अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ईरानियन फिल्मकार माजिद मजीदी की सबसे बड़ी खासियत है कि वह अपनी फिल्मों मे परिवार व रिश्तों को ही अहमियत देते आए हैं. उनका मानना है कि यदि परिवार अच्छे व संस्कारी होंगे, तो समाज अपने आप अच्छा हो जाएगा. 1997 में फिल्म ‘‘चिल्ड्रेंस आफ हैवेन’’ ने माजिद मजीदी को शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया था. उसके बाद उन्होने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. अब पहली बार वह अपने वतन ईरान से इतर भारत में आकर भारतीय कलाकारों व तकनीशियन के साथ हिंदी भाषा की फिल्म ‘‘बियौंड द क्लाउड्स’का लेखन व निर्देशन किया है. मजेदार बात यह है कि माजिद मजीदी की मातृभाषा पर्सियन है और उन्हे हिंदी या अंग्रेजी भी नहीं आती. इसके बावजूद भारत के प्रति लगाव ने उन्हे हिंदी फिल्म ‘बियौंड द क्लाउड्स’ बनाने के लिए मजबूर कर दिया.

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