नमक कितना ज्यादा चीनी कितनी कम

जरा सी बारिश होते ही हमारा मन गरमगरम चाय के साथ तले व मसाला बुरके हुए पकौड़ों के लिए ललचा उठता है. नमकीन पकौड़ों पर बुरके मसाले का तीखापन जब चाय के मीठे से टकराता है, तो मीठी चाय भी तीखी, मगर फीकी लगने लगती है और हम बिना सोचेसमझे चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए चाय में एक शुगर क्यूब या फिर 1 चम्मच चीनी और डाल देते हैं. यही नहीं, गरमी के मौसम में पता नहीं कितनी बार मीठीनमकीन मसालेदार शिकंजी पी लेते हैं. कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम में तो जैसे हम सब की जान बसती है.

इस तरह हमें पता ही नहीं चलता कि वक्तबेवक्त खानेपीने की उठती तलब को शांत करने और अपनी जीभ का स्वाद बढ़ाने के लिए हम अनजाने में अपने खानपान में नमक, मिर्चमसालों और चीनी की मात्रा बेवजह ही बढ़ाते रहते हैं. चीनी, नमक और मसाले डालने से उस समय तो व्यंजन का स्वाद निश्चित रूप से कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन इन के दुष्प्रभाव बाद में पता चलते हैं, जो बहुत ही कष्टप्रद होते हैं, क्योंकि ये गंभीर शारीरिक और मानसिक रोगों का कारण बनते हैं. वैसे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए चीनी, नमक और मसालों का विशेष महत्त्व है. लेकिन एक सीमित मात्रा तक प्रयोग करने पर ही ये लाभ पहुंचाते हैं. इन का जरूरत से ज्यादा प्रयोग हमारे शरीर को फायदे के बजाय नुकसान पहुंचाता है. अध्ययन बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों से हमारे खानपान में चीनी, नमक और मसालों का सेवन कई गुना बढ़ा है.

आज हमारी दिनचर्या ही कुछ ऐसी हो गई है कि अपने खानपान में इन तीनों को कम करना सचमुच एक कठिन काम बन चुका है. इस का एक कारण डब्बाबंद खानपान है. 3-4 दशक पहले तक डब्बाबंद खानपान का चलन न के बराबर था, इसलिए समस्याएं इतनी नहीं थीं. दरअसल, डब्बाबंद खाने को लंबे समय तक सुरक्षित और फ्रैश रखने के लिए उस में सोडियम और चीनी अधिक मात्रा में डाली जाती है. पर आजकल डब्बाबंद खानपान का चलन जिस तरह से बढ़ा है, उसी का परिणाम हैं- उच्च रक्तचाप, अस्थमा, बढ़ता मोटापा और फैलती कमर जैसी परेशानियां.

आइए, हम आप को बताते हैं कि हमें नमक, चीनी और मसाले कितने और कैसे खाने चाहिए :

ज्यादा चीनी खतरे की घंटी

मीठा हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है. इस से हमें शक्ति व ऊर्जा प्राप्त होती है. लेकिन जरूरत से ज्यादा मीठा खाने से वजन बढ़ सकता है. चीनी में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है. वैसे चीनी में कोई विटामिन, मिनरल या  पौष्टिक तत्त्व नहीं होता. यह मानव शरीर को सिर्फ ऊर्जा व शक्ति प्रदान करती है और वह भी 1 ग्राम में 4 कैलोरी की दर से. इस तरह अधिक मिठाइयां, ठंडे पेय, बिस्कुट व चाकलेट लेने से आहार का संतुलन बिगड़ जाता है और आहार की पौष्टिकता नष्ट हो जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिदिन 1,600 कैलोरीयुक्त आहार लेने वाला युवा व स्वस्थ व्यक्ति प्राकृतिक पदार्थों से प्राप्त होने वाली चीनी के अतिरिक्त 6 छोटे चम्मच यानी 24 ग्राम चीनी बिना किसी जोखिम के ले सकता है. इसी तरह 2,200 कैलोरीयुक्त आहार लेने वाला व्यक्ति 12 चम्मच यानी 48 ग्राम चीनी ले सकता है. मीठे के नाम पर हम ज्यादा कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम आदि लेते हैं, जो सिर्फ कैलोरीज बढ़ाते हैं, शरीर को किसी भी प्रकार का पोषण नहीं देते. कोल्ड ड्रिंक्स की जगह सादा ठंडा पानी, डब्बाबंद फू्रट जूस की जगह आधा कप 100% ताजे फलों का रस और खाने के बाद मीठे की जरूरत महसूस हो तो खीर या हलवे की जगह ताजे फल लेने चाहिए.

शरीर में जरूरत से कम या ज्यादा चीनी होने पर आप के शरीर में खतरे की घंटी बजने लगती है. रक्त में चीनी की मात्रा बढ़ने पर प्यास और भूख बहुत लगती है और पेशाब भी बारबार आता है. दूसरी तरफ अगर आप खाने के समय में जरूरत से ज्यादा गैप रखते हैं, कम खाते हैं, व्यायाम ज्यादा करते हैं या फिर खाली पेट अलकोहल का सेवन करते हैं, तो रक्त में चीनी का स्तर गिरने से आप बेजान सा महसूस करते हैं.

नमक का प्रयोग

नमक हमारे आहार का एक अनिवार्य हिस्सा है. भारत में प्रति व्यक्ति नमक का खर्च 15 ग्राम प्रतिदिन है. ‘द साइंटिफिक कमेटी औन न्यूट्रीशियंस’ हर व्यक्ति को प्रतिदिन 4 ग्राम नमक लेने की सलाह देती है. सोडियम हमारे शरीर के विकास के लिए अत्यंत जरूरी तत्त्व है, लेकिन सोडियम का जरूरत से ज्यादा प्रयोग एक नहीं अनेक समस्याओं को जन्म देता है. जैसे, अस्थमा, छाती में जलन, अस्थि रोग, सूजन, उच्च रक्तचाप आदि. इन सब रोगों से बचने के लिए हमें नमक का प्रयोग बहुत सोचसमझ कर करना चाहिए. शरीर में नमक की कमी की वजह से मांसपेशियों में ऐंठन, सिर चकराना और पैरों आदि में सूजन जैसी परेशानियां हो सकती हैं, जो आगे चल कर गंभीर स्नायु रोग का रूप धारण कर सकती हैं. आहार विशेषज्ञा शायस्ता आरजू बताती हैं कि कम नमक खाने वाला व्यक्ति बहुत ज्यादा पानी पी लेता है, तो वह वाटर इंटौक्सिकेशन का शिकार हो सकता है. नमक कई प्रकार का होता है, लेकिन आमतौर पर घरों में पैक्ड आयोडाइज्ड नमक ही प्रयोग होता है. बाजार में कई प्रकार के नमक उपलब्ध हैं, लेकिन किसी भी प्रकार के नमक के प्रयोग से पहले उस की विशेषताओं के बारे में जान लेना चाहिए.

नमक नमक में अंतर

समुद्री नमक : यह आम नमक की तरह ही पोषक होता है. इस नमक में पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयोडीन जैसे तत्त्व प्राकृतिक रूप से मौजूद रहते हैं. यह देखने और स्वाद में दूसरे नमक से भिन्न होता है. समुद्री नमक में आम नमक के मुकाबले खनिजों की मात्रा अधिक होती है और इस में समुद्र की महक महसूस की जा सकती है. 

अपरिष्कृत पहाड़ी नमक : इस नमक में विभिन्न प्रकार के 84 से अधिक खनिज पाए जाते हैं, लेकिन इस का प्रयोग खाद्यपदार्थों में स्वाद या महक के लिए नहीं किया जाता. आमतौर पर भुने आलू, मीट, सी फूड या पोल्ट्री फूड से बने व्यंजनों में इस का प्रयोग किया जाता है.

काला नमक : इस का प्रयोग विशेष रूप से स्वाद और महक के लिए किया जाता है, लेकिन ध्यान रहे इस के अधिक प्रयोग से जोड़ों में दर्द, खून की कमी, थकान और रक्त नलिकाओं में अवरोध की शिकायत हो सकती है. एक अध्ययन से पता चला है कि जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान काले नमक का प्रयोग अधिक करती हैं, उन के बच्चे कमजोर पैदा होते हैं और बीमारियों से लड़ने की उन की क्षमता दूसरे बच्चों के मुकाबले कम होती है.

मसालों का प्रयोग

मसाले भोजन को सुगंधित और स्वादिष्ठ बनाने के साथसाथ खाने को रिच लुक प्रदान करते हैं. चीनी, नमक और फैट का आदर्श विकल्प हैं- जड़ीबूटियां और मसाले. मसालों के महत्त्व को रेखांकित करते हुए आहार विशेषज्ञा विजयलक्ष्मी आयंगर बताती हैं, ‘‘मसालों में फाइटो न्यूट्रीऐंट्स होते हैं, जो हमारे शरीर के हैल्दी सैल्स को कैंसर सैल्स में परिवर्तित होने से रोकते हैं.’’ नमक की तरह ही कोई भी पैमाना मसालों के सुरक्षित प्रयोग और विषाक्त तत्त्वों के बारे में सही और पूरी जानकारी नहीं देता. यह बात 100% सही है कि कम मात्रा में और नियमित अंतराल से उपयोग किए गए मसाले हमें सुरक्षा प्रदान करते हैं. मसाले हमें छाती में जलन, आंखों में चुभन, बढ़ते कोलैस्ट्रौल, कैंसर, मधुमेह, जोड़ों के दर्द और अलसर जैसी बीमारियों से राहत पहुंचाते हैं. कई वर्षों से मसालों का प्रयोग बुखार, पेट दर्द, त्वचा रोग, बदहजमी, गले के संक्रमण, सर्दीजुकाम आदि के उपचार के लिए होता आ रहा है. आहार विशेषज्ञा कंचन सग्गी का कहना है, ‘‘मसाले किसी भी बीमारी को पूरी तरह से ठीक तो नहीं कर सकते, लेकिन उस बीमारी की गंभीरता को काफी हद तक कम कर सकते हैं और अस्थाई रूप से आराम भी पहुंचाते हैं.’’

मसालों की खूबियां

लौंग : दांत दर्द से लौंग तुरंत राहत प्रदान करती है. यह एक बहुत अच्छे माउथ फ्रैशनर का काम भी करती है.

अदरक या सोंठ : कोलैस्ट्रौल कम करने से ले कर रक्तचाप नियंत्रित करने और थकान दूर करने तक में सहायक है.

हलदी : हलदी स्वाद में कड़वी और प्रभाव में गरम होती है. यह कफ और पित्त के दोषों को दूर करती है. कटने, छिलने और जलने पर हलदी का प्रयोग ऐंटीसेप्टिक की तरह भी किया जाता है. इसी गुण के कारण हलदी का प्रयोग स्वास्थ्य और सौंदर्यवर्धन के लिए भी होता है.

दालचीनी : यह एक पेड़ की छाल होती है. यह बलगम, गैस, खुजली, हृदय रोग, मूत्राशय रोग, बवासीर, पेट के कीड़े, सायनस दूर करने और वीर्य बढ़ाने में सहायक है.

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हिदायतें जो Diabities से रखें दूर

मधुमेह यानी डायबीटिज खतरनाक रोग है, जो शरीर को धीरेधीरे खोखला कर देता है. इस बीमारी में रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है. चूंकि हमारे शरीर के हर हिस्से में रक्तसंचार होता है, इसलिए मधुमेह होने पर शरीर का कोई भी हिस्सा खराब हो सकता है. मधुमेह होने पर हार्टअटैक, किडनियों के खराब होने और आंखों की रोशनी तक चले जाने की बहुत संभावना रहती है.

पहले यह बीमारी एक निश्चित वर्ग और उम्र के लोगों को ही होती थी, लेकिन वर्तमान में असंतुलित खानपान और अव्यवस्थित रहनसहन के कारण बच्चों, बूढ़ों और युवाओं सभी को यह बीमारी अपनी चपेट में ले रही है. इस बीमारी से बचने और नजात पाने के निम्न उपाय हैं. जिन पर अमल कर के मधुमेह से बचा जा सकता है:

क्या करें

वजन कम करें: अकसर लोग अपने खानपान पर नियंत्रण नहीं रख पाते. दिन में जितनी बार भी भूख लगती है कुछ भी खा कर पेट भर लेते हैं. ऐसा करने से वजन तो बढ़ता ही है साथ ही असंतुलित आहार शरीर को बीमारियों का घर भी बना देता है. इन बीमारियों में ओबेसिटी यानी मोटापा बेहिसाब और बेवक्त खाने का ही नतीजा होता है. ओबेसिटी के शिकार को डायबिटीज आसानी से अपना शिकार बना लेती है. लेकिन इस का शिकार होने से बचा जा सकता है और इस के लिए ज्यादा मशक्कत करने की भी जरूरत नहीं पड़ती. बस, अपने आहार को छोटेछोटे मील्स में विभाजित कर दीजिए. हर मील का समय निर्धारित हो. इस से आप की भूख भी नियंत्रित हो जाएगी और वजन भी नहीं बढ़ेगा. इस के अलावा वजन कम करने के लिए दिन में 1 बार 30 से 45 मिनट तेज चलने की आदत डालें. इस से ब्लडशुगर कंट्रोल में रहती है. हफ्ते में 4-5 दिन तेज चलें.

स्ट्रैस से रहें दूर: मधुमेह और तनाव का गहरा संबंध है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सिर्फ काम को ही समय दे पाते हैं. ऐसे में अपने बारे में सोचने और कुछ करने का समय ही नहीं मिल पाता. इस के चलते लोग स्ट्रैस से घिर जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार तनाव एक मानसिक बीमारी है, जो मनुष्य को मधुमेह जैसी बीमारी के मुंह में धकेल देती है. इसलिए कोशिश करें कि दिन में कुछ समय अपने लिए जरूर निकालें. तनाव से दूर रहने के लिए व्यायाम सब से अच्छा विकल्प है. दिन में 1 बार 15 से 20 मिनट व्यायाम जरूर करें.

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डैंटल हाइजीन: यदि आप को मधुमेह है, तो आप को अपने दांतों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि मधुमेह से पीडि़तों को बैक्टीरियल इन्फैक्शन और मसूड़ों से जुड़ी बीमारी होने की संभावनाएं रहती है. इस के लिए आप दिन में 2 बार दांतों में ब्रश करें. साथ ही समयसमय पर डैंटिस्ट से भी दांतों की जांच कराते रहना चाहिए.

शुगर लैवल की जांच: मधुमेह होने पर रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है. इस स्तर को कम करने से पहले उसे जानने के लिए शुगर लैवल टैस्ट करवाना पड़ता है, जिस से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा पता चलती है. यदि आप मधुमेह के मरीज हैं तो हर तीसरे महीने इस की जांच जरूर करवाएं.

आंखों की जांच: मधुमेह के मरीजों को कम दिखने की भी समस्या होती है. इसलिए हर 6 महीने में 1 बार आंखों का चैकअप जरूर करवाएं.

खाली पेट फल न खाएं: मधुमेह के मरीजों को कभी खाली पेट फल नहीं खाना चाहिए. खाना खाने के बाद फल खाएं.

क्या न करें

मीठा: यदि आप मधुमेह के शिकार हैं तो आप को सब से पहले मीठे को त्यागना होगा. खासतौर पर चौकलेट, मिठाई, कोल्डड्रिंक्स, आइसक्रीम. शहद और ग्लूकोज युक्त चीजें तो बिलकुल न खाएं.

फैटी फूड: फैटी फूड यानी डीप फ्राइड और जंक फूड भी मधुमेह के खतरे को बढ़ाता है. पर जो मधुमेह के शिकार हैं उन्हें फ्रैंच फ्राइज, कौर्न चिप्स जैसी चीजों से परहेज करना चाहिए.

चावलों से बने खाद्यपदार्थ: मधुमेह के मरीजों के लिए चावल और चावलों से बनी चीजें भी बेहद हानिकारक हैं, क्योंकि चावल आसानी से शुगर में बदल जाता है. इसलिए इडली, पोहा, ढोकला, डोसा और चावल के आटे से बनी चीजों से मधुमेह के मरीजों को दूर रहना चाहिए.

मधुमेह के मरीजों को शराब या फिर हर उस पदार्थ से जिस में अलकोहल हो, बचना चाहिए, क्योंकि अलकोहल में शुगर कंटैंट होता है.

आम, केला, अंगूर, खरबूजा और चीकू जैसे फलों से भी मधुमेह के मरीजों को दूर रहना चाहिए. इसी तरह आलू, कद्दू, चुकंदर, गाजर, अरवी जैसी सब्जियों से भी परहेज करना चाहिए.

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क्या खाएं

फाइबर: ब्लड ग्लूकोज लैवल को नियंत्रित रखने के लिए अपने आहार मे ब्राउन राइस, पत्तागोभी, भिंडी, अमरूद, अनार और गेहूं शामिल करें, क्योंकि इन में फाइबर होता है जो डायबिटीज में फायदा करता है.

सलाद: मधुमेह के मरीजों को सलाद जरूर खाना चाहिए.

मेथी: मधुमेह के मरीजों के लिए मेथी बहुत अच्छी दवा है. इस के लिए रात भर मेथी को पानी मे भिगो कर रखें और सुबहउस के पानी को पी लें. इस से ब्लड में जाने वाले अनावश्यक ग्लूकोज को रोका जा सकता है.

दालचीनी: रोज 1/2 चम्मच दालचीनी खाने से ब्लडशुगर लैवल और कोलेस्ट्रौल लैवल नियंत्रित रहेगा. साथ ही दालचीनी मांसपेशियों और लिवर के लिए भी लाभदायक है.

कुछ दिनों से मुझे पेशाब करने में परेशानी हो रही है, मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल-

मेरी उम्र 50 वर्ष है. मुझे 10 वर्षों से शुगर की शिकायत है, जिस की दवा चल रही है. मगर कुछ दिनों से मुझे पेशाब करने में परेशानी हो रही है. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब-

आप कुछ अच्छी आदतों को अपना कर तथा कुछ सावधानी बरत कर अपनी शुगर को नियंत्रित कर सकते हैं तथा सामान्य जीवन जी सकते हैं. आप को स्मोकिंग से बचना चाहिए. अपना ब्लड प्रैशर तथा कोलैस्ट्रौल लैवल नियंत्रित रखें, रोजाना व्यायाम करें, खाने में चीनी की तथा कार्बोहाइड्रेट की मात्रा में कमी लाएं, पानी ज्यादा पीएं, ज्यादा फाइबर वाली चीजें खाएं और विटामिन डी का अनुकूल स्तर बनाए रखें.

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हम सभी जानते हैं कि खाने-पीने के रेडीमेड सामानों और सॉफ्ट ड्रिंक्स के जरिए हम सबसे ज्यादा शुगर (चीनी) कंज्यूम करते हैं. ये शूगर ही हमारे शरीर को कई तरह से सबसे ज्यादा नुकसान भी पहुंचाती है.

इस एक्स्ट्रा शुगर से आपकी सेहत को कोई भी फायदा नहीं होता बल्कि जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक ये शरीर में घटिया किस्म के कॉलेस्ट्रोल को बढ़ावा देती है जिससे आगे चलकर दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है.

ज्यादा शुगर वाली खाने-पीने की चीजें इस्तेमाल करने से डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है. एडल्ट्स को करीब 30 ग्राम शुगर एक दिन में कंज्यूम करने की सलाह दी जाती है जबकि 4 से 6 साल के बच्चों के लिए ये मात्रा 19 ग्राम और 7 से 10 साल के बच्चों के लिए 34 ग्राम है.

अगर आप मीठा खाने के बहुत ज्यादा शौकीन हैं और डायबिटीज जैसे इसके नुकसानों से भी बचे रहना चाहते हैं तो न्यूट्रीशन एक्सपर्ट डॉक्टर मर्लिन ग्लेनविल बता रहीं हैं ऐसे 6 तरीके जिससे आप अपनी आदत बदले बिना रह सकते हैं डायबिटीज से दूर.

1. बाहर संभल कर खाएं: सबसे ज्यादा शुगर बाहर से खाने-पीने वाली चीजों के जरिये कंज्यूम की जाती हैं. ऐसे में थोड़े सी सतर्कता से आप मीठा खाकर भी बीमारियों से बचे रह सकते हैं. आपको करना बस इतना है कि स्पैगिटी सॉस और मियोनीज की जगह ऑर्गनिक योगार्ट इस्तेमाल करें और ऐसी दुकानों पर खाएं जो अपने सॉस खुद तैयार करते हैं. घर में बने सॉस में अपेक्षाकृत कम शुगर होती है.

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डाईबेसिटी को नियंत्रित करने के लिए 7 डाइट टिप्स

एक रिसर्च के मुताबिक जवान बच्चों में डायबिटीज अधिक पाई जा रही है. इन बच्चों में डायबिटीज के साथ साथ मोटापे की समस्या भी देखने को मिलती है. अतः इन दोनों चीजों को साथ मिलाकर डाईबेसिटी नाम दिया गया है. यह ज्यादातर 20-79 साल के लोगों में अधिक देखी जाती है.

आपकी डाइट आपकी बीमारी को ठीक करने या उसे और बढ़ाने की जिम्मेदार होती है. अतः यदि आप डाईबेसिटी के मरीज हैं तो आपको अपनी डाइट का खास ख्याल रखना होता है. तो आइए जानते हैं कुछ डाइट टिप्स के बारे में जिन्हें आप फॉलो कर सकते हैं.

1. स्वयं को हाइड्रेटेड रखें :

स्वयं को हाइड्रेटेड रखने के लिए सोड़ा या अन्य प्रकार की ड्रिंक्स को अवॉइड करें और सादे पानी का प्रयोग करें. आपको अपनी शुगर लेवल नियंत्रण में रखनी होती है इसलिए किसी भी शुगर ड्रिंक का प्रयोग न करें अन्यथा आपकी डायबिटीज और अधिक भयंकर रूप ले सकती है. अतः स्वयं को हाइड्रेटेड रखें और इसके लिए केवल पानी ही पिएं.

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2. हेल्दी कार्ब्स खाएं :

आपको अपनी डाइट में कम से कम कार्ब्स रखने चाहिए. और जितने कार्ब्स आप अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं उन्हें हेल्दी रखें. बहुत ज्यादा कार्ब्स से भी आपका डायबिटीज का खतरा और अधिक बढ़ सकता है.

3. अपनी डाइट में होल ग्रेंस शामिल करें :

अपनी डाइट में होल ग्रेन जैसे ब्राउन चावल, होल ओट्स आदि चीजों को शामिल करें. आपको उन चीजों को अपनी डाइट से हटा देना चाहिए जिनमें कम फाइबर होता है जैसे सफेद ब्रेड, सफेद चावल व बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड.

4. फाइबर से युक्त डाइट रखें :

आपको हर चीज एक सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए और केवल हेल्दी चीजें ही खानी चाहिए. आप अपनी डाइट में फाइबर से भरपूर चीजें शामिल कर सकते हैं. इससे आपकी डायबिटीज़ नियंत्रित होने में मदद मिलेगी और आपकी ब्लड शुगर भी नियंत्रित होगी. इसके लिए आप ब्रोकली, स्प्राउट, गाजर, फूल गोभी व फलियां आदि चीजें शामिल कर सकते हैं.

5. रेड मीट खाएं :

यदि आप कुछ प्रकार का रेड मीट जैसे बेकन, बीफ आदि खाना पसंद करते हैं तो इनसे आपको हृदय से सम्बन्धित समस्याएं हो सकती हैं जिससे आपको कैंसर का भी खतरा हो सकता है. इसलिए इन रेड मीट की बजाए आप अंडे, मछली व पोल्ट्री के पदार्थ खा या पी सकते हैं. बीन्स, मटर व दाल आदि भी फाइबर से भरपूर होते हैं और अपने ग्लूकोज को भी ज्यादा प्रभावित नहीं करते हैं. अतः आप इनको भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.

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6. हेल्दी फैट्स को शामिल करें :

यह तो आपको पता ही होगा कि यदि आप ज्यादा फैट खाते हैं तो आप ज्यादा मोटे होते हैं और जिन लोगों को डायबिटीज होती है उन्हें अपने मोटापे का भी खास ख्याल रखना पड़ता है. इसलिए मोटापे को कंट्रोल करने के लिए आपको केवल वहीं फैट्स खाने चाहिए जो आपकी सेहत को ज्यादा नुक़सान न पहुंचाएं और जो आपके शरीर के लिए हेल्दी हों. ऐसे फैट का उदाहरण अन सैचुरेटेड फैट होता है.

7. एडेड शुगर को खाएं :

यदि आप ज्यादा शुगर खाते हैं तो आप बहुत ही बड़ी गलती कर रहे हैं. अपनी डाइट से जितना हो सके उतना शुगर को कट कर दें. आप चाहें तो ऐसी चीजें खा सकते हैं जिनमें नेचुरल शुगर होती है जैसे कुछ फल. लेकिन आप इन चीजों को भी केवल सीमित मात्रा में ही खाए. अन्यथा आपकी शुगर बढ़ सकती है. यदि आप जूस, काफी आदि ड्रिंक्स के ज्यादा आदी हो गए हैं तो आप इन्हें बिना शुगर एड किए पी सकते हैं. इससे आपको ज्यादा नुक़सान नहीं होगा. इसके अलावा आप स्नैक्स भी वही खाएं जिनमे शुगर की मात्रा बहुत ही कम हो.

डॉ दीपक वर्मा, इंटरनल मेडिसिन, कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, गाजियाबाद

त्वचा से लेकर वीर्य के लिए लाभकारी है प्याज, जानिए और भी गुण

हमारे रोज रोज के खानपान में प्याज एक अहम हिस्सा है. खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए प्याज जरूरी है, साथ में अपने सेहतमंद गुणों के कारण ये और अधिक खास हो जाता है. इस खबर में हम आपको प्याज से होने वाले फायदों के बारे में बताएंगे.

सर्दी जुकाम में है लाभकारी

सर्दी जुकाम और कफ की समस्या में भी प्याज काफी असरदार होता है. इस दौरान इसके सेवन से गले को काफी आराम मिलता है. कफ होने पर प्याज के रस में मिश्री मिलाकर चाटने से काफी फायदा मिलता है.

बालों का रखे ख्याल

बालों के झड़ने में भी ये काफी असरदार होता है. अगर आपके बाल झड़ रहे हो तो आपको प्याज का सेवन खाने में करना चाहिए. इससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं.

त्वचा के लिए है फायदेमंद

आपको बता दें कि प्याज में एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-एलर्जीक, एंटी-औक्सीडेंट और एंटी-कार्सिनोजेनिक गुण होते हैं. अपने इन गुणों के कारण ये कई तरह के रोगों में बेहद लाभकारी हो जाता है. इससे बहुत सी बीमारियां दूर होती हैं, कई लोगों का ये भी मानना है कि प्याज के नियमित सेवन से लोगों की आयु भी अधिक होती है. इसके साथ साथ त्वचा की झुर्रियों में भी ये बेहद लाभकारी है   और इससे त्वचा में रौनक बरकरार रहती है.

वीर्य के लिए है फायदेमंद

अपनी इन खूबियों के अलावा वीर्यवृद्धि के लिए भी सफेद प्याज के रस को शहद के साथ इस्तेमाल किया जाता है. नपुंसकता को दूर करने में ये काफी असरदार होता है.

डायबीटिज में है असरदार

डायबिटीज के मरीजों के लिए भी कच्चा प्याज काफी लाभकारी होता है. इसे खाने से शरीर में इंसुलिन पैदा होती है. शरीर में शुगर के लेवल को बैलेंस करने में भी प्याज का अहम योगदान होता है.

 

डाइबिटीज को हराना चाहती हैं तो आज ही अपनाएं ये डाइट

आज लोगों के बीच तेजी से फैलने वाली बीमारियों में से एक है डायबिटीज. समय के साथ इसका रूप भयावह होता जा रहा है, ये एक जानलेवा बीमारी के तौर पर सामने आई है. ये बीमारी शरीर में इंसुलिन का अच्छे से प्रोड्कशन ना होने के कारण होती है. जानकारों की माने तो अगर डायबिटीज को नियंत्रण में न रखा जाए तो इससे किडनी और दिल की बीमारी होने के साथ व्यक्ति का वजन भी बढ़ने लगता है.

इस खबर में हम आपको कुछ घरेरू चीजों के बारे में बताएंगे जिसके नियमित प्रयोग से आप इस बीमारी से निजात पा सकती हैं.

तांबे के बर्तन में पिएं पानी

जानकारों की माने तो डाइबिटिक मरीजों को तांबे के बर्तन में पानी पीना पेट के लिए काफी असरदार होता है. इसके लिए तांबे के बर्तन में पानी भरकर रातभर रख दें, सुबह उठकर उस पानी को पीलें. इससे तांबे के एंटीऔक्सीडेंट और एंटी इंफ्लामेट्री गुण पानी में आ जाते हैं, जो डायबिटीज को कंट्रोल में रखने में मदद करते हैं.

मेथी का दाना

कई स्टडीज में ये बात स्पष्ट हुई है कि डाइबिटीज को कंट्रोल करने में मेथी का दाना काफी लाभकारी है. इस पर हुए शोधों के मुताबिक , रोजाना गर्म पानी में भीगी हुई 10 ग्राम मेथी दाने का सेवन करने से टाइप-2 डायबिटीज कंट्रोल में रहती है. मेथी दाने में मौजूद फाइबर धीरे-धीरे ही ब्लडस्ट्रीम में शुगर को रिलीज करता है.

डाइबिटीज मरीजों को केवल मीठी चीजों को छोड़ना ही काफी नहीं होता, बल्कि उन्हें अपनी डाइट में बहुत सी चीजें जोड़नी होती हैं. इस रोग के मरीजों को करेला, आंवला और एलोवेरा जैसे खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट से जोड़ना चाहिए. डाइबिटीज में ये तत्व काफी असरदार होते हैं. आंवला में मौजूद फाइबर डायबिटीज के मरीजों को बहुत फायदा पहुंचाता है.

इन महिलाओं को होती है डाइबिटीज की परेशानी

पुरुष हो या महिलाएं सबके लिए डाइबिटीज किसी चुनौती से कम नहीं है. इस परेशानी से बचने के लिए जरूरी है कि आप शांत रहें, कूल रहें किसी भी तरह की परेशानी में अपना पौजिटिव अप्रोच रखें. आपके स्वभाव में कई तरह की गंभीर बीमारियों का राज झुपा है.

हाल ही में हुई एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि जो महिलाएं पौजिटिव अप्रोच के साथ अपना जीवन गुजारती हैं, उनमें टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बहुत कम होता है. यह दावा मेनोपौज के बाद महिलाओं पर की गई स्टडी में किया गया है.

इस स्टडी में वूमेन हेल्थ इनिशिएटिव के आंकड़ो का इस्तेमाल भी किया गया है. इस शोध में करीब एक लाख तीस हजार महिलाओं को शामिल किया गया था. इन महिलाओं को शुरू में डाइबिटीज की परेशानी नहीं थी. लेकिन बाद में इनमें से कइयों को डाइबिटीज की परेशानी हुई.

स्टडी में सकारात्मक और नकारात्मक स्वभाव की महिलाओं की तुलना की गई. शोध में शामिल एक एक्सपर्ट की माने तो किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व जीवनभर एक समान ही रहता है. यही कारण है कि नेगेटिव स्वभाव वाली महिलाओं को पॉजिटिव स्वभाओं वाली माहिलाओं के मुकाबले डायबिटीज का खतरा अधिक होता है.

उन्होंने आगे बताया कि महिलाओं के व्यक्तित्व से हमें ये जानने में मदद मिलेगी कि उन्होंने डायबिटीज होने की कितनी संभावना है. स्टडी के नतीजों में यह भी सामने आया कि मेनोपौज के बाद नेगेटिव स्वाभाव और डायबिटीज होने का गहरा संबंध है.

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