज में रख सकती हैं.

काफी के बीज

काफी की कुछ बीन्स को कटोरी में रखकर फ्रिज में रख दें. फ्रिज से न केवल बदबू चली जाएगी बल्कि काफी की सोंधी खुशबू भी आने लगेगी.

संतरा या पुदीना

संतरा या पुदीने का अर्क फ्रिज की बदबू को दूर करके उसे एक बहुत अच्छी खुशबू से भर देता है. इसमें बदबू सोखने की क्षमता होती है. आप जिस पानी से फ्रिज साफ करें उसमें इनके अर्क की कुछ बूंदें मिला दें. आप चाहें तो इसे कटोरी में डालकर हमेशा के लिए रख भी सकती हैं.

न्यूजपेपर

अखबार फ्रिज की बदबू को सोख लेता है. आप चाहें तो पहले से ही फ्रिज में रखी जाने वाली चीजों को पेपर से लपेट दें. अगर आप ऐसा नहीं करना चाहती हैं तो फ्रिज में पेपर का एक बंडल रख दीजिए. बदबू चली जाएगी.

बड़े काम की डिस्टैंट कजिंस से दोस्ती

‘‘अरे यार सायमी,आज फ्राइडे है. शाम को मूवी देखने चलें? आज प्रिंसिपल मैडम की  झाड़ खा कर मेरा मूड बेहद खराब हो रहा है. थोड़ा चिल करना चाहती हूं. टिकट बुक करवा लूं क्या?’’ कियारा ने अपनी फ्रैंड सायमी से कहा.

‘‘नहीं यार. आज शाम को तो मूवी बिलकुल नहीं जा पाऊंगी. शाम को अपने कजिंस के साथ मूवी देखने उन्हीं के पास जा रही हूं.’’

‘‘क्या तेरी कजिंस तु झ से इतने क्लोज हैं कि तू एक पूरी शाम उन के साथ बिताएगी? तू भी न वास्तव में विचित्र है. मौजमस्ती के लिए आउटिंग्स पर फ्रैंड्स के साथ जाया जाता है या परिवार के साथ.’’

‘‘अरे भई, मेरे ये डिस्टैंट कजिंस मेरे फ्रैंड्स ही हैं. मेरा कजिन मेरी जिंदगी का सब से फ्रैंडली और स्ट्रौंग सपोर्ट सिस्टम है. उन्हीं की वजह से मैं इस अनजान शहर में अकेले रहते हुए लाइफ के हर उतारचढ़ाव को बड़ी आसानी से फेस कर रही हूं. तू इमैजिन नहीं कर सकती, जिंदगी के हर मोड़ पर वे मेरा कितना साथ देते हैं. तू तो अभी इस स्कूल में नईनई आई है. कोई भी तो ऐसा नहीं है जिस से मन की बातें शेयर कर के जी हलका कर सकूं. हम 3 डिस्टैंट कजिंस हैं. बचपन से साथ पलेबढ़े हैं. तीनों इसी शहर में हैं. इन फैक्ट मु झे नए शहर में अकेले आने की परमिशन मिली तो वह भी मेरे इन कजिंस की वजह से ही.’’

निर्भरता खटकने लगी

‘‘मेरा परिवार बेहद रूढि़वादी और परंपरावादी है. हम जयपुर के पास खैरथल नाम के एक कसबे में संयुक्त परिवार में रहते हैं. हमारे घर के कर्ताधर्ता मेरे ताऊजी हैं. पापा का बिजनैस कोई खास नहीं चलता. उस से तो बस हम 5 सदस्यों के परिवार की दालरोटी ही बेहद मुश्किल से चल पाती है. बड़े खर्चों के लिए हमें ताऊजी का मुंह देखना पड़ता है.

‘‘जब से हम भाईबहन बड़े हुए, हर बात पर ताऊजी पर निर्भरता हमें खटकने लगी. मेरे कुछ डिस्टैंट कजिंस अपने कसबे से निकल कर यहीं जयपुर में जौब कर रहे हैं. यहां नए शहर में आने की परमीशन भी उन्हीं की वजह से मु झे मिली. पोस्ट ग्रैजुएशन के बाद मेरे लिए नितांत नए और अजनबी शहर जयपुर में नौकरी करने की इच्छा इन्हीं तीनों की वजह से पूरी हुई.’’

‘‘अच्छा. तो यह बात है.’’

‘‘बिलकुल. चल मैं आज तु झे डिस्टैंट कजिंस के साथ दोस्ती के फायदे बताती हूं.’’

तो चलिए पाठको, सायमी ने अपनी सहेली कियारा को डिस्टैंट कजिंस के साथ दोस्ती के जोजो फायदे गिनाए उन्हें आप के साथ शेयर कर रही हूं.

तनाव में कमी

गाहेबगाहे हर किसी की जिंदगी में तनाव आता ही है. कभी बड़े मसलों पर, तो कभी दैनिक जीवन के मामूली मुद्दों पर लेकिन यह कब गंभीर रूप धारण कर ले, कुछ कहा नहीं जा सकता.

तनाव के चलते आप ऐंग्जाइटी, डिप्रैशन अथवा चिड़चिड़ाहट अनुभव कर सकती हैं. लंबी अवधि तक तनाव  झेलने की वजह से आप को बहुत सारी हैल्थ प्रौब्लम्स हो सकती हैं. आप की इम्यूनिटी कम हो सकती है, आप को अनिद्रा, पाचन संबंधित शिकायतें, हृदय की समस्या, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रैशर जैसी गंभीर प्रौब्लम हो सकती है, लेकिन यदि आप के पास फ्रैंड्स के रूप में अपने कजिंस का सशक्त सपोर्ट सिस्टम है जो आप की केयर करते हैं और आप की मदद करना चाहते हैं, तो उस स्थिति में तनाव आप का कुछ नहीं बिगाड़ पाता.

समुचित सलाह

आप अपने डिस्टैंट कजिंस के सामने दोस्तों के रूप में बाहरी लोगों से अपेक्षाकृत अधिक सहजता से खुल सकते हैं. इस का कारण है कि  आप बचपन से उन से मिलते आ रहे हैं, उन के साथ इंटरैक्शन करते आ रहे हैं जिस से आप उन के साथ बिना किसी हिचक के अपनी हर तरह की परेशानियों का खुलासा कर सकते हैं और उसी सहजता से उन्हें हल करने के उन के सु झाव ग्रहण कर सकते हैं.

भावनात्मक सपोर्ट

किसी भी तरह का अपनापन भरा संबंध हमें भावनात्मक संबल देता है. परेशानी की हालत में जब कोई हमारी समस्याओं को सुनता है, हमारी फीलिंग्स को वैलिडेट करता है, हमारे साथ अच्छा व्यवहार करता है या हमारी मदद करता है तो हमें अच्छा महसूस होता है क्योंकि यह मदद हमारा ध्यान अपनी उदासी, दुख या खराब मूड से बंटा देती है.

व्यक्तिगत विकास

यदि आप के डिस्टैंट कजिंस की शख्सियत पौजिटिव है तो वे आप को अपने अनुरूप ढलने में अपरोक्ष रूप से सहायक सिद्ध हो सकते हैं. आप के सम्मुख अपने पौजिटिव व्यवहार का उदाहरण रखते हुए आप को अच्छी आदतें जैसे नियमित रूप से ऐक्सरसाइज करना, जिम जाना, स्मोकिंग या ड्रिंकिंग छोड़ना, अच्छा लाइफस्टाइल अथवा कोई हौबी अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.

अच्छे फ्रैंड्स के तौर पर वे आप को अपनेआप में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर प्रेरित कर सकते हैं. उन का प्रेरक व्यवहार आप के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी करते हुए आप को अपने लक्ष्य प्राप्त करने में सफलता के चांस बढ़ाएगा और भरोसेमंद मित्रों के तौर पर वे आप को पौजिटिविटी अपनाने का संकल्प मैंटेन करने में आप की मदद कर सकते हैं.

अपनत्व भाव

किसी के भी साथ नजदीकी दोस्ती आप के अपनत्व भाव को पोषित करने में मददगार होती है. इस की आवश्यकता मानव की भोजन आवास और सुरक्षा की मूलभूत आवश्यकताओं के बाद के पायदान पर आती है. डिस्टैंट कजिंस के रूप में एक सपोर्ट नैटवर्क आप को अपने जीवन में सुरक्षा का एहसास दिलाता है.

चुनौतियों का सामना करने में मददगार

जिंदगी में कदमकदम पर कठिन चुनौतियां आती हैं. वयस्क जीवन में ब्रेकअप अथवा डिवोर्स, किसी प्रियजन की मृत्यु, कोई बीमारी, बेरोजगारी, पारिवारिक समस्याएं आदि ऐसी चुनौतियां हैं, जिन का सामना हर इंसान को कभी न कभी करना ही पड़ता है. इन स्थितियों में डिस्टैंट कजिंस आप को न केवल इन का सफलतापूर्वक सामना करने में सहायक सिद्ध होते हैं वरन इन के प्रभाव से सफलतापूर्वक उबरने में भी मदद कर सकते हैं.

बढ़िया कंपनी

आप अपने डिस्टैंट कजिंस से गाहेबगाहे सामाजिक, पारिवारिक उत्सवों, आयोजनों और त्योहारों पर प्रारंभिक बचपन से मिलते आ रहे हैं जिस की वजह से बाहरी मित्रों, परिचितों की अपेक्षा आप उन से अपने इंटरैक्शन में बेहद सरलता से सहज अनुभव करते हैं और हर मौके पर उन की कंपनी ऐंजौय कर सकते हैं.

डिस्टैंट कजिंस से नजदीकी दोस्ताने के चलते आप को शौपिंग, मूवी, पिकनिक जैसी आउटिंग्स के लिए क्लोज दोस्त मिलते हैं, जिस के चलते आप जिंदगी को बेहतरीन ढंग से ऐंजौय कर सकते हैं और अथाह खुशियां पा सकते हैं.

अकेलापन दूर करने में सहायक

आज की आधुनिक जीवनशैली और आभासी मित्रों के प्रभाव में लोगों के अकेलेपन एवं सामाजिक आइसोलेशन में बढ़ोतरी होती जा रही है. डिस्टैंट कजिंस से इन से बचाव संभव होता है.

यहां यह बात ध्यान रखने योग्य है कि यदि आप के और आप के कजिंस के परिवारों के मध्य किसी भी तरह का विवाद, मतभेद या वैमनस्य है तो उस स्थिति में उन की ओर दोस्ती का हाथ न बढ़ाना ही उचित है.

डिस्टैंट कजिंस आप के विश्वसनीय मित्र के रूप में जिंदगी की चुनौती भरी कठिन दौड़ में आप का ताउम्र साथ निभाते हुए आप के फ्रैंड, फिलौसफर एवं गाइड की भूमिका भलीभांति निभा सकते हैं. यहां यह उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिकों ने डीएनए टैस्ट्स द्वारा पता लगाया है कि जब हम नए मित्रों को चुनते हैं, हम शायद अनजाने में डिस्टैंट रिश्तेदारों की कंपनी का चुनाव कर रहे होते हैं.

‘सैनडिएगो यूनिवर्सिटी औफ कैलिफोर्निया’ के मैडिकल जेनेटिक्स के प्रोफैसर जेम्सफाओलर कहते हैं कि एक अनऐक्सप्लेन्ड मेकैनिज्म अपने दोस्तों का चुनाव करते वक्त उन के और हमारे डीएनए में समानता के आधार पर उन्हें चुनने में हमारी मदद करता है.

इस से यह निष्कर्ष निकलता है कि औसत तौर पर हमारे और हमारे मित्रों के डीएनए में बहुत हद तक साम्यता होती है.

इस निष्कर्ष के आधार पर कहा जा सकता है कि डिस्टैंट कजिंस के साथ दोस्ती का रिश्ता बखूबी बनाया भी जा सकता है और निभाया भी तथा उन के साथ दोस्ती यकीनन बड़े काम की साबित हो सकती है.

तलाक का दंश पड़ने ना दे भारी

आजकल एक ऐसी माँ बहुत चर्चा में है जिसने अपने 4 साल के बेटे को ही मौत के घाट उतार दिया. सुचना सेठ एक पढ़ी लिखी महिला है जो की एक कम्पनी की सीईओ हैं 2010 में उसकी शादी वेंकट रमन के साथ हुई और 2019 में उन्हें एक बेटा हुआ. उसके बाद से इनके रिश्ते में अनबन रहने लगी और इन दोनों का 2020 में तलाक हो गया।कोर्ट ने रमन को बच्चे  से हफ्ते में एक बार मिलने   की परमिशन भी दी. लेकिन सुचना इस बात से इस  कदर  नाखुश थी कि उसने अपने मासूम  बच्चे को ही अपनी नफरत का शिकार बना लिया और उसको मौत के घाट उतार दिया. सुचना का कहना था की उसके बच्चे की शकल वेंकट से बहुत मिलती थी जिस कारण उसे बहुत गुस्सा आता था.अब  सोचने  वाली बात यह है कि एक माँ अपने मासूम से बच्चे का कत्ल कैसे कर सकती है. साइकोलॉजी के अनुसार अगर हम इस केस पर नजर डालते हैं तो तलाक के बाद रिश्ते में उतार चढ़ाव इसका एक कारण हो सकता है तलाक भावनात्‍मक रूप से तो भयानक होता ही है, समाजिक रूप से भी लोगों को भीतर तक तोड़ कर रख देता  है कभी कभी यह इस कदर  हावी हो जाता है  कि  मेन्टल हेल्थ पर असर पड़ने लगता है सिकोपेथी  के अनुसार किसी अनहोनी से बचने के लिए जरूरी है कि इन बातों का ध्यान रखें जिससे आप सुरक्षित और खुशहाल जीवन जी सकें.

 

तलाक के बाद ना सिर्फ पार्टनर से ही रिश्ता टूटता है बल्कि कभी कभी  परिवार व समाज से भी रिश्ता खराब हो जाता है जिससे तलाक शुदा होने का दंश तो व्यक्ति झेलता ही है साथ में अकेलेपन का शिकार भी होने लगता है लेकिन तलाक का अर्थ सब कुछ खत्म होना नहीं बल्कि  जीवन कि नई शुरुवात भी होता है और वो आप पर निर्भर करता है कि आप खुद को मजबूत बनाना चाहते हैं या कमजोर. अगर आप अपने जीवन को सुखद बनाना चाहते हैं तो यह लेख आपको बहुत कुछ पाने में लाभकारी सिद्ध होगा.

खुद को जाने

तलाक के बाद का आपका व्यवहार या तलाक से पहले का आपका रविया यदि बदल रहा है तो आप खुद  के बारे में अध्ययन करें क्योंकि अपने बदलते व्यवहार को हम अच्छी  तरह से जान सकते हैं वरना अपने किसी दोस्त या नजदीकी रिश्तेदार  से भी पूछ सकते हैं और अपने मन कि बातों को भी किसी ना किसी के साथ शेयर अवश्य करें.

हिम्मत बढ़ाए

यदि आपके बच्चे हैं तो उन्हें अपनी कमजोरी ना बनाए बल्कि अपनी हिम्मत बनाए क्योंकि कई बार लोगो के ताने, बच्चे के सवाल (आपके तलाक के बारे में ), या आपके पार्टनर से मिलती हुई बच्चे कि आदत या शकल आपकी शादी से मिले ज़ख्म को कुरेद सकते हैं तो ऐसी परिस्थिति में आपको सेहजता के साथ खुद को संभालना होगा व अपने बच्चे के दिमाग़ में भी सकरात्मक सोच के साथ अपने लिए स्नेह  बढ़ाना होगा जिससे समय रहते वो आपकी कड़वी यादों को भुलाने में मदद भी करेगा.

सकरात्मकता में बढ़ोतरी करें

किसी भी कठिन समय को सही तरीके से सिर्फ और सिर्फ सकरात्मक सोच से ही जीता जा सकता है। कई बार हालत इस कदर हावी हो जाते हैं कि अकेला व्यक्ति मानसिक तनाव के चलते गलत कदम उठाने कि तरफ बढ़ने लगता है फिर चाहे ख़ुदकुशी हो या जिससे वह नफरत करता है उसको दर्द देने कि फिराक में।ऐसे में हमें सकरात्मकता के साथ हलात पर काबू करना होगा यदि जरूरत पड़े तो समय रहते सायकाट्रिस्ट को दिखाएं या कॉउंसलिंग कराएं जिससे आपको अपनी सोच बदलने में सहायता मिलेगी. क्योंकि आपका एक गलत कदम ना जाने कितनी जिंदगी खराब कर सकता है.

सिचुएशनशिप है लेटैस्ट रिलेशनशिप ट्रैंड

कुछ साल पहले तक लड़केलड़की या पुरुषमहिला के बीच प्यार के माने अलग थे. रिश्ते की शुरुआत बात करने से होती थी. उस के बाद दोस्ती होना, एकदूसरे के लिए अट्रैक्शन और फीलिंग्स महसूस करना, फिर डेटिंग और प्यार में पड़ना बहुत सहज और इमोशनल घटना होती थी. इस के बाद दोनों शादी के सपने देखते थे और पूरी जिंदगी साथ गुजारने का वादा करते थे. तब अपने पेरैंट्स से मिलवाने का शगल शुरू होता था.

वह ऐसा वक्त था जब लोग प्यार के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे और रिश्ता भावनाओं से भरपूर होता था. मगर आज के डिजिटल युग में सबकुछ बदलने लगा है. तेज रफ्तार मौडर्न जैनरेशन को हर चीज बदलने और कुछ नया पिक करने की आदत है. आज जो मोबाइल बहुत उत्साह से खरीदा है एकडेढ़ साल के अंदर वही मोबाइल आंखों में खटकने लगता है. उसे किनारे कर नए मौडल का मोबाइल लेने की होड़ लग जाती है. इसी तरह उन्हें रिश्ते भी बदलने की लत लगती जा रही है. एक ही रिश्ते को जिंदगीभर कौन ढोए?

क्या पता कल कोई और खूबसूरत लड़की मिल जाए, कल कोई ज्यादा पसंद आ जाए, ज्यादा कूल, रिच और स्मार्ट मिल जाए. बस इसी चक्कर में वे रिश्तों में भी कमिटमैंट से बचने लगे है.

रोमांचकारी अनुभव

लोगों को सबकुछ तुरंत चाहिए और मन भर जाए तो तुरंत स्क्रौल करते हुए आगे बढ़ जाते हैं. डिजिटल युग की वजह से आज औप्शन बहुत हैं इसलिए एक के पीछे समय बरबाद करना नहीं चाहते. यही वजह है कि आज रिलेशनशिप ट्रैंड में काफी बदलाव आए हैं. आज युवाओं की रिलेशनशिप्स में कमिटमैंट की कमी दिखने लगी है. वे सिचुएशनशिप के कौंसैप्ट को फौलो करने लगे हैं.

2011 में जस्टिन टिम्बरलेक और मिला कुनिस की फिल्म ‘फ्रैंड्स विद बैनिफिट्स’ आई और इस के साथ रिलेशनशिप में फ्रैंड्स विद बैनिफिट्स का कौंसैप्ट युवाओं में लोकप्रिय बन गया था. उसी साल एश्टन कचर और नताली पोर्टमैन ने भी युवा मिलेनियल्स को नौनकमिटल रिलेशनशिप का स्वाद दिया यानी बिना ज्यादा तनाव लिए या इमोशनल हुए रोमांस या प्यार के संबंधों में आगे बढ़ना.

यह नया और रोमांचकारी अनुभव था. सार्वजनिक रूप से एक जोड़े की तरह न तो साथ होने का दिखावा करना, न कोई रोमांटिक डायलौग बोलना, न इमोशनली जुड़ना और न ही कुछ और लागलपेट. बस सीधे संबंध बनाना और जिंदगी ऐंजौय करना.

इस नौनकमिटल रिलेशनशिप का एक नया रूप हाल ही में सामने आया है. जेन जेड और मिलेनियल्स ने अपने रोमांटिक संबंधों को परिभाषित करने के लिए अन्य कई भ्रामक शब्दों के एक समूह के बीच हमें एक और नया शब्द दिया है और वह है सिचुएशनशिप. यह शब्द 2019 में खासा लोकप्रिय हुआ. रिएलिटी टीवी शो लव आइलैंड की प्रतिभागी अलाना मौरिसन ने अपनी डेटिंग हिस्ट्री बताने के लिए इस ‘सिचुएशनशिप’
शब्द का इस्तेमाल किया था.

एक नया ट्रैंड

यही वजह है कि युवा पीढ़ी के बीच रिलेशनशिप का एक नया ट्रैंड बहुत तेजी से पौपुलर हो रहा है और वह है सिचुएशनशिप जिस में रिलेशनशिप में की जाने वाली किसी भी चीज का कोई प्रैशर नहीं होता खासतौर से कमिटमैंट का. रिश्ते तभी तक टिकते हैं जब तक सब सही चल रहा हो.

आज पुरुषों से ले कर महिलाओं तक डेटिंग ऐप का इस्तेमाल कर रही हैं. लोग सिंगल रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं और अगर शादी के बाद आपस में बन नहीं रही तो एकदूसरे को ?ोलने के बजाय अलग होने में बिलकुल संकोच नहीं कर रहे हैं. मतलब सबकुछ एकदम क्लीयर कट.

ऐसे ही नए नए ट्रैंड्स में एक और टर्म बहुत तेजी से पौपुलर हो रही है और वह है सिचुएशनशिप.

क्या है सिचुएशनशिप

सिचुएशनशिप हिंदी के 2 शब्दों ‘सिचुएशन’ और ‘रिलेशनशिप’ को मिला कर बनाया गया है. सिचुएशनशिप में सबकुछ परिस्थिति पर निर्भर करता है. रोमांस और फिजिकल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 2 लोग साथ में आ सकते हैं. दोनों एकदूसरे के साथ घूमने जा सकते हैं, लंच या डिनर कर सकते हैं. इस रिश्ते को कोई नाम नहीं दिया जाता है. कई बार लोग सिचुएशनशिप में एकदूसरे के साथ सिर्फ वक्त बिताने के लिए भी साथ आ सकते हैं. इस रिश्ते में साथी बिना कुछ ऐक्सप्लेन किए दूसरे साथी को छोड़ सकता है.

सरल शब्दों में कहें तो सिचुएशनशिप एक अपरिभाषित रिश्ता है जहां लोग अंतरंग होते हैं लेकिन एक व्यक्ति तक सीमित होने या उस के साथ रिश्ते में बंधना पसंद नहीं करते हैं. यानी सिचुएशनशिप एक ऐसी डेटिंग है जिस में 2 लोग बिना किसी वादे या कमिटमैंट के एकसाथ रहते हैं.

वे इस रिश्ते के बारे में न तो किसी को बताना चाहते और न ही इसे कोई नाम देना चाहते हैं.
2 लोग एकदूसरे की जरूरत को पूरा करने के लिए साथ में रहते हैं. सिचुएशनशिप में कुछ भी परिभाषित नहीं है. आप इसे गोइंग विथ फ्लो कह सकते हैं. मिजाज बदला और पार्टनर भी बदल गए. कुछ ऐसा ही फलसफा है इस रिश्ते का. कुछ मामलों में यह सही है तो कुछ मामलों में बहुत गलत.

क्यों पसंद कर रहे हैं सिचुएशनशिप में रहना

नई जैनरेशन किसी भी शर्त पर अपनी आजादी के साथ सम?ाता नहीं करना चाहती है. युवा अपने मुताबिक जीवन जीना चाहते हैं और खुद को स्वतंत्र रखना चाहते हैं. दरअसल, जब आप किसी रिश्ते में होते हैं तो अपने साथी की बातों पर ध्यान देना होता है जिस से उन की आजादी छिन जाती है. इस के साथ ही लव रिलेशनशिप एक जिम्मेदारी भरा रिश्ता होता है.

इसलिए जब कोई इंसान कमिटमैंट या जिम्मेदारी जैसी चीजों से बचना चाहता है तो वह सिचुएशनशिप में रहना पसंद करता है क्योंकि इस में साथी से कोई वादा या कमिटमैंट करने की आवश्यकता नहीं होती है. इस में 2 लोग केवल एकदूसरे के साथ लव रिलेशनशिप के फायदों को शेयर करने के लिए साथ होते हैं.
इस के अलावा जब किसी इंसान को अपने पहले प्यार में धोखा या सफलता नहीं मिलती तो वह मात्र ऐंजौयमैंट के लिए सिचुएशनशिप में आना पसंद करता है.

सिचुएशनशिप और रिलेशनशिप में क्या अंतर

जब 2 लोगों के बीच गहरा प्यार होता है तो वे रिलेशनशिप में आते हैं यानी इस में 2 लोगों के रिश्ते को प्यार का नाम दिया जाता है. जो लोग इस रिश्ते में होते हैं वे एकदूसरे को अपने दोस्तों और परिवार वालों से मिलाना पसंद करते हैं. वे एकदूसरे को गर्लफ्रैंड और बौयफ्रैंड के रूप में मिलवाते हैं. इस में दोनों लोगों के बीच प्यार होता है और वे फ्यूचर के बारे में बात करना पसंद करते हैं.

वे एकदूसरे के साथ अपना जीवन बिताना चाहते हैं. जब 2 लोग रिलेशनशिप में होते हैं तो उन का रिश्ता शादी तक पहुंच सकता है. इस में दोनों को एकदूसरे के सवालों के जवाब देने होते हैं. एकदूसरे की जिम्मेदारियां उठानी पड़ती है, एकदूसरे की जरूरतों का खयाल रखना होता है.

वहीं आज के डिजिटल युग में ‘सिचुएशनशिप’ वर्ड काफी ट्रैंड कर रहा है. इस का मतलब है कि 2 लोग किसी सिचुएशन में एकसाथ रहते हैं.  इस में 2 अनजान लोग भी एकदूसरे के साथ जुड़ सकते हैं. सिचुएशनशिप की सब से बड़ी विभिन्नता है कि इस में कोई वादा नहीं होती है. सिचुएशनशिप में दोनों ही पार्टनर पर्सनल सवालों से मुक्त रहते हैं.

इस रिश्ते में दोनों लोग बिना किसी शर्त के एकसाथ रहते हैं और अच्छा समय बिताते हैं. रिलेशनशिप में 2 लोग प्यार की वजह से एकदूसरे के साथ जुड़े होते हैं, जबकि सिचुएशनशिप में 2 लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए जुड़े होते हैं. सिचुएशनशिप में दोनों भविष्य के बारे में बातचीत से बचते हैं. लंबे समय के लिए योजनाओं, वादों या सपनों की चर्चा नहीं करते क्योंकि वे उस रिश्ते को लंबे समय तक निभाने की नहीं सोचते. सिचुएशनशिप में भावनात्मक संबंध और इंटिमेसी हो सकती है लेकिन यह प्यार के नौर्मल रिश्तों में अकसर पाई जाने वाली गहराई के स्तर तक नहीं पहुंच सकती है.

सिचुएशनशिप के फायदे

फ्लैक्सिबिलिटी: सिचुएशनशिप में फ्लैक्सिबिलिटी होती है मतलब कोई वादा, दिखावा नहीं करना पड़ता और न ही एकदूसरे से सवालजवाब का चक्कर होता है. इस माने में यह अच्छा है. आप अपने हिसाब से रिश्ते को मोल्ड कर सकते हैं. कमिटमैंट के दबाव के बिना कनैक्शन तलाशने की स्वतंत्रता होती है.
कम दबाव: सिचुएशनशिप में आप के ऊपर कोई बर्डन नहीं होता कि ऐसा ही करना पड़ेगा या रिश्ता निभाना ही पड़ेगा यानी इस में किसी के ऊपर किसी भी तरह का प्रैशर नहीं होता. आप अपनी मरजी और खुशी से इस रिश्ते में होते हैं. सम?ा न आए तो साथी को बिना कुछ ऐक्सप्लेन किए छोड़ भी सकते हैं. यह उन व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से आकर्षक है जिन के जीवन में अन्य प्राथमिकताएं होती हैं. जो अपने
कैरियर या लाइफस्टाइल से सम?ाता नहीं करना चाहते या किसी और की वजह से जिंदगी का मकसद या जीने का तरीका नहीं बदलते.

नुकसान: मगर सच यह भी है कि भले ही साथ रहने का प्रैशर और जिम्मेदारियों के बो?ा से दूर सिचुएशनशिप एक बहुत सुखद स्थिति लग सकती है लेकिन यह बहुत कठिन रास्ता होता है जिस पर अगर सावधानी से न चला जाए तो जख्मी होने का खतरा रहता है. मुश्किल तब आती है जब इस में शामिल 2 लोगों में से किसी एक की भावनाएं गंभीर होने लगें और वह अपनेआप से कमिटमैंट चाहने लगे.

इन देशों में अगर घूमने जाएं तो कभी न करें ये काम

आपने दुनिया के अजीबों-गरीब कानूनों के बारे में जरूर सुना होगा. इनके बारे में सुनकर आपको बेशक हंसी आए या अजीब महसूस हो लेकिन इन कानूनों के पीछे कोई न कोई वजह जुड़ी होती है. कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि अजीबों-गरीब नियम या कानून के बारे में जानकर कई पर्यटकों की दिलचस्पी उस देश को जानने के बारे में और भी बढ़ जाती है और वो वहां घूमने की प्लानिंग भी करने लगते हैं. आइए, जानते हैं कुछ ऐसे ही देशों के बारे में.

सोमालिया में बैन है समोसा

समोसा भारत का एक मुख्य स्नैक्स है. जिसे पार्टी या टी टाइम में चाय-कौफी के साथ परोसा जाता है. शायद ही कोई ऐसा भारतीय हो, जिसने कभी समोसा न खाया हो. लेकिन अगर आप सोमालिया जाएंगे तो आपको समोसा कहीं दिखाई नहीं देगा. यहां के उग्रवादी समूह अल-शबाब ने यहां समोसा बनाना, खाना और बेचना सिर्फ इसलिए बैन करवा दिया क्योंकि उन्हें लगता है कि इसके तीन नुकीले हिस्से ईसाइयों का पवित्र चिन्ह है.

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पाकिस्तान में डांस नहीं

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में डांस करना बहुत अनैतिक माना जाता है. यहां की अथौरिटी ने स्कूल में बच्चों तक के डांस करने पर बैन लगा रखा है. इस प्रांत के सभी स्कूलों को नोटिस जारी किया है कि बच्चों को डांस न करने दिया जाए.

सिंगापुर में चुइंगम है बैन

यहां 1992 जब किसी व्यक्ति ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर चुइंगम चिपका दिया था, जिससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट कई घंटों के लिए बाधित हो गया था. तब से यहां चुइंगम चबाना मना है, इतना ही नहीं इसे एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट करना भी मना है. अगर आप सिंगापुर जाएं, तो भूलकर भी चुइंगम न लेकर जाएं.

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मलेशिया में पीले रंग से फोबिया!

इस देश की सरकार ने पीले रंग को बैन किया हुआ है. असल में 2015 में मलेशिया के प्रधानमंत्री का विरोध करने वाले समूहों ने पीले रंग की टी-शर्ट पहनी थी, जिस कारण यहां की सरकार ने इस ग्रुप को नियंत्रित करने के लिए किसी भी सरकारी जगह पर पीले रंग के कपड़ों पर बैन लगा दिया था.

बुरुन्डी में जौगिंग है बैन

अफ्रीकी देश बुरुन्डी में कुछ वक्त पहले जातिवाद का फैलाव था. आलम यह था कि, उस दौरान नागरिक जौगिंग करते समय विद्रोह की रणनीतियां बनाते थे. जिस वजह से यहां के प्रेसिडेंट ने 2014 में देश में इस तरह के विद्रोहों पर रोक लगाने के लिए जौगिंग पर बैन लगा दिया था.

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एक संकल्प बदल सकता है जीवन जीने का तरीका

खट्टी मीठी यादों के साथ साल दर साल कैलेंडर बदलते जाते हैं और साथ ही बदलती जाती है हमारी सोच, आदतें और जीवन के प्रति हमारा नजरिया. कुछ लोगो की आदत होती है नया साल आते ही कुछ ना कुछ संकल्प लेने लगते हैं जैसे अपनी किसी बुरी  आदत को छोड़ना, कुछ लक्ष्य हासिल करना  या कुछ अच्छी  आदतों  को अपनाना. कुछ लोग इन में कामयाब भी होते हैं और कुछ का संकल्प दो  से तीन दिन में फुर होते नजर आते हैं जो लोग अपने संकल्प  हासिल करते जाते हैं उनके लिए हर वर्ष खुशियों भरा साबित होता है. लेकिन जो नाकामयाब होते है या संकल्प  को कामयाब बनाने की कोशिश तक  नहीं करते वे सिर्फ हाथ मलते रह जाते हैं और या तो खुद में कमी निकलते है या हालातो का रोना रोते हैं नई  साल पर लिये संकल्प को अगर पुरी निष्ठां के साथ पूरा  करते है तो हम अपने वर्तमान के साथ साथ अपनी  आने वाली पीढ़ी का भी भविष्य  सवार सकते हैं क्योंकि अक्सर बच्चे माता पिता को देख कर उनकी जैसी आदते अपनाते हैं. यदि कुछ कर गुजरने की इच्छा है तो आप हमारे बताए ये टिप्स अपना कर जीवन में लिए हर संकल्प को आसानी से पूरा कर सकते हैं.

दृढ निश्चय लें– जो भी आप कार्य करने जा रहे हैं उसके लिए दृढ संकल्प लें की आप हर परिस्थिति में अपने लक्ष्य को पाकर ही रहेंगे.

समय  की कीमत समझें अपने काम को आगे के लिए ना छोड़े. सही समय आने का इंतज़ार ना करें, क्योंकि सही समय कभी आता नहीं बल्कि लाना पड़ता है.

रिश्तों को महत्व दें -आज कल हम अपने आप में इतने मग्न रहने लगे  हैं कि हम अपने रिश्ते नातो को वक़्त ही नहीं देते जबकि रिश्ते जीवन की पूंजी कि तरह होते हैं जो हर अच्छे बुरे वक़्त में हमारे साथ खडे होते है मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखे तो अकेले व्यक्ति को भौतिक, भावनात्मक, मानसिक व आर्थिक सहयोग नहीं मिल पाता. जबकि जो अपने रिश्तों कि कदर करता है उस  अकेले व्यक्ति की पीड़ा पूरे परिवार व रिश्तेदारों की पीड़ा बन जाती है. इसलिए इन्हें अपनी सेविंग्स समझ कर आगे बढ़े और हर साल अपने रिश्तों को और भी बहतर बनाने कि कोशिश करते रहें.

खानपान को बदले – अच्छा खाना स्वस्थ जीवन की  नीव होता है और यदि हम स्वस्थ रहते हैं तो हम अपना हर काम को बड़ी ही लग्न से करते हैं अच्छी डाइट और व्यायाम हमारे भीतर पॉजिटिव एनर्जी पैदा करता है जिससे हमारे अंदर किसी भी कार्य को समय पर सफलता के साथ पूरा करने का जस्बा बढ़ता जाता है. और आप शरारिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं.

अपने कार्य को गंभीरता से लें कभी भी किसी की देखा देखी  ना करें, यह नहीं सोचे  की आपके दोस्तों ने अपना संकल्प तोड़ दिया तो आप भी उसे पूरा कर के क्या करेंगे बल्कि पुरी शिदत्त से अपने संकल्प को पाने की कोशिश करें जिससे आप और लोगो की प्रेरणा बने.

जिस तरह आप किसी काम को किसी भी हाल में करने के लिए दृढ़ संकल्प लेते हैं. ठीक उसी तरह आप अपनी जिंदगी संवारने के लिए भी आने वाले नए साल पर कुछ  संकल्प ले जिससे आप अपने आने वाले साल को ही नहीं बल्कि जीवन को बेहतर बना सकें हमारी यही कामना है कि  आपका 2024 ही नहीं बल्कि आपका जीवन ही मंगलमय हो.

35+ विंटर लुक्स गाइड

सर्दियों का मौसम आते ही हमारे आसपास काफी कुछ बदलने लगता है. हमारे खानपान, रहनसहन से ले कर मेकअप के तरीकों और फैशन तक में बदलाव की बयार बहने लगती है. यह जरूरी भी है क्योंकि ठंड का मौसम हर चीज में परिवर्तन ला देता है. इस मौसम में ठंड से बचने के साथ ही स्टाइलिश और खूबसूरत दिखना भी काफी अहम होता है क्योंकि यह शादियों का और पार्टीज का मौसम होता है. अगर सर्दी के इस सीजन में आप भी अपने स्टाइल को मैंटेन करते हुए फैशनेबल दिखना चाहती हैं तो आप विंटर फैशन और मेकअप से जुड़ी इन बातों का खयाल जरूर रखें:

कैसा हो आप का फैशन

जींस के साथ लौंग जैकेट: सर्दियों के सीजन में लौंग जैकेट काफी चलन में रहती है. ज्यादातर लड़कियां स्टाइलिश लुक पाने के लिए इसे कैरी करती हैं. अगर आप भी इस विंटर स्टाइलिश लुक पाना चाहती हैं तो जींस और फुलस्लीव शर्ट, स्वैटर या टीशर्ट के साथ ऐंकल लैंथ या नी लैंथ लौंग कोट वियर कर सकती हैं. ये हर तरह के कलर में आते हैं और आप को ठंड से भी बचाते हैं. इस के साथ आप फुटवियर में शूज, ऐंकल लैंथ बूट्स पेयर कर पहन सकती हैं.

हाई वेस्ट ट्राउजर के साथ स्वैटर: ठंड से बचने के साथ ही स्टाइलिश दिखने के लिए बौटम स्टाइल हाई वेस्ट पैंट और स्वैटर कैरी कर सकती हैं. इस के साथ ऐंकल लैंथ बूट्स आप को परफैक्ट लुक देंगे. आप ढीलेढाले स्वैटर, फ्रिल स्टाइल स्वैटर और स्टाइलिश स्लीव वाले स्वेटर भी इस ट्राउजर के साथ कैरी कर सकती हैं.

स्वैटर के साथ स्कर्ट: पैंट या जींस के साथ स्वैटर पहनने के अलावा आप स्कर्ट के साथ भी इसे पेयर कर सकती हैं. इस के लिए आप चाहें तो वूलन स्कर्ट का चयन भी कर सकती हैं. स्टाइलिश दिखने के लिए नी लैंथ स्कर्ट के साथ स्वैटर पहनें. इस के अलावा हाई नैक स्वैटर के साथ भी स्कर्ट की पेयरिंग काफी शानदार लगेगी. वहीं फुटवियर में आप इस के साथ थाई हाई बूट पहन सकती हैं.

स्टौकिंस के साथ शौर्ट ड्रैस: सर्दियां आते ही ज्यादातर युवतियां, महिलाएं शौर्ट ड्रैस पहनने से परहेज करने लगती हैं. मगर एक खूबसूरत तरीका है जिस से आप बिना ठंड लगे भी शौर्ट ड्रैस कैरी कर सकती हैं. सर्दियों में शौर्ट ड्रैस पहनने के लिए सब से पहले ड्रैस के अंदर थर्मल वियर टौप पहनें और नीचे पैरों में वूलन स्टौकिंस पहन सकती हैं. इस के साथ नी लैंथ बूट्स, गले में मफलर और ड्रैस के ऊपर डैनिम या लैदर की जैकेट आप के लुक में चार चांद लगा देगी. सर्दियों में कैजुअल कपड़ों के साथ आप डैनिम जैकेट कैरी कर सकती हैं. यह आउटफिट के साथ काफी स्टाइलिश लुक देगी. आप इस डैनिम जैकेट को ट्रैंडी वूलन क्रौप टौप और टीशर्ट आदि के साथ स्टाइल कर सकती हैं.

वूलन लौंग ड्रैस: आप वूलन लौंग ड्रैस अपने लिए चुन सकती हैं. इस के साथसाथ आप शौर्ट जैकेट या कोट कैरी कर सकती हैं. यह आप को स्टाइलिश लुक देने के साथसाथ गरम भी रखेगा.

साड़ी के साथ ओवरकोट: सर्दियों में अगर आप शादी अटैंड कर रही हैं और साड़ी पहन रही हैं तो आप इस के साथ मैचिंग ओवर कोट पहन सकती हैं. यह आप के ट्रैडिशनल लुक को एक मौडर्न टच देगा साथ ही आप को सर्दियों से भी बचाएगा. प्रिंटेड या ऐंब्रौयडरी वाली जैकेट भी आप साड़ी के साथ वियर कर सकती है.

लहंगा विद जैकेट: अगर आप सर्दियों की शादी में जा रही हैं और सब से लेटैस्ट फैशन ट्रैंड्स के साथ खूबसूरत दिखना चाहती हैं तो लहंगे के साथ लौंग वूलन जैकेट आप के लिए बैस्ट औप्शन साबित हो सकता है. यह आउटफिट न केवल बेहद ऐलिगैंट और ग्रेसफुल लुक देगा बल्कि आप को सर्दी से भी पूरा बचाएगा. वूलन जैकेट के साथ आप चाहें तो भारी ऐंब्रौयडरी वर्क वाला लहंगा भी पहन सकती हैं या फिर साड़ी के साथ भी यह कौंबिनेशन बेहद स्टाइलिश लुक देगा.

पुलोवर के साथ मैचिंग पैंट: अपने मनपसंद कलर के पुलोवर के साथ मैचिंग पैंट और हाई हील्स आप को काफी अच्छा लुक देंगी. यह एक कैजुअल ड्रैस है जो कंफर्टेबल और स्मार्ट लुक देती है. आप साड़ी के साथ भी ब्लाउज के बजाय पुलोवर स्वैटर पहनी सकती हैं.

ब्लेजर देगा स्मार्ट लुक: विंटर में ब्लेजर एक बेहतरीन औप्शन है. ब्लेजर की खासीयत यह है कि दिखता बहुत स्टाइलिश है और इंडियन तथा वैस्टर्न दोनों आउटफिट के साथ सूट करता है. ब्लेजर को आप शर्ट, टीशर्ट, ट्यूनिक, साड़ी, लहंगा, स्कर्ट आदि के साथ पहन सकती हैं.

स्टाइलिश लुक के लिए स्किनी जींस: विंटर में आप अपने डेली वियर में स्किनी जींस को जरूर शामिल करें. इसे खास देखभाल की जरूरत भी नहीं होती है और इसे पहन कर आप स्टाइलिश भी नजर आएंगी. विंटर में आप स्किनी जींस के साथ टीशर्ट, शर्ट, ट्यूनिक, कोट आदि पहन सकती हैं.

वूलन स्कार्फ से बढ़ाएं आकर्षण: विंटर में वूलन स्कार्फ न सिर्फ स्टाइलिश ऐक्सैसरीज का काम करता है बल्कि आप को ठंड से भी बचाता है. इसलिए विंटर में वूलन स्कार्फ को अपना स्टाइल स्टेटमैंट जरूर बनाएं. आप चाहे वैस्टर्न आउटफिट पहन रही हों या इंडियन वूलन स्कार्फ के साथ आप का आउटफिट और ज्यादा स्टाइलिश नजर आएगा. वूलन स्कार्फ को आप साड़ी, सलवारकमीज, ड्रैस, जींस, टीशर्ट आदि आउटफिट्स के साथ पहन सकती हैं.

ओवरकोट: विंटर फैशन में ओवरकोट की खास जगह है. फौर्मल लुक के लिए ब्लैक, ब्राउन, ग्रे, औफ व्हाइट आदि कलर्स के ओवरकोट पहने जा सकते हैं. कैजुअल लुक के लिए पिंक, पर्पल, यलो, रैड जैसे ब्राइट कलर्स के ओवरकोट चुनें.

कार्डिगन: सर्दी से बचने के लिए कार्डिगन सब से सुरक्षित और पौपुलर औप्शन है. कार्डिगन की खासीयत यह है कि आप इसे ट्रैडिशनल और वैस्टर्न दोनों तरह के आउटफिट्स के साथ पहन सकती हैं.

टर्टल नैक: टर्टल नैक पहनने का सही मौसम विंटर ही है. ठंड से बचाने के साथ ही यह नैकलाइन बहुत स्टाइलिश भी नजर आती है. आप भी विंटर में टर्टल नैकलाइन वाली ड्रैस, टीशर्ट, ब्लाउज आदि जरूर पहनें.

गाउन: सर्दियों में गाउन भी अच्छा औप्शन है. स्पैशल पार्टी फंक्शन में रैड, ब्लैक, पर्पल, फुशिया पिंक, गोल्डन, सिल्वर जैसे ब्राइट कलर का गाउन पहन कर जाएं.

पैंट सूट के साथ ब्लेजर: दफ्तर में फौर्मल कपड़े पहनना पसंद करती हैं तो पैंट सूट से खुद को स्टाइल करें. आजकल लड़कियां ब्लेजर पहनना पसंद करती हैं. ब्लेजर के साथ मैचिंग पैंट ट्रैंड में है. आप सूट पैंट या जींस के साथ ब्लेजर को अपना सकती हैं.

नया लुक पाने के लिए अपने कोट में लगाएं बैल्ट: कोट तो सभी पहनते हैं इसलिए यह बेहद आम आउटफिट दिखाई देता है जो बड़ा ही बोरियत महसूस करवा सकता है. इसलिए ठंड के मौसम में अपने पुराने बोरिंग कोट को स्टाइलिश और नया लुक देने के लिए आप इस में बैल्ट लगा सकती हैं जो लोगों की नजरों को आप की ओर खींचने का काम करेगी.

अपने आउटफिट के हिसाब से चुनें ज्वैलरी: आउटफिट के साथसाथ ज्यादा स्टाइलिश नजर आने के लिए सही ज्वैलरी का चयन करना भी बेहद जरूरी होता है. अपनी ड्रैस के अनुसार ही ज्वैलरी और ऐक्सैसरीज कैरी करें. ऐसा करना आप को दूसरों से अलग बनाएगा.

सूट को दें नया लुक: इस के अलावा अगर आप सूट पहनना पसंद करती हैं, तो इस के ऊपर आप डिजाइनर ऊनी दुपट्टा या स्टाइलिश शौल ओढ़ सकती हैं जो आप के लुक को एकदम अलग और ऐलिगैंट बनाने का काम करेगी.

इस विंटर फुटवियर से आप भी दिखें स्टाइलिश फुटवियर आप की ओवरऔल आउटफिट में निखार लाता है. आप कितनी भी बढि़या ड्रैस कैरी कर लें लेकिन जब तक सही फुटवियर नहीं पहनतीं तो आप की पर्सनैलिटी में निखार नहीं आता. सर्दी में आप जितना अपने आउटफिट के बारे में सोचती हैं उतना ही अपने जूतों के बारे में भी सोचिए. इस मौसम में जब तक आप के पास स्टाइलिश फुटवियर न हों तब तक आप के फैशन में नयापन नहीं जोड़ा जा सकता है. कुछ ऐसे शूज या बूट के औप्शन पर ध्यान दें जो स्टाइलिश लुक के लिए आप की लिस्ट में जरूर शामिल होने चाहिए.

आइए, जानते हैं इस सर्दी में कौन से शूज आप को ट्रैंडी और स्टाइलिश लुक दें सकते हैं:

हील्स वाले बूट्स: हील्स वाले बूट्स आप को एक अलग ही स्मार्ट लुक देते हैं. अगर आप मिडी स्टाइल ड्रैस के साथ बूट्स कैरी करने की सोच रही हैं तो अपनी कमर में चौड़ी बैल्ट जरूर लगाएं. इस से आप का लुक और ज्यादा क्लासी लगेगा. बैल्ट लगाने से आप की फिगर काफी ज्यादा खूबसूरत लगेगी. इस के साथ हील्स वाले बूट्स पहनें.

ऐंकल बूट्स: ये बूट्स आप के ऐंकल एरिया को कवर करते हैं इसलिए इन्हें ऐंकल लैंथ बूट्स के नाम से जाना जाता है. अगर आप ज्यादा अट्रैक्टिव लुक चुनना चाहती हैं, तो इन बूट्स को रिप्ड जींस के साथ पेयर कर सकती हैं. वैसे आप इन्हें किसी भी तरह की ड्रैस के साथ कैरी कर सकती हैं. बस इन्हें कैरी करते वक्त ध्यान रखें कि आप ने मोजे जरूर पहन रखे हों. इस से आप के लुक में काफी ज्यादा बदलाव देखने को मिलेगा. ये आप को सर्दी से बचाएंगे और साथ में इन से आप का लुक भी काफी क्लासी लगेगा.

ब्लैक पंप्स: क्लासिक ब्लैक पंप्स का फैशन सदाबहार है. क्लासिक पंप्स को आप किसी भी तरह की ड्रैस के साथ पहन सकती हैं. आप चाहें तो इन्हें फौर्मल पैंसिल स्कर्ट या फिर नाइट आउट बैल बौटम के साथ पहन सकती हैं.

पतले स्ट्रैप वाली हील्स: पतले स्ट्रैप वाली हील्स देखने में बहुत खूबसूरत लगती हैं, साथ ही लड़कियों को पसंद भी ज्यादा आती हैं. इन के स्ट्रैप एकदम पतले होते हैं. आप चाहें तो सिंगर स्ट्रैप होल्डिंग वाले शूज या फिर मल्टीपल स्ट्रैप होल्डिंग वाले शूज भी ले सकती हैं. जब आप इन हील्स को सौलिड कलर के साथ पहनती हैं तो ये और भी अच्छी लगती हैं.

व्हाइट स्नीकर्स: सर्दी में स्नीकर्स सर्दी से बचने का बैस्ट औप्शन हैं. यह फुटवियर कंफर्टेबल होने के साथ ही पैरों को आराम भी देता है. व्हाइट स्नीकर का दूसरे किसी भी तरह के जूते मुकाबला नहीं कर सकते हैं. इन्हें आप जींस, ट्राउजर या फिर किसी दूसरी ड्रैस के साथ भी पहन सकती हैं.

थाईहाई बूट्स: सर्दियों में ड्रैस पहननी हो तो उस के साथ बूट बैस्ट शूज होते हैं और अगर वे थाईहाई हों तो आप की पर्सनैलिटी में चार चांद लग जाते हैं. अगर आप ओवरसाइज हूडी पहनती हैं तो इस के साथ आप थाईहाई बूट्स पहन सकती हैं. ये काफी कंफर्टेबल तो होते ही हैं देखने में भी कूल लगते हैं. शौर्ट ड्रैस के साथ हमेशा लंबी हाइट वाले बूट्स ही पहनें. इन की हाइट करीब 6 इंच होनी चाहिए. ये बोल्ड लुक देंगे.

पोप कलर हील्स: अगर फन लुक पाना चाहती हैं तो पोप कलर हील्स पहनें. पोप कलर हील्स कुछ आउटफिट्स के साथ बहुत ही अच्छी लगती हैं. ये मुख्य रूप से न्यूट्रल कलर के कपड़ों के साथ अच्छी लगती हैं. आप इन में नियौन ग्रीन से ले कर कैंडी पिंक और पंप हील्स आदि कुछ भी चुन सकती हैं.

किटन हील्स: ग्लैमरस लुक पाने के लिए आप सर्दियों के मौसम में किटन हील्स ट्राई कर सकती हैं. ये हील्स आप के लुक को स्टाइलिश दिखाने के साथसाथ आप की हाइट भी ज्यादा दिखाएंगी. इन हील्स को आप अपने किसी भी वैस्टर्न आउटफिट के साथ मैच कर के पहन सकती हैं और स्टाइलिश दिख सकती हैं.

वेज हील्स: सर्दियों के मौसम में वेज हील्स आप को स्टाइलिश लुक दे सकती हैं. ये हील्स न केवल सुंदर लगती हैं बल्कि मजबूत और कंफर्टेबल भी होती हैं और आप को स्मार्ट लुक भी देती हैं. ये वेज हील्स बूट्स की तुलना में ज्यादा सुरक्षित भी होती हैं.

पंप्स हील्स: पंप्स हील्स देखने में बेहद ट्रैंडी और कूल दिखाई देती हैं जिन्हें आसानी से हर ड्रैस के साथ कैरी किया जा सकता है. मगर इस तरह की हील्स फौर्मल ड्रैस पर काफी अच्छी लगती हैं. आप जैकेट के साथ भी इन्हें आसानी से वियर कर सकती हैं.

ब्लैक बूट्स: ब्लैक बूट्स आप के लिए एक फैशन स्टेटमैंट की तरह काम करते हैं. ये बूट्स अपने लुक के साथ प्रयोग करने की चाहत रखने वाली लड़कियों के लिए बैस्ट औप्शन हैं. ब्लैक बूट्स आप को कूल लुक देते हैं.

ग्लैडिएटर सैंडल्स: वैस्टर्न आउटफिट्स हों या इंडियन आउटफिट्स सभी के साथ सैंडल अच्छे लगते हैं. इन में आप को कई तरह की वैरायटी मार्केट में आसानी से मिल जाएगी. इन्हें आप अपनी ड्रैस के साथ मैच कर के खरीद सकती हैं.

सर्दियों में मेकअप कैसे करें

सर्दियों के मौसम में स्किन बहुत ही ज्यादा ड्राई हो जाने के कारण मेकअप करने में बहुत ही ज्यादा कठिनाई होती है. ड्राई स्किन की वजह से सर्दियों में मेकअप करने के कारण चेहरा बहुत ही ज्यादा रूखा और बेजान सा दिखने लगता है, साथ ही हर मौसम का मेकअप अलगअलग होता है. सर्दियों के मौसम में मेकअप थोड़ा ब्राइट रखा जाता है. गरमी के मौसम में जिन रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है उन का सर्दियों के मौसम में इस्तेमाल किया जा सकता है. इस मौसम में मेकअप करते समय इन बातों का खयाल रखें:

मेकअप के स्टैप्स

मौइस्चराइज करें: सर्दियों में स्किन को सब से पहले अच्छी तरह से साफ कर के मौइस्चराइज करना जरूरी है ताकि मेकअप करते समय स्किन ड्राई न हो और उस में अच्छी तरह से मेकअप प्रोडक्ट मैल्ट हो सकें. इस के लिए मौइस्चराइजर से चेहरे को 4-5 मिनट तक मौइस्चराइज करें ताकि स्किन सौफ्ट बन जाए. अगर आप सर्दियों में मेकअप करने से पहले कच्चे दूध को रूई से अपने चेहरे पर लगाएं और चेहरे को साफ कर लें तो इस से आप का चेहरा साफ भी होगा और मौइस्चराइज भी हो जाएगा.

फेस सीरम लगाएं: इस मौसम में फेस सीरम लगाना अच्छा होता है. इस से आप की त्वचा हाइड्रेट रहेगी और वह मुलायम और चमकदार बनी रहेगी.

प्राइमर लगाएं: आप सर्दियों के अनुसार ऐसे प्राइमर का इस्तेमाल करें जो स्किन को ड्राई न करे. अगर आप की स्किन बहुत ज्यादा ड्राई है तो आप पैट्रोलियम जैली को भी प्राइमर की जगह अपने फेस पर अप्लाई कर सकती हैं.

कंसीलर लगाएं: अगर आप की आंखों के आसपास डार्क सर्कल्स हैं और चेहरे पर भी दागधब्बे हैं तो उन्हें छिपाने के लिए कंसीलर का उपयोग कर सकती हैं. लिक्विड या क्रीमी कंसीलर यूज करें और फाउंडेशन से लाइट शेड का कंसीलर लगाएं. कंसीलर को अच्छी तरह से आंखों के आसपास लगाएं और अच्छी तरह से मिलाएं.

फाउंडेशन लगाएं: सर्दियों में आप ग्लोइंग इफैक्ट के लिए क्रीमी या औयल बेस्ड फाउंडेशन यूज करें. फाउंडेशन के बदले बीबी या फिर सीसी क्रीम भी लगा सकती हैं.

आईशैडो और आईलाइनर का इस्तेमाल करें: अगर आप सर्दियों में आईशैडो और आईलाइनर लगा रही हैं तो ज्यादा ब्लैक और ब्राउन कलर या फिर पिंक, पर्पल, चौकलेट ब्राउन, फौरेस्ट ग्रीन और नेवी ब्लू जैसे कलर का आईशैडो लगाएं. इस से आंखें बहुत ही सुंदर दिखती हैं.

इस के बाद आप काजल और आईलाइनर का इस्तेमाल करें. अगर आप को काजल फैलने की समस्या है तो आप काजल लगाने से पहले आंखों के आसपास हलकाहलका सा फेस पाउडर या फिर कोई सा भी पाउडर लगा लें जिस से आप का काजल फैलेगा नहीं. अब आप मसकारा लगा ले.

ब्लश और हाइलाइटर लगाएं: सर्दियों में ज्यादा डार्क ब्लश का इस्तेमाल न करें. बहुत ही लाइट ब्लश लगाएं और ऊपर से थोड़ा सा हाइलाइटर लगा लें. अगर आप चाहें तो ब्लश और हाइलाइटर दोनों को मिक्स कर के हलका सा लगा सकती हैं.

अंत में लिपस्टिक: अब मेकअप कंप्लीट करने के लिए आप लिपस्टिक लगाएं. सर्दियों में डार्क कलर की लिपस्टिक ज्यादा पसंद की जाती है. आप डार्क मैरून कलर, डार्क रैड या फिर डार्क पिंक कलर की भी लिपस्टिक लगा सकती हैं. लिपस्टिक लगाने से पहले अपने होंठों को अच्छी तरह मौइस्चराइज करना न भूलें. आप की लिपस्टिक जिस कलर की है उस से बस थोड़ा सा डिफरैंट कलर का लिप लाइनर लें. यह आप के होंठों को परफैक्ट लुक देगा.

नेलपौलिश: नेलपौलिश के लिए डार्क रैड, बरगंडी, पर्पल और नेवी ब्लू जैसे कलर से इस मौसम में शानदार लुक आता है. इन को लगाने से पहले आप नेल्स को कोई शेप दे देती हैं तो अच्छा रहेगा.

विंटर सीजन में हेवी मेकअप केकी नजर आने लगता है. इसलिए मिनिमल और नैचुरल मेकअप ही बेहतर माना जाता है.

चुनें नौनऔयली मौइस्चराइजर: सर्दियों के दौरान स्किन में अकसर ड्राईनैस की समस्या बनी रहती है. ऐसे में मौइस्चराइजर को अवौइड करना कई स्किन प्रौब्लम्स का कारण बन सकता है. लेकिन ज्यादातर मौइस्चराइजर स्किन के औयली और डार्क होने का कारण बनते हैं जो आप के मेकअप लुक को खराब भी कर सकते हैं. ऐसे में नौनऔयली मौइस्चराइजर का इस्तेमाल करना बेहतर साबित हो सकता है.

फेशियल औयल का करें इस्तेमाल: मिनिमल मेकअप के लिए फेशियल औयल का इस्तेमाल बेहतर साबित होता है. इस के लिए अगर आप नैचुरल औयल का इस्तेमाल करें तो ज्यादा फायदेमंद साबित होगा.

क्रोशिया आप की खुशियों की चाबी

क्रोशिया और बुनाई एक प्राचीन कला है जिसे हम सब ने अपनी नानी, दादी को करते जरूर देखा होगा. यह एक ऐसी कला है जो न सिर्फ हमें कुछ नया बनाने को प्रेरित करती है अपितु हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है. आइए, जानें इस कला के फायदों को जो इस को महत्त्वपूर्ण बनाते हैं:

मानसिक एकाग्रता

जब हम क्रोशिया करती हैं तो हम उस की डिजाइन में उलझ जाती हैं जिस से हमारा ध्यान एकाग्र होता है. इस से हमारी मानसिक एकाग्रता बढ़ाती है. डिजाइन बनाते समय हम छोटीछोटी बातों का ध्यान रखती हैं ताकि हमारी डिजाइन गलत न हो जाए और परिणामस्वरूप हमारा दिमाग ऐक्टिव रहता है. इस का चैलेंज हमारे दिमाग को मजबूती देता है जिस से हमारा दिमाग तेज होता है और हम बढ़ती उम्र में होने वाली बीमारी डिमेंशिया को काफी हद तक दूर रख सकती हैं. आप कह सकते हैं कि यह एक टौनिक का काम करता है.

क्रिएटिविटी का विकास

क्रोशिया के रंगीन धागे हमें आकर्षित करते हैं. उन्हें देख कर हमारा दिमाग खुदबखुद कुछ बुनने लगता है. जैसे लाल धागा देख कर अनायास आप को लाल गुलाब याद आ जाएगा. ये धागे हमें कुछ बनाने को उकसाते हैं और जब हम क्रोशिया और धागे से कुछ बनाती हैं तो खुदबखुद डिजाइन हमारी उंगलियों से उतरने लगती है.

शारीरिक लाभ

जब हम क्रोशिया या बुनाई करती हैं तो हाथ की उंगलियां अलगअलग तरीके से काम करती हैं. परिणामस्वरूप हमारे हाथों की मांसपेशिया मजबूत होती हैं. हाथों के लगातार क्रियाशील होने से हमारे हार्ट पर भी पौजिटिव असर देखने को मिलता है.

धैर्य में बढ़ोतरी

क्रोशिए की चीजें बनाने में समय लगता है और हम 1-1 लूप बना कर सुंदरसुंदर चीजें तैयार करती हैं क्योंकि काम धीरेधीरे आगे बढ़ता है जिस से हम में सब्र और संतुष्टि का विकास होता है.

बेहतरीन हौबी

क्रोशिया एक ऐसी हौबी है जिसे हम अकेले भी कर सकती हैं और ग्रुप में भी. किट्टी पार्टी छोडि़ए 2 घंटे की क्रोशिया पार्टी रखिए. घर लौटते हुए अपनी क्रिएटिविटी का नमूना ले कर जाएं, न कि समोसे कचौड़ी का बोझ. बाहर देशों में जगहजगह हौबी सैंटर खुले हैं जहां जा कर आप अपने ही तरह के लोगों से मिलती हैं और कुछ नया सीखती हैं. यह हौबी आप का गेटवे है अपनी कला को निखारने का और समय का सदुपयोग करने का.

निवेश

इस हौबी को बढ़ाने के लिए आप को बहुत पैसों की भी आवश्यकता नहीं होती. बस एक क्रोशिया और धागे का गोला ये 2 चीजें आप कहीं पर भी आसानी से ले जा सकती हैं. ट्रेन हो, बस हो या कार आप आराम से इसे बनाते हुए अपना खाली समय बिता सकती हैं.

आत्मविश्वास को बढ़ावा

क्रोशिया हमारे अंदर आत्मविश्वास पैदा करता है. जब हम क्रोशिया से या सलाइयों से कुछ बनाती हैं तो कुछ करने का जज्बा हमारे कौन्फिडैंस को बढ़ाता है और जब लोग तारीफ करते हैं तो हमारी खुशी दोगुनी हो जाती है.

बच्चों का विकास: क्रोशिए से आप खिलौने बना कर बच्चों को दे सकते हैं. ये खिलौने अपने रंगों से बच्चों को आकर्षित कर लेते हैं. खेलखेल में बच्चों को जानवरों के नाम भी आप आसानी से सिखा देंगे और इस से आप स्क्वायर, सर्कल आदि बना कर शेप्स भी सिखा सकती हैं.

क्रोशिए का छोटा सा ब्रेक भी आप को रिलैक्स करेगा और आप की ऐंग्जाइटी को कम करेगा. क्रोशिया करने वालो के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण बातें:

  •  क्रोशिया की जो सब से खास बात है वह है इस की सिंम्लिसिटी. धागों का लूप बना कर हम 1 का 2 और 2 का 3 और फिर 3 का 2 और इक करने से ही कितनी सुंदर डिजाइन बना लेती हैं.
  •  क्रोशिया धागे या ऊन से करते हैं इसलिए इस को ज्यादा नहीं खींच सकते. इसलिए यह पर्स, ऐक्सैसरीज, टौप, स्कर्ट्स आदि बनाने के काम आता है.
  •  क्रोशिया से डिजाइन बनाने का कोई सैट फौर्मूला नहीं है. आप जैसे चाहें अपनी क्रिएटिविटी को उकेर सकती हैं. आप चाहें गोलाई में क्रोशिया बुनें या फिर सीधा टेढ़ा बना कर सूईधागे से जोड़ लें. आप चाहें तो सिंगल पीस बना लें या फिर छोटेछोटे मोटिफ बना कर जोड़ लें. आप जैसे चाहें अपना सामान बना सकती हैं. यह हर तरह से सुंदर ही लगता है.

धागे का चुनाव: आजकल बाजार में तरहतरह के धागे मिलते हैं मोटे, पतले, सिल्क के, कौटन के आप को जो भी धागा पसंद आए आप ले लें. बस एक बात का ध्यान रखें कि शुरुआत मोटे धागे से करें. ऊन सही रहता है क्योंकि ऊन का फाइबर क्रोशिया से आसानी से लूप को निकाल देता है. ऊन के साथ मोटा क्रोशिया ही लें.

इस का छोटा होना आप के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है. आप के पर्स में अपना चश्मा भी ज्यादा जगह घेरेगा इस क्रोशिए से.

क्रोशिया के प्रकार: क्रोशिया अलगअलग वैराइटी में मिलता है. आप चाहें तो लकड़ी का, प्लास्टिक का या फिर मैटल का भी क्रोशिया ले सकती हैं.

क्रोशियां पकड़ने का तरीका: क्रोशिए को 2 प्रकार से पकड़ा जाता है- एक पैंसिल की तरह और दूसरा चाकू की तरह. छोटे काम के लिए पैंसिल की तरह पकड़ें और बड़े काम के किए चाकू की तरह इस्तेमाल करें. इस से आप के हाथ पर खिंचाव नहीं पड़ेगा.

अपनी यात्रा को बनाना है यादगार तो रखें इन बातों का ख्याल

शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा हो जिसे घूमना पसंद ना हो. यूं तो ग्रुप में घूमना सबसे अच्छा होता है लेकिन अकेले घूमने का मजा ही कुछ और है. लेकिन यात्रा करते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता पड़ती है. यात्रा के दौरान आपकी एक गलती भी आपको बड़ी परेशानी में डाल सकती है. जानें कि यात्रा के दौरान आप को किन-किन सावधानियों और प्लानिंग की जरूरत होती है, जिससे आपकी हर यात्रा आपके लिए सुखद और यादगार यात्रा बन जाए.

गाड़ी का रखें ध्यान

आप अकेले किसी भी निजी गाड़ी में यात्रा करने से बचें, क्योंकि रास्ते में यदि गाड़ी खराब हो गई, तो ऐसे में आपको परेशानी हो सकती है. अगर आप अपने ही वाहन से कहीं लंबे टूर में जाना चाहती है, तो आप दिन में सफर करें. जिससे आप रात होने तक अपनी मंजिल तक पहुंच जाएं.

कम से कम सामान लेकर चलें

अगर आप अकेली यात्रा कर रही हैं, तो अपने साथ कम से कम सामान लेकर चलें. एक भारी सूटकेस की बजाए दो हल्के बैग आपको ज्यादा आराम देते है. आपने साथ उतना ही सामान रखें जिसे आप खुद उठा सकें.

सेफ्टी चेन

अपने सामान को सुरक्षित रखने के लिए पहले से ही अपने सूटकेस, बैग आदि के ताले ठीक करा लें. रेल में यात्रा करते समय अपने पास सेफ्टी चेन रखना ना भूलें और इस चेन के द्वारा अपने सामान को अच्छे से लॉक करके सुरक्षित कर दें.

टॉर्च

यात्रा करते समय ये ध्यान रखें कि अपने साथ टॉर्च जरूर हो.

पास में ज्यादा पैसे ना रखें

अपने साथ अधिक नगद राशि या कीमती सामान लेकर ना चलें. इसके अलावा अपने पास डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड रखें.

ज्यादा रात तक बाहर ना घूमें

ज्यादा देर रात तक बाहर ना घूमें, ऐसा इसलिए क्योंकि आपको नई जगह के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है, इस कारण नए स्थान पर आप सावधान रहें.

बच्चों का रखें खास ख्याल

यदि आप अपने बच्चों के साथ यात्रा कर रही हैं तो जरुरी दवाएं, खाने-पीने का कुछ सामान, फर्स्ट ऐड की सामग्री अपने साथ जरूर रखें. यात्रा के वक्त अपने बच्चों को इधर-उधर ना छोड़े और बस या ट्रेन से उन्हें उतरने ना दें.

फैशन बनते पालतू कुत्ते

राजधानी दिल्ली की किसी भी मार्केट में चले जाएं. आप को चमचम करते पार्लरों में दिख जाएंगे जहां सजनेसंवरने युवतियां नहीं बल्कि शानदार एक से एक पालतू कुत्ता लाया जाता है. दिल्ली के धनाढ्य लोग अपनी बड़ीबड़ी गाडि़यों में इन कुत्तों को ले कर आते हैं. इन पार्लरों की परिचारिकाएं बड़े जतन से इन के बाल काटती हैं. स्पा देती हैं यानी नाखून काटने, सजानेसंवारने से ले कर कुत्तों को यहां तरहतरह के व्यायाम भी करवाए जाते हैं. होम सर्विस भी उपलब्ध है जिस के लिए विशेष वैनें बनवाई गई हैं जिन में कुत्तों से संबंधित हर सुविधा उपलब्ध है.

कुत्ता पालना सालों से स्टेटस सिंबल रहा है. सोसाइटी के नामीगिरामी लोगों में पालतुओं का चलन शुरू से रहा है. पिछले कुछेक सालों से मध्यवर्गीय परिवारों में भी इन्हें पालने का चलन बढ़ा है. ‘इंडिया इंटरनैशनल पेट ट्रेड फेयर’ के आंकड़ों के मुताबिक इस समय देश के सिर्फ 6 मैट्रो शहरों में ही पालतू कुत्तों की संख्या लगभग 40 लाख है. यह संख्या हर साल 10% की दर से बढ़ रही है.

मगर इन पालतू कुत्तों में से छोड़े गए कुत्ते स्ट्रीट डौग बन रहे हैं और लोगों को काट रहे हैं. दिल्ली ही नहीं सारे देश की म्यूनिसिपल कमेटियों के लिए ये सिरदर्द हैं क्योंकि इन्हें मारना संभव नहीं है. उस पर मेनका गांधी जैसे ऐनिमल लवर्स हल्ला मचाने लगते हैं.

ठीक से देखरेख नहीं

जो पाल रहे हैं उन में 10 से 15% संख्या उन लोगों की भी है, जो कुत्ते शुरू में पाल तो लेते हैं पर फिर उन की ठीक से देखरेख नहीं कर पाते और उन्हें सड़क पर छोड़ आते हैं. सड़कों पर सड़क छाप और पालतू कुत्तों के बीच फर्क एकदम साफ नजर आता है. पालतू कुत्ते आमतौर पर प्रशिक्षित होते हैं. उन्हें प्यार और पुचकार की आदत होती है. भूख लगने पर वे खाने पर ?ापटते नहीं, बल्कि हाथ बढ़ा कर मांगते हैं या फिर आवाज निकालते हैं.

सड़क छाप कुत्तों की तरह वे खूंख्वार नहीं होते. इसलिए जैसे ही किसी पालतू कुत्ते को घर से बाहर निकाल दिया जाता है, वह सड़क पर जीने लायक नहीं रह पाता. उसे सड़क के कुत्ते नोचनोच कर खा जाते हैं पर खूंख्वार पालतू कुत्ते बच जाते हैं और यही आक्रमण करते हैं.

राजधानी दिल्ली के पालतू जानवरों की एक डाक्टर कहती हैं कि ऐसे परिवारों को कुत्ते नहीं पालने चाहिए, जिन के पास जगह की कमी हो या वे जो जानवरों के प्रति संवेदनशील न हों. आमतौर पर बच्चों को कुत्ता पालने का क्रेज होता है और उन के जन्मदिन पर अभिभावक या जानपहचान के लोग उपहार स्परूप उन्हें पप्पी देते हैं. पप्पी की भी परवरिश आसान नहीं होती.

लगभग 6 सप्ताह के पपीज गोद देने लायक होते हैं, लेकिन इस उम्र में उन की अच्छी तरह देखभाल करनी पड़ती है. 6 महीने तक पप्पी बिलकुल एक छोटे बच्चे की तरह व्यवहार करते हैं, जो मुंह में मिल जाए, काटे लेंगे, कहीं भी सूसूपौटी कर देंगे, लेकिन इस उम्र में गोद लेने पर कुत्तों को अपनी तरह से प्रशिक्षित किया जा सकता है और वे परिवार के सदस्यों के साथ जल्दी घुलमिल जाते हैं.

छोटी उम्र में घर आने वाले पपीज खुद को घर का एक सदस्य मानने लगते हैं. इन को समय पर टीके लगवाना, वक्त पर पौष्टिक खाना देना और साफसफाई रखना घर वालों की जिम्मेदारी है. जो परिवार यह जिम्मेदारी नहीं उठा पाते उन्हें पालतू जानवर सिरदर्द लगने लगते हैं. ऐसे व्यक्तियों या परिवारों को कुत्ता नहीं पालना चाहिए क्योंकि एक बार घर में पलने के बाद कुत्ते बाहर की दुनिया में जीने लायक नहीं रह जाते.

फायदे भी हैं

कुत्ते पालने के बड़े फायदे भी हैं. सुरक्षा की दृष्टि से कुत्ते बेहद वफादार होते हैं. दिल्ली के मल्टी स्टोरी अपार्टमैंट में रहने वाली उमा अपने 5 साल के बच्चे और पालतू कुत्ते को अकेला घर में छोड़ कर आराम से बाहर का काम कर आती है.

वे कहती हैं, ‘‘मेरा कुत्ता स्नूपी किसी अजनबी को घर के अंदर आने ही नहीं देता. वह हर समय मेरे बेटे के साथ साए की तरह चलता है. मैं खुद अगर बच्चे को जोर से डांटती हूं, तो स्नूपी मुझ पर भी भूंकता है. मेरा बेटा स्नूपी से इतना हिलामिला है कि उसे खुद ही नहलाता है, उस के खानेपीने का खयाल रखता है, उसे शाम को बाहर घुमाने ले जाता है.’’

पालतू कुत्ते घर में सिर्फ सुरक्षा की दृष्टि से ही नहीं रखे जाते. जानवरों के डाक्टर जोशी कहते हैं, ‘‘कुत्ते वफादार होते हैं, यह तो सब को पता है. इस के अलावा उन के घर पर रहने से तनाव छूमंतर हो जाता है. कुत्ते बहुत अच्छे स्ट्रैस बस्टर होते हैं. उन के साथ रहने पर बच्चों की इम्यूनिटी भी बढ़ जाती है और बच्चों को एक अच्छा साथी भी मिल जाता है. अकेलापून दूर भगाने में कुत्ते सब से अच्छे मित्र साबित होते हैं.’’

शहरों में एकल परिवारों के चलन की वजह से भी कुत्ते पालने वालों की संख्या बढ़ी है. जिस तरह आज अमेरिका और कनाडा में लगभग 90% नागरिक कोई न कोई पालतू जानवर घर में रखते हैं उस के पीछे अकेलापन सब से बड़ी वजह है. बाहर के देशों में तो कुत्तों के लिए अलग पार्क, सड़कें और मौल हैं और कैनल भी हैं जहां कुछ दिनों के लिए अपने पालतू को छोड़ कर छुट्टी पर जा सकते हैं.

कुत्ते पालने का चलन

कुत्ते घर के सदस्य की तरह होते हैं. विदेशों में बच्चों को शुरू से ही पालतुओं के प्रति संवेदनशील बनाया जाता है. जानवरों के साथ अपनत्व भरा बरताव, सहृदयता जरूरी है. कुत्ते के मालिकों को उन की पौटी उठाने और सड़क साफ करने में जरा हिचक नहीं होती. वहां ज्यादातर लोग अपने पालतुओं के पीछे हाथों में ग्लब्ज पहने एक पौलिथीन या पेपर बैग उठा कर चलते हैं ताकि उन के पालतू सड़क या शहर गंदा न करें. कुत्ते उन के लिए सिर्फ  स्टेटस सिंबल या प्रहरी नहीं होते.

भारत में मध्यवर्ग में कुत्ते पालने का चलन तो बढ़ गया, पर लोग अब तक सैंसिटिव नहीं हो पाए हैं. उन्हें यह काम नौकरों पर छोड़ना होता है जिन्हें जानवरों से जरा भी लगाव नहीं होता.

राजधानी में आवारा और परित्यक्त कुत्तों के लिए बने संस्थानों में ऐसे कुत्ते आते हैं, जो कभी पालतू थे. अच्छी नस्ल और प्रशिक्षित कुत्ते दूसरे कुत्तों की भीड़ में न ठीक से खा पाते हैं और न ही अपनी आवाज उठा पाते हैं. अकसर उन की आंखें नम रहती हैं और किसी की पुचकार के लिए उन के कान तरसते रहते हैं. बिस्कुट देने पर वे ?ापटते नहीं, बल्कि हाथ चाट कर खाते हैं. ऐसे कुत्तों को अगर दोबारा अडौप्ट कर भी लिया जाए, तो उन्हें नए परिवार में घुलनेमिलने में बहुत समय लगता है.

पेट शोच का आयोजन

इस समय देश में विभिन्न शहरों में डेढ़ सौ से अधिक पेट शोज आयोजित होते हैं, जिन में कुत्ते, बिल्ली, विभिन्न पक्षियों के अलावा खरगोश और सफेद चूहों की नस्लें बिक्री के लिए रखी जाती हैं. पालतुओं को खिलाया जाने वाला खास आहार, उन को सजानेसंवारने में ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं होती. उन्हें तो बस प्यार की जरूरत होती है. वैसे भी ज्यादा पैंपर करने पर कुत्ते चिड़चिड़े हो जाते हैं. उन्हें समयसमय पर दूसरे कुत्तों से मिलने देना चाहिए. आरामतलब कुत्ते कई बीमारियों के शिकार हो जाते हैं. अच्छी नस्ल के कुत्तों के लिए रोज 3 से 5 किलोमीटर चलना या दौड़ना जरूरी है. बिना व्यायाम के उन का खाना नहीं पचता और वे पेट की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं.

यह बात बेहद अफसोस की है कि बहुत लोग अपने पालतुओं को साल 2 साल रखने के बाद किसी को दे देना चाहते हैं. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने पालतुओं से बहुत बुरा बरताव करते हैं. कुत्तों को समय पर खाना न देना, मारनापीटना, सर्दी या गरमी में घर से बाहर रखना यह अमानवीय लगता है. अगर आप अपने पालतू को रखने लायक नहीं है, तो मत पालिए.

अगर पैट पाला तो उस के खमियाजे के लिए भी तैयार रहना चाहिए. अगर वह किसी को काट ले तो उसे आर्थिक मुआवजा देने में हिचकिचाएं नहीं.

 दिखावा क्यों

मधुरा जब शहर में चल रहे डौग शो को देखने पहुंची तो वहां पर मौजूद डौग जो अपने मालिकों के साथ वहां आए थे, देख कर चकित रह गई. एक से बढ़ कर स्टाइलिश ढंग से सजे, कीमती कपड़ों से लैस, परफ्यूम से महकते और जूते, कौलर, नैकटाई, रिंग जैसी ऐक्सैसरीज से सज्जित उन पेट्स को देखना किसी स्वप्नलोक से कम न था. उन के नेम टैग भी बहुत ही आकर्षक थे. वे इस तरह से अपने मालिक के साथ खड़े थे जैसे मानो किसी फिल्म की शूटिंग में आए हों और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हों.

पग, अमेरिकन, पिट, लेबराडोर, बौक्सर, डेशुंड, अफगान हाउंड, आइरिश वुल्फहाउंड, जरमन शेपर्ड, डाबरमैन, डायमेशियंस जैसे महंगे पेट्स वहां मौजूद थे, जो शानदार गाडि़यों में बैठ कर आए थे. डौग शो में आ कर उन्हें सर्वप्रथम बनने के लिए किसी तरह की ट्रिक नहीं दिखानी थी, बल्कि उन का चयन उन के कोट साइज, आदत और पसंद के  हिसाब से होना था.

तभी वहां से गुजरती एक महिला को मधुरा ने कहते सुना, ‘‘कितने मजे हैं इन पेट्स के. आलीशान गाडि़यों में घूमते हैं, बड़ीबड़ी कोठियों में रहते हैं और हम से भी महंगा खाना खाते हैं. कितना कठिन है आज के जमाने में एक बच्चे को पालना और लोग पेट्स पालते हैं.’’

उस महिला के कहने के अंदाज से झलक रहा था कि पेट्स पर इतना पैसा खर्चने की बात उसे अखर रही थी.

बन गए हैं स्टेटस सिंबल

चीन में एक तिब्बती मस्टिफ 1 करोड़ पाउंड में बिका था. यह बहुत ही आक्रामक गार्ड डौग है. जाहिर सी बात है कि जिस ने इसे खरीदा होगा. वह कोई मामूली आदमी तो होगा नहीं, बल्कि महंगे पेट पालने की हैसियत रखता होगा. कोई भी पैट जितना कीमती होता है या बेहतरीन नस्ल को पालने, उस के रखरखाव में 50 हजार रुपए महीना खर्च हो सकते हैं.

समाजशास्त्रियों का मानना है मर्सिडीज और सोलिटेयर्स को पीछे छोड़ते हुए पेट्स लेटैस्ट स्टेटस सिंबल बनते जा रहे हैं और उन के मालिकों को उन के लिए महंगे से महंगे प्रोडक्ट्स और सर्विसेज लेने में कोई परेशानी महसूस नहीं होती है. शायद यही वजह है कि इस समय भारत मं यह बाजार 500 करोड़ तक पहुंच चुका है और उन के लिए ब्रैंडेड फूड से ले कर इस समय यहां पपकेक, बैड तो उपलब्ध हैं ही साथ ही उन के बर्थडे की पार्टी किसी लग्जरी रिजोर्ट में करवाने का इंतजाम भी किया जाता है.

उन के लिए है हर चीज ब्रैंडेड

जीवनशैली का अनिवार्य अंग व अधिक से अधिक भारतीय परिवारों के पेट्स को रखने के चलन के कारण वे अब केवल कोई खेलने या मन बहलाने की चीज अथवा मात्र सुरक्षागार्ड ही नहीं रह गए हैं, बल्कि वे परिवार का एक अहम हिस्सा भी बन गए हैं. यदि एकल परिवार हो जिस में एक ही बच्चा हो या ऐसे परिवार जहां बच्चे भी न हों, पेट्स उन के लिए एक कीमती चीज बन गए हैं. ब्रैंडेड कपड़ों से ले कर फर्नीचर, खिलौने और फूड तो उपलब्ध हैं ही, साथ ही वीकैंड किसी स्पा में गुजरना ताकि मसाज हो सके, के लिए उन के मालिक कहीं भी जाने व मुंह मांगे दाम चुकाने को तत्पर रहते हैं तो इस की वजह है कि वे चाहते है कि  उन का पेट स्पैशल अनुभव करे.

जगहजगह खुल रही पेट्स शौप पर जा कर उन के लिए टीशर्ट से ले कर कैनल, किताबें, फीडिंग बाउल्स, चेन आदि खरीदी जा सकती है. उन के लिए बाजार में इतने विकल्प व वैराइटीज मौजूद हैं कि उन के मालिक उन्हें स्पैशल ट्रीटमैंट दे सकते हैं. टीवी पर दिखाए जाने वाले पेडीग्री फूड के विज्ञापन से यह तो साबित हो ही जाता है कि पेट्स को ले कर कौशंस हो चुके हैं कि उन के पेट्स का अधिकार रखते हैं और उन के मालिक इस बात को ले कर कौशंस हो चुके हैं कि उन के पेट्स को बढि़या से बढि़या चीजें व सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए. पेडीग्री फूड का 500 ग्राम का पैकेट 65 रुपए का आता है और 1000 रुपए तक उस की कीमत है. इस के अतिरिक्त डौग च्यू जिन का आ कर हड्डी, जूतों आदि जैसा होता है, वे भी मिलते हैं. वे भी 25 से 600 रुपए के बीच आते हैं. उन के लिए हेयर ब्रश, टूथब्रश, टूथपेस्ट, नेलकटर, शैंपू, हेयर टोनिक, परफ्यूम सब मिलते हैं.

पेट्स की हैल्थ की नियमित जांच और समयसमय पर लगने वाले वैक्सीन बहुत ही महंगे होते हैं. यहां तक कि उन्हें कैल्सियम भी खिलाया जाता है. किसी भी डौग क्लीनिक में चले जाएं तो पाएंगे कि कुछ डौग अपनी बारी आने की प्रतीक्षा में बैठे होते हैं. मंथली चैकअप, रेबीज के टीकों, ग्लूकोस ड्रौप उन्हें समयसमय पर दी जाती हैं.

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