चाइल्ड एक्ट्रेस के रूप में फिल्म ‘मकड़ी’ और सीरियल कहानी घर-घर की से शोहरत बटोर चुकी एक्ट्रेस श्वेता बासु की फिल्म ‘ताशकंद फाइल्स’ रिलीज हो चुकी है, जिसमें उन्होंने एक जर्नलिस्ट का रोल निभाया है. आइए उनसे जानते है इस फिल्म से जुड़े कुछ रोचक किस्से…

फिल्म ताशकंदकी ख़ास बात क्या थी, जिसे करने के लिए लिए आप तैयार हुई?

इसमें मैंने एक जर्नलिस्ट का रोल निभाया है और मुझे ख़ुशी है कि मैंने मास मीडिया में पढ़ाई की है. इसलिए इस रोल को निभाना आसान था. इसमें मैंने एक ईमानदार जर्नलिस्ट की भूमिका निभाई है.

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रियल लाइफ में आप कैसी है?

मैनें जर्नलिस्ट का रोल बहुत स्ट्रौंग निभाया है, जबकि रियल लाइफ में मैं बहुत शांत और खुश रहना पसंद करती हूं. इसके अलावा मैंने एक डाक्युमेंट्री बनायी है. एक दो कौलम भी लिखती हूं.

क्या एक्टिंग आपके लिए इत्तेफाक था या बचपन से ही सोचा था?

मैं पैदा जमशेदपुर में हुई थी, लेकिन जब 5 साल की थी तब मुंबई आ गयी थी. मैंने 2 हिंदी फिल्में ‘मकडी’ और ‘इकबाल’ की थी. फिल्म मकड़ी के लिए मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. इसके बाद मेरे माता-पिता चाहते थे कि मैं ग्रेजुएशन पूरा कर फिल्मों में काम करूं और मैंने वैसा ही किया.

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फिल्मों में आने की प्रेरणा कहां से मिली?

मेरे पिता का खुद का थिएटर ग्रुप था. वहां मैंने थिएटर कभी नहीं किया, लेकिन माहौल को मैंने देखा है. इत्तेफाक से फिल्म मकड़ी, इक़बाल और अब ताशकंद फाइल्स.

आपने टीवी, वेब और फिल्मों में काम किया है, इनमें में कितना फर्क महसूस करती है?

एक कलाकार का काम एक्शन और कट के बीच में होता है. चाहे वह टीवी, वेब सीरीज हो या फीचर फिल्म किसी के लिए क्यों न हो. काम वही करना पड़ता है. इसलिए माध्यम कुछ भी हो, एक्टिंग में कोई फर्क नहीं पड़ता. एक मिनट के अंदर आप कितना भी सौ प्रतिशत अभिनय दे सकते है, वही सबकुछ होता है.

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क्या पहले की मीडिया और आज की मीडिया में अंतर को आप मानती है? अगर हुआ भी है तो इससे कैसे निपटना चाहिए?

झूठ कहना और लिखना बहुत आसान होता है, लेकिन सच को लिखना बहुत मुश्किल होता है. मीडिया अब पहले जैसी नहीं रही, क्योंकि सच कोई सुनना नहीं चाहता. उन्हें जो आसानी से मिल जाए, उसे ही सुनते है, ऐसे में अगर कोई बाहर निकलकर उसकी सच्चाई को परखे, तो अच्छा होगा. आज लोग एफर्ट नहीं लगाते.

यहां तक पहुंचने में आपके परिवार का सहयोग आपको कितना मिला?

फिल्म ‘मकड़ी’ की सफलता के बाद मैंने कई बड़ी पिक्चरों को ना कह दिया था, ताकि मैं माता-पिता के कहे अनुसार अपनी पढ़ाई पूरी कर सकूं. उन्होंने मेरी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों में बहुत सहयोग दिया है. मेरे पति और सास-ससुर भी मुझे बहुत प्रोत्साहन देते रहते है.

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परिवार के साथ काम को बैलेंस कैसे करती है?

कोई मुश्किल नहीं होती, फिल्मों का काम लगातार नहीं होता, बीच-बीच में ब्रेक होता है ऐसे में परिवार के साथ सामंजस्य में कोई समस्या नहीं आती. आज शादी किसी भी एक्ट्रेस के लिए कोई प्रौब्लम नहीं.

न्यूडिटी और इंटिमेट सीन्स को करने में आप कितनी सहज होती है?

विदेश की फिल्मों में भी न्यूडिटी और इंटिमेट सीन्स होते है. देखना ये पड़ता है कि उसे आप पर्दे पर कैसे दर्शाते है. वल्गैरिटी उसमें कितनी है. पहले की पेंटिंग्स में कितनी खूबसूरत तरीके से इंटिमेट सीन्स को दिखाया जाता रहा है, जिसमें प्यार का एहसास होता है. इसलिए जितना एस्थेटिक तरीके से आप ऐसे सीन्स को दिखायेंगे, उतना ही अच्छा प्रभाव समाज पर सकारात्मक होगा. मैं न्यूडिटी और इंटिमेट सीन्स को गलत नहीं कहती.

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आपके ड्रीम प्रोजेक्ट क्या है?

कोई ड्रीम नहीं है. मुझे पुरानी फिल्में बहुत अच्छी लगती है, लेकिन आज के दर्शकों का टेस्ट बदल चुका है. वे अपने आस-पास की फिल्मों को देखना चाहते है. हर तरह के कलाकार को आज काम मिल रहा है. इस तरह जैसी मांग होगी, वैसी फिल्में बनेंगी. मैं हर तरह की फिल्में करने की इच्छा रखती हूं. मैं देविका रानी के उपर बायोपिक करना चाहती हूं, क्योंकि वह इंडस्ट्री की पहली सुपर स्टार थी. उन्होंने साल 1930 में फेमिनिज्म पर तब बात की थी, जिसकी आज हम करते है. इसके अलावा मैं फिर से मृनाल सेन और रितुपर्न घोष को इंडस्ट्री में देखना चाहती हूं.

समय मिले तो क्या करती है?

मुझे खाना बनाना बहुत पसंद है. मैं हर तरह का खाना बना लेती हूं. बांग्ला भोजन मुझे बहुत अच्छा लगता है. मेरे पति मारवाड़ी है उनके लिए मैं गट्टे की कड़ी भी बना लेती हूं. इसके अलावा मैं किताबें बहुत पढ़ती हूं. साल में 30 से 40 किताबें पढ़ लेती हूं. फिल्म्स देखती हूं और सितार बजाती हूं.

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कितनी फैशनेबल है?

मुझे फैशन बहुत पसंद है. मैं बालों से लेकर नाख़ून तक सुंदर रखती हूं. मेकअप मैं खुद करती हूं. फैशन जो आरामदायक हो, उसे करती हूं. कपड़ों से ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का पता चलता है. हर यूथ को ये बात समझने की जरुरत है.

तनाव होने पर क्या करती है?

नकारात्मक बातें आती रहती है. उसे पढ़ने में मुझे अच्छा लगता है, क्योंकि वे अपनी राय मेरे लिए देते है और ये सही है. इसलिए मुझे तनाव अधिक नहीं होता.

Edited by- Rosy

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