90 के दशक में हिट और एक्शन फिल्म देने वाले अभिनेता खिलाड़ी कुमार यानि अक्षय कुमार आज उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां हर निर्माता निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में लेना पसंद करते हैं. कभी ऐसा वक्त था, जब अक्षय कुमार को काम के लिए हर प्रोडक्शन हाउस में घूमना पड़ता था, लेकिन ‘खिलाड़ी श्रृंखला’ ने उनके जीवन को एक अलग दिशा दी और आज वह हिंदी सिनेमा जगत में एक्शन हीरो के नाम से प्रसिद्ध हैं. उन्होंने केवल एक्शन ही नहीं, हर तरह के फिल्मों जैसे रोमकौम, कौमेडी, थ्रिलर आदि में काम किया है. मार्शल आर्ट के एक्सपर्ट अक्षय कुमार 29 साल से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं. वे अपने अनुशासित दिनचर्या के लिए प्रसिद्द हैं. उनकी फिल्म ‘केसरी’ रिलीज पर है. उन्होंने इस फिल्म को ‘भारत के वीर’ के लिए समर्पित किया है, क्योंकि उन सभी वीरों को वे सलाम करते हैं, जिन्होंने अपनी जान देकर पूरे देशवासियों को चैन की नींद दी है. पेश है उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश.

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इस फिल्म को करने की खास वजह क्या है?

ये एक हिस्टोरिकल फिल्म है, जिसे बहुत कम लोग ही जानते हैं. किस तरह 21 सिक्ख 10 हजार आक्रमणकारी से लड़ते हैं. सारागढ़ी की ये लड़ाई बहुत ही अलग थी और इसे स्कूलों में बच्चों को दिखाए जाने की जरुरत है, क्योंकि इसमें साहस और उनकी बहादुरी की कहानी है. ये मेरे लिए प्रेरणादायक फिल्म है. पहले मुझे भी इसके बारें में कम जानकारी थी, लेकिन अब फिल्म करने के बाद काफी जानकारी हासिल हुई है और मैं खुश हूं कि इतनी बड़ी ऐतिहासिक  फिल्म का मैं एक हिस्सा हूं.

इस फिल्म के लिए आपने क्या तैयारियां की हैं?

अधिक तैयारियां नहीं करनी पड़ी. सोर्ड फाइटिंग थोड़ी सीखी थी. इस फिल्म में सबसे अच्छा लगा पगड़ी पहनना. एक बार जब आप पगड़ी पहन लेते हैं, तो आपकी बैकबोन सीधी हो जाती है, एक भार सिर पर आ जाता है, एक जिम्मेदारी बढ़ जाती है. उसका मजा कुछ और होता है. इसमें मैंने डेढ़ किलो की पगड़ी पहनी है और उसके साथ सारे स्टंट किये हैं.

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क्या इस फिल्म का कोई प्रेशर है, क्योंकि ऐसी फिल्में अधिक चल नहीं पाती?

जब से मैंने इस फिल्म में काम करना शुरू किया, मैंने सोच लिया है कि फिल्म चले या न चले मुझे ये बनानी है, क्योंकि इस कहानी को हमें सबको बताना है. मैं इस फिल्म में अभिनय कर  बहुत गर्वित हूं.

क्या अभी आपके जीवन में कोई संघर्ष है?

संघर्ष से सबको गुजरना पड़ता है और मेरे लिए भी है. रोज सुबह उठकर अच्छा काम करने की चाहत और न मिलने पर हताश होना, ये सारी बातें संघर्ष की ही पहचान है.

आप हमेशा खुद स्टंट करते हैं, इसे देखकर आज की युवा पीढ़ी भी कोशिश करती है, उनके लिए क्या संदेश देना चाहते हैं?

कोई भी स्टंट ऐसे नहीं होता, इसके लिए एक बड़ी टीम होती है, जो हर बात की निगरानी करती है, ऐसे में किसी को भी ये खुद घर पर देखकर करने की जरुरत नहीं है, क्योंकि बिना सावधानी के करने पर ये जानलेवा भी हो सकती है.

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आपने हमेशा स्टंट खुद किये हैं, क्या इसमें आपको कभी खतरा महसूस नहीं हुआ? परिवार ने कैसे साथ दिया?

मैंने बचपन से स्टंट किया है और मुझे कोई खतरा नहीं लगता, लेकिन हमेशा मैं ये कहता आया हूं कि घर पर कभी भी खुद कोशिश न करें, क्योंकि ये सम्हलकर, सावधानी के साथ करने वाली होती है. मेरे माता-पिता ने हमेशा मेरी हर बात में सहयोग दिया है. मैं पहले एक स्टंटमैन हूं, बाद में अभिनेता बना. फिल्म ‘मैं खिलाडी तू अनाड़ी’ के स्टंट के बाद ही मुझे काम मिला था. वरना यहां कोई मेरा गौडफादर नहीं था, जिसकी वजह से मुझे काम मिला हो. मैं स्टंटमैन बनकर ही आज यहां पर आया हूं.

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आपकी और ट्विंकल की बौन्डिंग सालों से अच्छी चल रही है, जबकि आज रिश्तों के मायने बदल चुके हैं, आप दोनों की इस गहरी बौन्डिंग के पीछे का राज क्या है? अपने टीनेज बच्चों की देखभाल कैसे करते हैं?

हम एक दूसरे के प्रोफेशन में कभी दखलंदाजी नहीं करते, एक दूसरे का सम्मान करते हैं, स्पेस देते हैं आदि. इससे हमारा रिश्ता गहरा रहता है. बच्चों के बारें में… तो हम दोनों ने ही गलत आदतों को समझाकर छोड़ दिया है. आज के बच्चे काफी होशियार हैं और वे गलत सही को समझ सकते हैं. मेरे पिता ने भी मुझे वह आजादी दी थी और किसी भी गलत बात को छुपकर करने से मना किया था. इसलिए मुझे उसका कभी भी क्रेज नहीं रहा और गलत आदत ही नहीं लगी.

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