Rishabh Chadha : धारावाहिक आलादीन में नन्हे का किरदार निभाकर चर्चित हुए अभिनेता ऋषभ चड्ढा ने वर्ष 2014 में फिल्म खूबसूरत से बौलीवुड में काम करना शुरू किया. उन्हें वर्ष 2015 में रिलीज हुई फिल्म दृश्यम में देखा गया. 13 साल की उम्र में अभिनय की शुरुआत करने के बाद, ऋषभ चड्ढा ने कई टेलीविजन विज्ञापनों में काम किया. बारह साल के लंबे करियर में वे 150 से अधिक विज्ञापनों में दिखाई दिए हैं. दिल्ली बेली’, ‘देसी बॉयज’, ‘लुप्त’ आदि जैसी लोकप्रिय हिंदी फिल्मों में भी उन्होंने अभिनय किया है. फिल्मों के अलावा उन्होंने वेब सीरीज में भी काम किया है. इन दिनों उन्होंने जाम्बी हौरर कौमेडी फिल्म ‘जोर’ में उन्होंने जीतू की भूमिका निभाई है, जो रिलीज हो चुकी है और लोग इस नए कान्सेप्ट को पसंद कर रहे है. उन्होंने खास गृहशोभा के साथ बात की आइए जानते हैं उनकी कहानी उनकी जुबानी.
जॉम्बी फिल्में बनती है कम
इस फिल्म को करने की खास वजह के बारें में पूछने पर ऋषभ बताते हैं कि इस तरह की फिल्म करने का मौका बहुत कम मिलता है, जहां हौरर के साथ कौमेडी भी हो, अपने आप में ऐसी फिल्में मजेदार होती हैं. मैंने कौमेडी फिल्में कई की है, लेकिन हॉरर के साथ कौमेडी और जॉम्बी वाली फिल्म नहीं की. ये फिल्में बनती भी कम है. हालांकि लोग मानते है कि इस तरह की ज़ॉम्बी वाली फिल्मों का कान्सेप्ट विदेशों से आई है, लेकिन यहां भी इसके बारें में काल्पनिक कथाएं पुराने जमाने में प्रचलित रही है, जिसे हम सभी दादी – नानी से सुनते आए है. अंग्रेजी फिल्म अवतार को भी अगर हम देखें, तो ऐसी कहानियां हमारे देश में कही और सुनी जाती रही है. इस फिल्म को करने में बहुत मजा आया, क्योंकि इसकी वीएफएक्स बहुत अच्छी है. निर्देशक गौरव दत्ता ने बहुत कम बजट में एक अच्छी फिल्म बनाने की कोशिश की है और लोग इसे पसंद कर रहे है.
कौन्सेप्ट सही होना जरूरी
हौरर कौमेडी फिल्मों में दर्शकों को बांधे रखना आसान नहीं होता, इसलिए फिल्म को अधिक रोचक बनाना पड़ता है. ऋषभ कहते है कि इस फिल्म में जॉम्बी अलग – अलग रूप में सबके सामने आती रहती है, उनका एक अलग चरित्र है, जिसे देखना दर्शकों को रोचक लगता है. इसके अलावा इसमें एक अलग इमोशन का जुड़ाव भी है.
लगता है डर
ऋषभ कहते हैं कि बचपन में मैंने भी ऐसी कहानी दादी – नानी से सुनी है और कई बार महसूस किया है कि बिना किसी के बताए कई बार आप उस बात को भाप लेते है, जो कभी पहले घटी हो. मुझे डर अपने पेरेंट्स के लिए लगता है, क्योंकि जैसे – जैसे मैँ बड़ा हो रहा हूं और उनकी उम्र हो रही है, ऐसे में जब भी वे बाहर जाते है, मुझे हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं उन्हे चोट न लग जाए या फिर कोई कुछ कह न दें. मैँ अपने परिवार को लेकर बहुत प्रोटेक्टिव हूं. यही बात मुझे परेशान करता है.
ऋषभ आगे कहते हैं कि एक ऐक्टर, ड्रामा, रोमांस, रियल या सटल ऐक्टिंग करता है, लेकिन मुझे एक सही को ऐक्टर मिला है, जिससे मुझे अभिनय करने में बहुत मज़ा आया, क्योंकि कॉमेडी में ‘गिव एण्ड टेक’ वाली सिचुएशन होती है, जो मुझे उनके साथ काम करने को आसान बनाया. ऐक्टिंग में हमेशा कलेक्टिव एफर्ट होता है. मैँ सेट पर कई चीजें खुद से हमेशा करना पसंद करता हूं, मसलन मैं डायरेक्टर को जाकर 5 जोक क्रैक किया करता था और उन्हे जो पसंद आता था. अधिकतर सभी जोक उन्हे पसंद आ जाती थी.
मिली प्रेरणा
मुंबई की ऋषभ ने कभी सोचा नहीं था कि वे ऐक्टिंग में आएंगे, क्योंकि ये क्षेत्र आसान नहीं. वे कहते हैं कि मैंने आज से 18 साल पहले 13 साल की उम्र में इस क्षेत्र में आया था. सपना मेरी मां का था, मां ने कहा था कि वह मुझे एक बार टीवी पर देखना चाहती है. फिर मैं एक फोटोग्राफर को 10 हजार रुपये देखर फ़ोटो खिंचवाएँ और पोर्टफोलियो बनवाया था. मुझे बस इतना पता था कि मुझे मां के सपने को पूरा करना है और पिता के 10 हजार रुपये लौटाने है. वही से मेरी कैरियर शुरू हुई और आज मैं यहाँ तक पहुंच चुका हूं.
ड्रीम रहना जरूरी
ऋषभ कहते हैं कि मेरे क्लियर कट दो ड्रीम है, लेकिन एक खास ड्रीम यह है कि मैं चाहता हूं कि मेरे पास इतना पैसा हो कि मेरे पास खाने का एक लंगर हो, जिसका नाम हिंदुस्तान हो. वहां पर हर धर्म, जाति के लोग आकर खाते रहे और ये लगातार चलता रहे. ये मैं करूंगा और दूसरा ड्रीम है, मैंने जो कान्सेप्ट एक नाटक के लिए लिखा है, जिसका नाम मौडर्न मजनू है, उसमें मैं लाइव परफॉर्मेनस करता हूं. इसे मैं इतना चाहता हूं कि लोग देख कर कहे कि दुनिया में बस दो ही लोगों ने प्यार किया है, एक शाहरुख खान और दूसरा ऋषभ चड्ढा.
प्यार है एक अच्छा एहसास
ऋषभ सिंगल हैं, लेकिन प्यार को एक अच्छा एहसास मानते है. प्यार को लेकर ऋषभ का कहना है कि प्यार की परिभाषा कभी नहीं बदलती, लेकिन जेनरेशन बदलती है. मेरे हिसाब से लव एक ईमोशनल फैक्ट है और उसके लिए सही पार्टनर का मिलना जरूरी है. लव और मैरिज में बहुत बड़ा अंतर होता है. जब आप एक अच्छा दोस्त बनते है, तो शादी उसका एक अच्छा परिणाम होता है.
