UTI after menopause : “मैं साफसफाई का और अपना पूरा ध्यान रखती हूं. फिर भी पिछले 2 साल में मुझे 4 बार यूटीआई हुआ है…” यह सवाल एक 46 वर्षीय महिला का है जो बारबार होने वाले यूटीआई से परेशान थी और उसे इस की कोई भी वजह समझ नहीं आ रही थी.
अकसर महिलाएं इस समस्या के समाधान के लिए डाक्टरों द्वारा सुझाई गई ऐस्ट्रोजन क्रीम का सहारा लेती हैं, लेकिन कई बार इस का असर कुछ ही समय तक सीमित महसूस होता है. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ऐस्ट्रोजन क्रीम वाकई इस समस्या का स्थायी इलाज है या इस के साथ अन्य उपायों को भी अपनाना जरूरी है?
आइए, समझते हैं कि मेनोपौज के बाद यूटीआई से राहत पाने के लिए सही इलाज क्या है :
डाक्टर राधा का कहना है कि अगर कोई महिला मेनोपौज के दौरान बारबार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन का सामना कर रही है, जिसे 6 महीने में 2 बार या 1 साल में 3 बार से ज्यादा संक्रमण हुआ है तो उसे डाक्टर से तुरंत बात करनी चाहिए.
दरअसल, इस का सीधा संबंध मेनोपौज से है. मेनोपौज के बाद यूटीआई की समस्या कई महिलाओं में और भी ज्यादा बढ़ सकती है.
कनाडा के मेनोपौज फाउंडेशन के एक सर्वे मुताबिक, कनाडा की 82% महिलाओं को यह नहीं पता है कि इन दोनों कंडीशन का आपस में कोई संबंध भी है.
नैशनल लाइब्रेरी औफ मैडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, पूरी दुनिया में हर साल यूटीआई के 15 करोड़ मामले सामने आते हैं. इस में 80% केस महिलाओं के होते हैं. यूटीआई प्रौबलम्स के कारण हर साल 2 लाख 35 हजार से ज्यादा लोगों की मौत होती है.
मेनोपौज और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन का क्या संबंध है
मेनोपौज के बाद शरीर में ऐस्ट्रोजन हारमोन का स्तर कम हो जाता है, जिस का काम होता है यूरिनरी ट्रैक्ट के टिश्यू को स्वस्थ बनाए रखे. लेकिन ऐस्ट्रोजन हारमोन कम होने के कारण मूत्रमार्ग और योनि की त्वचा पतली तथा शुष्क हो जाती है. इस के कारण संक्रमण से बचाने वाले गुड बैक्टीरिया कम हो जाते हैं और यूटीआई का जोखिम काफी बढ़ जाता है.
मेनोपौज के बाद यूटीआई की दवाएं कितनी लाभकारी हैं
लोकल/वैजाइनल एस्ट्रोजन थेरैपी : मेनोपौज के बाद बारबार होने वाले यूटीआई को रोकने के लिए इस थेरैपी को सब से अच्छा माना जाता है. यह दवा क्रीम, टैबलेट या रिंग के रूप में दी जाती है.
मैडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, वैजाइनल ऐस्ट्रोजन का इस्तेमाल बारबार होने वाले यूटीआई के खतरे को लगभग 50% से 75% तक कम कर देता है. यह सीधे लोकल टिश्यूज में ऐस्ट्रोजन का स्तर सुधारती है, जिस से पीएच लेवल सामान्य होता है और अच्छे बैक्टीरिया वापस पनपने लगते हैं.
चूंकि यह दवा केवल लोकल एरिया में काम करती है और खून में बहुत कम अवशोषित होती है, इसलिए इस के दुष्प्रभाव भी न के बराबर होते हैं.
ऐंटीबायोटिक्स का कोर्स करना
जब यूटीआई का ऐक्टिव इन्फैक्शन होता है जैसे पेशाब में जलन, दर्द, बारबार पेशाब आना, तब डाक्टर ऐंटीबायोटिक्स का कोर्स देते हैं. यह तुरंत बैक्टीरिया को खत्म कर के लक्षणों से राहत दिलाती है. हालांकि ऐंटीबायोटिक्स वर्तमान संक्रमण को तो ठीक कर देती हैं, लेकिन मेनोपौज के कारण टिश्यूज में आए बदलावों को सही नहीं कर सकतीं. इसलिए, केवल ऐंटीबायोटिक लेने से संक्रमण बारबार लौटने का खतरा बना रहता है. इसलिए डाक्टर ऐंटीबायोटिक के साथ या उस के बाद वैजाइनल ऐस्ट्रोजन क्रीम/टैबलेट की सलाह देते हैं ताकि संक्रमण बारबार न हो.
मेनोपौज के बाद ऐस्ट्रोजेन क्रीम का फायदा कुछ ही दिन रहता है या नहीं?
कई महिलाओं की शिकायत होती है कि वैजाइनल ऐस्ट्रोजन क्रीम जब शुरुआत में लगते हैं तो सही लगता है. लगाने के शुरुआती 2 से 3 हफ्तों में टिश्यूज में नमी और लचीलापन वापस आता है. लेकिन जब हफ्ते में 2 बार की ‘मैंटेनेंस डोज’ पर आया जाता है या इसे लगाना बंद कर दिया जाता है, तो मेनोपौज के कारण ऐस्ट्रोजन का स्तर फिर से गिरने लगता है और लक्षण या यूटीआई की समस्या वापस लौटने लगती है.
यानी कि कुछ समय बाद इस का असर कम हो जाता है या फिर जब तक इसे लगते रहो तब तक तो ठीक और फिर गड़बड़ शुरू हो जाती है. अब इसे हमेशा सालोसाल तो नहीं लिया जा सकता है न. यही वजह है कि कहा जाता है कि वैजाइनल ऐस्ट्रोजन क्रीम कोई स्थायी इलाज नहीं है.
फायदा न होने की वजह क्या हो सकती है?
कई बार हम ट्रीटमैंट शुरू तो करते हैं लेकिन उसे अपनी ही मरजी से बंद भी कर देते हैं जबकि समस्या दूर होने पर 8 से 12 हफ्ते का समय लग सकता है. इसे रैगुलर ही लगाया जाना चाहिए. लेकिन कई बार लापरवाही या आलस्य की वजह से कभी दवाई लगते हैं कभी नहीं. ऐसी स्थिति में जितना फायदा होना चाहिए उतना नहीं हो पाता.
दूसरा, कई बार क्रीम बहुत कम मात्रा में लगाई जाती है या सही जगह यानी योनि के अंदरूनी हिस्से तक नहीं पहुंच पाती. अगर ऐसा होता है तो भी इस का फायदा नहीं हो पाता.
तीसरा, मेनोपौज के बाद पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर होना, ब्लैडर का पूरी तरह खाली न होना आदि से यूरिन रुका रह जाता है और बैक्टीरिया के ग्रोथ की आशंका बढ़ जाती है या शरीर में पानी की कमी होना जैसी वजहों से भी बारबार यूटीआई हो सकता है, जिस पर अकेले ऐस्ट्रोजन क्रीम का असर सीमित हो जाता है. इस के आलावा भी कई उपचार करने पड़ते हैं ताकि बार बार यूटीआई न हो.
चौथा, उम्र बढ़ने के साथ कई महिलाओं को यूरिनरी इनकौंटिनैंस की भी समस्या हो जाती है. यूरिन इनकौंटिनैंस के कारण पैड या अंडरवियर पर नमी बैक्टीरिया को पनपने के लिए परफैक्ट वातावरण बना सकती है.
सैक्सुअल ऐक्टिविटीज सीधे तौर पर यूटीआई का कारण नहीं है, लेकिन यह यूरिनरी ट्रैक्ट में बैक्टीरिया के प्रवेश की वजह बन सकती हैं. इस से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
यूटीआई बारबार न हो इस से बचने के क्या उपाय हैं?
-दिन में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं ताकि ब्लैडर में मौजूद बैक्टीरिया नियमित रूप से बाहर धुलते रहें.
-यूरिन करते समय जल्दबाजी न करें. डबल वौइडिंग की तकनीक अपनाएं यानी यूरिन करने के बाद 30 सैकंड रुकें और थोड़ा आगे झुक कर दोबारा यूरिन करने की कोशिश करें ताकि ब्लैडर पूरी तरह खाली हो जाए.
-केवल सादे पानी से सफाई करें. किसी भी सुगंधित साबुन, इंटीमेट वौश या डचिंग से बचें क्योंकि ये प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं.
-वैजाइनल ऐस्ट्रोजन का इस्तेमाल डाक्टर की सलाह के अनुसार लंबे समय, महीनों या सालों तक सुरक्षित माना जाता है. इसे बीच में अचानक बंद न करें-जिस दिन आप ऐस्ट्रोजन क्रीम न लगाएं, उस दिन नियमित रूप से वैजाइनल मोइस्चराइजर या ल्यूब्रिकेंट का उपयोग करें ताकि टिश्यूज में शुष्कता न आए.
-अगर क्रीम लगाने में असुविधा होती है या असर कम लगता है, तो अपने डाक्टर से वैजाइनल टैबलेट या वैजाइनल रिंग के बारे में बात कर सकती हैं. इन का असर अधिक स्थिर रहता है.
-जिन दिनों आप ऐस्ट्रोजन क्रीम नहीं लगाती हैं, उन दिनों ह्यलूरोनिक एसिड युक्त गैर हारमोनल वैजाइनल मोइस्चराइजर का उपयोग करें. यह त्वचा में नमी बनाए रखने में बहुत मदद करता है.
-प्रोबायोटिक्स और विटामिन सी युक्त आहार जरूर करें.
-क्रीम को केवल बाहरी हिस्से पर लगाने के बजाय, एप्लीकेटर की मदद से योनि के अंदर और थोड़ा सा हिस्सा यूरेथ्रा के आसपास लगाएं.
-यूटीआई से बचाव के अतिरिक्त सप्लिमेंट्स डाक्टर से पूछ कर लें.
