बौलीवुड से ले कर हौलीवुड तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी दीपिका ने अपनी मेहनत और लगन से अपना अलग मुकाम बनाया है. हमेशा अपने काम से आलोचकों को जवाब देने वाली दीपिका टौप  10 सैक्सिस्ट वूमंस की लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं. पिछले दिनों दीपिका की फिल्म ‘पद्मावत’ पर खूब विवाद रहा. इस पर दीपिका कहती हैं, ‘‘पहले तो मैं ने इसे सीरियसली नहीं लिया, लेकिन बिना वजह जो विवाद बनाया जा रहा था मुझे वह पसंद नहीं था. मुझ पर दबाव बनाया गया. मुझे झुकने को मजबूर किया गया, लेकिन जब कोई ऐसी बात जिस में मुझे लगे कि मैं ने कोई अपराध किया हो तब तो मैं झुकती या उन की बात मानती. लोगों ने मुझे खूब डराया, धमकाया. मेरी फैमिली को मेरी चिंता होने लगी थी. लेकिन मैं नहीं डरी और न ही इस प्रकरण को अपने ऊपर हावी होने दिया.’’

उतारचढ़ाव भी देखा

अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत दीपिका ने ब्लौकबस्टर फिल्म ‘ओम शांति ओम’ में शाहरुख खान के साथ की थी. यह फिल्म काफी पसंद की गई. यहीं से दीपिका की गाड़ी चल निकली. इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री का पुरस्कार भी मिला. इस के बाद उन की कई फिल्में बौक्सऔफिस पर औंधे मुंह गिरीं, लेकिन दीपिका ने कभी हार नहीं मानी. वे बताती हैं, ‘‘फिल्म ‘कौकटेल’ मेरे जीवन का टर्निंग प्वौंइंट थी. इसे मेरे आलोचकों और चाहने वालों दोनों का प्यार मिला.’’ अपने पापा को अपना सब से अच्छा टीचर मानने वाली दीपिका कहती हैं, ‘‘पापा की सीख पर गौर करने से ही मैं यहां तक पहुंची हूं. जो भी करो जीजान से करो, दिल लगा कर करो. मेरे पेरैंट्स ने कभी मुझ पर या मेरी बहन पर अपने सपनों को लादने की कोशिश नहीं की.’’

यंग जैनरेशन को संदेश देते हुए दीपिका कहती हैं, ‘‘कैरियर कौंशस जरूर बनो, लेकिन इतना भी नहीं कि वर्क का प्रैशर आप के दिमाग पर हावी होने लगे और आप डिप्रैशन का शिकार हो जाएं. मैं यही कहना चाहूंगी कि अगर डिप्रैशन का शिकार हो रहे हैं तो सब से पहले अपने आसपास के लोगों को बताएं कि आप क्या महसूस कर रहे हैं, परिवार से अपनी समस्या के बारे में चर्चा करें. किसी मनोचिकित्सक या काउंसलर से मिलें. ‘‘सब से बड़ी बात हमेशा पौजिटिव सोच रखें. नैगेटिव विचारों को मन में जगह न दें. पौजिटिव विचारधारा समस्या को सुलझा देती है.’’

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