इंडस्ट्री में ‘परफेक्शनिस्ट’ के नाम से परिचित अभिनेता आमिर खान ने फिल्म ‘कयामत से कयामत’ फिल्म से अपने कैरियर की शुरुआत की. आज वे एक सफल निर्माता, निर्देशक, स्क्रीनप्ले राइटर, टीवी प्रस्तुतकर्ता और एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं. वे बौलीवुड की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म बनाने की श्रेणी में आते हैं. उनकी अधिकतर फिल्मों के  सफल होने में उनका खुद हर फिल्म को बनाने में सक्रिय होना है. उन्हें साल 2003 में पद्मश्री और वर्ष 2010 में पद्मभूषण अवार्ड भी मिल चुका है. हाल ही में उनकी फिल्म ‘ठग औफ हिन्दोस्तान’ बौक्स औफिस पर अच्छी नहीं चली, जिसे वे अपनी गलती मानते हैं. अभी उन्होंने अपनी प्रोडक्शन हाउस में एक फिल्म ‘रूबरू रोशनी’ बनायीं, जिसे सोशल मीडिया और टीवी पर प्रसारित की गया. फिल्म की सफलता पर बातचीत हुई, पेश है अंश.

इस फिल्म को करने की इच्छा कैसे हुई?

ये एक सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म है, जब इसे निर्देशक स्वाति चक्रवर्ती ने मुझे बताया कि वह क्षमा याचना पर एक फिल्म बनाना चाहती हैं, जिसमें 3 कहानी है और सच्ची है, तो मुझे बहुत अच्छा लगा. मैंने सोचा कि पूरी दुनिया में हम सब किसी को माफ करना भूल गए हैं. हमारी सहनशक्ति कम होती जा रही है. इसलिए इसके बारें में बात करना जरुरी है. अगर आप किसी को माफ करते हैं, तो सबसे पहले आप खुद के घाव को भरते हैं और आपका भविष्य खराब नहीं होता. हर व्यक्ति को ये ध्यान रखना चाहिए कि अगले की सुने उसे कहने का मौका दें, तभी एक अच्छा माहौल आपके आस-पास बन सकता है.

फिल्म ‘रूबरू रोशनी’ का शीर्षक कैसे दिया? इसका अर्थ क्या है?

रूमी की एक इंग्लिश कविता है, जिससे ये शीर्षक मिला, जिसका अर्थ है, जब प्रकाश आपके जीवन में प्रवेश करती है. इससे मैं बहुत प्रभावित हुआ था और रूबरू रोशनी शीर्षक मिला.

आपके जीवन में कभी ऐसा समय आया, जब आपने किसी को माफ न किया हो और अब पछताते हैं?

मेरा झगड़ा फिल्म ‘इश्क’ के दौरान अभिनेत्री जूही चावला से हुआ था और मैंने 7 साल तक उनसे बात नहीं की थी. छोटी बात थी, पर मैं इतना अपसेट हो गया था कि सेट पर उनके साथ बैठता नहीं था और न ही उन्हें हेलो या बाय कहता था. शूटिंग के अलावा सेट पर कभी बातचीत भी नहीं करता था. जब मेरी और रीना का डिवोर्स हुआ और मीडिया में बात फैली, तब उनका फोन आया कि वह मुझसे मिलना चाहती हैं और मुझे डिवोर्स से रोकना चाहती हैं. मैं उस समय किसी से मिलना भी नहीं चाहता था, लेकिन वह आईं और रीना को न छोड़ने की सलाह दी थी. मुझे लगता है कि कहीं न कहीं उसके दिल में मेरे लिए जगह थी. जिससे वह मेरे मुश्किल घड़ी में मुझसे मिलने आई थी. अभी मैं बहुत इमोशनल हूं और छोटी-छोटी बात पर रोने लगता हूं.

आप हर फिल्म में अपना अलग चेहरा बना लेते हैं इसकी वजह क्या है?

मैं ऐसा इसलिए करता हूं ताकि फिल्म रियल लगे, अगली फिल्म के लिए मैंने अपने केश और दाढ़ी बढ़ाई है. इससे मैं कुछ भी चेहरे पर परिवर्तन कर सकता हूं और चरित्र के हिसाब से आगे बढ़ सकता हूं. अभी मेरे पास कई कहानियां है, पर अभी किसी को फाइनल नहीं किया है. इसके अलावा मैं अगली फिल्म में पतला दिखने वाला हूं और उसके लिए मेहनत कर रहा हूं.

अगर आपकी बायोपिक बने, तो आपकी भूमिका में किसे देखना पसंद करेंगे?

मेरा बेटा जुनैद अच्छा कर सकता है.

आपकी किसी फिल्म के सफल न होने पर जिम्मेदार किसे मानते हैं?

दर्शक मेरे नाम से फिल्म देखने आते हैं और इसकी जिम्मेदारी मेरी है. इसलिए फिल्म के सफल न होने में मैं अपनी गलती मानता हूं. दर्शक पूरी तरह से अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए आजाद हैं और मैं इसे स्वीकारता हूं.

नाकामयाबी से उबरने के लिए आपने क्या किया?

इससे उबरने के लिए एक अच्छी फिल्म करने की जरुरत होती है. जो मैं कर रहा हूं. अभी मेरे पास 4 अच्छी स्क्रिप्ट है. सबको करना चाहता हूं. इस बार मैं जल्दी निर्णय लूंगा, ताकि सभी फिल्में बन सकें. इन सभी मैं एक्टिंग करूंगा.

आपके बेटे जुनैद का क्या प्लान है?

उसने कई नाटकों में काम किया है और विदेश से अभिनय की ट्रेनिंग भी ले चुका है. उसके लिए अच्छी स्क्रिप्ट खोज रहा हूं. मैं उसे भी स्क्रीन टेस्ट के द्वारा ही फिल्मों में लाना चाहता हूं. उसका चेहरा मेरी पत्नी रीना की तरह है, लेकिन उसकी ऊंचाई मेरी तरह है. उसकी और मेरी रूचि फिल्मों को लेकर एक जैसी है. मैं उसे चरित्र भूमिका, मुख्य किरदार के रूप में काम देखना चाहता हूं, जिससे उसकी पहचान उस भूमिका से मिले.

पुरस्कार का मिलना आपके लिए कितना महत्व रखता है?

मैं हमेशा इससे दूर रहता हूं, मेरे हिसाब से अवार्ड देने वाले ज्यूरी मेंम्बर कई बार फिल्म इंडस्ट्री से नहीं होते, ऐसे में उनके द्वारा निर्धारित पुरस्कार का कोई महत्व नहीं. अगर कोई फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा व्यक्ति मुझे पुरस्कार दे, तो मुझे खुशी होगी. अगर लता मंगेशकर कभी मुझे अवार्ड देंगीं, तो वह पल मेरे लिए बहुत मूल्यवान होगा. औस्कर का अनुभव मेरे लिए भी बहुत अच्छा रहा है. वहां मेरी फिल्म का 5 वें पोजीशन पर भी पहुंचना मेरे लिए बड़ी बात है, क्योंकि वहां प्रतियोगिता बहुत कठिन होती है.

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