Skincare mistakes : खूबसूरत दिखना हर महिला की इच्छा होती है. इसी चाह में कई बार हम नए-नए सीरम, टोनर और एक्टिव इंग्रीडिएंट्स आज़माने लगते हैं. लेकिन जब देखभाल जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो यह “ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम” का रूप ले लेती है.
क्या है ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम?
जब हम अपनी त्वचा की वास्तविक जरूरत को समझे बिना ट्रेंड देखकर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगते हैं, बार-बार स्क्रब या एक्सफोलिएशन करते हैं और कई एक्टिव्स एक साथ लगाने लगते हैं, तो त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत (स्किन बैरियर) कमजोर हो जाती है. यहीं से समस्याएं शुरू होती हैं.
लक्षण पहचानें
- जलन, लालपन या खुजली
- अचानक दाने या ब्रेकआउट
- त्वचा का अत्यधिक ड्राय या ऑयली होना
- क्रीम लगाते ही चुभन महसूस होना
ये संकेत बताते हैं कि त्वचा को आराम और रिपेयर की जरूरत है.
मुख्य कारण
- सोशल मीडिया ट्रेंड्स का अंधानुकरण
- एक साथ कई एक्टिव्स (रेटिनॉइड, विटामिन C, AHA-BHA) का प्रयोग
- बार-बार क्लींजिंग और एक्सफोलिएशन
- अपनी स्किन टाइप को न समझना
क्या करें?
स्किनकेयर में “कम ही ज्यादा है” का सिद्धांत अपनाएं. एक समय पर केवल एक एक्टिव इस्तेमाल करें. हफ्ते में 1–2 बार से अधिक एक्सफोलिएशन न करें. यदि माइल्ड क्लींजर, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन से भी जलन हो रही हो, तो कुछ दिनों के लिए केवल बेसिक रूटीन अपनाएं, ताकि त्वचा स्वयं को रिपेयर कर सके.
नया प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले अपने हाथ या कान के पीछे के हिस्से पर पैच टेस्ट अवश्य करें. रेटिनॉइड, एसिड या विटामिन C जैसे एक्टिव्स का प्रयोग त्वचा विशेषज्ञ की सलाह से करें. रोज मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन लगाएं. रेटिनॉइड इस्तेमाल करते समय “सैंडविच मेथड” (मॉइस्चराइजर-रेटिनॉइड-मॉइस्चराइजर) अपनाने से जलन कम हो सकती है.
संतुलित और समझदारी भरी देखभाल ही स्वस्थ और दमकती त्वचा का आधार है.
