राकेश ओमप्रकाश मेहरा निर्देशित फिल्म मिर्जिया में एक पंक्ति है-‘‘एक नदी थी, दो किनारे थामे बैठी थी, कोई किनारा छोड़ नहीं सकती थी.’’ फिल्म खत्म होने के बाद अहसास होता है कि शायद लेखक ने यह पंक्ति फिल्म की नायिका सैयामी खेर के लिए लिखी हैं, जिन्होंने इस फिल्म में सुचित्रा उर्फ सुचि तथा साहिबां का किरदार निभाया है. यह एक कटु सत्य है. फिल्म ‘मिर्जिया’ में अपने अभिनय से सैयामी खेर ना सिर्फ प्रभावित करती हैं, बल्कि उनमें स्टार बनने के गुण भी साफ नजर आते हैं. इसके बाद अनुज चौधरी लोगों के जेहन में बस जाते हैं. भव्य स्तर पर बनायी गयी यह फिल्म उन लोगों को ज्यादा पसंद आएगी, जो कि कला, खूबसूरती, फोटोग्राफी आदि के शौकीन हैं. अन्यथा फिल्म की गति धीमी है. गुलजार लिखित पटकथा का उलझाव ऐसा है कि दर्शक सोचने लगता है कि फिल्म कब खत्म होगी.

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