आप कहां से यहां आये हो और यहां सीडियों पर बैठकर कर क्या रहे हो? मैडम मैं एक लेखक और अपना नाम फिल्म राइटर्स एसोसिएशन में लिखवाने आया . इससे क्या होगा? मैं कवितायेँ लिखता और राजस्थान के एक गांव से आया . यहां मैं अपने कविताओं को पहले रजिस्टर करवाकर फिर किसी म्यूजिक डायरेक्टर को देना चाहता , क्योंकि यहां मैंने सुना है कि कविताओं की चोरी संगीत निर्देशक कर लेते है. काम के लिए मैं हर रोज किसी संगीत निर्देशक के ऑफिस के बाहर घंटो अपनी कविताओं को लेकर बैठता , जिस दिन उनकी नज़र मेरे उपर पड़ी, मेरा काम बन जायेगा.’ मुझे उसकी बातें अजीब लगी थी, क्योंकि वह करीब 2 साल से ऐसा कर रहा था.
पत्नी और दो बच्चों के पिता होकर भी उसकी कोशिश बॉलीवुड में काम करने की थी, जिसके लिए उसके परिवार वाले पैसे जुटा रहा था, उसे काम कभी मिलेगा भी या नहीं, ये सोचने पर मजबूर होना पड़ा. ऐसे न जाने कितने ही लेखक और कलाकार मुंबई की सडको पर एक अवसर पाने की कोशिश में लगातार घूमते रहते है. इक्का दुक्का ही सफल होते है, बाकी या तो वापस चले जाते है, या डिप्रेसड होकर गलत कदम उठा लेते है.
