काजोल व रिद्धिसेन के अभिनय से सजी फिल्म ‘‘हेलीकोप्टर ईला’’ के प्रदर्शन की तारीखे क्यों बार बार बदलती रहीं, इसकी वजहें फिल्म देखकर समझ में आ गयी. फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है, जिसके लिए दर्शक अपनी मेहनत की कमाई को इस फिल्म की टिकट खरीदने में खर्च करेगा. उत्कृष्ट फिल्मकार प्रदीप सरकार की यह फिल्म कहीं न कहीं सफलतम फिल्म ‘‘निल बटे सन्नाटा’’ की याद दिलाती है. फर्क इतना है कि ‘निल बटे सन्नाटा’ में एक घरों में काम करने वाली सिंगल मां और उसकी बेटी के साथ उस तरह का परिवार था. जबकि ‘हेलीकोप्टर ईला’ में उच्चवर्ग की सिंगल मां व बेटा है. ‘निल बटे सन्नाटा’ में मां व बेटी के संघर्षों, सपनों व जीवन में आगे बढ़ने के जद्दोजहद की कहानी को खूबसूरती से पेश किया गया था. मगर फिल्म ‘हेलीकोप्टर ईला’ एक भी क्षण दर्शकों को बांधकर नहीं रखती.

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